ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 286




                                               

अंतर्वाह (जलविज्ञान)

जलविज्ञान के संदर्भ में, किसी जलनिकाय में जल का अंतर्वाह या अंत:प्रवाह उस निकाय के जल का स्रोत है। इसे किसी नियत समय या समय इकाई के दौरान जलनिकाय में आने वाले जल की औसत मात्रा के रूप में भी संदर्भित किया जा सकता है। यह बहिर्वाह का विपरीत है। सभी ...

                                               

अंतिम गति

अंतिम गति अथवा वेग किसी वस्तु के द्वारा प्राप्य उच्चतम वेग होता है, जब वह वस्तु किसी तरल पदार्थ या हवा के माध्यम से चलती या गिरती है। यह स्थिति तब आती है जब किसी वस्तु को खींचने पर लगने वाला बल और उस वस्तु का वज़न दोनों जुड़कर उस वास्तु पर लगने व ...

                                               

अतिचालकता

जब किसी मैटेरियल को 0°k तक ठंडा किया जाता है तो उसका प्रतिरोध पूर्णतः शून्य प्रतिरोधकता प्रदर्शित करते हैं। उनके इस गुण को अतिचालकता कहते हैं। शून्य प्रतिरोधकता के अलावा अतिचालकता की दशा में पदार्थ के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र भी शून्य हो जाता है जिस ...

                                               

अनुनाद

भौतिकी में बहुत से तंत्रों की ऐसी प्रवृत्ति होती है कि वे कुछ आवृत्तियों पर बहुत अधिक आयाम के साथ दोलन करते हैं। इस स्थिति को अनुनाद कहते हैं। जिस आवृत्ति पर सबसे अधिक आयाम वाले दोलन की प्रवृत्ति पायी जाती है, उस आवृत्ति को अनुनाद आवृत्ति कहते है ...

                                               

अनुप्रयुक्त भौतिकी

भौतिकी के तकनीकी और व्यावहारिक अनुप्रयोगों से सम्बंधित विषयों के विज्ञान को अनुप्रयुक्त भौतिकी कहते हैं। सैद्धांतिक भौतिकी और अनुप्रयुक्त भौतिकी के बीच की सीमाओं को किसी वैज्ञानिक की अभिप्रेरणा और अभिप्राय जैसे तत्त्वों से लेकर किसी अनुसन्धान के ...

                                               

अपकेन्द्रिय बल

अपकेन्द्रीय बल: Centrifugal Force) वह बल होता है जिसके कारण किसी गतिशील वस्तु में, केंद्र से दूर भागने की प्रवृत्ति होती है। यह वो आभासी बल होता है जो अभिकेन्द्रीय बल के समान तथा विपरीत दिशा में कार्य करता है। क्रीम सेपरेटर तथा सेंट्रीफ्युगल ड्रा ...

                                               

अपवाह वेग

इलेक्ट्रॉन को प्राप्त हुआ है सूक्ष्म नियत वेग जो मुक्त इलेक्ट्रॉन को तार की लंबाई के अनुदिश उच्च विभव वाले सिरे की ओर गति के लिए प्रेरित करता है, अनुगमन वेग कहलाता है। विद्युत धारा का मान अपवाह वेग के समानुपाती होता है। प्रतिरोधी पदार्थों में अपव ...

                                               

अभिकलनात्मक भौतिकी

कम्प्यूटेशनल भौतिकी है संख्यात्मक अध्ययन के कार्यान्वयन और एल्गोरिदम करने में समस्याओं का समाधान भौतिकी जिसके लिए एक मात्रात्मक सिद्धांत पहले से ही मौजूद है। It is often regarded as a subdiscipline of theoretical physics but some consider it an i ...

                                               

आइरन

एक भौतिक तत्त्व है। भौतिकी आवर्त सारणी के इस प्रचलित प्रबन्ध में लैन्थनाइड और ऐक्टिनाइड को अन्य धातुओं से अलग रखा गया है। विस्तृत और अति-विस्तृत आवर्त सारणीओं में f-ब्लॉक और g-ब्लॉक धातुओं को भी एक साथ प्रबन्धित किया जाता है।

                                               

आग

आग दहनशील पदार्थों का तीव्र ऑक्सीकरण है, जिससे उष्मा, प्रकाश और अन्य अनेक रासायनिक प्रतिकारक उत्पाद जैसे कार्बन डाइऑक्साइड और जल. उत्पन्न होते हैं। ऑक्सीकरण से उत्पन्न गैस आयनीकृत होकर प्लाज्मा. पैदा करते हैं। दहनशील पदार्थ में सन्निहित अशुद्धि क ...

                                               

आघूर्ण

भौतिकी में आघूर्ण का बहुत से स्थानों पर प्रयोग होता है। भौतिकी में इसकी संकल्पना गणित से आई है। किसी बिन्दु P {\displaystyle P} के सापेक्ष किसी सदिश A → {\displaystyle {\vec {A}}} के आघूर्ण की सामान्य परिभाषा यह है- M → P = r → × A → {\displaysty ...

                                               

आधुनिक भौतिकी

19वीं शताब्दी में भौतिकविज्ञानी यह विश्वास करते थे कि नवीन महत्वपूर्ण आविष्कारों का युग प्राय: समाप्त हो चुका है और सैद्धांतिक रूप से उनका ज्ञान पूर्णता की सीमा पर पहुँच गया है किंतु नवीन परमाणवीय घटनाओं की व्याख्या करने के लिये पुराने सिद्धांतों ...

                                               

आवृत्ति

कोई आवृत घटना, इकाई समय में जितनी बार घटित होती है उसे उस घटना की आवृत्ति कहते हैं। आवृति को किसी साइनाकार तरंग के कला परिवर्तन की दर के रूप में भी समझ सकते हैं। आवृति की इकाई हर्ट्ज होती है। एक कम्पन पूरा करने में जितना समय लगता है उसे आवर्त काल ...

                                               

इण्डस-१

इण्डस-१, भारत का प्रथम सिन्क्रोट्रॉन विकिरण स्रोत है। यह राजा रामन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केन्द्र, इन्दौर द्वारा विकसित एवं संचालित है।

                                               

इण्डस-२

इण्डस-२ भारत का दूसरा सिन्क्रोट्रान विकिरण स्रोत है जिसकी नामीय इलेक्ट्रॉन ऊर्जा 2.5 GeV तथा क्रांतिक तरंगदैर्घ्य लगभग 4 एंगस्ट्रॉम है। यह राजा रामन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केन्द्र, इन्दौर द्वारा विकसित एवं परिचालित है।

                                               

उच्च पारक फिल्टर

उच्च पार्क फ़िल्टर अथवा हाई पास फ़िल्टर एक इलेक्ट्रानिक फ़िल्टर है जो एक निश्चित कटऑफ़ से अधिक की फ़्रीक्वेंसी के संकेतों को निर्गमित होने देता है और इस कटऑफ़ से कम फ़्रीक्वेंसी के संकेतों को रोक लेता है। आमतौपर इसे लो-कट फ़िल्टर अथवा बेस-कट फ़िल ...

                                               

उत्तोलक

भौतिकी, यांत्रिकी और यांत्रिक प्रौद्योगिकी में उत्तोलक या लीवर को एक सरल यंत्र कहा जाता है। उत्तोलक कई रूपों में विद्यमान होते हैं। अपने सरलतम रूप में यह एक लम्बी छड़ हो सकती है जिसके एक सिरे के पास एक अवलम्ब लगाकर किसी भारी वस्तु को उठाने के काम ...

                                               

ऊर्जा (वैशेशिक दर्शन के अनुसार)

वैशेषिक दर्शनके अनुसार द्रव्य अवरोध दो प्रकार material obstructions के होते हैं- १. शोषण व २. आवर्तन जैसे लकड़ी शोषण के द्वारा इसके मार्ग को अवरुद्ध कर देती है। उसी प्रकार काँच जैसे द्रव्य आवर्तन के द्वारा अपने अन्दर से तेज गुजर जाने की अनुमति प् ...

                                               

एटलस प्रयोग

एटलस या ए टोरोइडल एलएचसी एपरेटस या एक टोरोइड एलएचसी उपकरण प्रयोग स्विट्जरलैंड और फ्रान्स में सर्न में स्थित लार्ज हैड्रान कोलाइडर पर बने दो बृहद् व्यापक प्रयोजन कण भौतिकी संसूचकों में से एक है। इस प्रयोग में आँकड़े संरक्षित करने के लिए रूट प्रारू ...

                                               

एन्ट्रॉपी

ऊष्मागतिकी में, एन्ट्रॉपी एक भौतिक राशि है जो सीधे मापी नहीं जाती बल्कि गणना द्वारा इसका मान निकाला जाता है। इसका प्रतीक S है। किसी निकाय की कुल ऊर्जा का वह भाग जिसे उपयोग में नहीं लाया जा सकता, उस निकाय की एन्ट्रॉपी कहलाती है। एण्ट्रॉपी की गणिती ...

                                               

ओस्मियम

ओस्मियम Osmium ; संकेत: Os; परमाणुभार १९० ; परमाणुसंख्या ७६ एक रासायनिक तत्व है। यह ज्ञात पदार्थों में सबसे भारी है। आस्मियम, प्लैटिनम समूह की छह धातुओं में से एक है और इन सबसे अधिक दुष्प्राप्य है। इसको सबसे पहले टेनांट ने १८०४ में आस्मिइरीडियम स ...

                                               

अल्फा कण

अल्फा कण मुख्यत हीलियम-नाभिक होते हैं। इनकी संरचना दो प्रोटानो व दो न्यूट्रानों के द्वारा होती हैं। रेडियो धर्मिता में ये कण नाभिक से उत्सर्जित होते हैं।

                                               

कूलम्ब

कुलाम का नियम - कुलाम का नियम हमें बताता है.की अगर दो स्थिर बिंदु आवेश एक दुषरे से कुछ दूरी पर रखे है तो उनके बीच कितना बल लग रहा है, इस नियम के अनुसार दो स्थिर बिंदु आवेशों के मध्य लगने बल उन आवेशों के परिमाणों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बी ...

                                               

केल्विन

कैल्विन तापमान की मापन इकाई है। यह सात मूल इकाईयों में से एक है। कैल्विन पैमाना ऊष्मगतिकीय तापमान पैमाना है, जहाँ, परिशुद्ध शून्य, पूर्ण ऊर्जा की सैद्धांतिक अनुपस्थिति है, जिसे शून्य कैल्विन भी कहते हैं। कैल्विन पैमाना और कैल्विन के नाम ब्रिटिश भ ...

                                               

केशिका

शरीर की सबसे पतली रक्त-वाहिनियाँ केशिका कहलातीं हैं। ये सूक्ष्मपरिसंचरण का भाग हैं। वे केवल एक कोशिका के बराबर मोटी होती हैं।

                                               

कॉरिऑलिस प्रभाव

भौतिक विज्ञान में, कॉरिऑलिस प्रभाव किसी घूर्णी निर्देश तंत्र में किसी गतिशील वस्तु में प्रेक्षित विक्षेपन होता है। फेरेल का नियम: इस नियम के अनुसार," धरातल पर मुख्य रूप से चलने वाली सभी हवाएं पृथ्वी की गति के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में दाहिनी ओर त ...

                                               

क्वथन

क्वथन या आम भाषा में उबाल, एक भौतिक प्रक्रिया है जिसके दौरान किसी द्रव के क्वथनांक बिंदु तक गर्म हो जाने पर उसकी सतह से तेज़ी से वाष्पीकरण होता है। तकनीकी भाषा में ऊष्मा द्वारा द्रव की सतह पर स्थित अणुओं की गतिज ऊर्जा उनके ऊपर लग रहे वायुमंडलीय व ...

                                               

क्वथनांक

किसी द्रव का क्वथनांक वह ताप है जिसपर द्रव के भीतर वाष्प दाब, द्रव की सतह पर आरोपित वायुमंडलीय दाब के बराबर होता है। यह वायुदाब के साथ परिवर्तित होता है और वायुदाब के बढ़ने पर द्रव के क्वथन हेतु अधिक उच्च ताप की आवश्यकता होती है।

                                               

क्वाण्टम उलझाव

प्रमात्रा यान्त्रिकी में प्रमात्रा उलझाव उस स्थिति को कहतें हैं जब दो वस्तुओं के एक-दूसरे पर कोई भौतिक प्रभाव पड़ने के बाद उनको अलग करने पर भी उन दोनों की परिस्थिति में एक प्रमात्रा सम्बन्ध रहता है। यदि एक वस्तु के किसी क्वाण्टम गुण को मापा जाए त ...

                                               

क्वाण्टम सांख्यिकी

भौतिकी में मुख्य रूप से तीन प्रकार की सांख्यिकी का उपयोग होता है। चिरसमत सांख्यिकी, बोस-आइंस्टाइन और फर्मी- डिरैक सांख्यिकी। दूसरे और तीसरे प्रकार का सम्मिलित रूप में क्वांटम सांख्यिकी भी कहते हैं, क्योंकि इनमें हम क्वांटम सिद्धांत के द्धारा जटिल ...

                                               

खगोलभौतिकी

खगोलभौतिकी खगोल विज्ञान का वह अंग है जिसके अंतर्गत खगोलीय पिंडो की रचना तथा उनके भौतिक लक्षणों का अध्ययन किया जाता है। कभी-कभी इसे ताराभौतिकी भी कह दिया जाता है हालाँकि वह खगोलभौतिकी की एक प्रमुख शाखा है जिसमें तारों का अध्ययन किया जाता है।

                                               

गणितीय भौतिकी

गणितीय भौतिकी भौतिकी की समस्याओं के समाधान के लिये गणितीय विधियों के विकास से संबन्धित है। गणितीय भौतिकी पत्रिका इस विषय इस तरह परिभाषित करती है- "भौतिकी की समस्याओं के लिये गणित का अनुप्रयोग तथा ऐसे अनुप्रयोगों और भौतिकीय सिद्धान्तों के सूत्रीकर ...

                                               

गति (भौतिकी)

यदि कोई वस्तु अन्य वस्तुओं की तुलना में समय के सापेक्ष में स्थान परिवर्तन करती है, तो वस्तु की इस अवस्था को गति कहा जाता है। सामान्य शब्दों में गति का अर्थ - वस्तु की स्थिति में परिवर्तन गति कहलाती है। गति Motion= यदि कोई वस्तु अपनी स्थिति अपने च ...

                                               

गतिज ऊर्जा

गतिज ऊर्जा किसी पिण्ड की वह अतिरिक्त ऊर्जा है जो उसके रेखीय वेग अथवा कोणीय वेग अथवा दोनो के कारण होती है। इसका मान उस पिण्ड को विरामावस्था से उस वेग तक त्वरित करने में किये गये कार्य के बराबर होती है। यदि किसी पिण्ड की गतिज ऊर्जा E हो तो उसे विरा ...

                                               

गतिशील कण का समय विस्तारण

विशिष्ट आपेक्षिकता सिद्धांत द्वारा व्युत्पन गतिशील कण का समय विस्तारण कण आयुकाल प्रयोगों में प्रेक्षित किया जा सकता है।

                                               

गैसों का अणुगति सिद्धान्त

गैसों का अणुगति सिद्धान्त गैसों के समष्टिगत गुणों को समझने के लिये एक सरलीकृत मॉडल है। सार रूप में यह सिद्धान्त कहता है कि गैसों का दाब उनके अणुओं के बीच के स्थैतिक प्रतिकर्षण के कारण नहीं है, बल्कि गतिशील अणुओं के आपसी टकराव का परिणाम है।

                                               

ग्राहम का विसरण का नियम

ग्राहम का विसरण का नियम गैस की विसरण की दर से सम्बन्धित एक नियम है जिसे स्कॉटलैण्ड के रसायन शास्त्री थॉमस ग्राहम ने प्रतिपादित किया था। थॉमस ने प्रयोगों के आधापर पाया कि किसी गैस के विसरण की की दर उसके कणों के द्रव्यमान के वर्गमूल के व्युत्क्रामु ...

                                               

घनत्व

भौतिकी में किसी पदार्थ के इकाई आयतन में निहित द्रव्यमान को उस पदार्थ का घनत्व कहते हैं। इसे ρ या d से निरूपित करते हैं। अर्थात ρ = m V {\displaystyle \rho ={\frac {m}{V}}} अतः घनत्व किसी पदार्थ के घनेपन की माप है। यह इंगित करता है कि कोई पदार्थ क ...

                                               

घर्षण

यदि किसी स्थिर ठोस वस्तु पर कोई दूसरी ठोस वस्तु इस तरह से रखी जाती है कि दोनों समतल पृष्ठ एक-दूसरे को स्पर्श करते है, तो इस दशा में दूसरी वस्तु को पहली वस्तु पर खिसकने के लिए बल लगाना पड़ता है l इस बल का मान एक सीमा से कम होने पर दूसरी वस्तु पहली ...

                                               

घूर्णन

भौतिकी में किसी त्रिआयामी वस्तु के एक स्थान में रहते हुए घूमने को घूर्णन कहते हैं। यदि एक काल्पनिक रेखा उस वस्तु के बीच में खींची जाए जिसके इर्द-गिर्द वस्तु चक्कर खा रही है तो उस रेखा को घूर्णन अक्ष कहा जाता है। पृथ्वी अपने अक्ष पर घूर्णन करती है।

                                               

घूर्णन अक्ष

भौतिकी में, घूर्णन अक्ष उस काल्पनिक लकीर को कहा जाता है जिसके इर्द-गिर्द कोई घूर्णन करती हुई वस्तु घूम रही हो। खगोलशास्त्र में पृथ्वी अपने अक्ष पर घूर्णन करती है।

                                               

चिरसम्मत भौतिकी

चिरसम्मत भौतिकी भौतिक विज्ञान की वह शाखा है जिसमें द्रव्य और ऊर्जा दो अलग अवधारणाएं हैं। प्रारम्भिक रूप से यह न्यूटन के गति के नियम व मैक्सवेल के विद्युतचुम्बकीय विकिरण सिद्धान्त पर आधारित है। चिरसम्मत भौतिकी को सामान्यतः विभिन्न क्षेत्रों में वि ...

                                               

चुम्बक

चुम्बक वह पदार्थ या वस्तु है जो चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। चुम्बकीय क्षेत्र अदृश्य होता है और चुम्बक का प्रमुख गुण - आस-पास की चुम्बकीय पदार्थों को अपनी ओर खींचने एवं दूसरे चुम्बकों को आकर्षित या प्रतिकर्षित करने का गुण, इसी के कारण होता है।

                                               

टेट्रोड

टेट्रोड या चतुराग्र एक निर्वात नली है जिसमें चार सक्रिय एलेक्ट्रोड होते हैं। प्रायः दो कंट्रोल ग्रिडों वाले निर्वात नलियों को ही टेट्रोड कहते हैं।। इसमें ट्रायोड में मौजूद तीन एलेक्ट्रोड तो होते ही हैं, इनके अतिरिक्त एक स्क्रीन ग्रिड भी होती है ज ...

                                               

डॉप्लर प्रभाव

जब किसी ध्वनि स्रोत और श्रोता के बीच आपेक्षिक गति होती है तो श्रोता को जो ध्वनि सुनाई पड़ती है उसकी आवृत्ति मूल आवृति से कम या अधिक होती है। इसी को डॉप्लर प्रभाव कहते हैं। यही प्रभाव प्रकाश स्रोत और प्रेक्षक के बीच आपेक्षिक गति से भी होता है, जिस ...

                                               

तरंग-कण द्वैतता

तरंग-कण द्वैतता अथवा तरंग-कण द्वित्व सिद्धान्त के अनुसार सभी पदार्थों में कण और तरंग दोनों के ही लक्षण होते हैं। आधुनिक भौतिकी के क्वाण्टम यान्त्रिकी क्षेत्र का यह एक आधारभूत सिद्धान्त है। जिस स्तर पर मनुष्यों की इन्द्रियाँ दुनिया को भाँपती हैं, ...

                                               

त्वरणमापी

कोई भी ऐसी युक्ति जो त्वरण मापने के काम आती है, त्वरणमापी कहलाती है। प्रायः ये विद्युतयांत्रिक युक्तियाँ होती हैं जो त्वरण के संगत उपयुक्त वैद्युत संकेत प्रदान करती हैं।

                                               

दिक्-काल

दिक्-काल या स्पेस-टाइम की संकल्पना, अल्बर्ट आइंस्टीन द्वारा उनके सापेक्षता के सिद्धांत में दी गई थी| उनके अनुसार तीन दिशाओं की तरह, समय भी एक आयाम है और भौतिकी में इन्हें एक साथ चार आयामों के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि वास्तव में ब्रह्म ...

                                               

दिष्ट धारा

दिष्ट धारा वह धारा है जो सदैव एक ही दिशा में बहती है व जिसकी ध्रुवीयता नियत रहती हैं। इसकी तुलना प्रत्यावर्ती धारा से की जा सकती है जो अपनी ध्रुवीयता निश्चित कालक्रम में बदलती रहती है। इन दोनों ही धाराओं का परिमाण निश्चित रहता है।I

                                               

दुर्बल अन्योन्य क्रिया

दुर्बल अन्योन्य क्रिया प्रकृति की चार मूलभूत अन्योन्य क्रियाओं में से एक है, अन्य चार अन्योन्य क्रियाएं गुरुत्वाकर्षण, विद्युत चुम्बकीय अन्योन्य क्रिया और प्रबल अन्योन्य क्रिया हैं। यह अन्योन्य क्रिया, उप-परमाणविक कणों के रेडियोधर्मी क्षय और नाभि ...