ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 226




                                               

सूर्य

सूर्य अथवा सूरज सौरमंडल के केन्द्र में स्थित एक तारा जिसके चारों तरफ पृथ्वी और सौरमंडल के अन्य अवयव घूमते हैं। सूर्य हमारे सौर मंडल का सबसे बड़ा पिंड है और उसका व्यास लगभग १३ लाख ९० हज़ार किलोमीटर है जो पृथ्वी से लगभग १०९ गुना अधिक है। ऊर्जा का य ...

                                               

अपसौरिका

अपसौरिका के दीर्घवृत्ताकार पथ पर वह बिंदु है जहाँ इसकी आकर्षण के केंद्र से दूरी अधिकतम होती है। आकर्षण का यह केंद्र सामान्यतः निकाय का द्रव्यमान केंद्र होता है।

                                               

सौर पवन

सौर वायु सूर्य से बाहर वेग से आने वाले आवेशित कणों या प्लाज़्मा की बौछार को नाम दिया गया है। ये कण अंतरिक्ष में चारों दिशाओं में फैलते जाते हैं। इन कणों में मुख्यतः प्रोटोन्स और इलेक्ट्रॉन से बने होते हैं जिनकी ऊर्जा लगभग एक किलो इलेक्ट्रॉन वोल्ट ...

                                               

वर्णमण्डल

सूर्य के वायुमंडल का निम्नस्तर, जो प्रकाशमंडल के ठीक ऊपर स्थित है उत्क्रमण मंडल कहलाता है। इस उत्क्रमण मंडल से ऊपर लगभग 11.200 किलोमीटर तक फैले हुए गोलीय मंडल को वर्णमंडल कहते हैं। पूर्ण सूर्यग्रहण के समय इस मंडल का वर्ण सिंदूरी होता है। यह वर्ण ...

                                               

सूर्य दूरबीन

एक सौर दूरबीन सूय का एक वशेष नरण करने के लए इतेमाल कया जाने वाला दूरबीन है। सौर दूरबीन आमतौपर य पेम काश के या उसके आसपास के तरंग दैय का पता लगाने म इतेमाल कया जाता है। सूरज दूरबीन के अचलत नाम हेलओाफ़ और फोतोहलओ ाफ शामल है।

                                               

सूर्योदय

सुर्योदय दो शब्दों से मिलकर बना है - सूर्य और उदय की सन्धि से बना है। इसका अर्थ है - सूर्य का उदय होना या निकलना। सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी अंग क्षितिज पर दिखाई देता है।

                                               

हेलियोस्फीयर

सूर्य से लाखों मील प्रति घंटे के वेग से चलने वाली सौर वायु सौरमंडल के आसपास एक सुरक्षात्मक बुलबुला निर्माण करती हैं। इसे हेलियोस्फीयर कहा जाता है। यह पृथ्वी के वातावरण के साथ-साथ सौर मंडल की सीमा के भीतर की दशाओं को तय करती हैं। हेलियोस्फीयर में ...

                                               

ऐड्रास्टीया (उपग्रह)

ऐड्रास्टीया बृहस्पति ग्रह का दूसरा सब से अंदरूनी उपग्रह है। इस उपग्रह की खोज १९७९ में वॉयेजर द्वितीय द्वारा ली गयी तस्वीरों का अध्ययन कर के की गई थी। यह उपग्रह बृहस्पति के मुख्य छल्ले के किनारे पर स्थित है और मन जाता है कि इसी उपग्रह से उभरी हुई ...

                                               

किन्नर (हीन ग्रह)

किन्नर या सॅन्टॉर ऐसे हीन ग्रह को कहा जाता है जिसमें क्षुद्रग्रह और धूमकेतु दोनों के लक्षण हों। इनका नाम किन्नर नाम की काल्पनिक जाती पर पड़ा है जो घोड़े और मनुष्य का मिश्रण थे। किन्नरों की कक्षाएँ ऐसी होती हैं के वे एक या एक से अधिक गैस दानव ग्रह ...

                                               

केरबेरस (उपग्रह)

केरबेरस, जिसे पी ४ भी कहते हैं, बौने ग्रह यम का एक उपग्रह है। इसकी खोज हबल अंतरिक्ष दूरबीन द्वारा हुई थी और इसके मिल जाने की घोषणा २० जुलाई २०११ को की गई थी। खोज होने के फ़ौरन बाद इसका अस्थाई नाम ऍस/२०११ पी १ रखा गया था। २०१५ में प्लूटो का अध्ययन ...

                                               

गैलाटिआ (उपग्रह)

गैलाटिआ सौर मण्डल के आठवे ग्रह वरुण का एक उपग्रह है। यह वरुण के सारे उपग्रहों में से उस से चौथा सबसे समीप परिक्रमा करने वाला उपग्रह है। लरिसा का औसत व्यास १७६ किमी है और इसका अकार बेढंगा है । इस उपग्रह का रंग गाढ़ा प्रतीत होता है। वैज्ञानिकों का ...

                                               

डस्पीना (उपग्रह)

डस्पीना सौर मण्डल के आठवे ग्रह वरुण का एक उपग्रह है। यह वरुण के सारे उपग्रहों में से उस से तीसरा सबसे समीप परिक्रमा करने वाला उपग्रह है। डस्पीना का औसत व्यास १५० किमी है और इसका अकार बेढंगा है । इस उपग्रह का रंग गाढ़ा प्रतीत होता है। वैज्ञानिकों ...

                                               

थलैसा (उपग्रह)

थलैसा सौर मण्डल के आठवे ग्रह वरुण का एक उपग्रह है। यह वरुण के सारे उपग्रहों में से उस से दूसरा सबसे समीप परिक्रमा करने वाला उपग्रह है। थलैसा का औसत व्यास ८२ किमी है और इसका अकार बेढंगा है । इस उपग्रह का रंग गाढ़ा प्रतीत होता है। वैज्ञानिकों का अन ...

                                               

निक्स (उपग्रह)

निक्स बौने ग्रह यम का एक उपग्रह है। इसकी खोज २००५ में हबल अंतरिक्ष दूरबीन द्वारा हुई थी। निक्स का अकार थोड़ा बेढंगा है । इसके अकार का सही अनुमान नहीं लगाया जा सका है, लेकिन इसका व्यास ४६ किमी से १३७ किमी के बीच में है। २०१५ में प्लूटो का अध्ययन क ...

                                               

नीसो (उपग्रह)

नीसो सौर मण्डल के आठवे ग्रह वरुण का एक उपग्रह है। यह वरुण के उपग्रहों में एक बाहरी कक्षा में परिक्रमा करने वाला उपग्रह माना जाता है। नीसो का औसत व्यास लगभग ६० किमी है और इसका अकार बेढंगा है । नीसो वरुण से क़रीब ४.९३ करोड़ किमी की दूरी पर उसकी परि ...

                                               

नैअड (उपग्रह)

नैअड सौर मण्डल के आठवे ग्रह वरुण का एक उपग्रह है। यह वरुण के सारे उपग्रहों में से उस से सबसे समीप परिक्रमा करने वाला उपग्रह है। नैअड का औसत व्यास ६६ किमी है और इसका अकार बेढंगा है । इस उपग्रह का रंग गाढ़ा प्रतीत होता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है ...

                                               

पक (उपग्रह)

पक अरुण ग्रह का एक उपग्रह है। १९८५ तक पक वैज्ञानिकों के लिए अज्ञात था और इसके अस्तित्व का तब पता चला जब अरुण के पास से गुज़रते हुए वॉयेजर द्वितीय यान की खींची गयी तस्वीरों में यह नज़र आया। पक का अकार लगभग गोले जैसा है लेकिन पूरा गोला नहीं है। इसप ...

                                               

प्रोटिअस (उपग्रह)

प्रोटिअस सौर मण्डल के आठवे ग्रह वरुण का एक उपग्रह है। यह वरुण के सारे उपग्रहों में से दूसरा सबसे बड़ा है। प्रोटिअस का औसत व्यास ४०० किमी है और इसका अकार थोड़ा बेढंगा है । इसकी ज़मीन उबड़-खाबड़ है और इसपर कुछ ऊँचाइयाँ २० किमी तक की देखी गयी हैं। उ ...

                                               

फोबोस

फ़ोबस मंगल ग्रह के दो प्राकृतिक उपग्रहों में से सबसे बड़ा व नज़दीकी उपग्रह है। यह दूसरे उपग्रह डीमोस से से ७.२४ गुना बड़ा है। इसका नाम यूनानी देवता फ़ोबस के नाम पर रखा गया है जो एरिस का बेटा था। दोनों चंद्रमाओं की खोज १८७७ में हुई थी। एक छोटा, बे ...

                                               

बिखरा चक्र

बिखरा चक्र या स्कैटर्ड डिस्क हमारे सौर मण्डल का एक बाहरी क्षेत्र है। यह वरुण-पार वस्तुओं के बड़े क्षेत्र का एक उपक्षेत्र है। इसमें बहुत से बर्फ़ीले हीन ग्रह हैं लेकिन यह अधिकतर एक-दुसरे से काफ़ी दूर हैं जिस से यह क्षेत्र बहुत ख़ाली सा है। माना जा ...

                                               

बृहस्पति के प्राकृतिक उपग्रह

हमारे सौर मण्डल के पाँचवे ग्रह बृहस्पति के ७९ ज्ञात उपग्रह हैं जिनकी परिक्रमा की कक्षाएँ परखी जा चुकी हैं और स्थाई पायी गयी हैं। यह संख्या सौर मण्डल के किसी भी अन्य ग्रह से अधिक है। इन उपग्रहों में से चार चन्द्रमा काफी बड़े आकार के हैं - गैनिमीड, ...

                                               

बौना ग्रह

वामन ग्रह या बौना ग्रह किसी आकाशीय पिण्ड का चक्कर लगाने वाले उन पिण्डों को कहते हैं जो ग्रह तथा उपग्रह से इतर हैं। वामन ग्रह की संज्ञा २००६ में स्वीकार की गयी और सूर्य का चक्कर लगाने वाले पिण्डों को तीन श्रेणियों में विभक्त किया गया। इस तरह वामन ...

                                               

भीमकाय टक्कर परिकल्पना

भीमकाय टक्कर परिकल्पना, चन्द्रमा की उत्पत्ति से सम्बन्धित परिकल्पना है। इस परिकल्पना के अनुसार, लगभग 4.5 बिलियन वर्ष पहले पृथ्वी के साथ एक विशालकाय पिण्ड की टक्कर हुई थी जो मंगल के आकार का था। चन्द्रमा की उत्पत्ति पृथ्वी के उन मलवों से हुई जो इस ...

                                               

मंगल के उपग्रह

मंगल ग्रह के २ प्राक्रुतिक उपग्रह है फ़ोबस और डाइमस। इन उपग्रहो को मंगल के द्वारा पकडे हुए क्षुद्रग्रह माना जाता है। इन उपग्रहो कि खोज सन 1877 मे असफ़ हॉल ने कि थी। उसने इनका नाम युनानी पौराणिक कथाओ के पात्र फ़ोबस और डाइमस जो कि युध के देवता अरेस ...

                                               

मीटस (उपग्रह)

मीटस बृहस्पति ग्रह का सब से अंदरूनी उपग्रह है। इस ग्रह के अस्तित्व के बारे में सब से पहले १९७९ में पता चला जब अंतरिक्ष यान वॉयेजर प्रथम बृहस्पति के पास से गुज़रा और मीटस को उसके द्वारा खींची गयी तस्वीरों में देखा गया। उसके बाद १९९६ से लेकर सितम्ब ...

                                               

यम के प्राकृतिक उपग्रह

यम के पाँच प्राकृतिक उपग्रह वैज्ञानिकों को ज्ञात हैं: १९७८ में खोज किया गया शैरन, २००५ में खोज किये गए दो नन्हे चन्द्रमा, निक्स और हाएड्रा, स्टिक्स और २० जुलाई २०११ को घोषित किया गया ऍस/२०११ पी १ । अन्य ग्रहों और बौने ग्रहों की तुलना में प्लूटो क ...

                                               

लरिसा (उपग्रह)

लरिसा सौर मण्डल के आठवे ग्रह वरुण का एक उपग्रह है। यह वरुण के सारे उपग्रहों में से चौथा सबसे बड़ा है। लरिसा का औसत व्यास २०० किमी से ज़रा कम है और इसका अकार बेढंगा है । इस उपग्रह का रंग गाढ़ा प्रतीत होता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है के वरुण का यह ...

                                               

लेओमडीआ (उपग्रह)

लेओमडीआ सौर मण्डल के आठवे ग्रह वरुण का एक उपग्रह है। यह वरुण के उपग्रहों में एक बाहरी कक्षा में परिक्रमा करने वाला उपग्रह माना जाता है। लेओमडीआ का औसत व्यास लगभग ४२ किमी है और इसका अकार बेढंगा है । लेओमडीआ वरुण से क़रीब २.३६ करोड़ किमी की दूरी पर ...

                                               

वरुण के प्राकृतिक उपग्रह

हमारे सौर मण्डल के आठवे ग्रह वरुण के १३ ज्ञात प्राकृतिक उपग्रह हैं। इनमें से ट्राइटन बाक़ी सबसे बहुत बड़ा है। अगर वरुण के सारे चंद्रमाओं का कुल द्रव्यमान देखा जाए तो उसका ९९.५% इस एक उपग्रह में निहित है। ट्राइटन वरुण का इकलौता उपग्रह है जो अपने ग ...

                                               

वरुण-पार वस्तुएँ

वरुण-पार वस्तुएँ सौर मण्डल की ऐसी खगोलीय वस्तुएँ हैं जो वरुण की कक्षा से बाहर सूरज की परिक्रमा करती हैं। यह वस्तुएँ तीन क्षेत्रों में पायी जाती हैं - काइपर घेरा, बिखरा चक्और और्ट बादल। सब से पहली खोजी गयी वरुण-पार वस्तु यम था जो १९३० में पाया गया ...

                                               

शनि के छल्ले

शनि के छल्ले हमारे सौर मण्डल के सबसे शानदार उपग्रही छल्लों का गुट हैं। यह छोटे-छोटे कणों से लेकर कई मीटर बड़े अनगिनत टुकड़ों से बने हुए हैं जो सारे इन छल्लों का हिस्सा बने शनि की परिक्रमा कर रहें हैं। यह सारे टुकड़े अधिकतर पानी की बर्फ़ के बने हु ...

                                               

शनि के प्राकृतिक उपग्रह

हमारे सौर मण्डल के छठे ग्रह शनि के बहुत से भिन्न-भिन्न प्रकार के उपग्रह हैं, जिनमें १ कि॰मी॰ से भी कम आकार के नन्हे चाँद और भयंकर आकार वाला टाइटन शामिल हैं। शनि के छल्लों में लाखों वस्तुएँ शनि की परिक्रमा कर रहीं हैं - लेकिन इनमें से बहुत तो छोटे ...

                                               

सेओ (उपग्रह)

सेओ सौर मण्डल के आठवे ग्रह वरुण का एक उपग्रह है। यह वरुण के उपग्रहों में एक बाहरी कक्षा में परिक्रमा करने वाला उपग्रह माना जाता है। सेओ का औसत व्यास लगभग ४४ किमी है और इसका अकार बेढंगा है । सेओ वरुण से क़रीब २.२४ करोड़ किमी की दूरी पर उसकी परिक्र ...

                                               

सैमअथी (उपग्रह)

सैमअथी सौर मण्डल के आठवे ग्रह वरुण का एक उपग्रह है। यह वरुण के उपग्रहों में एक बाहरी कक्षा में परिक्रमा करने वाला उपग्रह माना जाता है। सैमअथी का औसत व्यास लगभग ४० किमी है और इसका अकार बेढंगा है । सैमअथी वरुण से क़रीब ४.६७ करोड़ किमी की दूरी पर उस ...

                                               

सौर विकिरण

सौर विकिरण विद्युत चुम्बकीय विकिरण होता है जो सूर्य से ऊष्मा या प्रकाश के रूप में प्राप्त होता है। यह एक प्रकार की ऊर्जा होती है। या सौर विकरण को इस प्रकार परिभाषित कर सकते हैं सूर्य से जो ऊर्जा पृथ्वी पर आ रहा है उसे सौर विकिरण कहा जाता है। यह व ...

                                               

स्टिक्स (उपग्रह)

स्टिक्स बौने ग्रह यम का एक छोटा उपग्रह है। इसकी खोजे जाने की घोषणा ११ जुलाई २०१२ को की गई थी। इसकी खोज में हबल अंतरिक्ष दूरबीन का प्रयोग हुआ था।

                                               

हाएड्रा (उपग्रह)

हाएड्रा बौने ग्रह यम का एक उपग्रह है। प्लूटो के तीनों ज्ञात उपग्रहों में यह सब से बाहरी कक्षा में परिक्रमा करने वाला उपग्रह हैं। इसकी खोज २००५ में हबल अंतरिक्ष दूरबीन द्वारा हुई थी। हाएड्रा का अकार थोड़ा बेढंगा है । इसके अकार का सही अनुमान नहीं ल ...

                                               

हीन ग्रह

हीन ग्रह ऐसी खगोलीय वस्तुओं को कहा जाता है जो सौर मण्डल में सूरज की परिक्रमा तो करती हैं लेकिन ना तो वह इतनी बड़ी हैं के उन्हें ग्रह या बौना ग्रह कहा जाए और न ही वे धूमकेतु की श्रेणी में आती हैं। "हीन ग्रह केंद्र" नाम का संगठन ऐसे हीन ग्रहों के न ...

                                               

हैलिमीडी (उपग्रह)

हैलिमीडी सौर मण्डल के आठवे ग्रह वरुण का एक उपग्रह है। यह वरुण के उपग्रहों में एक बाहरी कक्षा में परिक्रमा करने वाला उपग्रह माना जाता है। हैलिमीडी का औसत व्यास लगभग ६२ किमी है और इसका अकार बेढंगा है । इस उपग्रह का रंग भूरा प्रतीत होता है। यह उपग्र ...

                                               

१०१९९ करिक्लो

१०१९९ करिक्लो हमारे सौर मंडल का सबसे बड़ा ज्ञात किन्नर है। यह शनि और अरुण की कक्षाओं के बीच में सूर्य की परिक्रमा करता है। करिक्लो की खोज सन् १९९७ में हुई थी। २०१४ में खगोलशास्त्रियों ने करिक्लो के इर्द-गिर्द दो छल्लों की खोज की घोषणा करी। इन छल् ...

                                               

२०००० वरुण

हिन्दी में अक्सर नॅप्टयून ग्रह को भी वरुण कहा जाता है। ध्यान दें कि २०००० वरुण इस से बिलकुल भिन्न खगोलीय वस्तु है। २०००० वरुण हमारे सौर मण्डल के काइपर घेरे में स्थित एक खगोलीय वस्तु है। अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ के नियमों के तहत यदी ग्रह से छोटी ...

                                               

५०००० क्वावार

क्वावार, जिसका अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ द्वारा रखा गया इसका औपचारिक नाम ५०००० क्वावार है, हमारे सौर मण्डल के काइपर घेरे में स्थित यम से लगभग आधे आकार की एक खगोलीय वस्तु है। अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ के नियमों के तहत यदी ग्रह से छोटी कोई वस्तु इत ...

                                               

९०३७७ सेडना

९०२७७ सेडना एक बहुत बड़ी नेप्चून-पार वस्तु है, जो सन् २०१२ में सूर्य से नेप्चून से भी लगभग तीन गुना दूर थी। स्पेक्ट्रोस्कोपी से पता चला है कि सेडना की सतह की संरचना इसी तरह की कुछ अन्य दूसरी नेप्चून-पार वस्तुओं के समान है, जो बड़े पैमाने पर जल, म ...

                                               

हीन ग्रह नामांकन

हीन ग्रह नामांकन अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ के हीन ग्रह केन्द्र की एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा बौने ग्रहों और, धूमकेतुओं के अलावा, सौर मंडल की क्षुद्रग्रहों जैसी सभी अन्य छोटी वस्तुओं को एक औपचारिक नाम दिया जाता है। यह नामांकन एक संख्या और एक नाम ...

                                               

चूहा गैलेक्सियाँ

चूहा गैलेक्सियाँ या ऍनजीसी 4676 पृथ्वी से 29 करोड़ प्रकाशवर्ष दूर स्थित दो सर्पिल गैलेक्सियों का एक जोड़ा है जो एक-दूसरे से टकराने और विलय होने की प्रक्रिया कर रहीं हैं। पृथ्वी की सतह से देखने पर यह आकाश में कोमा बेरेनाइसीस तारामंडल में दिखती हैं ...

                                               

शकट चक्र गैलेक्सी

शकट चक्र गैलेक्सी, जो ईऍसओ 350-40 भी कहलाती है, हमारे सौर मण्डल से लगभग 50 करोड़ प्रकाशवर्ष दूर स्थित एक लेंसनुमा गैलेक्सी है। पृथ्वी की सतह से देखें जाने पर यह आकाश के भास्कर तारामंडल क्षेत्र में दिखती है। इस गैलेक्सी का व्यास लगभग 1.50.000 प्रक ...

                                               

काली आँख गैलेक्सी

काली आँख गैलेक्सी, जिसे दुष्ट आँख गैलेक्सी और मॅसिये 64 भी कहते हैं, एक सर्पिल गैलेक्सी है जो पृथ्वी से लगभग 1.7 करोड़ प्रकाशवर्ष दूर स्थित है। पृथ्वी की सतह से देखने पर यह आकाश में कोमा बेरेनाइसीस तारामंडल में दिखती हैं।

                                               

सेयफ़र्ट गैलेक्सी

खगोलशास्त्र में सेयफ़र्ट गैलेक्सी सक्रीय गैलेक्सियों के दो प्रमुख प्रकारों में से एक है। क्वेसार दूसरा प्रमुख प्रकार होता है। दोनों में सक्रीय गैलेक्सीय नाभिक बहुत तेजस्विता से चमकता है, लेकिन जहाँ क्वेसार में गैलेक्सी का अन्य भाग इस केन्द्रीय ते ...

                                               

जी॰जे॰ ५०४ बी ग्रह

जी॰जे॰ ५०४ बी कन्या तारामंडल के ५९ कन्या तारे की परिक्रमा करता हुआ एक गैस दानव ग्रह है। अगस्त २०१३ में मिले इस ग्रह का द्रव्यमान हमारे सौर मंडल के बृहस्पति ग्रह से लगभग ४ गुना अनुमानित किया गया है। अन्दाज़ा लगाया जाता है कि यदि इस ग्रह को आँखों द ...

                                               

बेटा वर्जिनिस तारा

बेटा वर्जिनिस या β वर्जिनिस कन्या तारामंडल में स्थित एक मुख्य अनुक्रम तारा है। यह हमारे सूरज से ज़रा बड़ा है और उस से लगभग 35 प्रकाशवर्ष की दूरी पर स्थित है। बेटा वर्जिनिस कन्या तारामंडल का पाँचवा सबसे रोशन तारा है।