ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 255




                                               

अल-नास

क़ुरान का अध्याय । الناس بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ जिन्नात में से ख्वाह आदमियों में से

                                               

अल-माइदा

क़ुरान का अध्याय । --HINDI TRANSLATION-- सूरए अल माएदह ख़वान मदीना में नाज़िल हुआ और इसकी एक सौ बीस आयते हैं मैं उस ख़ुदा के नाम से षुरू करता हॅू जो बड़ा मेहरबान रहम वाला है ऐ ईमानदारों अपने इक़रारों को पूरा करो देखो तुम्हारे वास्ते चैपाए जानवर ह ...

                                               

यूनुस सूरा

--HINDI TRANSLATION-- सूरए यूनुस मक्का में नाज़िल हुआ और इसकी एक सौ नौ 109 आयतें है मै उस खुदा के नाम से शुरू करता हूँ जो बड़ा मेहरबान रहम वाला है अलिफ़ लाम रा 1 ये आयतें उस किताब की हैं जो अज़सरतापा सर से पैर तक हिकमत से मलूउ भरी है 2 क्या लोगों ...

                                               

हूद (सूरा)

क़ुरान का अध्याय । सूरए हूद मक्का में नाज़िल हुआ और इसकी एक सौ तेईस 123 आयते हैं मैं उस ख़ुदा के नाम से शुरु करता हूँ जो बड़ा मेहरबान रहम वाला है अलिफ़ लाम रा - ये कुरान वह किताब है जिसकी आयते एक वाकिफ़कार हकीम की तरफ से दलाएल से खूब मुस्तहकिम मज ...

                                               

सेंट मैरीस फोरॉना चर्च एटूर

सेंट मैरीस फोरॉना चर्च एटूर उत्तरी मालाबार के एक प्रसिद्ध मैरिएन तीर्थ-स्थल और सबसे पुराने चर्चोँ में से एक है। यह कण्णूर जिले के पूर्वी शहर इरिट्टी में स्थित है। यह तालाश्शेरी Archdiocese के सेंट मैरी के नाम पर स्थापित हुआ पहला चर्च है। यह इरिट् ...

                                               

नरसिंह

नरसिंह नर + सिंह को पुराणों में भगवान विष्णु का अवतार माना गया है। जो आधे मानव एवं आधे सिंह के रूप में प्रकट होते हैं, जिनका सिर एवं धड तो मानव का था लेकिन चेहरा एवं पंजे सिंह की तरह थे वे भारत में, खासकर दक्षिण भारत में वैष्णव संप्रदाय के लोगों ...

                                               

वराह

प्रह्लाद के पिता दो भाई थे। हिरन्यकस्यप व हिरन्याक्छ। हिरन्याक्छ सूकर क रूप धारन कर के धरती को उथा कर पताल में चला गया। धरती की रच्छा के लिये पर्मत्मा ने वाराह रूप धारन किया था।

                                               

वामन मंदिर, खजुराहो

इसकी लंबाई ६२ और चौड़ाई ४५ है। यह मंदिर अपेक्षाकृत अधिक ऊँचे अधिष्ठान पर निर्मित हैं। इसके तलच्छंद के अंतः भागों की सामान्य योजना और निर्माणशैली देवी जगदंबी मंदिर से मिलती- जुलती है, किंतु इसका भवन दोनों की अपेक्षा अधिक भारी व सुदृढ़ है। गर्भगृह ...

                                               

वैदूर्यरत्न

हीरा,मोती और जवाहरात में यह भी एक रत्न होता है, इसकी बनावट दुरंगा पत्थर की भांति होती है, अंग्रेजी में केट्स आई भी कहते है।शनि के दो शिष्य राहु और केतु माने जाते हैं,राहु शनि का मुख औरकेतु शनि की पूंछ मानी जाती है, जब जातक को साधारण कष्ट देना होत ...

                                               

शनि की साढ़े साती

शनि की साढ़े साती, भारतीय ज्योतिष के अनुसार नवग्रहों में से एक ग्रह, शनि की साढ़े सात वर्ष चलने वाली एक प्रकार की ग्रह दशा होती है। ज्योतिष एवं खगोलशास्त्र के नियमानुसार सभी ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में भ्रमण करते रहते हैं। इस प्रकार जब शनि ग्र ...

                                               

शनिवार व्रत कथा

एक समय सभी नवग्रहओं: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुद्ध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु में विवाद छिड़ गया, कि इनमें सबसे बड़ा कौन है? सभी आपस मेंं लड़ने लगे, और कोई निर्णय ना होने पर देवराज इंद्र के पास निर्णय कराने पहुंचे. इंद्र इससे घबरा गये, और इस ...

                                               

सूर्य देवता

सूर्य को वेदों में जगत की आत्मा कहा गया है। समस्त चराचर जगत की आत्मा सूर्य ही है। सूर्य से ही इस पृथ्वी पर जीवन है, यह आज एक सर्वमान्य सत्य है। वैदिक काल में आर्य सूर्य को ही सारे जगत का कर्ता धर्ता मानते थे। सूर्य का शब्दार्थ है सर्व प्रेरक.यह स ...

                                               

गुप्तेश्वर मन्दिर

गुप्तेश्वर मन्दिर, ये शहर से करीब ४ कि॰ मी॰ कि दूरी फुहारे सॆ दछिण की ओर स्थित है, जैसा कि नाम से हि पता लगता है कि यहां पर "ईश्वर का गुप्त वास"। इस मन्दिर में भगवान शिव एक गुफा में विराजमान हैं। भगवान शिव यहां पर गुप्त रूप में तपस्या करते थे, कु ...

                                               

चंदनेश्वर, ओड़िशा

चंदनेश्वर भारत के ओड़िशा राज्य के बालेश्वर ज़िले में स्थित एक नगर है। यहाँ शिव जी का एक प्रसिद्ध मंदिर है। राष्ट्रीय राजमार्ग ११६बी का एक अन्त यहाँ स्थित है।

                                               

नट मंदिर

यह वह स्थान है, जहां मंदिर की नर्तकियां, सूर्यदेव को अर्पण करने के लिये नृत्य करतीं थीं। पूरे मंदिर में जहां तहां फूल-बेल और ज्यामितीय नमूनों की खुदाई की गई है। इनके साथ ही मानव, देव, गंधर्व, किन्नर आदि की अकृतियां भी एन्द्रिक मुद्राओं में दर्शित ...

                                               

चर्च ऑफ सेंट थॉमस द मार्टर

चर्च ऑफ सेंट थॉमस द मार्टर ओवरमोंनो, मॉनमाउथ, मॉनमाउथशायर, वेल्स, में एंग्लिकन सम्प्रदाय का गिरजाघर है। गिरजाघर मध्युगीन मोंनो पुल के नजदीक है, जो मोंनो नदी पर बना हुआ है। पुराने लाल बलुआ पत्थरों से बने इस गिरजाघर की इमारत का एक हिस्सा कम से कम व ...

                                               

मॉनमाउथ बैपटिस्ट चर्च

मॉनमाउथ बैपटिस्ट चर्च मोंक स्ट्रीट, मॉनमाउथ, मॉनमाउथशायर, दक्षिण पूर्व वेल्स में स्थित है। चर्च की वर्तमान इमारत का निर्माण 1907 में हुआ था, परन्तु बैपटिस्ट जनसमूह 1818 में ही गठित हों चुका था। गिरजाघर के निवर्तमान पादरी जोनाथन ग्रीव्स हैं।

                                               

मॉनमाउथ मेथोडिस्ट चर्च

मॉनमाउथ मेथोडिस्ट चर्च मॉनमाउथ, दक्षिण-पूर्व वेल्स में स्थित एक ईसाई धर्म के सम्प्रदाय मेथोडिज़्म का गिरजाघर है। यह गिरजाघर इमारतों के बीच सेंट जेम्स स्ट्रीट से काफी पीछे स्थित है। इसका डिजाइन जॉर्ज वॉन मेडोक्स ने तैयार किया था व इसका निर्माण 183 ...

                                               

सेंट मैरी प्रायरी चर्च

सेंट मैरी प्रायरी चर्च व्हाइटक्रॉस स्ट्रीट, मॉनमाउथ, मॉनमाउथशायर, दक्षिण पूर्व वेल्स, में स्थित एक ईसाई धर्म के एंग्लिकन सम्प्रदाय का गिरजाघर है। गिरजाघर 1075 में एक बेनेडिक्टाइन प्रायरी के रूप में निर्मित किया गया था। प्रायरी गिरजाघर एक ब्रेटन म ...

                                               

सेंट मैरी रोमन कैथोलिक चर्च

सेंट मैरी रोमन कैथोलिक चर्च एक ईसाई धर्म के रोमन कैथोलिक सम्प्रदाय का गिरजाघर है जो सेंट मैरी स्ट्रीट, मॉनमाउथ, वेल्स, के केंद्र के नजदीक मौजूद है। यह गिरजाघर यूरोपीय धर्मसुधार के बाद वेल्स में अनुमित पहला रोमन कैथोलिक पूजा का सार्वजनिक स्थल था। ...

                                               

महापरिनिब्बाण सुत्त

महापरिनिब्बाण सुत्त थेरवाद बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक के सुत्तपिटक का प्रथम निकाय दीघनिकाय का १६वाँ सूत्र है। यह महात्मा बुद्ध के देहान्त व परिनिर्वाण से सम्बन्धित है और त्रिपिटक का सबसे लम्बा सूत्र है। अपने विस्तृत विवरण के कारण इसे भगवान बुद्ध की मृत ...

                                               

थिरुनवुकरसर

तिरुनवुकरसर एक शिव भक्त था तमिलनाडु ७०० मे। वे नयनार सन्घ के सन्त थे। सबसे चार महत्वपूर्ण नयनाऔर तमिलनाडु में उनका नाम कुरवार था । उन्होने भगवान शन्कर के लिए बहुत भजन लिखे और इस वक्त को हमारे पास ३०६६ हे।

                                               

माणिक्कवाचकर

माणिक्कवाचकर तमिल कवि थे। यद्यपि उनकी गिनती नायनारों में नहीं की जाती है किन्तु तिरुवसाकम नामक ग्रन्थ की रचना में उनका भी योगदान है। इस पुस्तक में शंकर भगवान के भजन और गीत हैं। माणिक्कवाचकर तिरुमुरै के रचनाकारों में से एक हैं जो तमिल शैव सिद्धान् ...

                                               

सुन्दरमूर्ति

उनका जन्म थिरुनवलूर नाम के गांव मे हुआ। उनके बचपन का नाम "नम्बि अरुरार" था। उनके पिता का नाम "सदैयार" और माँ का नाम "इसैग्नानि" था। वे ब्राह्मण थे। थिरुनवलूर के राजा नारसिन्घ मुनैयार ने नम्बि को गोद लेना चाहा। सदैयार अनासक्ति से परिपूर्ण थे, उन्ह ...

                                               

ककनमठ

ककनमठ भारत के मध्य प्रदेश के मुरैना ज़िले के सिहोनिया शहर में स्थित एक शिव मंदिर है। इसका निर्माण कच्छपघात राजवंश के शासक कीर्तिराज ने करा था। यह अब खंडरावस्था में है और मूल मंदिर परिसर का केवल एक भाग ही बचा हुआ है। इस स्थान की कुछ मूर्तियाँ अब ग ...

                                               

ऐतरेय आरण्यक

ऐतरेय आरण्यक ऐतरेय ब्राह्मण का अंतिम खंड है। "ब्राह्मण" के तीन खंड होते हैं जिनमें प्रथम खंड तो ब्राह्मण ही होता है जो मुख्य अंश के रूप में गृहीत किया जाता है। "आरण्यक" ग्रंथ का दूसरा अंश होता है तथा "उपनिषद्" तीसरा। कभी-कभी उपनिषद् आरण्यक का ही ...

                                               

अष्टमी

हिंदू पंचांग की आठवीं तिथि को अष्टमी कहते हैं। यह तिथि मास में दो बार आती है। पूर्णिमा के बाद और अमावस्या के बाद। पूर्णिमा के बाद आने वाली अष्टमी को कृष्ण पक्ष की अष्टमी और अमावस्या के बाद आने वाली अष्टमी को शुक्ल पक्ष की अष्टमी कहते हैं।

                                               

एकादशी तिथि

हिंदू पंचांग की ग्यारहवी तिथि को एकादशी कहते हैं। यह तिथि मास में दो बार आती है। पूर्णिमा के बाद और अमावस्या के बाद। पूर्णिमा के बाद आने वाली एकादशी को कृष्ण पक्ष की एकादशी और अमावस्या के बाद आने वाली एकादशी को शुक्ल पक्ष की एकादशी कहते हैं। इन द ...

                                               

चतुर्थी

हिंदू पंचांग की चौथी तिथि को चतुर्थी कहते हैं। यह तिथि मास में दो बार आती है। पूर्णिमा के बाद और अमावस्या के बाद। पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को कृष्ण पक्ष की चतुर्थी और अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को शुक्ल पक्ष की चतुर्थी कहते हैं।

                                               

चतुर्दशी

हिंदू पंचांग की चौदहवीं तिथि को चतुर्दशी कहते हैं। यह तिथि मास में दो बार आती है। पूर्णिमा के बाद और अमावस्या के बाद। पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्दशी को कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी और अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्दशी को शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी कहते हैं।

                                               

तृतीया

हिंदू पंचांग की तीसरी तिथि को तृतीया कहते हैं। यह तिथि मास में दो बार आती है। पूर्णिमा के बाद और अमावस्या के बाद। पूर्णिमा के बाद आने वाली तृतीया को कृष्ण पक्ष की तृतीया और अमावस्या के बाद आने वाली तृतीया को शुक्ल पक्ष की तृतीया कहते हैं।

                                               

त्रयोदशी

हिंदू पंचांग की तेरहवीं तिथि को त्रयोदशी कहते हैं। यह तिथि मास में दो बार आती है। पूर्णिमा के बाद और अमावस्या के बाद। पूर्णिमा के बाद आने वाली त्रयोदशी को कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी और अमावस्या के बाद आने वाली त्रयोदशी को शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी कहते हैं।

                                               

दशमी

हिंदू पंचांग की दसवीं तिथि को दशमी कहते हैं। यह तिथि मास में दो बार आती है। पूर्णिमा के बाद और अमावस्या के बाद। पूर्णिमा के बाद आने वाली दशमी को कृष्ण पक्ष की दशमी और अमावस्या के बाद आने वाली दशमी को शुक्ल पक्ष की दशमी कहते हैं। अक्षर "मी" अंतमे ...

                                               

द्वादशी

हिंदू पंचांग की बारहवीं तिथि को द्वादशी कहते हैं। यह तिथि मास में दो बार आती है। पूर्णिमा के बाद और अमावस्या के बाद। पूर्णिमा के बाद आने वाली द्वादशी को कृष्ण पक्ष की द्वादशी और अमावस्या के बाद आने वाली द्वादशी को शुक्ल पक्ष की द्वादशी कहते हैं।

                                               

द्वितीया

द्वितीया हिन्दू काल गणना अनुसार माह की दूसरी तिथि होती है। यह तिथि प्रत्येक पक्ष में आती है, जिस कारण माह में दो द्वितियाएं होती हैं, - एक कृष्ण पक्ष द्वितीया, दूसरी शुक्ल पक्ष द्वितीया।

                                               

नवमी

हिंदू पंचांग की नौवीं तिथि को नवमी कहते हैं। यह तिथि मास में दो बार आती है। पूर्णिमा के बाद और अमावस्या के बाद। पूर्णिमा के बाद आने वाली नवमी को कृष्ण पक्ष की नवमी और अमावस्या के बाद आने वाली नवमी को शुक्ल पक्ष की नवमी कहते हैं।

                                               

पंचमी

हिंदू पंचांग की पांचवीं तिथि को पंचमी कहते हैं। यह तिथि मास में दो बार आती है। पूर्णिमा के बाद और अमावस्या के बाद। पूर्णिमा के बाद आने वाली पंचमी को कृष्ण पक्ष की पंचमी और अमावस्या के बाद आने वाली पंचमी को शुक्ल पक्ष की पंचमी कहते हैं।

                                               

प्रतिपदा

हिंदू पंचांग की पहली तिथि को प्रतिपदा कहते हैं। यह तिथि मास में दो बार आती है। पूर्णिमा के बाद और अमावस्या के बाद। पूर्णिमा के बाद आने वाली प्रतिपदा को कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा और अमावस्या के बाद आने वाली प्रतिपदा को शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा कहते हैं।

                                               

षष्ठी

हिंदू पंचांग की छठी तिथि को षष्टि कहते हैं। यह तिथि मास में दो बार आती है। पूर्णिमा के बाद और अमावस्या के बाद। पूर्णिमा के बाद आने वाली षष्टि को कृष्ण पक्ष की षष्टि और अमावस्या के बाद आने वाली षष्टि को शुक्ल पक्ष की षष्टि कहते हैं।

                                               

सप्तमी

हिंदू पंचांग की सातवीं तिथि को सप्तमी कहते हैं। यह तिथि मास में दो बार आती है। पूर्णिमा के बाद और अमावस्या के बाद। पूर्णिमा के बाद आने वाली सप्तमी को कृष्ण पक्ष की सप्तमी और अमावस्या के बाद आने वाली सप्तमी को शुक्ल पक्ष की सप्तमी कहते हैं।

                                               

वैशाख कृष्ण सप्तमी

हिन्दू पंचांग १००० वर्षों के लिए सन १५८३ से २५८२ तक सॄष्टिकर्ता ब्रह्मा का एक ब्रह्माण्डीय दिवस विष्णु पुराण भाग एक, अध्याय तॄतीय का काल-गणना अनुभाग विश्व के सभी नगरों के लिये मायपंचांग डोट कोम आनलाइन पंचाग महायुग

                                               

वैशाख शुक्ल सप्तमी

महायुग आनलाइन पंचाग विष्णु पुराण भाग एक, अध्याय तॄतीय का काल-गणना अनुभाग हिन्दू पंचांग १००० वर्षों के लिए सन १५८३ से २५८२ तक विश्व के सभी नगरों के लिये मायपंचांग डोट कोम सॄष्टिकर्ता ब्रह्मा का एक ब्रह्माण्डीय दिवस

                                               

श्रावण कृष्ण सप्तमी

विष्णु पुराण भाग एक, अध्याय तॄतीय का काल-गणना अनुभाग आनलाइन पंचाग महायुग हिन्दू पंचांग १००० वर्षों के लिए सन १५८३ से २५८२ तक सॄष्टिकर्ता ब्रह्मा का एक ब्रह्माण्डीय दिवस विश्व के सभी नगरों के लिये मायपंचांग डोट कोम

                                               

श्रावण शुक्ल सप्तमी

आनलाइन पंचाग सॄष्टिकर्ता ब्रह्मा का एक ब्रह्माण्डीय दिवस हिन्दू पंचांग १००० वर्षों के लिए सन १५८३ से २५८२ तक विष्णु पुराण भाग एक, अध्याय तॄतीय का काल-गणना अनुभाग महायुग विश्व के सभी नगरों के लिये मायपंचांग डोट कोम

                                               

प्रकाशग्राही प्रोटीन

प्रकाशग्राही प्रोटीन ऐसे प्रोटीन होते हैं जो स्वयं पर प्रकाश पड़ने पर पारक्रमण द्वारा उसे विद्युत या अन्य संकेत में परिवर्तित कर देते हैं। इनके प्रयोग से कई जीव दृश्य बोध और प्रकाशानुवर्तन जैसी प्रक्रियाएँ करने में सक्षम होते हैं। रात्रि व दिन मे ...

                                               

मेलानिन

मेलानिन एक प्राकृतिक रंगद्रव्य है को पृथ्वी के अधिकतर जीवों में पाया जाता है, हालांकि मकड़ियों जैसे भी गिनती के कुछ जीव हैं जिनमें यह नहीं पाया गया है। जानवरों में मेलानिन टाइरोसीन नामक एक अमीनो अम्ल से बनता है। जीवों में मेलानिन का सबसे अधिक पाय ...

                                               

अंतःस्राविकी

अंत:स्राव विद्या आयुर्विज्ञान की वह शाखा है जिसमें शरीर में अंतःस्राव या हारमोन उत्पन्न करने वाली ग्रंथियों का अध्ययन किया जाता है। उत्पन्न होने वाले हारमोन का अध्ययन भी इसी विद्या का एक अंश है। हारमोन विशिष्ट रासायनिक वस्तुएँ हैं जो शरीर की कई ग ...

                                               

हार्मोन

हार्मोन या ग्रन्थिरस या अंत:स्राव जटिल कार्बनिक पदार्थ हैं जो सजीवों में होने वाली विभिन्न जैव-रसायनिक क्रियाओं, वृद्धि एवं विकास, प्रजनन आदि का नियमन तथा नियंत्रण करता है। ये कोशिकाओं तथा ग्रन्थियों से स्रावित होते हैं। हार्मोन साधारणतः अपने उत् ...

                                               

नेत्रविज्ञान

नेत्रविज्ञान, चिकित्साविज्ञान का वह अंग है जो आँख की रचना, कार्यप्रणाली, उसकी बीमारियों तथा चिकित्सा से संबधित है। नेत्रचिकित्सा, चिकित्सा व्यवसाय का एक प्रधान महत्वपूर्ण अंग समझा जाना चाहिए। नेत्र जीवन के लिए अनिवार्य तो नहीं, किंतु इसके बिना मा ...

                                               

इम्यूनोफ्लोरेसेंस

इम्यूनोफ्लोरेसेंस एक ऐसी तकनीक है जिसका उपयोग प्रकाश सूक्ष्मदर्शी के लिए प्रतिदीप्ति सूक्ष्मदर्शी के साथ किया जाता है और इसका उपयोग प्रमुख रूप से जैविक नमूनों पर किया जाता है। यह तकनीएक कोशिका के भीतर लक्षित विशेष बायोमोलिक्यूल को फ्लोरोसेंट रंजक ...