ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 135




                                               

अत्तिला

अत्तिला या अत्तिला हूण वर्ष 434 से अपनी मृत्यु तक हूणों का राजा था। यह हूण साम्राज्य का नेता था यह मूल रूप से भारत में आये स्वेत हूंणों का ही वंशज था जो मूल रूप से गुर्जर वंश के थे हूंणों के परिवार के सदस्य कंषान गुर्जर कुषान/ड के परिवार के थे। ज ...

                                               

तोरमाण

me|Toraman}} तोरमाण भारत वर्ष पर आक्रमण करने वाले हूणों का नेता था जिसने 500ई के लगभग मालवा पर अधिकार किया था। मिहिरकुल तोरमाण का ही पुत्र था, जिसने हूण साम्राज्य का विस्तार अफ़ग़ानिस्तान तक किया। तोरमाण ने कई विजय अभियान किये थे, एक बड़े विस्तृत ...

                                               

हूण लोग

मुख्य मेनू खोलें विकिपीडिया खोजें आपके लिये कोई अधिसूचना नहीं है। मिहिरकुल लेख संवाद किसी अन्य भाषा में पढ़ें डाउनलोड करें ध्यान रखें History संपादित करें Thursday, October 25, 2012 शिव भक्त सम्राट मिहिरकुल हूण Emperor Mihirkula Huna पांचवी शताब् ...

                                               

भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन

भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय आह्वानों, उत्तेजनाओं एवं प्रयत्नों से प्रेरित, भारतीय राजनैतिक संगठनों द्वारा संचालित अहिंसावादी और सैन्यवादी आन्दोलन था, जिनका एक समान उद्देश्य, अंग्रेजी शासन को भारतीय उपमहाद्वीप से जड़ से उखाड़ ...

                                               

अन्तरिम भारत सरकार

भारत की अन्तरिम सरकार २ सितम्बर १९४६ को बनायी गयी थी। इसका निर्माण नवनिर्वाचित भारतीय संविधान सभा से हुआ था। इसका कार्य ब्रितानी भारत के स्वतन्त्र भारत में संक्रमण के कार्य में सहयोग करना था। इसका अस्तित्व १५ अगस्त १९४७ तक रहा जब भारत का विभाजन क ...

                                               

अब्दुल हबीब यूसुफ़ मर्फ़ानी

अब्दुल हबीब यूसुफ़ मर्फ़ानी: भारत के राज्य गुजरात सौराश्ट्र के शहर धोराजी के व्यापारी थे। यह मेमन व्यापारी समुदाय से थे। अब्दुल हबीब यूसुफ मारफानी ने भारतीय राष्ट्रीय सेना को लगभग 1 करोड़ रुपये का पूरा भाग्य दान किया। उसी तरह जैसे गुजराती व्यापार ...

                                               

आज़ाद हिन्द रेडियो

आज़ाद हिंद रेडियो का आरम्भ नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के नेतृत्व में १९४२ में जर्मनी में किया गया था। इस रेडियो का उद्देश्य भारतीयों को अंग्रेजों से स्वतन्त्रता पाने के लिये संघर्ष करने के लिये प्रचार-प्रसार करना था। आज़ाद हिंद रेडियो एक प्रचार रेडि ...

                                               

आनंद भवन

आनंद भवन, इलाहाबाद में स्थित नेहरू-गाँधी परिवार का पूर्व आवास है जो अब एक संग्रहालय के रूप में है। वस्तुतः यह एक अपेक्षाकृत रूप से नया भवन है, जब मोतीलाल नेहरू ने इस नए भवन का निर्माण करवाया और अपने पुराने आवास को कांग्रेस के कार्यों हेतु स्थानीय ...

                                               

असहयोग आन्दोलन

गाँधी जी के नेतृत्व मे चलाया जाने वाला यह प्रथम जन आंदोलन था। इसमे असहयोग और व्यास काल की निती प्रमुखत: से अपनाई गई। इस आंदोलन का व्यापक जन आधार था। शहरी क्षेत्र मे मध्यम वर्ग तथा ग्रामिण क्षेत्र मे किसानो और आदीवासियो का इसे व्यापक समर्थन मिला। ...

                                               

इंडियन इंडिपेंडेस लीग

इंडियन इंडिपेंडेस लीग १९२० के दशक से १९४० के दशक तक चला राजनीतिक संगठन था। इसका उद्देश्य प्रवासी भारतीयो को भारत में ब्रिटिश राज हटाने के लिये प्रेरित करना था। इसकी स्थापना भारतीय क्रांतिकारी नेता रास बिहारी बोस और जवाहरलाल नेहरू ने १९२८ में की थ ...

                                               

इंडियन रिपब्लिकन आर्मी

भारत की आजादी पाने की इच्छा इतनी प्रबल थी कि बहुत से लोगों ने ब्रिटिश फौज की नौकरी छोड़ दी और अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए इंडियन रिपब्लिकन आर्मी का गठन कर लिया। 18 अप्रैल सन् 1930 को बंगाल के चटगाँव में भारता की आजादी के दीवानों ने शौर्य का ऐसा ...

                                               

इराम हत्याकांड

इराम ओडिशा में एक छोटा सा गांव है, यह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह रक्त तीर्थ इराम या भारत के दूसरे जलियांवाला बाग के रूप में जाना जाता है।

                                               

उत्तराखंड के शहीदों की सूची

गुन्दरू पुत्र सागरू 1890-1932 लुदर सिंह पुत्र रणदीप 1890-1932 दिला पुत्र दलपति 1880- टिहरी जेल में मृत्यु मदन सिंह 1875- टिहरी जेल में मृत्यु जमन सिंह पुत्र लच्छू 1880-1931 गुलाब सिंह ठाकुर 1910- टिहरी जेल में मृत्यु ज्वाला सिंह पुत्र जमना सिंह 1 ...

                                               

उत्तराखंड में स्वाधीनता संग्राम

वर्तमान राज्य उत्तराखण्ड जिस भौगोलिक क्षेत्पर विस्तृत है उस इलाके में ब्रिटिश शासन का इतिहास उन्नीसवी सदी के दूसरे दशक से लेकर भारत की आज़ादी तक का है। उत्तराखण्ड में ईस्ट इंडिया कंपनी का आगमन 1815 में हुआ। इससे पहले यहाँ नेपाली गोरखों का शासन था ...

                                               

ए ओ ह्यूम

एलेन ओक्टेवियन ह्यूम ब्रिटिशकालीन भारत में सिविल सेवा के अधिकारी एवं राजनैतिक सुधारक थे। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापकों में से एक थे। ह्यूम प्रशासनिक अधिकारी और राजनैतिक सुधारक के अलावा माहिर पक्षी-विज्ञानी भी थे, इस क्षेत्र में उनके ...

                                               

काकोरी काण्ड

काकोरी काण्ड भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रान्तिकारियों द्वारा ब्रिटिश राज के विरुद्ध भयंकर युद्ध छेड़ने की खतरनाक ईच्छा से हथियार खरीदने के लिये ब्रिटिश सरकार का ही खजाना लूट लेने की एक ऐतिहासिक घटना थी जो ९ अगस्त १९२५ को घटी। इस ट्रेन डकैती म ...

                                               

कुली-बेगार आन्दोलन

कुली-बेगार आन्दोलन 1921 में उत्तर भारत के बागेश्वर नगर में आम जनता द्वारा अहिंसक आन्दोलन था। इस आन्दोलन का नेतृत्व बद्री दत्त पाण्डे ने किया, तथा आंदोलन के सफल होने के बाद उन्हें कुमाऊं केसरी की उपाधि दी गयी। इस आन्दोलन का उद्देश्य कुली बेगार प्र ...

                                               

कूका विद्रोह

सिखों के नामधारी संप्रदाय के लोग कूका भी कहलाते हैं।। इसकी शुरुआत 1840 ईस्वी में हुई थी इसको प्रारम्भ करने का श्रेय सेन साहब अर्थात भगत जहवाहर मल को जाता है इसको बालक सिंह तथा उसके अनुयायी रामसिंह ने नेतृत्व किया थालोगों के सशस्त्र विद्रोह को कूक ...

                                               

ख़िलाफ़त आन्दोलन

=) असहयोग खिलाफत आन्दोलन:- मार्च 1919 में बंबई में एक खिलाफत समिति का गठन किया गया था। मोहम्मद अली और शौकत अली बंधुओ के साथ-साथ अनेक मुस्लिम नेताओं ने इस मुद्दे पर संयुक्त जनकार्यवायी की संभावना तलाशने के लिए महात्मा गाँधी के साथ चर्चा शुरू कर दी ...

                                               

खाकसार आंदोलन

खाकसार आंदोलन, लाहौर, पंजाब, ब्रिटिश भारत में स्थित एक सामाजिक आंदोलन था, 1931 में इनायतुल्ला खान माश़रिकी द्वारा स्थापित इस समूह का उद्देश्य, भारत से ब्रिटिश साम्राज्य के शासन से मुक्त करा कर, हिंदू-मुस्लिम शासन स्थापित करने का था। खाकसार आंदोलन ...

                                               

खेड़ा सत्याग्रह

खेड़ा सत्याग्रह गुजरात के खेड़ा जिले में किसानों का अंग्रेज सरकार की कर-वसूली के विरुद्ध एक सत्याग्रह इसे प्रथम असहयोग आंदोलन भी कहा जाता है।

                                               

गांधी-इरविन समझौता

5 मार्च सन् 1931 को लंदन द्वितीय गोल मेज सम्मेलन के पूर्व महात्मा गांधी और तत्कालीन वाइसराय लार्ड इरविन के बीच एक राजनैतिक समझौता हुआ जिसे गांधी-इरविन समझौता कहते हैं। ब्रिटिश सरकार प्रथम गोलमेज सम्मेलन से समझ गई कि बिना कांग्रेस के सहयोग के कोई ...

                                               

गोपाल गणेश आगरकर

गोपाल गणेश आगरकर भारत के महाराष्ट्र प्रदेश के समाज सुधारक एवं पत्रकार थे। वे मराठी के प्रसिद्ध समाचार पत्र केसरी के प्रथम सम्पादक थे। किन्तु बाल गंगाधर तिलक से वैचारिक मतभेद के कारण उन्होने केसरी का सम्पादकत्व छोड़कर सुधारक नामक पत्रिका का प्रकाश ...

                                               

गोलमेज सम्मेलन (भारत)

यह लेख आंग्ल-भारतीय गोलमेज सम्मेलन के बारे में है। डच-इन्डोनेशियाई गोलमेज सम्मेलन के लिए, डच-इन्डोनेशियाई गोलमेज सम्मेलन देखिये। गोलमेज के अन्य उपयोगों के लिए, कृपया गोलमेज देखें। नमक यात्रा के कारण ही अंग्रेजों को यह अहसास हुआ था कि अब उनका राज ...

                                               

चम्पारण सत्याग्रह

गांधीजी के नेतृत्व में बिहार के चम्पारण जिले में सन् 1917में एक सत्याग्रह हुआ। इसे चम्पारण सत्याग्रह के नाम से जाना जाता है। गांधीजी के नेतृत्व में भारत में किया गया यह पहला सत्याग्रह था।

                                               

चिनाहट की लड़ाई

चिनाहट की लड़ाई 30 जून, 1857 को ब्रिटिश सेनाओं और भारतीय विद्रोहियों के बीच, चिंतहाट,अवध के पास इस्माइलगंज में लड़ी गई थी। अंग्रेजों का नेतृत्व ओउड के मुख्य आयुक्त, हेनरी लॉरेंस ने किया था। विद्रोही बल, जिसमें ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना और स्थानीय ...

                                               

चौरी चौरा कांड

चौरी चौरा, उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के पास का एक कस्बा है जहाँ 5 फ़रवरी 1922 को भारतीयों ने ब्रिटिश सरकार की एक पुलिस चौकी को आग लगा दी थी जिससे उसमें छुपे हुए 22 पुलिस कर्मचारी जिन्दा जल के मर गए थे। इस घटना को चौरीचौरा काण्ड के नाम से जाना जाता ...

                                               

जलसेना विद्रोह (मुम्बई)

भारत की आजादी के ठीक पहले मुम्बई में रायल इण्डियन नेवी के सैनिकों द्वारा पहले एक पूर्ण हड़ताल की गयी और उसके बाद खुला विद्रोह भी हुआ। इसे ही जलसेना विद्रोह या मुम्बई विद्रोह के नाम से जाना जाता है। यह विद्रोह १८ फ़रवरी सन् १९४६ को हुआ जो कि जलयान ...

                                               

झाँसी

झाँसी भारत के उत्तर प्रदेश प्रान्त में स्थित एक प्रमुख शहर है। यह शहर उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है और बुंदेलखंड क्षेत्र के अन्तर्गत आता है। झाँसी एक प्रमुख रेल एवं सड़क केन्द्र है और झाँसी जिले का प्रशासनिक केन्द्र भी है। झाँस ...

                                               

टंट्या भील

टंट्या भील का नाम सबसे बड़े व्यक्ति के रुप मे लिया जाता है वे बड़े योद्दा थे । आज भी बहुत आदिवासी घरो मे टंट्या भील कि पुजा कि जाती है,कहा जाता है कि टंट्या भील को सभी जानवरो कि भाषा आती थी, टंट्या भील के आदिवासीयों ने देवता कि तरह माना था, आदिवा ...

                                               

ढाका अनुशीलन समिति

ढाका अनुशीलन समिति, अनुशीलन समिति की ढाका स्थित शाखा का नाम था। इसकी स्थापना नवम्बर १९०५ में की गयी थी। आरम्भ में पुलिन बिहारी दास के नेतृत्व में केवल ८ क्रान्तिकारियोण ने इसकी शुरुआत की थी किन्तु यह तीव्र वेग से पूरे पूर्वी बंगाल में फैल गयी।

                                               

तेज बहादुर सप्रू

मोटे अक्षर सर तेज बहादुर सप्रू प्रसिद्ध वकील, राजनेता और समाज सुधारक थे। उन्होंने गोपाल कृष्ण गोखले की उदारवादी नीतियों को आगे बढ़ाया और आजाद हिन्द फौज के सेनानियों का मुकदमा लड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

                                               

द इंडियन सोसियोलोजिस्ट

द इंडियन सोसियोलोजिस्ट २०वीं शताब्दी के आरम्भिक दिनों में प्रकाशित एक भारतीय राष्ट्रवादी जर्नल थी। इसका उपशीर्षक यह था, स्वतंत्रता तथा राजनैतिक, सामाजिक और धार्मिक सुधार का एक औजार ।

                                               

दाण्डी आन्दोलन

असहयोग आंदोलन समाप्त होने के कई वर्ष बाद तक महात्मा गाँधी ने अपने को समाज सुधार कार्यो पर केंद्रित रखा। 1928 में उन्होंने पुन:राजनीति में प्रवेश करने की सोची। उस वर्ष सभी श्वेत सदस्यों वाले साईमन कमीशन, जो कि उपनिवेश की स्थितियों की जाँच-पड़ताल क ...

                                               

दिल्ली बम काण्ड

दिल्ली बम काण्ड सन् १९१२ में बनायी गयी मास्टर अमीरचन्द, लाला हनुमन्त सहाय, मास्टर अवध बिहारी, भाई बालमुकुन्द और बसन्त कुमार विश्वास द्वारा लार्ड हार्डिंग नामक ब्रिटिश वायसराय को जान से मार डालने की एक क्रान्तिकारी योजना थी जो सफल न हो सकी। लार्ड ...

                                               

दिल्ली षड्यंत्र मामला

दिल्ली षडयंत्र मामला, जिसे दिल्ली-लाहौर षडयंत्र के नाम से भी जाना जाता है, १९१२ में भारत के तत्कालीन वाइसराय लॉर्ड हार्डिंग की हत्या के लिए रचे गए एक षड्यंत्र के संदर्भ में प्रयोग होता है, जब ब्रिटिश भारत की राजधानी के कलकत्ता से नई दिल्ली में स् ...

                                               

धरासन सत्याग्रह

धरासन सत्याग्रह: मई, 1930 में औपनिवेशिक भारत में ब्रिटिश नमक कर के खिलाफ एक विरोध था। साल्ट मार्च के अंत में दांडी सत्याग्रह के समापन के बाद, महात्मा गांधी ने गुजरात में धारसन नमक कार्य का अहिंसक हमला चुना क्योंकि ब्रिटिश शासन के खिलाफ अगला विरोध ...

                                               

नजफ़गढ़ की लड़ाई

नजफ़गढ़ की लड़ाई १८५७ के प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के दौरान हुई एक लड़ाई थी। यह दिल्ली की घेराबंदी की एक सहायक घटना थी। बख्त खान के नेतृत्व में भारतीयों की एक बड़ी सेना ने दिल्ली को घेरने आ रही ब्रिटिश सेना पर पीछे से हमला करने का निश्चय क ...

                                               

निशान सिंह

निशान सिंह भारत के लिए कुर्बान होने वाले वीर सपूत थे जिन्होने सन् १८५७ से स्वतंत्रता के प्रथम संग्राम में अपनी वीरता का परिचय दिया था। निशान सिंह की स्मृति में गांव में एक विद्यालय व एक पुस्तकालय संचालित हो रहा है।

                                               

परकाला नरसंहार

हैदराबाद के निजाम के पुलिस और रजाकार के द्वारा 2 सितंबर, 1947 को परकाला शहर में 22 लोगों की हत्या को परकाला नरसंहार कहा जाता है. यह नरसंहार उस लोकप्रिय आंदोलन को दबाने के लिए किया गया था जब हैदराबाद राज्य को भारत में विलय करने के चर्चा हो रही थी।

                                               

पवनार

पवनार एक ऐतिहासिक गांव है जो महाराष्ट्र के वर्धा जिले में धाम नदी के तट पर बसा है। यह गांव जिले की सबसे प्राचीन बस्तियों में एक है। राजपूत राजा पवन के नाम पर इसका नाम पवनार पड़ा। गांव में गांधी कुटी और आचार्य विनोबा भावे का परमधाम आश्रम देखा जा स ...

                                               

पूर्ण स्वराज

१९ दिसम्बर १९२९ को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी और लोगों ने ब्रितानी साम्राज्य से पूरी तरह से स्वतंत्र होकर अपना राज बनाने के लिए संघर्ष करने की प्रतिज्ञा की थी। 31 दिसम्बर 1929 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का वार्षिक ...

                                               

प्रजामण्डल

प्रजामण्डल भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय रियासतों की जनता के संगठन थे। 1920 के दशक में प्रजामण्डलों की स्थापना तेजी से हुई प्रजामण्डल का अर्थ है जनता का समुह

                                               

प्रेम कुमार सहगल

कर्नल प्रेम कुमार सहगल आजाद हिन्द फौज के प्रसिद्ध अधिकारी थे। द्वितीय विश्वयुद्ध के समाप्त होने पर जनरल शाहनवाज खान, कर्नल गुरबख्श सिंह ढिल्लों तथा कर्नल सहगल के ऊपर अंग्रेज सरकार ने मुकद्दमा चलाया।

                                               

प्लासी का पहला युद्ध

प्लासी का पहला युद्ध 23 जून 1757 को मुर्शिदाबाद के दक्षिण में 22 मील दूर नदिया जिले में गंगा नदी के किनारे प्लासी नामक स्थान में हुआ था। इस युद्ध में एक ओर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना थी तो दूसरी ओर थी बंगाल के नवाब की सेना। कंपनी की सेना न ...

                                               

बख्तावर सिंह

महाराणा बख्तावरसिंह मध्यप्रदेश के धार जिले के अमझेरा कस्बे के शासक थे, जिन्होंने १८५७ के स्वतंत्रता संग्राम में मध्य प्रदेश में अंग्रेजों से संघर्ष किया। लंबे संघर्ष के बाद छलपूर्वक अंग्रेजों ने उन्हें कैद कर लिया। 10 फरवरी 1858 में इंदौर के महार ...

                                               

बाबा राघवदास

बाबा राघवदास का जन्म १२ दिसम्बर १८९६ को पुणे महाराष्ट्र में एक संभ्रान्त ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री शेशप्पा और माता का नाम श्रीमती गीता था। इनके पिता एक नामी व्यवसायी थे। बाबा राघवदास के बचपन का नाम राघवेन्द्र था। राघवेन्द् ...

                                               

बारडोली सत्याग्रह

बारडोली सत्याग्रह, भारतीय स्वाधीनता संग्राम के दौरान वर्ष 1928 में गुजरात में हुआ यह एक प्रमुख किसान आंदोलन था जिसका नेतृत्व वल्लभ भाई पटेल ने किया था। उस समय प्रांतीय सरकार ने किसानों के लगान में 22 प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी थी। पटेल ने इस लगान ...

                                               

ब्रिटिश राज

ब्रिटिश राज 1858 और 1947 के बीच भारतीय उपमहाद्वीप पर ब्रिटिश द्वारा शासन था। क्षेत्र जो सीधे ब्रिटेन के नियंत्रण में था जिसे आम तौपर समकालीन उपयोग में इंडिया कहा जाता था‌- उसमें वो क्षेत्र शामिल थे जिन पर ब्रिटेन का सीधा प्रशासन था और वो रियासतें ...

                                               

भारत की अंतःकालीन सरकार

भारत की अंतःकालीन सरकार भारतीय राष्ट्रवादियों द्वारा १ दिसम्बर १९१५ को काबुल में अस्थायी रूप से स्थापित एक सरकार थी। राष्ट्रपती राजा महेंद्र प्रताप थे, पंतप्रधान मौलाना बरकतउल्लाह, गृह मंत्री देवबंदी मौलाना उबैदुल्लाह सिंधी, युद्ध मंत्री देवबंदी ...