ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 294




                                               

रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह

रिलायंस अनिल धीरूभाई अम्बानी समूह कई कम्पनियों वाला एक औद्योगिक घराना या समूह है। अनिल अंबानी इसके मालिक हैं। मुकेश अंबानी एवं अनिल अम्बाणी के आपसी झगड़े के कारण रिलायंस इण्डस्ट्रीज के विभाजन हुआ और यह समूह अस्तित्व में आया। इसके लगभग ८० लाख शेयर ...

                                               

लघु उद्योग

लघु उद्योग (छोटे पैमाने की औद्योगिक इकाइयाँ वे इकाइयां होती है जो मध्यम स्तर के विनियोग की सहायता से उत्पादन प्रारम्भ करती हैं। इन इकाइयों मे श्रम शक्ति की मात्रा भी कम होती है और सापेक्षिक रूप से वस्तुओं एवं सेवाओं का कम मात्रा में उत्पादान किया ...

                                               

विनिर्माण

मशीनों, औजारों और श्रम का उपयोग करके सामान बनाने की क्रिया को विनिर्माण कहते हैं। विनिर्मित सामान स्वयं प्रयोग के लिये हो सकते हैं, या बेचने के लिये। विनिर्माण के अन्तर्गत हस्तकला से लेकर उच्च तकनीकी तक बहुत सी मानवी गतिविधियाँ आ जाती हैं किन्तु ...

                                               

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग वे उद्योग हैं जिनमें काम करने वालों की संख्या एक सीमा से कम होती है तथा उनका वार्षिक उत्पादन भी एक सीमा के अन्दर रहता है। किसी भी देश के विकास में इनका महत्वपूर्ण स्थान है।

                                               

हड़ताल

औद्योगिक माँगों की पूर्ति कराने के लिए हड़ताल मजदूरों का अत्यंत प्रभावकारी हथियार है। औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 में हड़ताल की परिभाषा करते हुए लिखा गया है कि औद्योगिक संस्थान में कार्य करनेवाले कारीगरों द्वारा सामूहिक रूप से कार्य बंद करने अथवा ...

                                               

अटार्नी जनरल

अनुच्छेद 76 और 88 भारत के महान्यायवादी के साथ संबन्धित है| भारत के महान्यायवादी देश का सर्वोच्च कानून अधिकारी होता है। वह सभी कानूनी मामलों में सरकार की सहायता के लिए जिम्मेदार होता है। राष्ट्रपति, महान्यायवादी की नियुक्त करता है| जो व्यक्ति नियु ...

                                               

महान्यायवादी

अधिकांश कॉमन-कानून का अनुसरण करने वाले देशों में महान्यायवादी होता है जो सरकार का मुख्य सलाहकार होता है। इसके अलावा कुछ देशों में वह पब्लिक प्रॉस्क्यूटर के दायित्व का भी निर्वहन करता है। राष्टपति, उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने के लिए ...

                                               

ईशा अम्बानी

ईशा मुकेश अम्बानी एक भारतीय व्यावसायिक है। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी और रिलायंस फाउंडेशन के संस्थापक नीता अंबानी की बेटी हैं। येल विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान और दक्षिण एशियाई अध्ययन में स्नातक होने के ब ...

                                               

जयानन्द भारती

जयानन्द भारती, भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं सामाजिक चेतना के अग्रदूत थे। उन्होने ‘डोला-पालकी आन्दोलन’ चलाया। यह वह आन्दोलन था जिसमें शिल्पकारों के दूल्हे-दुल्हनों को डोला-पालकी में बैठने के अधिकार बहाल कराना था। लगभग 20 वर्षों तक चलने वा ...

                                               

मोतीलाल तेजावत

मोतीलाल तेजावत आदिवासियों का मसीहा के नाम से जाने जाते हैं। इन्होंने वनवासी संघ की स्थापना की। इनहोंने भील, गरासिया तथा अन्य खेतिहरों पर होने वाले सामन्ती अत्याचार का विरोध किया और उन्हें एकजुट किया। सन 1920 में आदिवासियों के हितों को लेकर मातृकु ...

                                               

स्वामी केशवानन्द

स्वामी केशवानन्द का जन्म राजस्थान के सीकर जिले में हुआ था।उन्होंने शिक्षा पंजाब प्रदेश फ़िरोज़पुर से प्राप्त की है। villege mangloona, thsil=laxmangarh, distik= sikar jati jat Dhaka thi

                                               

हरविलास शारदा

हरबिलास शारदा एक शिक्षाविद, न्यायधीश, राजनेता एवं समाजसुधारक थे। वे आर्यसमाजी थे। इन्होने सामाजिक क्षेत्र में वैधानिक प्रक्रियाओं के क्रियान्यवन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। इनके अप्रतिम प्रयासों से ही बाल विवाह निरोधक अधिनियम, १९३० अस्तित्व में ...

                                               

देखरेख गुणवत्ता आयोग

देखरेख गुणवत्ता आयोग एक विशेष रूप से गठित संयुक्त राजशाही के स्वस्थ्य एवं सामाजिक देखरेख विभाग की ग़ैर-विभागीय सार्वजनिक संस्था है। इसे २००९ में स्थापित किया गया था ताकि इंगलैंड में स्वास्थ्य और सामाजिक देखरेख की सुविधाओं का निरीक्षण किया जा सके। ...

                                               

अर्थशास्त्र

यह पृष्ठ अर्थशास्त्र इकनॉमिक्स विषय से सम्बन्धित है। कौटिल्य द्वारा रचित अर्थशास्त्र ग्रन्थ के लिये यहाँ देखें। अर्थशास्त्र सामाजिक विज्ञान की वह शाखा है, जिसके अन्तर्गत वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, वितरण, विनिमय और उपभोग का अध्ययन किया जाता है। ...

                                               

संगुटिका (कंपनी)

संगुटिका दो या उससे अधिक निगमों का एक संयोजन है जो एक ही कारपोरेट संरचना के अंतर्गत, अक्सर एक पैरेंट कंपनी और विभिन्न अधीनस्थ कंपनियों को शामिल करती हुई, पूरी तरह से भिन्न व्यापार में सलग्न होती हैं। प्राय: संगुटिका एक बहु-औद्योगिक कंपनी होती है। ...

                                               

अन्तरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र

उत्पादक संसाधनों और उपभोक्ता वरीयताओं में अन्तर्राष्ट्रीय अन्तर और उन्हें प्रभावित करने वाले अंतरराष्ट्रीय संस्थान अन्तर्राष्ट्रीय अर्थशास्त्र के अध्यन के विषय हैं। यह व्यापार, निवेश और प्रवास सहित विभिन्न देशों के निवासियों के बीच लेनदेन और बातच ...

                                               

अर्थव्यवस्था

अर्थव्यवस्था उत्पादन, वितरण एवम खपत की एक सामाजिक व्यवस्था है। यह किसी देश या क्षेत्र विशेष में अर्थशास्त्र का गतित चित्र है। यह चित्र किसी विशेष अवधि का होता है। उदाहरण के लिए अगर हम कहते हैं समसामयिक भारतीय अर्थव्यवस्था तो इसका तात्पर्य होता है ...

                                               

बचत

सामान्य अर्थों में बचत का अर्थ धन को संरक्षित करने यथा- बैंक में रखने, पेंशन फंड में निवेश करने इत्यादि से लगाया जाता है। लेकिन व्यापक अर्थ में बचत शब्द खर्च घटाने, संसाधन बचाने जैसी आर्थिक गतिविधियों के लिए प्रयुक्त होता है। सामान्यत बचत के तीन ...

                                               

अर्थशास्त्र के प्रमुख सिद्धान्त

अर्थशास्त्र, उपयोगिता की विद्या है। उपयोगिता के अन्तर्गत लोगों की प्राथमिकता, वस्तुओं से मिलने वाली संतुष्टि, वस्तुओं को लोगों द्वारा प्रदत्त महत्व आदि आते हैं। इच्छाएँ अनन्त हैं और इसके साथ यह भी सत्य है कि एक ही वस्तु की अधिकाधिक मात्रा मिलने प ...

                                               

आयात

किसी भी तरह के उत्पादों या सेवाओं को बाहर के किसी देश से खरीदने को आयात कहते हैं। निर्यात का उल्टा होता है आयात। ये आयात निर्यात दो प्रकार मे होता हे। इसमे पाहिले राष्ट्रीय और आंतरराष्ट्रीय ऐसे दो प्रकार होते हे ।

                                               

आर्थिक दक्षता

अर्थशास्त्र में, आर्थिक दक्षता का मतलब सभी सम्साधनों का इस प्रकार उपयोग करने से है कि वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन अधिकतम किया जा सके। दो आर्थिक तंत्रों की तुलना करते समय इसका उपयोग किया जाता है। कोई अर्थतंत्र दूसरे अर्थतंत्र से अधिक दक्ष कहा जा ...

                                               

आर्थिक नीति

आर्थिक नीति से आशय उन सरकारी नीतियों से होता है जिनके द्वारा किसी देश के आर्थिक क्रियाकलापों का नियमन होता है। आर्थिक नीति के अन्तर्गत करों के स्तर निर्धारित करना, सरकार का बजट, मुद्रा की आपूर्ति, ब्याज दर के साथ-साथ श्रम-बाजार, राष्ट्रीय स्वामित ...

                                               

आर्थिक वृद्धि

किसी देश की प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि आर्थिक वृद्धि कहलाती है। आर्थिक वृद्धि केवल उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं का परिमाण बताती है।

                                               

आर्थिक व्यवस्था

किसी समाज के अन्दर या किसी भौगोलिक क्षेत्र के अन्दर उत्पादन, संसाधनों के नियतन, तथा वस्तुओं एवं सेवाओं के वितरण को आर्थिक व्यवस्था या आर्थिक प्रणाली कहते हैं।

                                               

आर्थिक समस्या

आर्थिक समस्या का कथन है कि किसी भी अर्थव्यवस्था के सीमित संसाधन मानव की सभी आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकते। इसका मानना है कि मानव की आवश्यकताएँ असीम हैं, जबकि उनको पूरा करने के साधन कम होते हैं। आर्थिक समस्या को ही मूलभूत आर्थिक समस्या भी कहते ह ...

                                               

आर्थिक साम्राज्यवाद

वर्तमान अर्थनीतिक परिप्रेक्ष्य में आर्थिक साम्राज्यवाद से आशय आर्थिक सिद्धान्तों को सामाजिक विज्ञान के अन्य सम्बन्धित क्षेत्रों में भी लागू करने का क्रमबद्ध प्रयत्न करना है। इस तरह के प्रयत्न के परिणामस्वरूप कई नई विधाओं का जन्म हुआ।

                                               

आर्थिक सुधार

आर्थिक सुधार एक वृहद अर्थ वाला शब्द है। प्रायः इसका उपयोग अल्पतर सरकारी नियंत्रण, अल्पतर सरकारी निषेध, निजी कम्पनियों की अधिक भागीदारी, करों की अल्पतर दर आदि के सन्दर्भ में किया जाता है। उदारीकरण के पक्ष में मुख्य तर्क यह दिया जाता है कि इससे दक् ...

                                               

इंजीनियरी अर्थशास्त्र

इंजीनियरी अर्थशास्त्र, अर्थशास्त्र का एक उपविषय है जिसमें इंजीनियरी निर्णय लेने के सम्बन्ध में आर्थिक सिद्धान्तों के उपयोग का अध्ययन किया जाता है।

                                               

उत्पाद कर

"उत्‍पाद शुल्‍क" या आबकारी एक अप्रत्‍यक्ष कर है जो भारत में विनिर्माण की जाने वाली उन वस्‍तुओं पर लगाया जाता है जो घरेलू खपत के लिए होती हैं। कर विनिर्माण पर लगाया जाता है और जैसे ही वस्‍तुओं का विनिर्माण हो जाता है केन्‍द्रीय उत्‍पाद शुल्‍क देय ...

                                               

उत्पादकता

उत्पादकता उत्पादन के दक्षता की औसत माप है।उत्पादन प्रक्रिया में आउटपुट और इनपुट के अनुपात को उत्पादकता कह सकते हैं। उत्पादकता का विचार सर्वप्रथम 1766 में प्रकृतिवाद के संस्थापक क्वेसने के लेख में सामने आया। बहुत समय तक इसका अर्थ अस्पष्ट रहा। सम्प ...

                                               

उत्पादन

उत्पादन के लिए चार मूल आवश्यकताएँ होती हैं। 3- भौतिक पूँजी अर्थात उत्पादन के प्रत्एक स्तर पर आई लागत। 2- श्रम। 1- भूमि तथा अन्य प्राकृतिक संसाधन जैसे जल, वन, खनिज। 4 मानव पूँजी।

                                               

उत्पादन, लागत और मूल्य निर्धारण

उत्‍पादन से तात्‍पर्य किसी वस्‍तु का निर्माण करना या उत्‍पादित करना, लागत से आशय उस वस्‍तु को निर्मित करने में हुए व्‍यय की राशि को लागत कहते हैं। वस्‍तु को निर्मित करने में व्‍यय हुई राशि अर्थात् लागत तथा वस्‍तु को निर्मित करने में व्‍यक्तियों अ ...

                                               

उदासीनता वक्र

उदासीनता वक्र या तटस्थता वक्र किसी उपभोक्ता के व्यवहार को बताने वाला वक्र है जिस में किसी एक वक्र के किसी भी बिंदु पर उपभोक्ता को प्राप्त होने वाली उपभोग सामग्री से समान संतुष्टि प्राप्त होती है। या, "उदासीन वक्र उसे कहते हैं, जिसके सभी बिंदुओं प ...

                                               

ऊष्मा-अर्थशास्त्र

ऊष्मा-अर्थशास्त्र, अर्थशास्त्र का एक सम्प्रदाय है जो अर्थशास्त्र में भी ऊष्मागतिकी के नियमों के उपयोग का पक्षधर है। थर्मो-इकनॉमिक्स शब्द का सबसे पहले प्रयोग १९६२ में अमेरिकी इंजीनियर माइरन ट्राइबस ने किया था। ऊष्मा-अर्थशास्त्र को उसी प्रकार समझा ...

                                               

एकाधिकार

अर्थशास्त्र में जब कोई एक व्यक्ति या संस्था का किसी उत्पाद या सेवा पर इतना नियंत्रण हो कि वह उसके विक्रय से सम्बन्धित शर्तों एवं मूल्य को अपनी इच्छानुसार लागू कर सके तो इस स्थिति को एकाधिकार कहते हैं। अर्थात बाजार में प्रतियोगिता का अभाव एकाधिकार ...

                                               

ऑर्डर (विनिमय)

विनिमय आदेश स्टॉक, बॉण्ड, वस्तु या शेयर बाजार में एक उपभोक्ता द्वारा अपने दलाल को दिया गया विनिमय बाजार में क्रय-विक्रय करने का एक निर्देश होता है। ये निर्देश सरल या जटिल हो सकते हैं। ऐसे आदेशों के कुछ मानक निर्देश होते हैं। वे इस प्रकार से हैं।

                                               

कारोबारी माहौल

कारोबारी माहौल वो आंतरिक और बाह्य कारक है जो एक कंपनी के परिचालन की स्थिति के प्रभाव का संयोजन करते है। कारोबारी माहौल इन कारकों कों शामिल कर सकते हैं: ग्राहक और आपूर्तिकर्ता; प्रतियोगी और मालिक; प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सुधार; कानून और सरकार ...

                                               

काला बाजार

काला बाजार या भूमिगत बाजार या भूमिगत अर्थव्यवस्था वह बाजार है जहाँ सारा वाणिज्य, कराधान, नियम और व्यापार सम्न्बन्धी नियंत्रण आदि की चिंता किये बिना किया जाता है। इसे छाया अर्थतंत्र, काली अर्थव्यवस्था और समानान्तर अर्थव्यवस्था भी कहते हैं। आधुनिक ...

                                               

कीमत

अर्थशास्त्र में कीमत भुगतान की वह मात्रा है जो एक पक्ष दूसरे पक्ष से वस्तु अथवा सेवा की एक इकाई ख़रीदने के लिए देता है। आमतौपर यह किसी मौद्रिक इकाई में अथवा मुद्रा जैसी किसी चीज में व्यक्त की जाती है और आर्थिक मूल्य से अलग होती है। व्यष्टि अर्थशा ...

                                               

कोटा प्रणाली

कोटा प्रणाली में कारखानों में तैयार किये जा रहे उत्पाद पर सरकार की सीमा लागू होती है। बिना सक्षम स्वीकृति के न तो अधिक उत्पाद तैयार किया जा सकता है और न ही आयात एवं निर्यात। इसमें कच्चे माल के आयात पर भी कोटा निश्चित किया जाता है।

                                               

क्रय-शक्ति समता

क्रय-शक्ति समता) अंतर्राष्ट्रीय विनिमय का एक सिद्धांत है जिसके अनुसार विभिन्न देशों में एकसमान वस्तुओं की कीमत समान रहती है। क्रय शक्ति समता सिद्धांत की मुख्य विशेषताएँ क्रय शक्ति समता सिद्धान्त की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं- 1. विनिमय दर का ...

                                               

खुली अर्थव्यवस्था

खुली अर्थव्यवस्था अर्थव्यवस्था का एक दर्शन है। खुली अर्थव्यवस्था को अगर उसके शाब्दिक अर्थ से समझें तो इसका मतलब होता है एक ऐसा देश या समाज जहाँ किसी को किसी से भी व्यापार करने की छूट होती है और ऐसा भी नही कि इस व्यापार पे कोई सरकारी अंकुश या नियं ...

                                               

गणितीय अर्थशास्त्र

गणितीय अर्थशास्त्र में गणितीय विधियों का उपयोग करके अर्थशास्त्र के सिद्धान्तों को प्रस्तुत करना तथा उनका विश्लेषण करना आता है। इसमें उपयोग में आने वाले गणित में चलन-कलन, समाकलन, अन्तर समीकरण, अवकल समीकरण, मैट्रिक्स बीजगणित, गणितीय प्रोग्रामन तथा ...

                                               

ग़ृह ऋण

घर या ज़मीन खरीद्ने के लिये लिये गये ऋण को गृह ऋण कह्ते हैं। भारत में इस तरह का ऋण किसी भी वित्तीय संस्थान से लिय जा सक्ता है। ऋण शुक आने कि अवधि 1 साल से ले के 20 साल तक की हो सक्ती है।

                                               

ग्रेशम का नियम

सुप्रसिद्ध व्यापारिक संस्थान भरसर के संचालक मंडल के तत्कालीन सदस्य हेनरी अष्टम कालीन ब्रिटिश सरकार के आर्थिक सलाहकार, महारानी एलिजाबेथ के प्रथम मुद्रानिर्यंता तथा ब्रिटिश रायल एक्सचेंज के अादि संस्थापक सर थोमस ग्रेशम इस विशिष्ट आर्थिक सिद्धांत के ...

                                               

चिरसम्मत अर्थशास्त्र

चिरसम्मत अर्थशास्त्र या चिरसम्मत राजनीतिक अर्थशात्र आर्थिक चिन्तन की वह परम्परा है जिसका विकास मुख्यतः इंग्लैण्ड में १८वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से लेकर १९वीं शताब्दी के मध्यकाल तक हुआ। इसके मुख्य विचारकों में आदम स्मिथ, जे बी से, डेविड रिकार्डो, ...

                                               

चौर्य व्यापार

करों या वैधानिक प्रतिबंधों से आँख छिपाकर या उनकी चोरी कर लाभ कमाने के लिये अवैध रूप से मुद्रा, वस्तु या व्यक्तियों का किया गया आयात, निर्यात, अंतर्देशीय या अंतर्प्रातीय व्यापार चौर्य व्यापार माना जाता है। स्वतंत्र व्यापापर कर या प्रतिबंध- विलासमय ...

                                               

ज्ञान अर्थव्यवस्था

ज्ञान अर्थव्यवस्था या ज्ञान अर्थतंत्र या नॉलेज एकनॉमी उस अर्थव्यवस्था को इंगित करता है जिसमें ज्ञान का महत्व अधिकाधिक है। इसके अलावा इससे ज्ञान के सृजन एवं ज्ञान के प्रबन्धन का भी बोध होता है। वर्तमान समय में अर्तहोत्पत्ति के लिये ज्ञान का महत्व ...

                                               

तकनीकी विश्लेषण

तकनीकी विश्लेषण अथवा टेक्निकल एनालिसिस विभिन्न प्रतिभूतियों का विश्लेषण करने की विधा है। इसकी सहायता से भविष्य में इनके मूल्यों के बढ़ने-घटने के बारे में अनुमान लगाया जाता है। इसके लिये भूतकाल में इन सेक्योरिटीज के मूल्यों एवं उनके क्रय-विक्रय की ...

                                               

तुलनात्मक सुलाभ

तुलनात्मक सुलाभ की संकल्पना के अनुसार, कुछ व्यक्ति, फर्म या राष्ट्र अन्य व्यक्तियों, फर्मों या राष्ट्रों की अपेक्षा कम मूल्य में उत्पादित कर सकते हैं। तुलनात्मक सुलाभ का सिद्धान्त अन्तरराष्ट्रीय व्यापार की मूलभूत संकल्पना है जो कहती है कि राष्ट्र ...