ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 295




                                               

अंशुमान

इक्षवाकु वंश में सगर के पुत्र अंशमन हुए जिनके पुत्र अंशुमान थे जिन्होंने अपने पूर्वजो की मुक्ति के लिए तपस्या करते हुए प्राण त्याग दिए। अंशुमान के पुत्र दिलीप हुए और उनके पुत्र भगीरथ ने गंगा को धरती पर लाकर अपने पूर्वजो को मुक्ति दिलाई

                                               

नागभट्ट द्वितीय

नागभट्ट द्वितीय, अपने पिता वत्सराज से गद्दी प्राप्त कर गुर्जर-प्रतिहार राजवंश के चौथे राजा बने। उनकी माता का नाम सुन्दरीदेवी था। नागभट्ट द्वितीय को परमभट्टारक, महाराजाधिराज और कन्नौज विजय के बाद परमेश्वर की उपाधि दी गई थी। शाकम्भरी के चाहमानों ने ...

                                               

महेन्द्रपाल प्रथम

महेन्द्रपाल प्रथम, मिहिर भोज का पुत्और प्रतिहार वंश का सातवाँ शासक था। उसकी माँ का नाम चन्द्रभट्टारिकादेवी था। महेन्द्रपाल प्रथम का उल्लेख काठियावाड़, पंजाब और मध्य प्रदेश के विभिन्न शिलालेख में महिंद्रापाल, महेन्द्रयुधा, महिशपालदेव नाम से किया ग ...

                                               

मिहिर भोज

मिहिरभोज प्रतिहार, गुर्जर प्रतिहार राजवंश के सबसे महान राजा माने जाते हैं। इन्होने लगभग ५० वर्ष तक राज्य किया था। इनका साम्राज्य अत्यन्त विशाल था अपने पिता रामभद्र की हत्या करके मिहिरभोज ने सता संभाली ओर नागभट की तरह इसका विस्तार किया। मिहिरभोज प ...

                                               

रामभद्र

रामभद्र गुर्जर प्रतिहार राजवंश का एक शासक था। जैन प्रभावकचरित के अनुसार, नागभट्ट द्वितीय के बाद रामभद्र राजा बना, जिसे कभी कभी राम या रामदेव भी कहा गया है। उसकी माँ का नाम इस्तादेवी था। रामभद्र का शासनकाल संक्षिप्त केवल तीन वर्ष का था। उसके शासनक ...

                                               

द्वितीय पुलकेशी

पुलकैशिन २ चालुक्य राजवंश का एक महान शासक था। इन्होंने लगभग ६२० ईसवी में शासन किया था। इन्हें पुलकैशी नाम से भी जाना जाता था।

                                               

राजेन्द्र चोल २

राजेन्द्र चोल द्वितीय अपने बड़े भ्राता राजाधिराज चोल के उत्तराधिकारी थे। इनको कोप्पम के युद्ध में अपने भ्राता के संग याद किया जाता है, जहां इन्होंने पश्चिमी चालुक्य वंश के राजा सोमेश्वर १ का पासा प"अलट दिया था।

                                               

प्राणांतक प्रथम

प्राणांतक प्रथम ने पांड्या वंश को पाने के लिए अठारह साल तक दक्षिण भारत में चोल साम्राज्य पर शासन किया। उनके पूर्वाधिकारी आदित्य प्रथम थे जबकि उत्तराधिकारी गंधारादित्य हुए थे।

                                               

राजेन्द्र प्रथम

राजेन्द्र प्रथम चोल राजवंश का सबसे महान शासक था। उसने अपनी महान विजयों द्वारा चोल सम्राज्य का विस्ताकर उसे दक्षिण भारत का सर्व शक्तिशाली साम्राज्य बनाया। उसने गंगई कोंड की उपाधि धारण की तथा गंगई कोंड चोलपुरम नामक नगर की स्थापना की। वहीं पर उसने च ...

                                               

वीरराजेन्द्र चोल

वीरराजेंद्र चोल दक्षिणी भारत के चक्रवर्ती सम्राट राजेन्द्र प्रथम का पुत्र था और अपने बड़े भाइयों राजाधिराज प्रथम और राजेन्द्र द्वितीय के बाद चोल साम्राज्य की सत्ता संभालने वाला राजा बना।

                                               

अर्णोराज चौहान

अर्णोराज चौहान / ˈ ə r n oʊ r ɑː j ə x ɔː h ɑː n ə) शैवमतानुयायी थे। येे शाकम्बरी के चौहान राजवंश के राजा थे | नल, आवेल्लदेव, आनाक इत्यादि नामान्तरणो से भी प्रसिद्धि थी। अर्णोराज द्वारा पुष्कर का सुप्रसिद्ध वराहमन्दिर निर्मित किया गया। हेमचन्द्र ...

                                               

किर्तिपाल

कीर्तिपाल चौहान, नाडौल केे शासक अल्हण का पुुत्र था | कीर्तिपाल ने जालोर के परमार शासकों को पराजित कर जालोपर अधिकाकर सोनगरा चौहानों की सत्ता स्थापित की | जालौर का दुर्ग सोनगीरि पहाड़ी पर स्थित है इसलिए यहाँ के चौहान, सोनगरा चौहान कहलाए | कीर्तिपाल ...

                                               

वाक्पतिराज प्रथम

वाक्पतिराज प्रथम राज्यकाल 917 – 944 ई, शाकम्भरी चहमान राजवंश का राजा था। उसने सपदलक्ष पर शासन किया जिसके अन्तर्गत वर्तमान समय के राजस्थान और उत्तरी-पश्चिमी भारत आते हैं।

                                               

विग्रहराज चौहान

सम्राट विग्रहराज चौहान या विग्रहराज चतुर्थ के एक हिन्दू राजपूत सम्राट थे जिन्होने भारत के उत्तर-पश्चिम भाग में शासन किया। उन्होने अपने पड़ोसी राजाओं को जीतकर राज्य को एक साम्राज्य में परिवर्तित कर दिया। उनके राज्य में वर्तमान राजस्थान, हरियाणा और ...

                                               

धनानंद

महान सम्राट महाराजा महापद्मनंद जो एक न्यायी शासक थे इनके 10 पुत्र निम्न लिखित है:- 1 गंगन पाल 2 पंडुक 3 पंडुगति 4 भूतपाल 5 राष्ट्रपाल 6 गोविषाणक 7 दशसिद्धक 8 कैवर्त और 9 घनानंद १०चंद्रगुप्तचंद्र नंद चंद्र नन्द जोकि महान सम्राट महाराजा महापद्मनंद ...

                                               

धार लौह स्तम्भ

धार लौह स्तम्भ भारत के मध्य प्रदेश राज्य के धार नगर में स्थित एक विध्वंसित लोहे का स्तम्भ है जिसके सारे टुकड़ों का भार मिलाकर ७३०० किलोग्राम है, यानि दिल्ली के लौह स्तम्भ से लगभग १,००० किलोग्राम अधिक। इसकी निर्माण-व्युत्पत्ति आधिकारिक रूप से ज्ञा ...

                                               

मानतुंग

मानतुंग आचार्य सातवी शताब्दी के जैन मुनी थे। जो श्री भक्तामर स्तोत्र के निर्माता है। आचार्य मानतूंग महाराष्ट्रमे धुले शहर से १०० किलो मीटर के अंतर पर एक शिखर कि चोटी पर जाकर सदा के लिये ध्यानस्त हो गए। और वही पर उनको मोक्ष कि प्राप्ती हुई। आज उस ...

                                               

महेन्द्रवर्मन प्रथम

महेन्द्रवर्मन प्रथम चम्पा राज्य के राजा थे। वे पहले जैन धर्म के अनुयायी थे पर बाद मेंं उन्होंने शैव धर्म अपनाया। महेन्द्र वर्मन प्रथम 600-30ई. सिंह विष्णु का पुत्र एवं उत्तराधिकारी था। छठी सदी से पल्लवों का इतिहास अधिक स्पष्ट हो जाता है। इस सदी क ...

                                               

कण्व वंश

शुंग वंश के अन्तिम शासक देवभूति के मन्त्रि वसुदेव ने उसकी हत्या 73 ई पू में कर दी तथा मगध की गदी पर कण्व वंश की स्थापना की। कण्व वंश ने 75 इ.पू. से 30 इ.पू. तक शासन किया। वसुदेव पाटलिपुत्र के कण्व वंश का प्रवर्तक था। वैदिक धर्म एवं संस्कृति संरक् ...

                                               

कान्ह

कान्ह सातवाहन वंश का एक राजा था। विद्वानों के अनुसार यह सातवाहन वंश के संस्थापक सिमुक का छोटा भाई था जिसने उसके बाद राजसत्ता संभाली। कान्ह के पश्चात शातकर्णी राजा बना जो इस वंश का पहला बड़ा और प्रभावशाली राजा था। कान्ह के बारे में जानकारी नासिक श ...

                                               

शालिवाहन शक

शालिवाहन शक जिसे शक संवत भी कहते हैं, हिंदू कैलेंडर, भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और कम्बोडियन बौद्ध कैलेंडर के रूप मे प्रयोग किया जाता है। माना जाता है कि इसकी शुरुआत वर्ष 78 के वसंत विषुव के आसपास हुई थी। शालिवाहन राजा, शालिवाहन जिसे कभी कभी गौतमीप ...

                                               

चक्रायुध

चक्रायुध प्राचीन भारत के कन्नौज राज्य का शासक था। संभवतः उसने आठवीं शताब्दी के अंतिम दो दशकों में शासन किया था। ७८३ ई के बाद किसी समय, जब कन्नौज राष्ट्रकूट, प्रतिहाऔर पाल नरेशों के त्रिकोणयुद्ध का केंद्र था, चक्रायुध को कन्नौज का सिंहासन प्राप्त ...

                                               

आरामशाह

आरामशाह दिल्ली सल्तनत में गुलाम वंश का शासक था और वो कुतुबुद्दीन ऐबक के बाद सत्तासीन हुआ था। कुतुबुद्दीन की मृत्यु के बाद लाहौर के अमीरों ने जल्दबाजी में उसे दिल्ली का शासक बना दिया पर वो अयोग्य निकला। आरामशाह की हत्या कर इल्तुतमिश शासक बना। इसने ...

                                               

इल्तुतमिश

शम्सुद्दीन इल्तुतमिश दिल्ली सल्तनत में शम्सी वंंश का एक प्रमुख शासक था। तुर्की-राज्य संस्थापक कुतुब-उद-दीन ऐबक के बाद वो उन शासकों में से था जिससे दिल्ली सल्तनत की नींव मजबूत हुई। वह ऐबक का दामाद भी था। उसने 1211 इस्वी से 1236 इस्वी तक शासन किया। ...

                                               

नासिरुद्दीन महमूद

नासिरूद्दीन महमूद तुर्की शासक था, जो दिल्ली सल्तनत का आठवां सुल्तान बना। यह भी गुलाम वंश से था। बलबन ने षड़यंत्र के द्वारा 1246 में सुल्तान मसूद शाह को हटाकर नाशिरुद्दीन महमूद को सुल्तान बनाया ये एक ऐसा सुल्तान हुआ जो टोपी सीकर अपनी जीविका निर्बह ...

                                               

अलाऊद्दीन मसूदशाह

स्रोत - वाल्मीकि रामायण अलाउद्दीन मसूद शाह, तुर्की शासक था, जो दिल्ली सल्तनत के सातवें सुल्तान बना. यह भी गुलाम वंश से था । यह 1242-1246 तक दिल्ली सल्तनत में राज्य.

                                               

मुईज़ुद्दीन बहरामशाह

मुईज़ुद्दीन बहरामशाह एक मुस्लिम तुर्की शासक था, जो दिल्ली का छठा सुल्तान बना। वह गुलाम वंश से था। बहराम इल्तुतमिश का पुत्र एवं रजिया सुल्तान का भाई था।

                                               

रूकुनुद्दीन फ़ीरोज़शाह

रूकुनुद्दीन फ़ीरोज़शाह दिल्ली सल्तनत में ग़ुलाम वंश का शासक था। सन् 1236 में इल्तुतमिश की मृत्यु के बाद वो एक साल से भी कम समय के लिए सत्तासीन रहा। उसके बाद रजिया सुल्तान शासक बनी।

                                               

कुमारगुप्त द्वितीय

कुमारगुप्त द्वितीय प्राचीन भारत में तीसरी से पाँचवीं सदी तक शासन करने वाले गुप्त राजवंश का राजा था। इनकी राजधानी पाटलीपुत्र थी जो वर्तमान समय में पटना के रूप में बिहार की राजधानी है।

                                               

कुमारगुप्त प्रथम

कुमारगुप्त प्रथम प्राचीन भारत में तीसरी से पाँचवीं सदी तक शासन करने वाले गुप्त राजवंश का राजा था। इनकी राजधानी पाटलीपुत्र थी जो वर्तमान समय में पटना के रूप में बिहार की राजधानी है। नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना कुमारगुप्त प्रथम ने की थी। कुमारग ...

                                               

घटोट्कच गुप्त

यह प्राचीन भारत में तीसरी से पाँचवीं सदी तक शासन करने वाले गुप्त राजवंश का राजा था। इनकी राजधानी पाटलीपुत्र थी जो वर्तमान समय में पटना के रूप में बिहार की राजधानी है।

                                               

नरसिंहगुप्त बालादित्य

स्रोत - वाल्मीकि रामायण नरसिंहपुर बुरी तरह से budut उत्तराधिकारी के नरसिंहपुर बुरी तरह से हुआ । नरसिंहपुर बुरी तरह से उत्तराधिकारी के kumaragupta III हुआ.

                                               

प्रभावतीगुप्त

प्रभावतीगुप्त गुप्त सम्राट चन्द्रगुप्त द्वितीय की पुत्री थी। उसका विवाह वाकाटक नरेश रुद्रसेन द्वितीय के साथ 380 ई॰ के आसपास हुआ था। रुद्रसेन द्वितीय शैव मतानुयायी था जबकि प्रभावती वैष्णव मत को मानने वाली थी। विवाह के बाद रुद्रसेन भी वैष्णव हो गया ...

                                               

बुद्धगुप्त

यह प्राचीन भारत में तीसरी से पाँचवीं सदी तक शासन करने वाले गुप्त राजवंश का राजा था। इनकी राजधानी पाटलीपुत्र थी जो वर्तमान समय में पटना के रूप में बिहार की राजधानी है।

                                               

भानुगुप्त

यह प्राचीन भारत के प्रसिद्ध गुप्त राजवंश का राजा था। इनका उल्लेख केवल एरण शिलालेख में तथा मञ्जुश्रीमूलकल्प नामक क्रिया-तन्त्र ग्रन्थ में मिलता है। भानु गुप्त भारत पर राज्य करने वाले प्रसिद्ध गुप्त राजवंश के प्रारम्भिक गुप्त सम्राटों में से एक था। ...

                                               

रामगुप्त

यह प्राचीन भारत में तीसरी से पाँचवीं सदी तक शासन करने वाले गुप्त राजवंश का राजा था। इनकी राजधानी पाटलीपुत्र थी जो वर्तमान समय में पटना के रूप में बिहार की राजधानी है। यह समुद्रगुप्त का बड़ा पुत्र एवं प्रसिद्ध गुप्त शासक चन्द्रगुप्त -II बड़ा भाई थ ...

                                               

वैन्यगुप्त

यह प्राचीन भारत के प्रसिद्ध गुप्त राजवंश का राजा था।वैनगुप्त गुप्त वंश के कम ज्ञात राजाओं में से एक थे। वह नालंदा में खोजी गई खंडित मिट्टी की सीलिंग और गुप्तागर तांबे की प्लेट शिलालेख गुप्ता युग 188 507 सीई से ज्ञात है। आर सी मजूमदार उन्हें पुरुग ...

                                               

श्रीगुप्त

श्रीगुप्त गुप्त साम्राज्य का संस्थापक राजा था। श्रीगुप्त के बाद उसका पुत्र घटोत्कच शासक बना। इस वंश का प्रथम प्रतापी राजा चंद्रगुप्त प्रथम था जिसने एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की। चंद्रगुप्त ने लिच्छवी वंश की राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह किया ज ...

                                               

स्कन्दगुप्त

स्कन्दगुप्त प्राचीन भारत में तीसरी से पाँचवीं सदी तक शासन करने वाले गुप्त राजवंश के आठवें राजा थे। इनकी राजधानी पाटलिपुत्र थी जो वर्तमान समय में पटना के रूप में बिहार की राजधानी है कर लिया और फिर महान गुप्त साम्राज्य पर धावा बोला। परंतु वीर स्कन् ...

                                               

मराठवाडा

मराठवाडा शब्द का मतलब है मराठी लोगों का । मराठवाडा - मध्य महाराष्ट्र का एक संभाग है जो गोदावरी के घाटी में बसे आठ जिलों से बना है। इस संभाग का मुख्य शहर औरंगाबाद है। नांदेड, लातूर,परभणी इस इलाके के अन्य महानगर है। यह हैदराबाद के निज़ाम की सलतनत क ...

                                               

येसूबाई

येसूबाई, मराठा छत्रपति संभाजी की पत्नी थीं। वह पिलाजीराव शिरके, एक मराठा सरदार मुखिया जो कि छत्रपति शिवाजी की सेवाओं में थे, उनकी बेटी थीं। जब रायगढ़ के मराठा किले पर मुग़लों द्वारा 1689 में कब्जा कर लिया गया था, तब येसूबाई को उनके युवा पुत्र शाह ...

                                               

महादजी शिंदे

महादजी शिंदे मराठा साम्राज्य के एक शासक थे जिन्होंने ग्वालियर पर शासन किया। वे सरदार राणोजी राव शिंदे के पाँचवे तथा अन्तिम पुत्र थे। शिंदे अथवा सिंधिया वंश के संस्थापक राणोजी शिंदे के पुत्रों में केवल महादजी पानीपत के तृतीय युद्ध से जीवित बच सके। ...

                                               

सिंधिया

कुर्मी या पाटीदार सिंधिया राजघराने ने ऐसे रखा था राजनीति में कदम: 27 बार सांसद दे चुका है ये राजपरिवार |- | कुल | सूर्यवंश सर्प या शेशवंशी शाखा |- | शीर्षक | प्रभाकरवर्मा |- | धर्म | हिन्दू. |- | मूल राज्य | रणथंबौर और् पत्तदकल |- | अन्य राज्य | ...

                                               

अहिल्याबाई होल्कर

अहिल्याबाई होलकर इतिहास-प्रसिद्ध सूबेदार मल्हारराव होलकर के पुत्र खंडेराव की पत्नी थीं। जन्म इनका सन 1725 में हुआ था और देहांत 13 अगस्त 1795 को; तिथि उस दिन भाद्रपद कृष्णा चतुर्दशी थी। अहिल्याबाई मालवा साम्राज्य की रानी थीं। उनका कार्यक्षेत्र अपे ...

                                               

तुकोजी होल्कर

तुकोजीराव होल्कर प्रथम अहिल्याबाई होल्कर का सेनापति था तथा उनकी मृत्यु के बाद होल्करवंश का शासक बन गया था। दूरदर्शिता के अभाव तथा प्रबल महत्वाकांक्षावश इसने महादजी शिन्दे से युद्ध मोल लिया था तथा अंततः पूर्णरूपेण पराजित हुआ था।

                                               

कंकरोली

कंकरोली यह एकलिंगजी से 18 किलोमीटर की दूरी पर है। हल्दीाघाटी इतिहास में महाराणा प्रताप और अकबर के बीच हुए युद्ध के लिए प्रसिद्ध है। यह युद्ध 18 जून 1576 ई. को हुआ था। इस युद्ध में महाराणा प्रताप की विजय हुई थी। इसी युद्ध में महाराणा प्रताप का प्र ...

                                               

आलमगीर द्वितीय

अज़ीज़-उद्दीन आलमगीर द्वितीय ३ जून १७५४ से ११ दिसम्बर १७५९ तक भारत में मुगल सम्राट रहा। ये जहांदार शाह का पुत्र था। 1754 में इमाद उल मुल्क की मदद से जो कि उस वक्त काफी ताकतवर मुगल मंत्री था उसकी सहायता से आलमगीर द्वितीय ने सत्ता प्राप्त की यह जहा ...

                                               

मुहम्मद इब्राहिम (मुगल सम्राट)

मुहम्मद इब्राहिम १३वां मुगल सम्राट था। यह रफी उल-दर्जत और रफी उद-दौलत का भाई था और १७२० में फर्रुख्शियार के बाद गद्दी पर बैठा। १७४४ में इसकी मृत्यु हो गई।

                                               

रफी उद-दौलत

रफी उद-दौलत जिसे शाहजहां द्वितीय भी कहा गया है १७१९ में अति लघु-काल के लिए मुगल सम्राट बना था। यह अपने भाई रफी उल-दर्जत की मृत्यु उपरांट गद्दी पर बैठा था। इसे भि उसी की तरह सैयद भ्राता ने बाद्शाह घोषित किया था। १७१९ में ही इसकी हत्या कर दी गयी थी।

                                               

अकबर के नवरत्न

अकबर ने अपनी सत्ता के सुदृढ़ीकरण हेतु 9 विद्वानों की नियुक्ति की जिन्हें कालांतर में अकबर के नवरत्न के नाम से भी जाना गया। मुल्लाह दो पिअज़ा अकबर के अमात्य थे। यह बात को काटने के लिए काफी प्रसिद्ध थे तथा यह प्याज खाने के भी सौकिन थे। ये रसोइया थे ...