ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 129




                                               

छत्रपति

छत्रपति मराठों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक सम्राट के लिए एक भारतीय शाही शीर्षक है। शब्द छत्रपति संस्कृत छतरा और पति से है; छत्रपति इस प्रकार अपने अनुयायियों को छाया देता है और उनकी सफलता की रक्षा करता है।

                                               

तंजावुर मराठा राज्य

15वीं शताब्दी विशेष रूप से 1436 के आसपास में चोल शासन के पतन के बाद, तंजावुर क्षेत्र पांड्यों के शासन में आया और फिर, मलिक काफूर के आक्रमण के बाद, यह क्षेत्र अव्यवस्था का शिकार हो गया। पांड्यो ने जल्दी ही अपनी शक्ति एकत्रित कर स्वतंत्रत होने का प ...

                                               

तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध

तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध, ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी और मराठा साम्राज्य के बीच सम्पन्न निर्णायक अन्तिम युद्ध था। इस युद्ध मे मराठा की तरफ से पेशवा बाजीरावII नेतृत्व कर रहे थे, परंतु उनकी अंग्रेजों के सामने न चल पाई और अंग्रेजों ने उन्हें 8 लाख की ...

                                               

नाग नाइक

नाग नाइक सिंहगड किले का कोली राजा था। नाग नाइक महादेव कोली थे। 1340 ईसा पश्चात दिल्ली सल्तनत के सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलुक़ ने सिंहगड किले पर आक्रमण कर दिया था लेकिन सुल्तान कोली राजा नाग नाइक को हरा नही पाया क्योंकि नाग नाइक ने सिंहगड की किलेबन् ...

                                               

नागपुर राज्य

नागपुर राज्य 18वीं शताब्दी की शुरुआत में देवगढ़ के गोंड शासकों द्वारा स्थापित पूर्व-मध्य भारत में एक साम्राज्य था। यह 18वीं शताब्दी के मध्य में मराठों के भोंसले वंश के शासन में आ गया और मराठा साम्राज्य का हिस्सा बन गया। नागपुर शहर राज्य की राजधान ...

                                               

नाना फडणवीस

नाना फडणवीस, जन्म: 12 फरवरी 1742 ई मृत्यु: 13 मार्च 1800 ई.,वास्तविक नाम - बालाजी जनार्दन भानु। एक अत्यंत चतुऔर प्रभावशाली मराठा मंत्री थे, जब पानीपत का तृतीय युद्ध लड़ा जा रहा था उस समय वे पेशवा की सेवा में नियुक्त थे। वह अपनी चतुराई और बुद्धिमत ...

                                               

पहला आंग्ल-मराठा युद्ध

पहला आंग्ल-मराठा युद्ध भारत में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और मराठा साम्राज्य के बीच लड़े गये तीन आंग्ल-मराठा युद्धों में से पहला था। युद्ध सूरत संधि के साथ शुरू हुआ और साल्बाई की संधि के साथ समाप्त हुआ।

                                               

पेशवा

मराठा साम्राज्य के प्रधानमंत्रियों को पेशवा कहते थे। ये राजा के सलाहकार परिषद अष्टप्रधान के सबसे प्रमुख होते थे। राजा के बाद इन्हीं का स्थान आता था। छत्रपती शिवाजी महाराज के अष्टप्रधान मंत्रिमंडल में प्रधान मंत्री अथवा वजीर का पर्यायवाची पद था। प ...

                                               

प्रतापगढ़ दुर्ग

प्रतापगढ़ दुर्ग महाराष्ट्र के सतारा जिले में सतारा शहर से २० कि॰मी॰ दूरी पर स्थित है। यह मराठा शासक छत्रपती शिवाजी महाराज के अधिकार में था। उन्होंने इस किले को नीरा और कोयना नदियों की ओर से सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से बनवाया था। १६५६ में किले क ...

                                               

बाजीप्रभु देशपाण्डे

बाजीप्रभु देशपांडे एक नामी वीर थे। मराठों के इतिहास में उनका महत्वपूर्ण स्थान है। इनका जन्म ब्रह्मण परिवार मे हुआ था तथा ये एक वीर मराठा योद्धा थे। इनकी वीरता से प्रभावित होकर शिवाजी ने इन्हे अपनी सेना में अहम स्थान दिया था। इन्होने मुगल सेना से ...

                                               

बाजीराव द्वितीय

बाजीराव द्वितीय, from 1796 to 1818तक मराठा साम्राज्य के पेशवा थे। इनके समय में मराठा साम्राज्य का पतन होना शुरू हुआ। इनके शासनकाल में अंग्रेजों के साथ संघर्ष शुरू हुआ। बाजीराव द्वितीय आठवाँ और अन्तिम पेशवा 1796-1818 था। वह रघुनाथराव राघोवा का पुत ...

                                               

बाजीराव प्रथम

पेशवा बाजीराव प्रथम महान सेनानायक थे। वे १७२० से १७४० तक मराठा साम्राज्य के चौथे छत्रपति शाहूजी महाराज के पेशवा रहे। इनका जन्म चित्ताबन कुल के ब्राह्मणों में हुआ। इनको बाजीराव बल्लाळ तथा थोरले बाजीराव के नाम से भी जाना जाता है। इन्हें प्रेम से लो ...

                                               

बालाजी आवजी चिटनवीस

बालाजी आवजी चिटनवीस वर्ष १६५८ से लेकर १६८० तक छत्रपती शिवाजी महाराज के चिटनिस थे। बालाजी का मूल उपनाम चित्रे था किन्तु छत्रपती शिवाजी महाराज के चिटनवीस बनने के बाद उन्होने चिटनवीस उपनाम अपना लिया।

                                               

बालाजी विश्वनाथ

बालाजी विश्वनाथ भट्ट प्रथम पेशवा थे।, इन्हें प्रायः पेशवा बालाजी विश्वनाथ के नाम से जाना जाता है। ये एक ब्राह्मण परिवार से थे और १८वीं सदी के दौरान मराठा साम्राज्य का प्रभावी नियंत्रण इनके हाथों में आ गया। बालाजी विश्वनाथ ने शाहुजी की सहायता की औ ...

                                               

मराठा राजवंश एवं राज्यो की सूची

कन्हेरखेड़, वेले, अख्ड़ और ग्वालियर के शिंदे सिंधीया महाराष्ट्र के सतारा, कोल्हापुर, नागपुर, अक्कलकोट, सावंतवाड़ी और तमिल नाडु के तंजावुर के भोसले महाराष्ट्और बरोडा के गायकवाड देओगिरी दौलताबाद के यादव पैठन के सातवाहन सिंदखेड़ राजा, विदर्भ, नाशिक, ...

                                               

मराठा साम्राज्य से संबंधित युद्ध

मराठों ने भारतीय उपमहाद्वीप में एक के बाद एक अनेक युद्ध लड़े और जीते। इससे मराठा साम्राज्य का निर्माण हुआ। इन विजयों की शृंखला का आरम्भ १६५९ में शिवाजी द्वारा प्रतापगढ़ के युद्ध में विजयप्राप्ति के साथ हुआ।

                                               

मस्तानी

मस्तानी एक अत्यन्त सुन्दर और बहादुर महिला थी। वह पेशवा बाजीराव प्रथम की प्रेयसी तथा पत्नी थी। बाजीराव स्वयं उसे पत्नी ही मानते थे, परन्तु उनकी पत्नी के रूप में उसे पारिवारिक तथा सामाजिक स्वीकृति कभी नहीं मिल पायी।

                                               

माधवराव पेशवा

पेशवा माधवराव प्रथम मराठा साम्राज्य के चौथे पूर्णाधिकार प्राप्त पेशवा थे। वे मराठा साम्राज्य के महानतम पेशवा के रूप में मान्य हैं जिनके अल्पवयस्क होने के बावजूद अद्भुत दूरदर्शिता एवं संगठन-क्षमता के कारण पानीपत के तृतीय युद्ध में मराठों की खोयी श ...

                                               

मोरोपंत त्र्यंबक पिंगले

मोरोपन्त त्रयम्बक पिंगले, मराठा साम्राज्य के प्रथम पेशवा थे। उन्हें मोरोपन्त पेशवा भी कहते हैं। वे शिवाजी के अष्टप्रधानों में से एक थे।

                                               

राजाराम प्रथम

राजाराम राजे भोंसले मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी के छोटे पुत्र थे तथा सम्भाजी के सौतेले भाई थे। वे 1689 में मुग़ल साम्राज्य के शासक औरंगजेब के द्वारा सम्भाजी की हत्या कर दिये जाने के बाद मराठा साम्राज्य के तृतीय छत्रपति बने। उनका का ...

                                               

राज्यव्यवहार कोश

राज्यव्यवहार कोश एक कोशग्रन्थ है जिसका निर्माण छत्रपति शिवाजी महाराज जी के एक मंत्री रामचन्द्र अमात्य ने धुन्धिराज नामक विद्वान की सहायता से निर्मित किया था। इस कोश में १३८० फारसी के प्रशासनिक शब्दों के तुल्य संस्कृत शब्द थे। अपने राज्याभिषेक के ...

                                               

राधाबाई

राधाबाई नेवास के बर्वे परिवार की कन्या थीं जिनका विवाह बालाजी विश्वनाथ के साथ हुआ था। इनके पिता का नाम डुबेरकर अंताजी मल्हार बर्वे था। राधाबाई बालाजी के पिता विश्वनाथ भट्ट सिद्दियों के अधीन श्रीवर्धन गाँव के देशमुख थे। भारत के पश्चिमी सिद्दियों स ...

                                               

वाघ्या

वाघ्या, मराठा राजा शिवाजी महाराज का एक पालतू कुत्ता था, जो एक मिश्रित-नस्ल का था। इसे वफादारी और अनन्त भक्ति के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। बताया जाता है कि, छत्रपति शिवाजी की मृत्यु के बाद, वाघ्या विलाप करते हुए शिवाजी के अंतिम संस्कार के दौ ...

                                               

शनिवार वाड़ा

शनिवार वाड़ा भारत के महाराष्ट्र राज्य के पुणे ज़िले में स्थित एक दुर्ग है जिनका निर्माण १८वीं सदी में १७४६ में किया था। यह मराठा पेशवाओं की सीट थी। जब मराठाओं ने ईस्ट इंडिया कम्पनी से नियंत्रण खो दिया तो तीसरा आंग्ल-मराठा युद्ध हुआ था तब मराठों न ...

                                               

शमशेर बहादुर प्रथम

शमशेर बहादुर प्रथम उत्तरी भारत में कालपी और बांदा के एक मराठा शासक थे। वह पेशवा बाजीराव प्रथम और उनकी दूसरी पत्नी मस्तानी के पुत्र थे।

                                               

शाहु

छत्रपति शाहु मराठा सम्राट और छत्रपति शिवाजीमहाराज के पौत्और सम्भाजी महाराज के बेटे थे। ये ये छत्रपति शाहु महाराज के नाम से भी जाने जाते हैं। छत्रपति शाहूजी महाराज का जन्म 1682गांगुली गांव में हुआ था। 1689 में साहू को औरंगजेब ने अपनी सेना में रायग ...

                                               

शाहू द्वितीय (सतारा)

शाहु द्वितीय मराठा साम्राज्य के एक छत्रपति थे। वे सतारा के राजाराम द्वितीय के दत्तक पुत्र थे, और उनके बाद वे छत्रपती बने। १७७७ से १८०८ तक वह छत्रपति और मराठा सत्ता के महाराज थे। १८०८ में उनकी मृत्यू हो गयी।

                                               

शिवाजी द्वितीय

शिवाजी द्वितीय मराठा राजा था। राजाराम की मृत्यु के बाद शिवाजी द्वितीय गद्दी पर बैठा। जब वह गद्दी पर बैठा तो केवल 4 साल का था और उसकी माँ ताराबाई ने उसे गद्दी पर बिठाया था। उसकी माँ उसकी संरक्षिका बनी। ताराबाई ने मुगलों के खिलाफ मराठों का नेतृत्व ...

                                               

सचिव

हिन्दू राजाओं के इसी कार्यालय प्रधान को सचिव कहा जाता था। मराठा साम्राज्य के दफ़तरों को सचिव कहते थे। आजकल किसी बड़े अधिकारी या विभाग का वह व्यक्ति जो अभिलेख आदि सुरक्षित रखता हो। और मुख्य रूप से पत्र व्यवहार aur gopniye kam karta ho आदि की व्यवस ...

                                               

सतारा के राजाराम द्वितीय

राजाराम द्वितीय भोसले, जिसे रामराज के नाम से भी जाना जाता है, मराठा साम्राज्य का 6 वां राजा थे । वह छत्रपति शाहू के एक दत्तक पुत्र थे ताराबाई ने उन्हें अपने पोते के रूप में शाहू के पास पेश किया था और शाहू की मौत के बाद उन्हें सत्ता में लेने के लि ...

                                               

अनवरुद्दीन ख़ान

अनवरुद्दीन ख़ान, उर्फ़ मोहम्मद अनवरुद्दीन, आरकाट के दूसरे राजवंश के के पहले नवाब थे। वह पहले दो कर्नाटक युद्धों के दौरान एक प्रमुख व्यक्ति थे। वह 1721-1733 के बीच थट्टा के सुबेदर भी थे।

                                               

कामरान

कामरान बाबर के बेटे हुमायूं का आधा भाई था. अपने भाई हुमायूं किगए प्रशासक के अफगानिस्तान और स्वयं भारत और शासन से 1530 के लिए 1540.

                                               

जहाँआरा बेगम

जहाँआरा बेगम सम्राट शाहजहां और महारानी मुमताज महल की सबसे बड़ी बेटी थी। वह अपने पिता के उत्तराधिकारी और छठे मुगल सम्राट औरंगज़ेब की बड़ी बहन भी थी। उन्होंने चांदनी चौक की रूपरेखा बनाई! 1631 में मुमताज़ महल की असामयिक मृत्यु के बाद, 17 वर्षीय जहाँ ...

                                               

जहाँगीर

जहाँगीर अकबर के पुत्र थे। सलीम, मुराद और दानियाल । मुराद और दानियाल पिता के जीवन में शराब पीने की वजह से मर चुके थे। जँहागिर का प्रथम विवाह 1585 ई. में मानबाई से हुआ जो आमेर के राजा भगवानदास की पुत्री व मान सिंह की बहन थी। इसके बाद उनका दूसरा विव ...

                                               

तख़्त-ए-ताऊस

तख़्त-ए-ताऊस वह मशहूर सिंहासन है जिसे मुगल बादशाह शाहजहाँ ने बनवाया था। पहले यह आगरे के किले में रखा था। वहाँ से इसे दिल्ली के लाल किले में ले जाकर रख दिया गया। दिल्ली से इस सिहांसन को ईरान का शाह नादिरशाह लूट कर ले गया। सन् 1747 में नादिरशाह के ...

                                               

दानियाल

दानियाल मुगल सम्राट् अकबर का सबसे छोटा और प्रिय पुत्र। वह सितंबर १५७२ में अजमेर में उत्पन्न हुआ। १५९९ में वह दक्षिण प्रदेश का सैन्य अधिपति नियुक्त किया गया। १६०० में इसने अहमदनगर को जीत लिया। अकबर ने सन् १६०१ में खानदेश नाम का प्रांत इसे पुरस्कार ...

                                               

दारा शिकोह

दारा को 1633 में युवराज बनाया गया और उसे उच्च मंसब प्रदान किया गया। 1645 में इलाहाबाद, 1647 में लाहौऔर 1649 में वह गुजरात का शासक बना। 1653 में कंधार में हुई पराजय से इसकी प्रतिष्ठा को धक्का पहुँचा। फिर भी शाहजहाँ इसे अपने उत्तराधिकारी के रूप में ...

                                               

बहादुर शाह प्रथम

बहादुर शाह प्रथम का जन्म 14 अक्तूबर, सन् 1643 ई. में बुरहानपुर, भारत में हुआ था। बहादुर शाह प्रथम दिल्ली का सातवाँ मुग़ल बादशाह था। शहज़ादा मुअज्ज़म कहलाने वाले बहादुरशाह, बादशाह औरंगज़ेब का दूसरा पुत्र था। जो अपने भाई आज़म शाह को मुगल राजगद्दी स ...

                                               

बाग़-ए-बाबर

बाग़-ए-बाबर मुगल सम्राट बाबर का मकबरा परिसर है। यह काबुल आने वाले पर्यटकों का सबसे पसंदीदा स्‍थान है। इसी बाग में प्रथम मुगल बादशाह बाबर की कब्र है। यह पार्क कई बगीचों को मिलाकर बनाया गया है। इस बाग की बाहरी दीवार का पुनर्निर्माण २००५ ई. में पुरा ...

                                               

बैरम खां

बैरम खान या मोहम्मद बैरम खान अब्दुल रहीम खानेखाना के पिता जाने-माने योद्धा थे। वह अकबर के वज़ीर थे व तुर्किस्तान से आए थे। उन्हीं के संरक्षण में अकबर बड़े हुए लेकिन दरबार के कुछ लोगों ने अकबर को बैरम खान के खिलाफ भड़का दिया और उन्हें संरक्षक पद स ...

                                               

मज्म उल बहरैन

मज्म उल बहरैन दारा शुकोह द्वारा लिखित तुलनात्मक धर्म पर एक पुस्तक है। यह सूफ़ी और वेदांतिक अटकलों के बीच रहस्यमय और बहुलवादी समानताओं के एक रहस्योद्घाटन के लिए समर्पित थी।. यह धर्मों की विविधता और इस्लाम और हिंदू धर्म और अन्य धर्मों की एकता दोनों ...

                                               

मिर्ज़ा नजफ खां

मिर्ज़ा नजफ़ खां मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय के दरबार में एक फारसी एडवेंचरर था। इसके सफ़ावी वंश को नादिर शाह ने १७३५ में पदच्युत कर दिया था। नजफ़ खां भारत १७४० में आया था। इसकी बहन का विवाह अवध के नवाब से हुआ था। इसे अवध के उप-वज़ीर का पद भी मिला ...

                                               

मिर्ज़ा मोहम्मद हाकीम

मिर्ज़ा मोहम्मद हाकीम, कभी कभी मिर्ज़ा हकीम, लघु रूप में भी जाने जाते थे, मिर्ज़ा मुगल सम्राट हुमायूं के दूसरे पुत्र थे।इन्होंने अफगानिस्तान में काबुल पर शासन किया था, और अक्सर उनके बड़े भाई सम्राट अकबर के साथ ही रहते थे मिर्ज़ा हाकीम ने सम्राट अ ...

                                               

मीर बाकी

बाक़ी ताशकंदी, जिसे मीर बाक़ी के नाम से जाना जाता है, मुग़ल सम्राट बाबर का सेनापति था। वह मूल रूप से ताशकंद का था। ऐसा माना जाता है कि अवध प्रान्त का गवर्नर बना दिया गया था। उसने बाबरी मस्जिद की स्थापना की थी, जोकि आधुनिक भारत के सबसे बड़े धार्मि ...

                                               

मुगल साम्राज्य की सेना

मुगल साम्राज्य की सेना; Army of the Mughal Empire ; राज्य के द्वारा कोई विशाल सेना स्थायी रूप से नहीं रखी जाती थी परन्तु सिद्धान्त रूप में साम्राज्य के सभी बल नागरिक शाही सेना के हो सकने वाले सिपाही थे। मुगल सेना का इतिहास अधिकतर मनसबदारी प्रणाली ...

                                               

राजा बीरबल

बीरबल: असली नाम: महेश दास भट्ट था, मुगल बादशाह अकबर के प्रशासन में मुगल दरबार का प्रमुख वज़ीर था और अकबर के परिषद के नौ सलाहकारों में से एक सबसे विश्वस्त सदस्य था जो अकबर के नवरत्नों थे यह संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ नौ रत्न है। उनका जन्म भट्टराव ...

                                               

सैयद बन्धु

सैयद बन्धु से आशय सैयद हसन अली खान बरहा और सैयद अब्दुल्लाह नामक दो भाइयों से है जो मुगल साम्राज्य में शक्तिशाली सेनानायक थे। उन्हें राजनिर्माता भी कहा जाता है।

                                               

हुमायूँ

हुमायूँ एक मुगल शासक था। प्रथम मुग़ल सम्राट बाबर के पुत्र नसीरुद्दीन हुमायूँ थे। यद्यपि उन के पास साम्राज्य बहुत साल तक नही रहा, पर मुग़ल साम्राज्य की नींव में हुमायूँ का योगदान है। बाबर की मृत्यु के पश्चात हुमायूँ ने १५३० में भारत की राजगद्दी सं ...

                                               

अजबदे पंवार

अजबदे परमार महाराणा प्रताप की पत्नी तथा अमरसिंह सिसोदिया की माँ थी। इनके पिता का नाम राव माम्रक सिंह तथा माता का नाम हंसा बाई था। अजबदे पंवार ने महाराणा प्रताप की राजनीतिक मामलों में काफी मदद की थी।

                                               

महारानी जयवंताबाई

महारानी जयवंताबाई महाराणा उदय सिंह की पहली पत्नी थी, और इनके पुत्र का नाम महाराणा प्रताप था। यह राजस्थान के जालौर की एक रियासत के अखे राज सोंगरा चौहान की बेटी थी। उनका शादी से पहले जीवंत कंवर नाम था जो शादी के बाद बदल दिया गया। जयवंता बाई उदय सिं ...