ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 277




                                               

अंकगणित

अंकगणित गणित की तीन बड़ी शाखाओं में से एक है। अंकों तथा संख्याओं की गणनाओं से सम्बंधित गणित की शाखा को अंकगणित कहा जाता हैं। यह गणित की मौलिक शाखा है तथा इसी से गणित की प्रारम्भिक शिक्षा का आरम्भ होता है। प्रत्येक मनुष्य अपने दैनिक जीवन में प्राय ...

                                               

अंतर्वेशन

अंतर्वेशन का अर्थ है किसी गणितीय सारणी में दिए हुए मानों के बीच वाले मानों को ज्ञात करना। अंग्रेजी शब्द इंटरपोलेशन का शाब्दिक अर्थ है - बीच में शब्द बढ़ाना या किसी के वर्ग या समूह के बीच में उसी तरह की और कोई चीज बाहर से लाकर जमाना, बैठाना या लगाना।।

                                               

अंश

अंश भिन्न के समान भागों की संख्या को निरूपित करता है। आम तौपर भिन्न का उपरी भाग अंश होता है। उदाहरण स्वरूप - 3 5 {\displaystyle {\tfrac {3}{5}}} भिन्न में 3 {\displaystyle 3} अंश है।

                                               

अभिलक्षणिक मान तथा अभिलक्षणिक सदिश

किसी अशून्य वर्ग मैट्रिक्स A {\displaystyle A} का अभिलाक्षणिक सदिश v {\displaystyle v} वह अशून्य सदिश है जो निम्नलिखित विशेषता रखता है- A v = λ v {\displaystyle Av=\lambda v} जहाँ λ {\displaystyle \lambda } एक संख्या है। इसे A {\displaystyle A} क ...

                                               

अवकलज

किसी चर राशि के किसी अन्य चर राशि के सम्बन्ध में तात्कालिक बदलाव की दर की गणना को अवकलन कहते हैं तथा इस क्रिया द्वारा प्राप्त दर को अवकलज कहते हैं। यह किसी फलन को किसी चर राशि के साथ बढ़ने की दर को मापता है। जैसे यदि कोई फलन y किसी चर राशि x पर न ...

                                               

अवकलजों की सूची

किसी व्यंजक या फलन का अवकलज निकालना अवकलन की प्राथमिक क्रिया है। नीचे बहुत से फलनों के अवकलज या अवकल गुणांक दिए गये हैं। इनमे f एवं g, x के सापेक्ष अवकलनीय फलन हैं; c कोई वास्तविक संख्या है।

                                               

अवशेष प्रमेय

अवशेष प्रमेय सम्मिश्र विश्‍लेषण में गणित का एक क्षेत्र है जिसे कौशी अवशेष प्रमेय भी कहा जाता है जो कि बन्द वक्र में विश्लेषणात्मक फलनों का रेखा समाकल ज्ञात करने के लिए बहुत उपयोगी है; यह वास्तविक समाकल ज्ञात करने के लिए भी बहुत सहायक है। यह कौशी ...

                                               

असमीकरण

गणित मे असमीकरण दो वस्तुओं के सापेक्ष परिमाण अथवा आकार के बारे मे एक कथन होता है कथन a < b {\displaystyle a > b {\displaystyle a> b\!\ } का अर्थ है कि a,b से बडा है एक अन्य उपयोग मे इन सन्केतो क प्रयोग कर एक राशि को दूसरी की अपेक्षा बहुत ...

                                               

आपतन कोण

जब कोई किरण एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाती है। तो अपने मार्ग से कुछ विचलित हो जाती है। पहले माध्यम में आपतित किरण व अभिलम्ब के बीच बने कोण को आपतन कोण कहते हैं। यह एक सघन माध्यम मे बना है

                                               

आविश्लेषिक फलन

गणित में, फलनों की आविश्लेषिक कक्षा निम्नलिखित प्रभाव के अंतरगत वास्तविक विश्लेषणात्मक फलनों का व्यापकीकरण है। यदि f अन्तराल में समान रूप से शून्य होगा। आविश्लेषिक कक्षा उन फलनों की व्यापक कक्षा है जिनमें उपरोक्त कथन सय है।

                                               

इष्टतमकरण

गणित में अभीष्टीकरण या इष्टतमकरण उन गणितीय समस्याओं के अध्ययन को कहते हैं जिनमें किसी वास्तविक फलन का मान अधिकतम या न्यूनतम करने की चेष्टा की जाती है। इसके लिये उचित विधियों का सहारा लेते हुए, उस फलन में निहित वास्तविक चरों या पूर्णांक चरों का मा ...

                                               

कलन

कलन गणित का प्रमुख क्षेत्र है जिसमें राशियों के परिवर्तन का गणितीय अध्ययन किया जाता है। इसकी दो मुख्य शाखाएँ हैं- अवकल गणित तथा समाकलन गणित । कैलकुलस के ये दोनों शाखाएँ कलन के मूलभूत प्रमेय द्वारा परस्पर सम्बन्धित हैं। वर्तमान समय में विज्ञान, इं ...

                                               

सदिश कलन

सदिश कलन या सदिश कैल्कुलस या सदिश विश्लेषण गणित की वह विधा है जो सदिश राशियों के वास्तविक विश्लेषण से सम्बन्ध रखती है। इसके अन्तर्गत बहुत सी समस्याएं हल करने की विधियाँ एवं सूत्र आते हैं जो कि प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान में बहुत उपयोगी हैं। अमेरिकी ...

                                               

कौशी आव्यूह

गणित में कौशी के नाम से नामकरण किया गया कौशी आव्यूह अथवा कौशी मैट्रिक्स एक m×n का आव्यूह है जहाँ a ij निम्न प्रकार परिभाषित है a i j = 1 x i − y j ; x i − y j ≠ 0, 1 ≤ i ≤ m, 1 ≤ j ≤ n {\displaystyle a_{ij}={\frac {1}{x_{i}-y_{j}}};\quad x_{i}-y_ ...

                                               

कौशी समाकल प्रमेय

गणित में, ऑगस्टिन लुइस कौशी के नाम से नामकरण किया गया सम्मिश्र विश्लेषण कौशी समाकल प्रमेय, "समिश्र संख्या|सम्मिश्र समतल में होलोमार्फिक फलन के लिए रेखा समाकल के बारे में एक महत्वपूर्ण कथन है। वस्तुतः, इस कथन के अनुसार यदि दो अलग-अलग पथ दो बिन्दुओ ...

                                               

क्रमचय-संचय

क्रमचय-संचय गणित की शाखा है जिसमें गिनने योग्य विवर्त संरचनाओं का अध्ययन किया जाता है। शुद्ध गणित, बीजगणित, प्रायिकता सिद्धांत, टोपोलोजी तथा ज्यामिति आदि गणित के विभिन्न क्षेत्रों में क्रमचय-संचय से संबन्धित समस्याये पैदा होतीं हैं। इसके अलावा क् ...

                                               

क्षेत्रमिति

क्षेत्रमिति गणित की एक शाखा है जो मापन से सम्बन्धित है। मापन में भी विशेष रूप से यह ज्यामितीय आकृतियों के क्षेत्रफल एवं आयतन के सूत्रों की निष्पत्ति एवं उनके प्रयोग से सम्बन्ध रखती है।

                                               

गणितीय प्रतिरूप

गणितीय संकल्पनाओं से मानव का सर्वप्रथम परिचय कदाचित्‌ बालकोपयोगी ढेलों के डिब्बे के रूप में हुआ यदि ऐबाकस से शिशु मस्तिष्क में गणितीय मनोभावों को कुछ अंश तक उत्तेजना मिलती है तो घनाकार गिट्टकों से, जिनसे शिशुपालन गृह वाले प्रहेलिका चित्र बनते हैं ...

                                               

गणितीय वित्त

गणितीय वित्त अनुप्रयुक्त गणित की एक शाखा है जो वित्त-बाजार से संबंधित है। बहुत से विश्वविद्यालयों में गणितीय वित्त की शिक्षा दी जाती है।

                                               

गणितीय सर्वसमिका

निम्नलिखित सर्वसमिका एक सुज्ञात त्रिकोणमितीय सर्वसमिका है। sin 2 ⁡ θ + cos 2 ⁡ θ = 1 {\displaystyle \sin ^{2}\theta +\cos ^{2}\theta =1\,} यह सर्वसमिका θ {\displaystyle \theta } के सभी वास्तविक मानों के लिये सत्य है। जबकि cos ⁡ θ = 1, {\displayst ...

                                               

गणितीय सौन्दर्य

कुछ गणितज्ञ अपने काम से, और सामान्य रूप से गणित से सौन्दर्य-सुख प्राप्त करते हैं, इसे ही गणितीय सौन्दर्य कहते हैं। गणितज्ञ इस प्रसन्नता को यह कहकर अभिव्यक्त करते हैं कि गणित सुन्दर है। गणितज्ञ, गणित को कला का ही रूप समझते हैं, या कम से कम, एक रचन ...

                                               

घटाना

जोड़ने की प्रक्रिया के विरुद्ध प्रक्रिया को घटाना कहा जाता है। जब किसी संख्या अथवा अंक से किसी दूसरी संख्या या अंक को कम किया जाता है तो उसे घटाना कहा जाता है। घटाने को - चिह्न से प्रदर्शित किया जाता है, जिसे ऋण चिह्न कहते हैं। उदाहरणः 36 - 5 = 3 ...

                                               

घनाभ

घनाभ या आयतफलकी वह समान्तरषटफलक है जिसका प्रत्येक फलक आयताकार हो। जब तीनों बीमा समान हों तो वह आकार घन कहलाता है।

                                               

चार रंग की प्रमेय

चार रंग की प्रमेय, या चार रंग मानचित्र प्रमेय एक गणितीय प्रमेय है जिसके अनुसार, किसी तल का संस्पर्शी क्षेत्रों में हुआ विभाजन मानचित्र नामक छवि का निर्माण करता है और इस मानचित्र के क्षेत्रों को रंगने के लिए चार से अधिक रंगों की आवश्यकता नहीं होती ...

                                               

ज्यामिति

ज्यामिति या रेखागणित गणित की तीन विशाल शाखाओं में से एक है। इसमें बिन्दुओं, रेखाओं, तलों और ठोस चीज़ों के गुणस्वभाव, मापन और उनके अन्तरिक्ष में सापेक्षिक स्थिति का अध्ययन किया जाता है। ज्यामिति, ज्ञान की सबसे प्राचीन शाखाओं में से एक है। ज्यामिति ...

                                               

डिस्क्रीट टाइम फुरिअर ट्रान्सफार्म

गणित में डिस्क्रीट टाइम फुरिअर ट्रान्सफार्म या डीटीएफटी, फुरिअर विश्लेषण के कई रुपों में से एक रूप है। यह अनन्त तक परिभाषित किसी अनावर्ती डिस्क्रीट-टाइम सेक्वेंस को रूपानतरित करता है। इसे यह भी कहते हैं कि समय-डोमेन का आंकड़ा आवृत्ति-डोमेन में बद ...

                                               

डिस्क्रीट फुरिअर रूपान्तर

डिस्क्रीट फुरिअर रूपान्तर) एक रूपान्तर है जो डिस्क्रीट-समय संकेतों को एक दूसरे रूप में बदल देता है। तकनीकी रूप से इसे समय-डोमेन संकेत को आवृत्ति-डोमेन संकेत में परिवर्तन के रूप में समझा जाता है। डिस्क्रीट फुरिअर रूपान्तर, डिस्क्रीट-टाइम फुरिअर रू ...

                                               

डीरिख्ले श्रेणी

गणित में डीरिख्ले श्रेणी निम्न प्रकार की श्रेणी को कहा जाता है: ∑ n = 1 ∞ a n s, {\displaystyle \sum _{n=1}^{\infty }{\frac {a_{n}}{n^{s}}},} जहाँ s सम्मिश्और a सम्मिश्र अनुक्रम है। यह सामान्य डीरिख्ले श्रेणी की विशेष अवस्था है। डीरिख्ले श्रेणी व ...

                                               

त्रिविकर्णिक आव्यूह

त्रिविकर्णिक आव्यूह एक ऎसा आव्यूह होता है, जो निम्नवत स्वरूप में रहता है - 1 4 0 3 4 1 0 2 3 4 0 1 3 {\displaystyle {\begin{pmatrix}1&4&0&0\\3&4&1&0\\0&2&3&4\\0&0&1&3\\\end{pmatrix}}} यहां प्रत्येक ...

                                               

त्रिविकर्णिक आव्यूह कलनविधि

त्रिविकर्णिक आव्यूह कलनविधि) जिसे थॊमस कलनविधि के नाम से भी जाना जाता है, गॊस निरसन का सरलीकृत रूप है जिसका उपयोग त्रिविकर्णिक आव्यूह के समुच्चय को हल करने के लिये किया जाता है। एक त्रिविकर्णिक आव्यूहों के समुच्चय को इस तरह व्यक्त किया जा सकता है ...

                                               

दिक्

दिक् जगह के उस विस्तार या फैलाव को कहते हैं जिसमें वस्तुओं का अस्तित्व होता है और घटनाएँ घटती हैं। मनुष्यों के नज़रिए से दिक् के तीन पहलू होते हैं, जिन्हें आयाम या डिमॅनशन भी कहते हैं - ऊपर-नीचे, आगे-पीछे और दाएँ-बाएँ।

                                               

दीर्घवृत्तलेखी

दीर्घवृत्त खींचने के लिए उसके दो गुणों का उपयोग किया गया है: १ दीर्घवृत्त पर स्थित किसी भी बिंदु से उसकी नाभीय दूरियों का योगफल सदा दीर्घ अक्ष के बराबर रहता है तथा २ यदि नियत लंबाई की ऋजु रेखा के सिरे दो लंब रेखाओं पर खिसकें, तो उसके रेखा पर स्थि ...

                                               

न्यूनकोण त्रिभुज तथा अधिककोण त्रिभुज

न्यूनकोण त्रिभुज उस त्रिभुज को कहते हैं जिसके तीनों कोण, न्यूनकोण हों। अधिककोण त्रिभुज उस त्रिभुज को कहते हैं जिसका कोई कोण, अधिककोण हो। चूँकि त्रिभुज के तीनों कोणों का योग १८० डिग्री होता है, अतः किसी भी त्रिभुज में दो कोण, अधिककोण नहीं हो सकते। ...

                                               

परवलय

गणित में, परवलय एक द्विविमीय समतलीय वक्र है जो दर्पण-सममित होता है और यह अंग्रेज़ी अक्षर U के आकार का होता है। परवलय एक द्विमीय वक्र है जिसे कई तरह से परिभाषित किया जाता है। एक परिभाषा परवलय को शांकव के एक विशेष रूप में परिभाषित करती है। इसके अनु ...

                                               

अति परवलय

गणित में अतिपरवलय एक ऐसा शांकव होता है जिसकी उत्केन्द्रता इकाई से अधिक होती है। एक अन्य परिभाषा के अनुसार अतिपरवलय ऐसे बिन्दुओं का बिन्दुपथ है जिनकी दो निश्चित बिन्दुओं से दूरियों का अंतर सदैव अचर रहता है। इन निश्चित बिन्दुओं को अतिपरवलय की नाभिय ...

                                               

परवलयिक गति

प्रक्षेप्य गति गति का एक रूप है, जहाँ कण को पृथ्वी की सतह के निकट क्षितिज से किसी कोण पर प्रक्षेपित किया जाता है और यह गुरुत्वाकर्षण के अधीन वक्रीय गति करता है । प्रक्षेप्य के पथ को प्रक्षेप्य वक्र कहा जाता है। प्रक्षेप्य गति केवल तभी प्राप्त होत ...

                                               

परिमेय फलनों के समाकल की सूची

नीचे प्रमुख परिमेय फलनों के समाकल दिये गये हैं। for a ≠ 0: {\displaystyle a\neq 0:} ∫ 1 a x 2 + b x + c n d x = 2 a x + b n − 1 4 a c − b 2 a x 2 + b x + c n − 1 + 2 n − 3 2 a n − 1 4 a c − b 2 ∫ 1 a x 2 + b x + c n − 1 d x {\displaystyle \int {\ ...

                                               

पहाड़ा

पहाड़ा एक गणितीय सूची है जिसे प्राय: छोटी कक्षा के विद्यार्थियों को अच्छी तरह याद करा दिया जाता है। गुणा और भाग की अंकगणितीय क्रियाओं को करने इसका उपयोग में होता है। प्रायः ९ × ९ तक का पहाडा याद करना पर्याप्त होता है किन्तु १२ × १२ तक का पहाड़ा य ...

                                               

प्रतिलोम समस्या

विज्ञान में ऐसी समस्याओं को प्रतिलोम समस्या कहते हैं जो कुछ प्रेक्षणों की सहायता से उनको उत्पन्न करने वाले कारणों की गणना करतीं हैं। उदाहरण के लिये धरती के गुरुत्वीय क्षेत्र के आंकडों के आधापर धरती के अन्दर विभिन्न बिन्दुओं पर घनत्व निकालना एक प् ...

                                               

प्रदिश विश्लेषण

आतानक विश्लेषण का मुख्य उद्देश्य ऐसे नियमों की रचना और अध्ययन है, जो साधारणतया सहचर रहते हैं, अर्थात् यदि हम नियामकों की एक संहति से दूसरी में जाएं तो ए नियम ज्यों के त्यों बने रहते हैं। इसीलिए अवकल ज्यामिति के लिए यह विषय महत्वपूर्ण है। इस विषय ...

                                               

प्राकृतिक लघुगणक

किसी संख्या के प्राकृतिक लघुगणक का अर्थ है, उस संख्या का e आधापर लघुगणक. e एक अप्रिमेय प्रागनुभविक संख्या है जिसका मान लगभग 2.718 है। प्राकृतिक लघुगणक को प्रायः ln x, या log e x से निरूपित किया जाता है। जब कभी आधार e ही सन्दर्भ में हो तब कभी-कभी ...

                                               

प्राकृतिक संख्या

गणित में 1.2.3. इत्यादि संख्याओं को प्राकृतिक संख्याएँ कहते हैं। ये संख्याएँ वस्तुओं को गिनने अथवा क्रम में रखने के लिए प्रयुक्त होती हैं। प्राकृतिक संख्याओं के जो गुणस्वभाव भाज्यता से संबंधित हैं। उनका अध्ययन संख्या सिद्धांत में होता हैं। उदाहरण ...

                                               

प्रायिकता

किसी घटना के होने की सम्भावना को प्रायिकता या संभाव्यता कहते हैं। सांख्यिकी, गणित, विज्ञान, दर्शनशास्त्र आदि क्षेत्रों में इसका बहुतायत से प्रयोग होता है।

                                               

प्रिज्म (ज्यामिति)

ज्यामिति में प्रिज्म उस बहुफलक को कहते हैं जिसका आधार n-भुजाओं वाला बहुभुज हो तथा इसी के समान्तर एक दूसरा सर्वसम फलक हो तथा इन दोनों समान्तर फलकों की संगत भुजाओं को मिलाने वाले n समानतर चतुर्भुजाकार फलक हों।

                                               

फलन की सीमा

गणित में फलन की सीमा कलन की एक मूलभूत अवधारणा है और विश्लेषण विशेष रूप से निविष्ट मान के परिवेश में फलन का व्यवहार की जानकारी देता है। औपचारीक रूप से इसकी प्रथम परिभाषा १९वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध से निम्न प्रकार है। अनौपचारिक रूप से, एक फलन f प ...

                                               

फ़ूर्ये श्रेणी

गणित में फूर्ये श्रेणी एक ऐसी अनन्त श्रेणी है जो f आवृत्ति वाले किसी आवर्ती फलन को f, 2f, 3f, आदि आवृत्तियों वाले ज्या और कोज्या फलनों के योग के रूप में प्रस्तुत करती है। इसका प्रयोगे सबसे पहले जोसेफ फ़ूर्ये ने धातु की प्लेटों में उष्मा प्रवाह एव ...

                                               

बिंदुपथ

गणित में बिंदुपथ उन समस्त बिंदुओं का समुच्चय है जो कोई समान गुण रखते हों। सामान्यतः बिंदुपथ का सम्बन्ध एक शर्त से होता है। इस शर्त का पालन करने वाले समस्त बिंदुओं को मिलाने से कोई सतत आकृति या आकृतियाँ या वक्र बनता है।

                                               

बीजगणित

बीजगणित भी देखें। बीजगणित अरबी "अल-जेब" से, शाब्दिक अर्थ "टूटे हुए हिस्सों का पुनर्मिलन" संख्या सिद्धांत, ज्यामिति और विश्लेषण के साथ गणित के व्यापक भागों में से एक है। अपने सबसे सामान्य रूप में, बीजगणित गणितीय प्रतीकों और इन प्रतीकों में हेरफेर ...

                                               

बीने–कौशी तत्समक

बीजगणित में, बीने–कौशी तत्समक को जैक्स फिलिप मारी बिने और ऑगस्टिन लुइस कौशी के नाम पर नामाकरण किया, जिसके अनुसार ∑ i = 1 n a i c i ∑ j = 1 n b j d j = ∑ i = 1 n a i d i ∑ j = 1 n b j c j + ∑ 1 ≤ i < j ≤ n a i b j − a j b i c i d j − c j d i {\ ...

                                               

बेय का सिद्धांत

प्रायिकता ज्ञात करने के लिए प्रयोग किया जाने वाला बेय का सिद्धांत P and P का मान ज्ञात करता है| यह महान गणितज्ञ थोमस बेय के नाम पर है| यह सिद्धांत P, P, P और P के बीच में सम्बन्ध दर्शाता है जहाँ: PA | B = B के पहले ही हो जाने के पश्चात B के होने ...