ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 178




                                               

अवपरमाणुक कण

भौतिकी में अवपरमाणुक कण उन कणों को कहते हैं जिनसे मिलकर न्युक्लियॉन और परमाणु बने हैं। अवपरमाणुक कण दो प्रकार के हैं - मिश्र या संयुक्त कण composite particles मूल कण elementary particles, जो किसी अन्य कण से मिलकर नहीं बने हैं। कण भौतिकी एवं नाभिक ...

                                               

कणों की सूची

इन्हें भी देखें: कण आविष्कारों की समयरेखा यह सूची भिन्न प्रकार के उन सभी कणों की है जो ज्ञात हैं अथवा उनकी उपस्थिति सैद्धान्तिक रूप से दी गई है और यह माना जाता है कि पूरा ब्रह्माण्ड इन्हीं कणों से बना हुआ है। विभिन्न प्रकार के विशिष्ट कणों की सूच ...

                                               

परमाणु नाभिक

नाभिक, परमाणु के मध्य स्थित धनात्मक वैद्युत आवेश युक्त अत्यन्त ठोस क्षेत्र होता है। नाभिक, नाभिकीय कणों प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन से बने होते है। इस कण को नूक्लियान्स कहते है। प्रोटॉन व न्यूट्रॉन दोनो का द्रव्यमान लगभग बराबर होता है और दोनों का आंतरि ...

                                               

अण्डजता

अण्डज वो जीव होते हैं जो अंडे देते हैं और जिनके भ्रूण का विकास माता के गर्भ में नहीं होता, सिर्फ कुछ अपवादों में ही इनके भ्रूण का विकास माता के शरीर् में आंशिक रूप से होता या है। प्रजनन का यह तरीका अधिकतर मछलियों, उभयचरों, सरीसृपों, सभी पक्षियों, ...

                                               

अमीबा

अमीबा के भोजन ग्रहण करने व पाचन की विधि का सचित्र वर्णन कीजिए अमीबा Amoeba जीववैज्ञानिक वर्गीकरण में एक वंश है तथा इस वंश के सदस्यों को भी प्रायः अमीबा कहा जाता है। अत्यंत सरल प्रकार का एक प्रजीव प्रोटोज़ोआ है जिसकी अधिकांश जातियाँ नदियों, तालाबो ...

                                               

हाथी

हाथी जमीन पर रहने वाला एक विशाल आकार का प्राणी है। यह जमीन पर रहने वाला सबसे विशाल स्तनपायी है। यह एलिफैन्टिडी कुल और प्रोबोसीडिया गण का प्राणी है। आज एलिफैन्टिडी कुल में केवल दो प्रजातियाँ जीवित हैं: ऍलिफ़स तथा लॉक्सोडॉण्टा । तीसरी प्रजाति मैमथ ...

                                               

आयनन ऊर्जा

किसी विलगित गैसीय अवस्था वाले परमाणु के सबसे शिथिलतः बद्ध इलेक्ट्रान को परमाणु से अलग करने के लिये आवश्यक ऊर्जा, आयनन ऊर्जा) या आयनन विभव या आयनन एन्थैल्पी कहलाती है। A g + E I → A g + + e − {\displaystyle \ A_{g}+E_{I}\to A_{g}^{+}\ +e^{-}}. जहा ...

                                               

तत्वों की सूची (नाम अनुसार)

नीचे प्रत्येक तत्व के सबसे स्थिर समस्थानिक का तत्व प्रतीक, परमाणु क्रमांक और परमाणु भार का विवरण दिया गया है। साथ ही उनका समूह और आवर्त सारणी मे उनकी स्थिति भी प्रदर्शित है।

                                               

थॉमसन का परमाणु मॉडल

सन 1891-1897 तक के अपने प्रयोगो द्वारा सन 1898 में जे.जे. थॉमसन ने यह बताया की परमाणु एक समान आवेशित गोला होता है, जिसमे धनावेश समान रूप से विपरीत रहता है। इस पर इलेक्ट्रॉन इस प्रकार स्थित होते हैं कि उससे एक स्थिर व स्थायी वैद्युत व्यवस्था प्राप ...

                                               

परमाणु बीमा पूल

परमाणु ऊर्जा विभाग डीएई ने 12 जून 2015 को भारतीय परमाणु बीमा पूल आइएनआईपी का शुभारम्भ किया। आइएनआईपी परमाणु उर्जा जोखिम हस्तांतरण के अंतर्गत विश्व का 27वां बीमा पूल बन गया है, इस श्रेणी में फ्रांस, रूस, दक्षिण अफ्रीका तथा अमेरिका जैसे देश शामिल हैं।

                                               

पेंटाक्वार्क

यूरोपीय नाभिकीय अनुसंधान संगठन सर्न में मौजूद वैज्ञानिकों की एक टीम ने 14 जुलाई 2015 को एक विशेष सब-एटॉमिक पार्टिकल पेंटाक्वार्क की मौजूदगी की खोज की जो अब तक केवल सैधांतिक रूप से ही मौजूद था। यह खोज सर्न, जिनेवा में विशाल हैड्रन कोलाइडर के प्रयो ...

                                               

मूलकण

भौतिकी में मूलकण वे कण हैं, जिनकी कोई उपसंरचना ज्ञात नहीं है। यह किन कणों से मिलकर बना है, अज्ञात है। मूलकण ब्रह्माण्ड की आधारभूत संरचना है, समस्त ब्रह्माण्ड इन्ही मूलभूत कणों से मिलकर बना है। कण भौतिकी के मानक मॉडल के अनुसार क्वार्क, लेप्टॉन और ...

                                               

W व Z बोसॉन

मानक प्रतिमान में दुर्बल अन्योन्य क्रिया के बल वाहक कण हैं। W बोसॉन का द्रव्यमान 80.4 GeV/ c 2 और आवेश ±1 होता है अतः सामान्यतः इसे W ± द्वारा लिखा जाता है। Z बोसॉन का द्रव्यमान 91.2 GeV/ c 2 तथा आवेश शून्य होता है। Z बोसॉन का प्रतीक चिह्न Z है। ...

                                               

इलेक्ट्रॉन

इलेक्ट्रॉन या विद्युदणु ऋणात्मक वैद्युत आवेश युक्त मूलभूत उपपरमाणविक कण है। यह परमाणु में नाभिक के चारो ओर चक्कर लगाता हैं। इसका द्रव्यमान सबसे छोटे परमाणु से भी हजारगुना कम होता है। परम्परागत रूप से इसके आवेश को ऋणात्मक माना जाता है और इसका मान ...

                                               

क्वार्क

क्वार्एक प्राथमिक कण है तथा यह पदार्थ का मूल घटक है। क्वार्क एकजुट होकर सम्मिश्र कण हेड्रॉन बनाते है, परमाणु नाभिक के मुख्य अवयव प्रोटॉन व न्यूट्रॉन इनमें से सर्वाधिक स्थिर हैं। नैसर्गिक घटना रंग बंधन के कारण, क्वार्क ना कभी सीधे प्रेक्षित हुआ या ...

                                               

गेज बोसॉन

कण भौतिकी में, गेज बोसॉन एक बोसॉनिक कण है जो प्रक्रिति के मूलभूत बलो के वाहक की भूमिका निभाता है अर्थात यह एक प्रकार का बल वाहक कण है।

                                               

ग्लुओन

ग्लुओन कण भौतिकी में एक मूलभूत कण है। इसका आवेश शून्य होता है अतः यह विद्युत चुम्बकीय अन्योन्य क्रियाओं में भाग नहीं लेता है। इसका द्रव्यमान शून्य होता है अतः यह गुरुत्वीय अन्योन्य क्रियाओं में भी भाग नहीं लेता। इस कण का प्रचक्रण 1 होता है। यह कण ...

                                               

टाऊ (कण)

टाऊ एक मूलभूत कण है। इसका प्रतीक चिह्न τ है। इसका आवेश इकाई होता है अर्थात इलेक्ट्रॉन के समान होता है। विद्युतणु की भाँति यह कण भी लेप्टॉनों की श्रेणी में आता है। इसका द्रव्यमान 1.777 Gev/c 2 है। इसका प्रचक्रण 1/2 होता है। आवेश के कारण यह दो फ्ले ...

                                               

टाऊ न्यूट्रिनो

टाऊ न्यूट्रिनो एक मूलभूत कण है। इसका प्रतीक चिह्न ν τ है। इसका आवेश शून्य होता है अर्थात यह एक उदासीन कण है। न्यूट्रिनों तीन प्रकार के होते हैं जिनमें से यह टाऊ से सम्बद्ध लेप्टॉनों की श्रेणी में आता है। इसका द्रव्यमान लगभग शून्य माना जाता है, प् ...

                                               

टॉप क्वार्क

यह क्वार्क का एक फ्लेवर है अथवा एक प्रकार का क्वार्क है जिसका आवेश +e, द्रव्यमान 171.2 GeV/c 2 तथा प्रचक्रण 1/2 होता है। टाॅप क्वार्क अब तक पाये गये फर्मियान कणों में सबसे भारी कण है। इसका द्रव्यमान टंगस्टन के परमाणु के लगभग बराबर होता है और यह च ...

                                               

न्यूट्रिनो

न्यूट्रिनो यह एक नया कण है जिसका सर्वप्रथम आविष्कार सन्‌ १९३० में पौली ने किया था। इस कण का प्रथम सैद्धांतिक आधार प्रसिद्ध भौतिकीविद फर्मी ने सन्‌ १९३४ में बतलाया।

                                               

पोजीट्रॉन

पाजीट्रोन या पोजीटिव इलेक्ट्रोन परमाणु में पाया जाने वाला एक मौलिक कण है। यह धन आवेश युक्त इलेक्ट्रोन है। इसके गुण इलेक्ट्रोन के समान होते किन्तु दोनो में अंतर यह है कि इलेक्ट्रोन ऋण आवेश युक्त कण है तथा पोजीट्रोधन आवेश युक्त कण है। इसका द्रव्यमा ...

                                               

म्यूऑन न्यूट्रिनो

म्यूऑन न्यूट्रिनो एक मूलभूत कण है। इसका प्रतीक चिह्न ν μ है। इसका आवेश शून्य होता है अर्थात यह एक उदासीन कण है। न्यूट्रिनों तीन प्रकार के होते हैं जिनमें से यह म्यूऑन से सम्बद्ध लेप्टॉनों की श्रेणी में आता है। इसका द्रव्यमान लगभग शून्य माना जाता ...

                                               

केआईसी 8462852

केआईसी 8462852, जिसे टैबी का तारा और बोयेजियन का तारा भी कहते हैं, F-श्रेणी का एक मुख्य अनुक्रम तारा है जो पृथ्वी से लगभग 1.470 प्रकाशवर्ष दूर स्थित है। यह पृथ्वी की सतह से देखे जाने पर आकाश में हंस तारामंडल के क्षेत्र में स्थित है। इसके कांतिमान ...

                                               

भौतिक राशि

भौतिक राशि वस्तुतः कोई भौतिक गुण है जिसे मापा जा सकता है अर्थात कोई आंकिक मान दिया जा सकता है। अन्तरराष्ट्रीय मापन शब्दावली की परिभाषा के अनुसार- भौतिक राशि किसी वस्तु, पदार्थ या परिघटना का गुण है तथा इस गुण को संख्यात्मक मान एवं कोई मानक सन्दर्भ ...

                                               

अभिवाह

अभिवाह या फ्लक्स की अवधारणा का भौतिकी व व्यावहारिक गणित में कई तरह से उपयोग होता है। मोटे तौर पर, किसी स्थान, सतह या अन्य पदार्थ को पार करने वाली किसी पदार्थ, क्षेत्र आदि की मात्रा को अभिवाह कहते हैं। विद्युतचुम्बकत्व में विद्युत अभिवाह और चुम्बक ...

                                               

आपेक्षिक घनत्व

किसी वस्तु का आपेक्षिक घनत्व या विशिष्ट घनत्व उसके घनत्व को किसी सन्दर्भ पदार्थ के घनत्व से भाग देने से प्राप्त होता है। प्रायः दूसरे पदार्थों का घनत्व जल के घनत्त्व के सापेक्ष व्यक्त किया जाता है। उदाहरण के लिये बर्फ का आपेक्षिक घनत्व 0.91 है जि ...

                                               

आयतन प्रत्यास्थता मापांक

किसी पदार्थ का आयतन प्रत्यास्थता मापांक अथवा बल्क मोड्यूलस एकसमान संपीड़न के मापन को व्यक्त करता है। इसे अत्यल्प दाब बढ़ाने के परिणामस्वरूप आयतन में होने वाली सापेक्षिक कमी के अनुपात से परिभाषित किया जाता है। इसकी अन्तर्राष्ट्रीय इकाई प्रणाली इका ...

                                               

ऊष्मा धारिता

किसी पदार्थ के द्रव्यमान का ताप एक डिग्री सेल्सियस बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को उस पदार्थ की ऊष्मा धारिता कहते हैं। इस भौतिक राशि का एस आई मात्रक जूल प्रति केल्विन है। ऊष्मा धारिता की विमा है। सूत्र के रूप में, C = Q Δ T {\displaystyle ...

                                               

कार्य (भौतिकी)

भौतिकी में कार्य होना तब माना जाता है जब किसी वस्तु पर कोई बल लगाने से वह वस्तु बल की दिशा में कुछ विस्थापित हो। दूसरे शब्दों में, कोई बल लगाने से बल की दिशा में वस्तु का विस्थापन हो तो कहते हैं कि बल ने कार्य किया। कार्य, भौतिकी की सबसे महत्वपूर ...

                                               

कोणीय आवृत्ति

भौतिकी में, घूमती हुई कोई वस्तु, इकाई समय में जितना कोण घूम जाती है उसे कोणीय आवृत्ति या कोणीय चाल कहते हैं। कोणीय चाल, वास्तव में कोणीय वेग नामक सदिश राशि के परिमाण magnitude को कहते हैं। कोई वस्तु एक चक्कर Turn घूमने में 2π रेडियन कोण घूमती है, ...

                                               

कोणीय वेग

D.v. समय के साथ ध्रुवांतर द्वारा घुमे गए कोण की दर को कोणीय वेग कहते हैं। इसका संकेत ω {\displaystyle \omega } है। यदि समय t {\displaystyle \mathbf {t} } में ध्रुवोत्तर कोण θ {\displaystyle \mathbf {\theta } } से घूम गया हो, तो- ω {\displaystyle ...

                                               

क्रिस्टलता

क्रिस्टलता किसी ठोस पदार्थ में ढांचे की सुव्यवस्था के माप को कहते हैं। क्रिस्टलों में परमाणु या अणु एक नियत व आवर्ती क्रम में सज्जित होते हैं। क्रिस्टलता काष्ठा का पदार्थ की कठोरता, घनत्व, पारदर्शिता और विसरण के गुणों पर भारी प्रभाव पड़ता है।

                                               

चुम्बकीय अभिवाह

चुम्बकीय अभिवाह या चुम्बकीय फ्लक्स वह भौतिक राशि है जो किसी तल से होकर गुजरने वाले चुम्बकीय क्षेत्र का सम्पूर्ण परिमाण की माप है। इसे संक्षेप में Φm से निरूपित किया जाता है। इसका SI मात्रक वेबर है ; व्युत्पन्न मात्रक वोल्ट-सेकेण्ड है तथा CGS मात् ...

                                               

तापीय प्रसार

ताप के परिवर्तन के फलस्वरूप पदार्थों के लम्बाई, क्षेत्रफल एवं आयतन में होने वाले परिवर्तन को में होने वाले परिवर्तन को ताप विस्तार कहते हैं। सभी पदार्थों में यह प्रवृत्ति पायी जाती है।

                                               

तेजस्विता

खगोलशास्त्र में तेजस्विता किसी तारे, गैलेक्सी या अन्य खगोलीय वस्तु द्वारा किसी समय की ईकाई में प्रसारित होने वाली ऊर्जा की मात्रा होती है। यह चमक से सम्बन्धित है जो वस्तु की वर्णक्रम के किसी भाग में मापी गई तेजस्विता को कहते हैं। अन्तरराष्ट्रीय म ...

                                               

प्रतिक्षेप

भौतिकी में, त्वरण के परिवर्तन की दर को प्रतिक्षेप या झटका या धक्का कहते हैं। यह एक सदिश राशि है। इसकी विमा है और एसआई इकाई m⋅s -3 है। प्रतिक्षेप को गुरुत्व प्रति सेकेण्ड के रूप में भी अभिव्यक्त किया जा सकता है।

                                               

अभिलाक्षणिक प्रतिबाधा

किसी समांगी विद्युत-लाइन की अभिलाक्षणिक प्रतिबाधा या सर्ज प्रतिबाधा इस लाइन के अनन्त लम्बाई में प्रवाहित वोल्तता एवं धारा के अनुपात के बराबर होती है। इसे Z 0 {\displaystyle Z_{0}} से निरूपित किया जाता है। यह स्थिति सीमित लम्बाई की लाइन में भी सम् ...

                                               

प्रतिरोधकता

किसी पदार्थ की वैद्युत प्रतिरोधकता से उस पदार्थ द्वारा विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करने की क्षमता का पता चलता है। कम प्रतिरोधकता वाले पदार्थ आसानी से विद्युत आवेश को चलने देते हैं। इसकी SI ईकाई ओम मीटर है।

                                               

प्रेरकत्व

विद्युतचुम्बकत्व एवं इलेक्ट्रॉनिक्स में, प्रेरकत्व ए.सी.परिपथों का वह गुण है, जिसके कारण वह विद्युत धारा मान में होने वाले परिवर्तनों का विरोध करता है इसका प्रतीक L तथा मात्रक हेनरी होता है प्रतिरोधों की भांति, इंडक्टर्स को भी समूहन की जरूरत पड़ती है

                                               

बलयुग्म

ऐसे बलों के समूह को बलयुग्म कहते हैं जिनका परिणामी बल शून्य हो किन्तु उनका बलाघूर्ण अशून्य हो। इसके प्रभाव में केवल घूर्णी गति ही सम्भव है और स्थान-परिवर्तन नहीं होता। अर्थात किसी पिण्ड पर बलयुग्म लगा हो तो द्रव्यमान केन्द्र का त्वरण नहीं होता। ब ...

                                               

बलाघूर्ण

torque किसी बल द्वारा किसी वस्तु को किसी अक्ष के परितः घुमाने की प्रवृत्ति tendency को बलाघूर्ण Torque, moment या moment of force कहते हैं। पार्श्व चित्र में बल F का बिन्दु O के सापेक्ष बलाघूर्ण M है तो - M 0 → = r → × F → {\displaystyle {\overri ...

                                               

भौतिक गुण

किसी भौतिक प्रणाली के किसी भी मापने योग्य गुण को भौतिक गुण कहते हैं जो उस प्रणाली की बहुतिक अवस्था का सूचक है। इसके विपरीत वे गुण जो यह बताते हैं कि कोई वस्तु किसी रासायनिक अभिक्रिया में कैसा व्यवहार करती है, उसका रासायनिक गुण कहलाती है।

                                               

यंग मापांक

यांत्रिकी के सन्दर्भ में यंग गुणांक या यंग मापांक, किसी समांग प्रत्यास्थ पदार्थ की प्रत्यास्थता का मापक है। यह एकअक्षीय प्रतिबल एवं विकृति के अनुपात के रूप में परिभाषित है। कभी-कभी गलती से इसे प्रत्यास्थता मापांक भी कह दिया जाता है क्योंकि सभी प् ...

                                               

विद्युत अभिवाह

विद्युत क्षेत्र में स्थित किसी तल से अभिलम्बवत गुजरने वाली विद्युत बल रेखाओ की कुल संख्या को विद्युत अभिवाह या विद्युत फ्लक्स कहते हैं। इसे Φ से प्रदशित करते हैं। ϕ = Ψ ε 0 = ∫ A E → ⋅ d A → {\displaystyle \phi ={\frac {\mathit {\Psi }}{\varepsil ...

                                               

सापेक्ष वेग

जब दो वस्तुएं गतिमान हों तो एक वस्तु द्वारा प्रेक्षित दूसरे वस्तु का वेग आपेक्षिक वेग या सापेक्ष वेग कहलाता है। अर्थात् वस्तु A {\displaystyle \mathbf {A} } का B {\displaystyle \mathbf {B} } के सापेक्ष वेग वह वेग है जिस वेग से वस्तु B {\displayst ...

                                               

ऑयलर का प्रमेय

ऑयलर का प्रमेय संख्या सिद्धान्त के अन्तर्गत एक प्रमेय है। इसे फर्मट-ऑयलर प्रमेय भी कहते हैं। इसे सर्वप्रथम सन् १७३६ में ऑयलर ने प्रस्तुत एवं सिद्ध किया था। इस प्रमेय के अनुसार यदि n तथा a दो परस्पर अभाज्य coprime धन पूर्णांक हों तो, a φ n ≡ 1 mod ...

                                               

कौशी समाकल सूत्र

गणित में, कौशी समाकल सूत्र सम्मिश्र विश्‍लेषण में महत्वपूर्ण सूत्र है। इसका नाम ऑगस्टिन लुइस कौशी के नाम पर किया गया है। इसके अनुसार किसी चकती पर परिभषित होलोमार्फिक फलन को चकती की सीमा पर इसके मान से पूर्णतया ज्ञात किया जा सकता है और यह सभी होलो ...

                                               

द्विपद प्रमेय

गणित में द्विपद प्रमेय एक महत्वपूर्ण बीजगणितीय सूत्र है जो x + y प्रकार के द्विपद के किसी धन पूर्णांक घातांक का मान x एवं y के n वें घात के बहुपद के रूप में प्रदान करता है। अपने सामान्यीकृत रूप में द्विपद प्रमेय की गणना गणित के १०० महानतम प्रमेयो ...

                                               

फर्मा का अंतिम प्रमेय

संख्या सिद्धान्त में फर्मा का अंतिम प्रमेय के अनुसार, शून्य के अतिरिक्त a, b तथा c कोई ऐसी धनात्मक पूर्ण संख्याएँ नहीं होतीं जो समीकरण a n + b n = c n -- १ को संतुष्ट करें, जहाँ n, 2 से बड़ी कोई धनात्मक पूर्णांक हो। उदाहरण के लिए फर्मा के इस प्रम ...