ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 276




                                               

महाराजा महाविद्यालय

इस विश्वविद्यालय की स्थापना १९४४ में हुई थी। ये राजस्थान विश्वविद्यालय के अधीन ६ विश्वविद्यालयों और उत्तर भारत के पुरातनतम महाविद्यालयों में से एक है। इसकी इमारत की अभिकल्पना ब्रिटिश वास्तुकारों ने की थी।

                                               

राजस्थान महाविद्यालय

विश्वविद्यालय राजस्थान महाविद्यालय भारतीय राज्य राजस्थान के जयपुर नगर में स्थित एक महाविद्यालय है। यह राजस्थान विश्वविद्यालय के छः घटक महाविद्यालयों में से एक है। महाविद्यालय में स्नातक स्तर के कला संकाय के पाठ्यक्रमों का अध्ययन करवाया जाता है। य ...

                                               

राजस्थान विश्वविद्यालय

राजस्थान विश्वविद्यालय, राजस्थान का सबसे पुराना विश्वविद्यालय है। यह मानविकी, समाज विज्ञान, विज्ञान, वाणिज्य, एवं विधि अध्ययन आदि विषयों में उच्च स्तर की शिक्षा और शोध कार्य में संलग्न भारत के अग्रणी शिक्षण संस्थानों में से है।

                                               

विश्वविद्यालय महारानी महाविद्यालय

विश्वविद्यालय महारानी महाविद्यालय भारतीय राज्य राजस्थान में महिलाओं के लिए अग्रणी महाविद्यालय है। यह जयपुर में स्थित है। इसकी स्थापना १९४४ में हुई। वर्तमान में राजस्थान विश्वविद्यालय के छः घटक महाविद्यालयों में से एक है। महारानी महाविद्यालय वर्ष ...

                                               

एस॰ एल॰ बी॰ एस॰ इंजीनियरिंग कॉलेज

एस॰ एल॰ बी॰ एस॰ इंजीनियरिंग कॉलेज जोधपुर में स्थित एक तकनीकी कॉलेज है। यह जोधपुर-जयपुर हाई-वे, डांगियावास के पास जोधपुर रेलवे स्टेशन से लगभग २५ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद द्वारा अनुमोदित है और बीकानेर तकनीकी ...

                                               

वैज्ञानिक साहित्य

वैज्ञानिक साहित्य के अन्तर्गत वे प्रकाशन आते हैं जिनमें प्राकृतिक तथा सामाजिक विज्ञान से सम्बन्धित मौलिक प्रायोगिक या सैद्धान्तिक कार्यों का विवरण हो। अकादमिक प्रकाशन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा अनुसंधानों को साहित्य में जगह मिलती है। किसी वैज्ञ ...

                                               

हाफ-अर्थ

पृथ्वी पर जीवों का किस प्रकार आविर्भाव हुआ और किस प्रकार उनका विकास हुआ, इसके विषय में हमेशा से बड़ा हो वाद विवाद रहा है। नए प्रकार के जीव की उत्पत्ति के विषय में एडवर्ड विलसन ने 2016 ईo में प्राकृतिक वरण का सिद्धांत प्रतिपादित किया और एक पुस्तक ...

                                               

अभियन्ता

अभियंता वह व्यक्ति है जिसे अभियाँत्रिकी की एक या एक से अधिक शाखाओं में प्रशिक्षण प्राप्त हो अथवा जो कि व्यावसायिक रूप से अभियाँत्रिकी सम्बन्धित कार्य कर रहा हो। कभी कभी इन्हे यंत्रवेत्ता भी कहा जाता है | यद्यपि अभियंता एक शुद्ध हिन्दी शब्द है लेक ...

                                               

योशिरो नाकामत्सु

डा योशिरो नाकामत्सु को मानव-इतिहास में जन्मे महान मस्तिष्कसमृद्ध लोगों में शुमार किया जाता है। 3000 से अधिक पेटेंट हासिल करने वाले योशिरो को 36 वर्षों तक निरंतर, किये गये हर भोजन की बाकायदा फोटोग्राफी के साथ हर तथ्य का रिकार्ड रखने के लिए पोषण श् ...

                                               

अखिल भारतीय इंजिनीयरिंग प्रवेश परीक्षा

इस प्रतियोगिता प्रवेश परीक्षा का लोकप्रिय नाम ए आई ट्रिपल ई भी है। इसका आयोजन सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ सेकेण्डरी एजूकेशन् द्वारा किया जाता है जो मेडिकल कालेजों में प्रवेश के लिये ए आई पी एम टी की परीक्षा भी लेती है। इस परीक्षा में वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे ...

                                               

रोबॉटिक्स के नियम

रोबॉटिक्स के नियम वें मापदंड, सिद्धांत व कानून हैं जिनके तहत एक रोबोट का बर्ताव कार्य करने का ढंग निर्धारित किया जाता है। इस तरह के रोबोट अब तक बनाए नहीं गए है परन्तु इन्हे काल्पनिक विज्ञान, फ़िल्मों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में संशोधन क ...

                                               

मूल इकाइयाँ

अन्तर्राष्ट्रीय इकाई प्रणाली ने सात SI सात मूल इकाइयां बतायीं हैं: ये भौतिक इकाइयाँ हैं, जिनको प्रचालित परिभाषाओं द्वारा परिभाषित किया गया है। अन्य सभी भौतिक इकाइयाँ इन मूल इकाइयों द्वारा व्युत्पन्न की जा सकती हैं। इनको व्युत्पन्न इकाइयाँ कहा जाय ...

                                               

आसुत जल

आसुत जल वह जल है जिसकी अनेक अशुद्धियों को आसवन के माध्यम से हटा दिया गया हो। आसवन में पानी को उबालकर उसकी भाप को एक साफ़ कंटेनर में संघनित किया जाता है। यह पीने के लिए उपयुक्त नहीं होता है क्योंकि इसमें जीवन के लिए आवश्यक लवण अनुपस्थित होते है। इ ...

                                               

निर्वात आसवन

निर्वात आसवन, एक आसवन प्रक्रिया है जिसके अन्तर्गत आसुत होने वाले तरल मिश्रण के ऊपर के दाब को इसके वाष्प दाब से कम कर दिया जाता है जिसके कारण सबसे अधिक वाष्पशील द्रवों का वाष्पीकरण होता है। यह आसवन विधि इस सिद्धांत पर कार्य करती है कि क्वथन तब संभ ...

                                               

प्रभाजी आसवन

प्रभाजी आसवन एक औद्योगिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी मिश्रण के अवयवों जिनके boiling point का अन्तर 25k से कम होता है को अलग किया जाता है। यह आसवन की एक विशिष्ट विधि है। उदाहरण के लिये पेट्रोलियम से पेट्रोल, डीजल, केरोसिन एवं अन्य घटकों को इसी ...

                                               

भंजक आसवन

भंजक आसवन वह रासायनिक प्रक्रम है जिसमें उच्च ताप पर गरम करने के कारण काष्ठ आदि पदार्थ अपघतित हो जाते हैं। प्रायः यह शब्द कार्बनिक पदार्थों को हवा की अनुपस्थिति या बहुत कम आक्सीजन की उपस्थिति में सम्साधित करने को कहते हैं। इस प्रक्रिया द्वारा बड़े ...

                                               

भभका

भभका एक उपकरण है जिसका प्रयोग मिश्रय और अमिश्रय तरल मिश्रणों के आसवन हेतु किया जाता है । पहले इन मिश्रणों को चयनात्मक रूप से उबाला जाता है फिर इनकी वाष्प को ठंडा कर संघनित किया जाता है। भभके का प्रयोग के इत्और औषधि निर्माण, औषधीय प्रयोजनों हेतु इ ...

                                               

भाप आसवन

भाप आसवन, एक विशेष प्रकार की आसवन प्रकिया है जिसके द्वारा ताप संवेदी पदार्थों जैसे कि प्राकृतिक एरोमैटिक यौगिकों को पृथक किया जाता है। बहुत से कार्बनिक यौगिक निरंतर उच्च तापमान पर विघटित हो जाते हैं, इनका पृथक्करण सामान्य आसवन द्वारा नहीं हो सकता ...

                                               

हैलोएल्केन

हैलोएल्केउन अकार्बनिक यौगिक समूह का नाम होता है जिसमें मीथेन, ईथेन इत्यादि जैसे एल्केन्स में एक या अधिक हैलोजन अणु, जैसे क्लोरीन या फ्लोरीन आदि जुड़ कर उनसे कार्बनिक हैलाइड बनाते हैं।

                                               

अपामार्ग

अपामार्ग एक औषधीय वनस्पति है। इसका वैज्ञानिक नाम अचिरांथिस अस्पेरा है। हिन्दी में इसे चिरचिटा, लटजीरा, चिरचिरा आदि नामों से जाना जाता है।इसे लहचिचरा भी कहा जाता है।

                                               

अरंडी

अरंडी तेल का पेड़ एक पुष्पीय पौधे की बारहमासी झाड़ी होती है, जो एक छोटे आकार से लगभग १२ मी के आकार तक तेजी से पहुँच सकती है, पर यह कमजोर होती है। इसकी चमकदार पत्तियॉ १५-४५ सेमी तक लंबी, हथेली के आकार की, ५-१२ सेमी गहरी पालि और दांतेदार हाशिए की त ...

                                               

अरण्यतुलसी

अरण्यतुलसी का पौधा ऊँचाई में आठ फुट तक, सीधा और डालियों से भरा होता है। छाल खाकी, पत्ते चार इंच तक लंबे और दोनों ओर चिकने होते हैं। यह बंगाल, नेपाल, आसाम की पहाड़ियों, पूर्वी नेपाल और सिंध में मिलता है। इसके पत्तों को हाथ से मलने पर तेज सुगंध निक ...

                                               

आमड़ा

आमड़ा एक किस्म का फल है जो बहुत खट्टा होता है। इस फल को उत्तर प्रदेश के बहुत से जिलों में अम्बार कहते हैं। आमड़ा इसका अचार डाला जाता है। इसको अमला आँवला, नहीं भी कहा जाता है।

                                               

इंद्रायन

इंद्रायन की बेल मध्य, दक्षिण तथा पश्चिमोत्तर भारत, अरब, पश्चिम एशिया, अफ्रीका के उच्च भागों तथा भूमध्यसागर के देशों में भी पाई जाती है। इसके पत्ते तरबूज के पत्तों के समान, फूल नर और मादा दो प्रकार के तथा फल नांरगी के समान दो इंच से तीन इंच तक व्य ...

                                               

कठमूली

कठमूली या झिंझोरी एक वृक्ष है। यह अल्प प्राप्य औषधीय पादप है। इसका धार्मिक महत्व भी है। हिन्दू लोग विजया दशमी के अगले दिन अपने मित्रों से मिलते हैं और इसकी पत्तियों का आदान-प्रदान करते हैं। इसकी पत्तियों को सोना पत्ती कहते हैं। यह दक्षिणी-पूर्वी ...

                                               

कलिहारी

कलिहारी एक सुंदर बहुवर्षीय वृक्षारोही लता है; यह कोल्चिकेसी परिवार का सदस्य है। इसके सुंदर पुष्पों के कारण अग्निशिखा के नाम से भी जाना जाता है। यह जंगल में सामान्य रूप से मिलता है। जिसके राइजोम आयताकार, अँग्रेजी के V के आकार के सफेद रंग के होते ह ...

                                               

कुकरौंधा

कुकरौंधा एक वनस्पति है। यह भारत में बहुतायत में पायी जाती है। भारत में कपूर इसी से बनाया जाता है। विभिन्न भाषाओं में नाम संस्कृत: कुकुन्दर, कुकुराद्रु हिन्दी: कुकुरौन्हा, कुकरौंधा, कुकुरमुत्ता छत्तीसगढ़ में मलयालम: कुक्करवृक्षम इसमें पीले फूल खिल ...

                                               

कुटज

कुटज एक पादप है। इसके पौधे चार फुट से १० फुट तक ऊँचे तथा छाल आधे इंच तक मोटी होती है। पत्ते चार इंच से आठ इंच तक लंबे, शाखा पर आमने-सामने लगते हैं। फूल गुच्छेदार, श्वेत रंग के तथा फलियाँ एक से दो फुट तक लंबी और चौथाई इंच मोटी, इंच मोटी, दो-दो एक ...

                                               

गुग्गुल

गुग्गुल या गुग्गल एक वृक्ष है। इससे प्राप्त राल जैसे पदार्थ को भी गुग्गल कहा जाता है। भारत में इस जाति के दो प्रकार के वृक्ष पाए जाते हैं। एक को कॉमिफ़ोरा मुकुल तथा दूसरे को कॉ. रॉक्सबर्घाई कहते हैं। अफ्रीका में पाई जानेवाली प्रजाति कॉमिफ़ोरा अफ् ...

                                               

गुच्छी

गुच्छी एक कवक है जिसके फूलों या बीजकोश के गुच्छों की तरकारी बनती है। यह स्वाद में बेजोड़ और कई औषधियों गुणों से भरपूर है। भारत और नेपाल में स्थानीय भाषा में इसे गुच्छी, छतरी, टटमोर या डुंघरू कहा जाता है। गुच्छी चंबा, कुल्लू, शिमला, मनाली सहित हिम ...

                                               

गैनोडर्मा

रिशी या गैनोडर्मा खुम्ब की एक जाति है जो लकड़ी पर उगती है। इसके अन्तर्गत लगभग ८० प्रजातियाँ हैं जिसमें से अधिकांश उष्णकटिबन्धीय क्षेत्रों में पैदा होतीं है। इनका उपयोग परम्परागत एशियायी चिकित्सा में होता है जिसके कारण ये आर्थिक रूप से अति महत्वपू ...

                                               

गोखरू

गोखरू या गोक्षुर भूमि पर फ़ैलने वाला छोटा प्रसरणशील क्षुप है जो कि आषाढ़ और श्रावण मास मे प्राय हर प्रकार की जमीन या खाली जमीन पर उग जाता है। पत्र खंडित और फूल पीले रंग के आते हैं, फल कंटक युक्त होते हैं, बाजार मे गोखरु के नाम से इसके बीज मिलते ह ...

                                               

गोरखमुंडी

गोरखमुंडी कंपोज़िटी कुल की वनस्पति है। इसे मुंडी या गोरखमुंडी और मुंडिका अथवा श्रावणी कहते हैं। गोरखमुंडी एकवर्षा आयु वाली, प्रसर, वनस्पति धान के खेतों तथा अन्य नम स्थानों में वर्षा के बाद निकलती है। यह किंचित् लसदार, रोमश और गंधयुक्त होती है। का ...

                                               

चकवड़

चकवड़ को पवाड़, पवाँर, जकवड़ आदि नामों से पुकारा जाता है। भाषा भेद से नाम भेद संस्कृत- चक्रमर्द। हिन्दी-पवाड़, पवाँर, चकवड़। मराठी- टाकला। गुजराती- कुवाड़ियों। छत्तीसगढ़ी - चिरौठा । बंगला- चाकुन्दा। तेलुगू- तागरिस। तामिल- तगरे। मलयालम- तगर। फरसी- ...

                                               

जटामांसी

जटामांसी हिमालय क्षेत्र में उगने वाला एक सपुष्पी औषधीय पादप है। इसका उपयोग तीक्ष्ण गंध वाला इत्र बनाने में होता है। इसे जटामांसी इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी जड़ों में जटा जैसे तन्तु लगे होते हैं। इसे मारवाङी मेंबालछड़ नाम से भी जाना जाता है।

                                               

जादू मशरूम

साइलोस्यबीन मशरूम को सीइकहीदीलीक मशरूम कहा जाता है, यह मशरूम में मुख्या तात्व है जो सीइकहीदीलीक दवाओं साइलोस्यबीन और सेलोबिन बनाने के काम आता है। आम भाषा में जादू मशरूम शरूओम्स है। लगभग 40 प्रजातियों के जीनस सेलोसेइब में पाए जाते हैं। सीलोसिभा कु ...

                                               

डालेचुक

डालेचुक बहुत उंचाई पर उत्पन्न होने वाला एक पादप है। इसे लेह बेर भी कहते हैं। यह एक औषधीय पादप है। 4000 से 14000 फुट की ऊंचाई पर उगने वाले इस पौधे के फलों के चमत्कारिक गुणों के कारण यह संजीवनी बूटी के समान समान माना जाता है। लेह बेरी ज्यूस में आंव ...

                                               

तगर

तगर एक प्रकार का पेड़ जो अफगानिस्तान, कश्मीर, भूटान और कोंकण में नदियों के किनारे पाया जाता है। भारत के बाहर यह मडागास्कर और जंजीबार में भी होता है। इसकी लकड़ी बहुत सुगंधित होती है और उसमें से बहुत अधिक मात्रा में एक प्रकार का तेल निकलता है। यह ल ...

                                               

तीखुर

तीखुर हल्दी जाति का एक पादप जिसकी जड़ का सार सफेद चूर्ण के रूप में होता है और खीर, हलुआ आदि बनाने के काम आता है। यह भारतीय उपमहाद्वीप का देशज है। अपने औषधीय गुणों के कारण पश्चिमी जगत में में भी इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ी है। एक विदेशज तीखुर भी आ ...

                                               

तेलिया कन्द

तेलिया कन्द हिमालय क्षेत्र में पाया जाने वाला एक पादप है। तेलिया कन्द के लिए राज निघण्टु में लिखा है कि" तैल कन्द: देह सिद्धिं विद्यते” अर्थात तेलिया कन्द के द्वारा व्यक्ति देह सिद्घि को प्राप्त कर सकता है। दु:साध्य नपुंसक को भी पुरुषार्थ प्राप्त ...

                                               

दारुहरिद्रा

दारुहरिद्रा, एक औषधीय पौधा है। यह पादप भारत और नेपाल के पर्वतीय हिमालयी क्षेत्रों का देशज वृक्ष है। यह श्रीलंका में भी पाया जाता है। यह मधुमेह की चिकित्सा में बहुत उपयोगी है।

                                               

नागरमोथा

नागरमोथा एक पौधा है जो पूरे भारत में खरपतवार के रूप में उगता है। इससे इत्र बनता है और औषधि के रूप में इसका उपयोग होता है। संस्कृत में इसे नागरमुस्तक या भद्र मुस्तक कहते हैं। यह नमी वाले तथा जलीय क्षेत्रों में अधिक पाया जाता है। नागरमोथा पूरे भारत ...

                                               

निर्गुन्डी

निर्गुन्डी एक औषधीय गुणों वाली क्षुप है। हिन्दी में इसे संभालू/सम्मालू, शिवारी, निसिन्दा शेफाली, तथा संस्कृत में इसे सिन्दुवार के नाम से जाना जाता है। इसके क्षुप १० फीट तक ऊंचे पाए जाते हैं। संस्कृत में इसे इन्द्राणी, नीलपुष्पा, श्वेत सुरसा, सुबा ...

                                               

नीबू घास

नींबू घास घास परिवार का पादप है जो एशिया, अफ्रीका और आस्ट्रेलिया के उष्णकटिबन्धीय क्षेत्रों में पाया जाता है। नींबू घास की कुछ प्रजातियों का प्रयोग पाक शाला में तथा दवाइयाँ बनाने मे भी किया जाता है। इस घास के पत्तियो का सुगंध नीबू जैसा लगता है।

                                               

नीलक

नीलक अथवा अंग्रेजी में सुप्रसिद्ध लाइलक नामक सर्वप्रिय, मनमोहक, रंगदाऔर सुगांधित फूलों के पतझड़-पौधे का सिरिंगा वल्गेरिस है। ओलिएसिई वंश का यह झाड़ी सदृश पौधा अपने नैसर्गिक वासस्थान, पूर्वी देशों और विशेषतया ईरान से, साढ़े तीन सौ वर्ष पूर्व टर्की ...

                                               

पचौली

पचौली एक पौधा है जिसके पत्तियों से तेल निकाला जाता है जिसका प्रयोग बड़े पैमाने में मादक और गैर मादक पदार्थों जैसे केन्डी, दूध से बनी मिठाई, वेक्ड पदार्थ में संघटक के रूप में किया जाता है। साथ ही इसका उपयोग साबुन, इत्र, बाँडी लोशन, सेविंग लोशन, डि ...

                                               

पत्थरचूर

पत्थरचूर या पाषाणभेद एक औषधीय पादप है। कोलियस फोर्सकोली जिसे पाषाणभेद अथवा पत्थरचूर भी कहा जाता है, उन कुछ औषधीय पौधों में से है, वैज्ञानिक आधारों पर जिनकी औषधीय उपयोगिता हाल ही में स्थापित हुई है। भारतवर्ष के समस्त ऊष्ण कतिबन्धीय एवं उप-ऊष्ण कटि ...

                                               

पथरचटा

पथरचटा या पथरचट्टा यह एक सपुष्पक पादप है जो भारत के सभी राज्यों में पाया जाता है। माडागास्कर को इसका उत्पत्तिस्थल बताया जाता है। इसके पत्तों के किनारों से नया पौधा निकलता है। यह पथरी तथा अन्य रोगों में उपयोगी है।

                                               

पल्सेटिला निग्रिकेस

पल्सेटिला निग्रिकेस, रेननकुलेसेइ परिवार का बारहमासी पौधा है। यह पौधा ३ से ५ इंच लम्बा होता है व इसके ढ़ीले ढ़ीले घंटी की आकार के फूल, बैंगनी रंग के होते हैं या नीले होते हैं। पौधे के ऊपर, हर तरफ लम्बे सिल्क जैसे धागे होते हैं। यह खेतों में व समतल ...

                                               

बकुची

बकुची औषधी के काम में प्रयुक्त होने वाला एक पौधा है। यह पौधा हाथ, सवा हाथ ऊँचा होता है। इसकी पत्तियाँ एक अँगुल चौड़ी होती हैं और डालियाँ पृथ्वी से अधिक ऊँची नहीं होतीं तथा इधर उधर दूर तक फैलती हैं। इसका फूल गुलाबी रंग का होता है। फूलों के झड़ने प ...