ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 296




                                               

कंगला महल

कंगला महल मणिपुर की राजधानी इम्फाल में स्थित एक पुराना महल है। यह इम्फाल नदी के दोनों किनारों पर विस्तृत है लेकिन अब इसके अधिकतर भाग के खंडहर ही बचे हैं। मणिपुरी भाषा में कंगला का अर्थ सूखी भूमि होता है और यह महल प्राचीनकाल में मणिपुर के मेइतेइ र ...

                                               

टिकेन्द्रजीत सिंह

टिकेन्द्रजीत सिंह स्वतन्त्र मणिपुर रियासत के राजकुमार थे। उन्हें वीर टिकेन्द्रजीत और कोइरेंग भी कहते हैं। वे मणिपुरी सेना के कमाण्डर थे। उन्होने महल-क्रान्ति की जिसके फलस्वरूप १८९१ में अंग्रेज-मणिपुरी युद्ध शुरू हुआ।

                                               

पुया

पुया कर रहे हैं धार्मिक ग्रंथों की Sanamahism में लिखा मेइती भाषा और में मेइती स्क्रिप्ट, के पारंपरिक विद्या युक्त मेइती लोगों की मणिपुर ।

                                               

भाग्यचन्द्र

राजर्षि भाग्यचन्द्र, एक मीतई राजा थे जिन्होने १८वीं शताब्दी में शासन किया। उन्होने रासलीला नृत्य का आविष्कार किया। राजा के रूप में उनके सभी कार्य मिथकीय रूप ले चुके हैं। उन्होने ही मणिपुर में वैष्णव सम्प्रदाय का प्रसार किया। उन्हे दादा पामहीबा ने ...

                                               

कुण्डलपुर, मध्य प्रदेश

कुण्डलपुर भारत के मध्य प्रदेश राज्य में स्थित एक जैनों का एक सिद्ध क्षेत्र है जहाँ से श्रीधर केवली मोक्ष गये है जो दमोह से ३५ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह एक प्रमुख जैन तीर्थ स्थल है। यहाँ तीर्थंकर ऋषभदेव की एक विशाल प्रतिमा विराजमान है।

                                               

खवासा का नरभक्षी

खवासा का नरभक्षी नाम से एक बाघ को जाना जाता है जिसने अंग्रेजी शासन के समय मध्य प्रदेश के खवासा नामक ग्राम के आस पास अपना आतंक फैलाया था। यहाँ के एक बाघ को एक अंग्रेज़ ने अपना शिकार बनाने का असफ़ल प्रयास किया जिसके परिणामस्वरूप वह बाघ शारीरिक रूप ...

                                               

धरमपुरी

धरमपुरी मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित पौराणिक नगर है। धरमपुरी प्राचीन भारत का एक सुविख्यात नगर तथा दुर्ग रहा है। यह दक्षिण - पशचिम के भूतपूर्व धार राज्य के अंतर्गत आता था। आजादी के पश्चात् यह धार जिले की मनावर तहसील का टप्पा था। विंध्यांचल पर ...

                                               

बाघ की गुफाएँ

बाघ गुफाएं, मध्य प्रदेश में धार जिले से ९७ किलोमीटर दूर विन्ध्य पर्वत के दक्षिणी ढलान पर हैं। ये इंदौऔर वडोदरा के बीच में बाघिनी नदी के किनारे स्थित हैं। इन गुफाओं का सम्बन्ध बौद्ध धर्म से है। यहां अनेक बौद्ध मठ और मंदिर देखे जा सकते हैं। इन गुफा ...

                                               

मगरोरा

मगरोरा किला नौन और सिंध नदियों के संगम के पास नौन नदी पर स्थित है। मगरोरा किला डबरा से झाँसी के रास्ते में सड़क के पश्चिम में पड़ता है। मगरोरा क़िला आसपास के क्षेत्र देखने के हिसाब से एक सुंदर स्थल है। निरंतर जलापूर्ति के लिए किले में दो विशाल टै ...

                                               

मेरुतुङ्ग

मेरुतुंग १४वीं शताब्दी के एक भारतीय लेखक थे। उन्होंने संवत १३६१ में प्रबन्धचिन्तामणि नामक ग्रन्थ की रचना की। यह एक ऐतिहासिक महत्त्व की गद्य रचना है जिसमें इतिहास-प्रसिद्ध विद्वानों, कवियों और आचार्यों से सम्बद्ध घटनाओं का अलंकृत गद्यशैली में वर्ण ...

                                               

बीजापुर सल्तनत

बीजापुर सल्तनत या आदिलशाही सल्तनत दक्कन का एक राज्य था। यह बहमनी सल्तनत का एक प्रांत था जिसका सूबेदार युसूफ़ आदिलशाह था जिसने बीजापुर को 1490 में स्वतंत्र घोषित कर दिया। उसने इसके साथ ही आदिलशाही वंश की स्थापना भी की। 1686 में औरंगजेब ने इसको मुग ...

                                               

संयुक्त महाराष्ट्र समिति

संयुक्त महाराष्ट्र समिति, एक संगठन था, जिसका गठन १९५० में तत्कालीन द्विभाषी बॉम्बे राज्य से मराठी बोले जाने वाले क्षेत्रों का अलग राज्य बनाने के उद्देश्य से किया गया था। बाद में संगठन, इस राज्य के महाराष्ट्र नाम से गठन के बाद भंग की गयी।

                                               

मिज़ो समझौता

मिज़ो समझौता भारत सरकाऔर मिज़ो नैश्नल फ़्रन्ट के बीच ३० जून १९८६ को हुआ एक समझौता था। ऍम॰ऍन॰ऍफ़॰ ने १९५० के दशक में भारत-सरकार के मिज़ोरम के प्रति ग़ैर-संवेदनशील प्रशासन से उत्तेजित होकर एक अलगाववादी अभियान आरम्भ किया था। हालांकि यह अभियान असफल थ ...

                                               

मिज़ोरम का इतिहास

मिज़ोरम का इतिहास मूलतः भारत के पूर्वोत्तर इलाके में स्थित मिज़ोरम राज्य में बदलावों का संकलन हैं। यह इतिहास चीन लोगों का हैं, जो बर्मा के चिन राज्य से भारत आएँ।

                                               

कुम्भलगढ़ दुर्ग

कुम्भलगढ़ का दुर्ग राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित है। निर्माण कार्य पूर्ण होने पर महाराणा कुम्भा ने सिक्के डलवाये जिन पर दुर्ग और उसका नाम अंकित था। वास्तुशास्त्र के नियमानुसार बने इस दुर्ग में प्रवेश द्वार, प्राचीर, जलाशय, बाहर जाने के लिए स ...

                                               

चित्तौड़गढ़ की घेराबंदी (१५६७–१५६८)

चित्तोड़गढ़ की घेराबंदी वर्ष 1567 में मेवाड़ राज्य पर मुगल साम्राज्य द्वारा किया गया सैनिक अभियान था। इसमें अकबर की सेना ने चित्तौड़गढ़ दुर्ग में जयमल के नेतृत्व वाले 8000 राजपूतों और 40.000 किसानों की घेराबन्दी कर ली।

                                               

चित्तौड़गढ़ दुर्ग

|location= चित्तौड़गढ़, भारत |image= Chittaur_Fort_a_view_from_the_main_approach_road.jpg |caption= चित्तौड़गढ़ दुर्ग का एक दृश्य |type= किला |built= |materials= |used= |controlledby= |garrison= |commanders= |battles= }} चित्तौड़गढ़ दुर्ग भारत का ...

                                               

चेतक

महाराणा प्रताप के सबसे प्रिय और प्रसिद्ध नीलवर्ण ईरानी मूल के घोड़े का नाम चेतक था। चेतक अश्व गुजरात के व्यापारी काठीयावाडी नस्ल के तीन घोडे चेतक,त्राटक और अटक लेकर मारवाड आया।अटक परीक्षण में काम आ गया। त्राटक महाराणा प्रताप ने उनके छोटे भाई शक्त ...

                                               

डीग

डीग राजस्थान प्रांत के भरतपुर जिले का एक प्राचीन ऐतिहासिक शहर है। इसका प्राचीन नाम दीर्घापुर था। स्कंद पुराण में दीर्घ या दीर्घापुर के रूप में इसका उल्लेख है। भरतपुर शहर से 32 किमी की दूरी पर स्थित है। डीग को भरतपुर राज्य की पहली राजधानी राजा ठाक ...

                                               

दुर्जनसाल

दुर्जनसाल कोटा के राजा भीमसिंह के तृतीय पुत्र। बड़े भाई अर्जुन सिंह के निस्संतान मर जाने पर इनमें और मझले भाई श्यामसिंह में गद्दी के लिए झगड़ा शुरू हुआ। श्यामसिंह की युद्ध में मृत्यु हो जाने पर इन्हें बड़ा दु:ख हुआ और इन्होंने संवत्‌ १७८० में बड़ ...

                                               

नीमराना

नीमराना भारत के राजस्थान प्रदेश के अलवर जिले का एक प्राचीन ऐतिहासिक शहर है, जो नीमराना तहसील में दिल्ली-जयपुर राजमार्ग पर दिल्ली से 122 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह 1947 तक चौहानों द्वारा शासित 14 वीं सदी के पहाड़ी किले का स्थल है। नीमराना का ...

                                               

मंडोर

मण्डोर का प्राचीन नाम ’माण्डवपुर’ था। यह पुराने समय में मारवाड़ राज्य की राजधानी हुआ करती थी। राव जोधा ने मंडोर को असुरक्षित मानकर सुरक्षा के लिहाज से चिड़िया कूट पर्वत पर मेहरानगढ़ का निर्माण कर अपने नाम से जोधपुर को बसाया था तथा इसे मारवाड़ की ...

                                               

महाराजा रामसिंह द्वितीय

महाराजा रामसिंह द्वितीय जो १८४३ ईस्वी में मात्र १६ वर्ष की उम्र में जयपुर के राजा बने थे। नाबालिग होने के कारण ब्रिटिश सरकार ने इन्हें वयस्क होने तक अपने संरक्षण में ले लिया था। इनके समय में मेजर जॉन लुडलो ने जनवरी १८४३ ईस्वी में जयपुर का प्रशासन ...

                                               

मेवाड़ की शासक वंशावली

राजस्थान के दक्षिण - पश्चिम भाग पर गुहिलों का शाषन था। "नैणसी री ख्यात" में गुहिलों की 24 शाखाओं का वर्णन मिलता है जिनमें मेवाड़, बागड़ और प्रताप शाखा ज्यादा प्रसिद्ध हुई। इन तीनो शाखाओं में मेवाड़ शाखा अधिक महत्वपूर्ण थी। मेवाड़ के प्राचीन नाम श ...

                                               

मेहरानगढ़

मेहरानगढ दुर्ग भारत के राजस्थान प्रांत में जोधपुर शहर में स्थित है। पन्द्रहवी शताब्दी का यह विशालकाय किला, पथरीली चट्टान पहाड़ी पर, मैदान से १२५ मीटर ऊँचाई पर स्थित है और आठ द्वारों व अनगिनत बुर्जों से युक्त दस किलोमीटर लंबी ऊँची दीवार से घिरा है ...

                                               

रणथम्भोर दुर्ग

रणथंभोर दुर्ग दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग के सवाई माधोपुर रेल्वे स्टेशन से १३ कि॰मी॰ दूर रन और थंभ नाम की पहाडियों के बीच समुद्रतल से ४८१ मीटर ऊंचाई पर १२ कि॰मी॰ की परिधि में बना एक दुर्ग है। दुर्ग के तीनो और पहाडों में प्राकृतिक खाई बनी है जो इस किले ...

                                               

राजस्थान की समय रेखा

यह राजस्थान के इतिहास की समय रेखा है। १५१८ महाराणा जगमल सिंह द्वारा बाँसवाड़ राज्य की स्थापना १२३७ रावल जैत्रसिंह द्वारा सुल्तान बलवन पर विजय १९१८ बिजोलिया किसान आन्दोलन १११३ अजयराज द्वारा अजमेर अजयमेरु की स्थापना १६६७ जयसिंह की दक्षिण भारत में म ...

                                               

राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान

राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान राजस्थान सरकार द्वारा स्थापित एक संस्थान है जो राजस्थानी संस्कृति एवं विरासत को संरक्षित रखने एवं उसकी उन्नति करने के उद्देश्य से स्थापित किया है। इसकी स्थापना १९५४ में मुनि जिनविजय के मार्गदर्शन में की गयी थी। म ...

                                               

राजस्थान में जौहर और साके

प्राचीन काल में राजस्थान में बहुत बार साके और कई बार जौहर हुए हैं। जौहर पुराने समय में भारत में राजपूत स्त्रियों द्वारा की जाने वाली क्रिया थी। जब युद्ध में हार निश्चित हो जाती थी तो पुरुष मृत्युपर्यन्त युद्ध हेतु तैयार होकर वीरगति प्राप्त करने न ...

                                               

दुर्गादास राठौड

दुर्गादास, मारवाड़ जोधपुर के राजपूत शासक महाराजा जसवंत सिंह के मंत्री आसकरण राठौड़ के पुत्र थे। उनकी माँ अपने पति और उनकी अन्य पत्नियों के साथ नहीं रहीं और जोधपुर से दूर रहीं। अतः दुर्गादास का पालन-पोषण लुनावास नामक गाँव में हुआ। इनका जन्म सालवाॅ ...

                                               

रानी हंसाबाई

रानी हंसाबाई मेवाड़ के राणा लाखा की रानी तथा मारवाड़ नरेश राव चुड़ा की पुुत्री थी। इनका विवाह इनके भाई राव रणमल के कहनेे पर ही मेवाड़ के राणा लाखा केे साथ इस शर्त पर हुआ कि लाखा का ज्येष्ठ पुत्र कुंवर चुण्डा मेवाड़ राज्य उत्तराधिकारी नहीं बनेगा, ...

                                               

रायसल दरबारी

राजा रायसल दरबारी खण्डेला के प्रथम शेखावत राजा थे। उन्होंने ई॰सं॰ १५८४ से १६१४ तक शासन किया। उनका विवाह चौहान राजपूत राजकुमारी किंनवती निर्बन सके साथ हुआ जो खण्डेला के राजा की पुत्री थी।

                                               

हकीम खाँ सूरी

इनका जन्म 1538 ई. में हुआ | ये अफगान बादशाह शेरशाह सूरी के वंशज थे | महाराणा प्रताप का साथ देने के लिए ये बिहार से मेवाड़ आए व अपने 800 से 1000 अफगान सैनिकों के साथ महाराणा के सामने प्रस्तुत हुए | हकीम खान सूरी को महाराणा ने मेवाड़ का सेनापति घोष ...

                                               

चोग्याल

छोग्याल पूर्व के सिक्किम अधिराज्य और लद्दाख जो अभी भारत में हैं के राजा हुआ करते थें, जो नामग्याल राजवंश के अलग शाखाओं में शासन करते थें। छोग्याल 1642 से 1975 के बीच सिक्किम का पूर्ण महाराजा हुआ करते थें। 1975 में उनका राज-पाठ निरस्त कर दिया गया ...

                                               

तितालिया संधि

तितालिया संधि सिक्किम के चोग्याल और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी के बीच हुआ था। इस संधि को कैप्टेन बर्रे लैटर ने फरवरी 1817 में निपटाया था, इस संधि के तहत ब्रिटिश ने सिक्किम कि सुरक्षा कि गारंटी दी और नेपाल द्वारा सदियों पहले सिक्किम का कब्जा किया ...

                                               

कैथल

कैथल हरियाणा प्रान्त का एक महाभारत कालीन ऐतिहासिक शहर है। इसकी सीमा करनाल, कुरुक्षेत्र, जीन्द और पंजाब के पटियाला जिले से मिली हुई है। पुराणों के अनुसार इसकी स्थापना युधिष्ठिर ने की थी। इसे वानर राज हनुमान का जन्म स्थान भी माना जाता है। इसीलिए पह ...

                                               

पटौदी रियासत

इनके पुरखे सलामत खान सन्1408 में अफगानिस्तान से भारत आए थे। सलामत के पोते अल्फ खान ने मुग्लों का कई लड़ाइयों में साथ दिया था। उसी के चलते अल्फ खान को राजस्थान और दिल्ली में तोहफे के रूप में जमीनें मिली। इसके बाद सन् 1917 से 1952 तक इफ्तिखार अली ह ...

                                               

हसन खां मेवाती

हसन खां मेवाती मेवात के मुस्लिम खानजादा राजपूत शासक थे। इनके खानदान ने मेवात पर 200 साल राज किया। बहादुर नहार द्वार 1353 ईसवीं में स्थापित मेवात राज्य का वह सातवां शासक था। अलवर उनके राज्य की राजधानी थी। अलवर के उत्तर-पश्चिम अरावली पर्वत श्रंखला ...

                                               

गुगे

गुगे पश्चिमी तिब्बत का एक प्राचीन राज्य था जो १०वीं शताब्दी ईसवी के बाद अपने चरम पर पहुँचा। अपने सबसे बड़े विस्तार में इसका राज भारत के कुछ इलाक़ों तक पहुँच गया, जिनमें हिमाचल प्रदेश का स्पीति क्षेत्और ऊपरी किन्नौर ज़िला, तथा जम्मू व कश्मीर की ज़ ...

                                               

अवन्ति

अवन्ति प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में से एक था। यह जनपद पश्चिमी और मध्य मालवा के क्षेत्र में बसा हुआ था जिसके दो भाग थे। उत्तरी अवन्ति जिसकी राजधानी उज्जयिनी थी तथा दक्षिणी अवन्ति जिसकी राजधानी महिष्मती थी। इन दोनों क्षेत्रो के बीच नेत्रावती नद ...

                                               

अश्मक

अश्मक या अस्सक प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में से एक था। यह एक मात्र महाजनपद था जो विंध्य पर्वत के दक्षिण में स्थित था। आधुनिक काल में इस प्रदेश को महाराष्ट्र कहते हैं। यह अवन्ति का एक समीपवर्ती राज्य था। प्रारंभ में अस्सक गोदावरी के तट पर बसे ह ...

                                               

कंबोज

कंबोज प्राचीन भारत के १६ महाजनपदों में से एक था। इसका उल्लेख पाणिनी के अष्टाध्यायी में १५ शक्तिशाली जनपदों में से एक के रूप में भी मिलता है। बौद्ध ग्रन्थ अंगुत्तर निकाय, महावस्तु मे १६ महाजनपदों में भी कम्बोज का कई बार उल्लेख हुआ है - ये गांधारों ...

                                               

कोलीय

कोलीय भारतीय उपमहाद्वीप के सूर्यवंश के के क्षत्रिय थे। दोनों कबीलों को अपने शाही खून की शुद्धता पर बहुत गर्व था और उन्होंने प्राचीन काल से अंतर-विवाह की इस परंपरा का पालन किया था। उदाहरण के लिए, सुद्दोधन की बुआ का विवाह कोलीय के शासक अंजना से हुआ ...

                                               

चेदि जनपद

पौराणिक 16 महाजनपदों में से एक है। वर्तमान में बुंदेलखंड का इलाक़ा इसके अर्न्तगत आता है। गंगा और नर्मदा के बीच के क्षेत्र का प्राचीन नाम चेदि था। बौद्ध ग्रंथों में जिन सोलह महाजनपदों का उल्लेख है उनमें यह भी था। कलिचुरि वंश ने भी यहाँ राज्य किया। ...

                                               

पाञ्चाल

पांचाल या पान्चाल राज्य प्राचीन भारत के १६ महाजनपदों में से एक था। यह उत्तर में हिमालय के भाभर क्षेत्र से लेकर दक्षिण में चर्मनवती नदी के उत्तरी तट के बीच के मैदानों में फैला हुआ था। इसके पश्चिम में कुरु, मत्स्य तथा सुरसेन राज्य थे और पूर्व में न ...

                                               

मल्ल महाजनपद

मल्ल प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में से एक था। इसका उल्लेख अंगुत्तर निकाय में आया है। मल्ल नाम मल्ल राजवंश के नाम पर है जो इस महाजनपद की उस समय शासक थी। मल्लों की दो शाखाएँ थीं। एक की राजधानी कुशीनारा थी जो वर्तमान कुशीनगर है तथा दूसरे की राजधान ...

                                               

वज्जि

वज्जि या वृजि प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में से एक था। कई छोटे राज्यों को मिलाकर इसकी उत्पत्ति हुई थी। इसकी राजधानी वैशाली थी। वज्जि के गणराज्य बनने के बाद इसका राज्य-संचालन अष्टकुल द्वारा होने लगा। उस समय वज्जि एवं लिच्छवी कुल सार्वाधिक महत्वप ...

                                               

वत्स

वत्स या वंश या बत्स या बंश प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में से एक था। यह आधुनिक इलाहाबाद के आसपास केन्द्रित था। उत्तरपूर्व में यमुना की तटवर्ती भूमि इसमें सम्मिलित थी। इलाहाबाद से ३० मील दूर कौशाम्बी इसकी राजधानी थी। वत्स को वत्स देश और वत्स भूमि ...

                                               

निकिता ख़्रुश्चेव

निकिता सरगेयेविच ख़्रुश्चेव​ शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ के सर्वोच्च नेता थे। १९५३ से १९६४ में वह सोवियत साम्यवादी पार्टी के प्रथम सचिव रहे और फिर १९५८ से १९६४ तक सोवियत संघ के प्रधान मंत्री रहे। उनके काल में भूतपूर्व सोवियत तानाशाह जोसेफ़ स्टा ...

                                               

लियोनिद ब्रेझ़नेव

लियोनिद ईलिच ब्रेझ़नेव, सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी की केन्द्रीय समिति के भूतपूर्व महासचिव थे और सन् 1964 से सन् 1982 में अपनी मृत्यु तक सोवियत संघ के प्रमुख शासक थे। उनका अठाराह साल का शासनकाल जोसेफ स्टालिन के अलावा किसी भी अन्य सोवियत शासक ...