ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 313




                                               

सुदामा पांडेय धूमिल

सुदामा पाण्डेय धूमिल हिंदी की समकालीन कविता के दौर के मील के पत्थर सरीखे कवियों में एक है। उनकी कविताओं में आजादी के सपनों के मोहभंग की पीड़ा और आक्रोश की सबसे सशक्त अभिव्यक्ति मिलती है। व्यवस्था जिसने जनता को छला है, उसको आइना दिखाना मानों धूमिल ...

                                               

ग्राम्या

ग्राम्या में सुमित्रानंदन पंत की सन 1939 से 1940 के बीच लिखी गई कविताओं का संग्रह है। इनके विषय में वे ग्राम्या की भूमिका में लिखते हैं-- ग्राम्या में मेरी युगवाणी के बाद की रचनाएँ संग्रहीत हैं। इनमें पाठकों को ग्रामीणों के प्रति केवल बौद्धिक सहा ...

                                               

चिदंबरा

चिदंबरा’ वह कविता संग्रह है जिसके लिए १९६८ में सुमित्रानंदन पंत को ज्ञानपीठ से सम्मानित किया गया। यह संग्रह उनकी काव्य-चेतना के द्वितीय उत्थान की परिचायिका है, उसमें ‘युगवाणी’ से लेकर ‘अतिमा’ तक की रचनाओं का संचयन है, जिसमें ‘युगवाणी, ‘ग्राम्या’, ...

                                               

पल्लव कविता संग्रह

पल्लव सुमित्रानंदन पंत का तीसरा कविता संग्रह है जो 1928 में प्रकाशित हुआ था। यह हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के प्रारंभ का समय था और इसकी लगभग सभी कविताएँ प्रकृति के प्रति प्रेम में डूबी हुई हैं। माना जाता है कि पल्लव में सुमित्रानंदन पंत की स ...

                                               

स्वच्छंद कविता संग्रह

स्वच्छंद श्री सुमित्रानंदन पंत की जन्मशती के अवसर पर सन 2000 में, उनकी विपुल काव्य-संपदा से से चुनी हुई कविताओं को लेकर तैयार किया गया है। यह चयन पंतजी के अंतिम दौर की कविताओं के इर्द-गिर्द ही नहीं घूमता, जो काल की दृष्टि से हमारे अधिक निकट है, ब ...

                                               

क्या भूलूं क्या याद करूँ

क्या भूलूं क्या याद करूँ हरिवंश राय बच्चन की बहुप्रशंसित आत्मकथा तथा हिन्दी साहित्य की एक कालजयी कृति है। यह चार खण्डों में हैः क्या भूलूँ क्या याद करूँ, नीड़ का निर्माण फिर, बसेरे से दूऔर दशद्वार से सोपान तक। इसके लिए बच्चनजी को भारतीय साहित्य क ...

                                               

बसेरे से दूर

बसेरे से दूर, हरिवंश राय बच्चन की आत्मकथा,‘क्या भूलूँ क्या याद करूँ’, ‘नीड़ का निर्माण फिर’, ‘बसेरे से दूर’ और ‘दशद्वार से सोपान तक’ नामक चार खंडों में प्रकाशित उनकी आत्मकथा, का तीसरा खण्ड है।

                                               

अद्दहमाण

अद्दहमाण ने संदेश रासक नामक प्रसिद्ध काव्य की रचना की है। इनकी जन्मतिथि का अभी तक अंतिम रूप से निर्णय नहीं हो सका है। किंतु संदेश रासक के अंतसाक्ष्य के आधापर मुनि जिनविजय ने कवि अब्दुल रहमान को अमीर खुसरो से पूर्ववर्ती सिद्ध किया है और इनका जन्म ...

                                               

अब्दुर्रहमान (कवि)

सन्देश रासक/रासो उनकी प्रसिद्ध कृति है जिसे 1207 ई॰ के लगभग का बताया जाता है। यह एक दूतकाव्य है। हिंदी साहित्य में प्रकृति वर्णन का समावेश करने वाले प्राथमिक कवियों में इनकी गणना की जाती है।

                                               

अमोघ नारायण झा

पंडित अमोघ नारायण झा अमोघ जन्म: भद्र कृष्ण द्वितीय, १९२४ इसवी, तत्कालीन पूर्णिया जिले का जयनगर गाव, बिहार शिस्खा: साहित्य भूषण, B.A.C.T. लब्ध स्वर्ण पदक वृत्ति: स्वतंत्रता सेनानी, हिंदी अध्यापक, सम्मानित साहित्यकार कृति: साप्ताहिक विश्वा मित्र, क ...

                                               

अयोध्या प्रसाद खत्री

अयोध्या प्रसाद खत्री का नाम हिंदी पद्य में खड़ी बोली हिन्दी के प्रारम्भिक समर्थकों और पुरस्कर्ताओं में प्रमुख है। उन्होंने उस समय हिन्दी कविता में खड़ी बोली के महत्त्व पर जोर दिया जब अधिकतर लोग ब्रजभाषा में कविता लिख रहे थे। उनका जन्म बिहार में ह ...

                                               

अरुण मित्तल अद्भुत

डॉ॰ अरुण मित्तल ‘अद्भुत’ एक हिन्दी कवि हैं। पेशे से प्रबंधन के प्राध्यापक अरुण गजल, कविता, कहानी, लघुकथा, संस्मरण, लेख तथा फीचर विधाओं में अपनी लेखनी चला रहे हैं। अरुण अद्भुत का मुख्य स्वर" ओज” है। उनकी लगभग 300 रचनाएँ विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में ...

                                               

ईश्वरदास (कवि)

ईश्वरदास हिन्दी भाषा के कवि थे जिन्होने सत्यवतीकथा नामक पुस्तक की रचना की। उक्त पुस्तक दिल्ली के बादशाह सिकंदर शाह के समय में लिखी गई। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने सत्यवतीकथा को अवधी की सबसे पुरानी रचना माना है । पुस्तक दोहे और चौपाइयों में लिखी गई ह ...

                                               

करनेस (कवि)

करनेस, अकबर के दरबार से संबंध रखनेवाले हिंदी के एक कवि थे। इनका जन्मकाल सन्‌ 1554 ई. और रचनाकाल 1580 ई. के लगभग माना जाता है। मिश्रबंधुविनोद के अनुसार ये नरहरि कवि के साथ अकबर के दरबार में आया जाया करते थे। करनेस ने कर्णाभिरण, श्रुतिभूषण तथा भूपभ ...

                                               

कवींद्राचार्य सरस्वती

कवीन्द्राचार्य सरस्वती ब्रजभाषा के कवि थे। सत्रहवीं शताब्दी में भारत में जो श्रेष्ठ तथा दिग्गज आचार्य कवि हुए उनमें कवींद्राचार्य सरस्वती का नाम विशेष उल्लेखनीय है। दक्षिण में गोदावरी के तीपर एक गाँव में ऋग्वेदीय आश्वलायन शाखा के ब्राह्मण कुल में ...

                                               

कुमार अंबुज

कुमार अंबुज हिन्दी के सुप्रसिद्ध,चर्चित कवि हैं। उनका पहला कविता संग्रह किवाड़1992,जिसकी शीर्षक कविता को भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार मिला। क्रूरता 1996, दूसरा कविता संग्रह है। उसके बाद अनंतिम1998, अतिक्रमण2002 और 2011 में अमीरी रेखा कविता संग्रह व ...

                                               

कृपाराम (काव्यशास्त्री)

इनका कुछ वृतांत ज्ञात नहीं है। इन्होंने संवत् १५९८ में रसरीति पर हिततरंगिणी नामक ग्रन्थ दोहों में रचा। रीति या लक्षण ग्रंथो में यह बहुत पुराना ग्रन्थ है। कवि ने कहा है कि अन्य कवियों ने बड़े छंदों के विस्तार में शृंगार रस का वर्णन किया है पर मैंन ...

                                               

गंग कवि

कवि गंग या गंग कवि हिन्दी के कवि थे। उनका वास्तविक नाम गंगाधर था। वे अकबर के दरबारी कवि थे। जन्म, निधनतिथि तथा जन्मस्थान विवादास्पद है। वैसे ये इकनौर के भट राव कहे जाते हैं। शिवसिंह सेंगर के आधापर मिश्रबंधु इनका जन्म सं. १५९५, तासी इनका रचनाकाल स ...

                                               

घासीराम व्यास

घासीराम व्यास भारत के स्वतन्त्रता सेनानी एवं हिन्दी कवि थे। इन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करने में बढ़ चढ़कर भाग लिया। इन्होने प्रत्येक विषय पर रचनाएँ की हैं जिनमें प्रकृतिपरक, शृंगारिक तथा राष्ट्रीय विचारधारा से युक्त महत्वपूर्ण हैं। कवि दं ...

                                               

चन्द्रशेखर वाजपेयी

चंद्रशेखर वाजपेयी 19वीं शताब्दी के हिन्दी कवि हैं। इनका जन्म सं. 1855, पौष शुक्ल 10, को मोजबाबाद फतेहपुर में हुआ था। इनके पिता मनीराम वाजपेयी भी अच्छे कवि थे। इनके गुरु असनी के करनेश महापात्र थे, जो "कर्णभरण", "श्रुतिभूषण" और भूपभूषण" नामक ग्रंथो ...

                                               

जगन्नाथदास रत्नाकर

इनका जन्म सं. 1923 सन्‌ 1866 ई. के भाद्रपद शुक्ल पंचमी के दिन हुआ था। भारतेंदु बावू हरिश्चंद्र की भी यही जन्मतिथि थी और वे रत्नाकर जी से 16 वर्ष बड़े थे। उनके पिता का नाम पुरुषोत्तमदास और पितामह का नाम संगमलाल अग्रवाल था जो काशी के धनीमानी व्यक्त ...

                                               

जमाल

शिवसिंहसरोज में इन्हें जमालुद्दीन, पिहानी हरदोई निवासी और सं. १६२५ में उपस्थित कहा गया है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने जमाल को मुसलमान कवि और उनका रचना-काल संवत् १६२७ अनुमानत: माना है। विश्वनाथप्रसाद मिश्र ने इनके विषय में एक दंतकथा का उल्लेख किया ह ...

                                               

ठाकुर (कवि)

ठाकुर नाम के हिंदी में तीन प्रसिद्ध कवि हुए हैं - असनीवाले प्राचीन ठाकुर, असनीवाले दूसरे ठाकुऔर तीसरे ठाकुर बुंदेलखंडी। संख्या में तीन होने के कारण ये ठाकुरत्रयी भी कहलाए।

                                               

तोषमणि

जैसा कि कवि के आत्मकथन शुक्ल चतुर्भुंज को सुत तोष, बसै सिंगरौर जहाँ रिषि थानो। दच्छिन देव नदी निकटै दस कोस प्रयागहि पूरब मानौ से प्रकट है कि वे प्रयाग से पूर्व दस कोस दूर गंगातट पर स्थित सिंगरौर शृंगवेरपुर गाँव के निवासी चतुर्भुज शुक्ल के लड़के थ ...

                                               

दीनदयालु गिरि

दीनदयालु गिरि हिंदी कवि थे। हिंदी के काव्यगमन में वे एक ऐसे नक्षत्र है जो अपने अन्योक्तिप्रकाश के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। इनका आविर्भाव रीतिकाल के उत्तर भाग एवं आधुनिक काल के संधियुग में हुआ, अत: उनके काव्य में दोनों युगों की विशेषताएँ समा ...

                                               

देवल आशीष

21 मार्च 1971 को लखनऊ में जन्मे देवल आशीष हिंदी गीत के रचनाकार हैं। जनसंचार एवम् वाणिज्य में स्नातकोत्तर की उपाधियाँ प्राप्त करने वाले इस रचनाकार का मूल विषय प्रेम है।

                                               

धरनीदास

धरनीदास हिन्दी के सन्त कवि थे। इननका जन्म १६१६ ई. के आसपास मांझी गाँव, जिला सारन बिहार, में हुआ था। आपके तीन ग्रंथ प्रसिद्ध हैं- शब्दप्रकाश, रत्नावली और प्रेमप्रगास। इलाहाबाद के बेलवेडियर प्रेस से प्रकाशित धरनीदास की बानी के बहुसंख्यक पद शब्दप्रक ...

                                               

धरमदास

धर्मदास कबीर के परम शिष्य और उनके समकालीन सन्त एवं हिन्दी कवि थे। धनी धर्मदास को छत्तीसगढ़ी के आदि कवि का दर्जा प्राप्त है। कबीर के बाद धर्मदास कबीरपंथ के सबसे बड़े उन्नायक थे।

                                               

नकछेदी तिवारी

नकछेदी तिवारी हिन्दी साहित्य के एक कवि थे। वे अज्ञान उपनाम से हिन्दी काव्यरचना करते थे। डुमराँव शाहाबाद निवासी तिवारी जी का जन्म हल्दी गाँव में सं. १९१९ वि. में हुआ था। ये गद्य पद्य दोनों ही लिखते थे। काव्य के क्षेत्र में इन्होंने स्फुट रचनाएँ ही ...

                                               

पलटू साहब

संत पलटू साहब के जन्म वा मरण के समय के निश्चित पता नहीं चलता। अयोध्या से प्राय: चार मील पर अवस्थित रामकोट में इनकी एक समाधि है जहाँ पर इनकी मृत्युतिथि आश्विन शुक्ला 12 बतलाई जाती है। किंतु कोई संवत्‌ नहीं दिया जाता और इसी प्रकार इनके शिष्य हुलासद ...

                                               

बनारसीदास (कवि)

बनारसीदास कवि थे। वे मूलत: एक श्रीमल जैन व्यापारी थे। वे अपनी काव्यात्मक आत्मकथा अर्धकथानक के लिये जाने जाते हैं। यह आत्मकथा ब्रजभाषा में है। यह किसी भारतीय भाषा में लिखी हुई प्रथम आत्मकथा है। जिस समय उन्होंने यह रचना की, उनकी आयु ५५ वर्ष थी।

                                               

बाल गोविन्द द्विवेदी

बाल गोविन्द द्विवेदी का जन्म १५ जनवरी सन् १९४८ में उत्तर प्रदेश के ज़िले फतेहपुर स्थित ग्राम-रारी खुर्द में हुआ। इनके पिता का नाम आचार्य श्री राम प्यारे द्विवेदी था जो स्वयं एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। माता का नाम श्रीमती कमला द्विवेदी था। श ...

                                               

भगवंतराय खीची

महराज भगवंतराय खीची उत्तर प्रदेश के जिला फतेहपुर के रहनेवाले थे। इनके पास 14 परगने थें, जिसके यह स्वतंत्र राजा थे ये कई सुकवियों के आश्रयदाता और बड़े गुणग्राही नरेश थे। महाराज छत्रसाल ओर छत्रपति शिवाजी का जैसा गुणगान भूषण ने किया वैसे ही अनेक सुक ...

                                               

भारत यायावर

भारत यायावर हिन्दी के जाने माने साहित्यकार हैं। उनका जन्म आधुनिक झारखंड के हजारीबाग जिले में हुआ। सुरु से ही गरीबी में पले बढे भारत ने विलक्षण प्रतिभा पायी थी I चार भाई और दो बहनो के बिच भारत अपनी बड़ी बहन के सबसे करीब थे I इनका बड़ी बहन के प्रति ...

                                               

मंझन

मंझन, हिंदी सूफी प्रेमाख्यान परंपरा के कवि थे। मंझन के जीवनवृत्त के विषय में उसकी एकमात्र कृति "मधुमालती" में संकेतित आत्मोल्लेख पर ही निर्भर रहना पड़ता है। मंझन ने उक्त कृति में शहएवक्त सलीम शाह सूर, अपने गुरू शेख मुहम्मद गौस एवं खिज्र खाँ का गु ...

                                               

मनियार सिंह

मनियार सिंह हिन्दी के कवि है। मनियारसिंह जन्म वाराणसी में संवत् 1807 विक्रमी के लगभग हुआ। इनके पिता का नाम श्यामसिंह था। "हनुमत् छबीसी" नामक रचना से ज्ञात होता है कि इन्होंने कुछ समय बलिया में भी बिताया था। रामचंद्र पंडित इनके प्रमुख आश्रयदाता और ...

                                               

मलयजी

मलय हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में प्रगतिशील चेतना युक्त नवीन कवियों में महत्त्वपूर्ण स्थान रखने वाले कवि हैं। कविता के अतिरिक्त उन्होंने कहानियाँ, आलोचना एवं अनुवाद के क्षेत्र में भी महत्त्वपूर्ण कार्य किया है।

                                               

माधव सिंह छितिपाल

माधवसिंह छितिपाल अमेठीनरेश एवं हिन्दी कवि थे। कविवर छितिपाल की गणना उन भारतीय नरेशों में होती है। जो कुशल शासक होने के साथ सहृदय कवि भी थे। इन्होंने अमेठी राज्य तथा हिंदी साहित्य की श्रीवृद्धि में पूरा योगदान दिया। इन्होंने प्रयाग, काशी, विंध्याच ...

                                               

माधवदास माधुरी

माधवदास माधुरी चैतन्य सम्प्रदाय के हिन्दी कवि थे। इनका नाम माधव दास था और ये कपूर खत्री थे। कहीं अन्यत्र से आकर वृंदावन के पास माधुरीकुंड पर रहने लगे और अपना उपनाम माधुरी रखा। वंशीवटमाधुरी, केलिमाधुरी, उत्कंठामाधुरी, वृंदावनमाधुरी, दानमाधुरी, मान ...

                                               

मोहम्मद इमरान प्रतापगढ़ी

इमरान प्रतापगढ़ी एक उर्दू और हिंदी भाषाओं के कवि हैं। इनका जन्म 6 अगस्त 1987 में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ जिले मे हुआ था। इन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है और ये 2019 मुरादाबाद लोकसभा सीट से कांग्रेस पार्टी से चुनाव भी लडे थे।

                                               

रइधू

मेहेसर चरिउ, सिरिवाल चरिउ, बलहद्द चरिउ, सुक्कोसल चरिउ, धण्णकुमार चरिउ, जसहर चरिउ, सम्मइजिण चरिउ, पउम चरिउ, सम्मत्त गुण णिहाण कव्व, वित्तसार, सिद्धंतत्थसारो इत्यादि ।

                                               

रमई काका

रमई काका अवधी के प्रसिद्ध साहित्यकार थे। उनका वास्तविक नाम चन्द्रभूषण त्रिवेदी था। आप बैसवाड़ी अवधी के उत्तम हास्य कवि थे।

                                               

रसनिधि

दतिया राज्य के बरौनी क्षेत्र के जमींदार पृथ्वीसिंह, रसनिधि नाम से काव्यरचना करते थे। इनका रचनाकाल संवत् १६६० से १७१७ तक माना जाता है। इनका सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ रतनहजारा है जो बिहारी सतसई को आदर्श मानकर लिखा गया प्रतीत होता है। बिहारी की दोहापद्धति क ...

                                               

रामसहायदास

रामसहायदास वाराणसी के चौबेपुर के रहनेवाले अस्थाना कायस्थ थे। भवानीदास इनके पिता और चिंतामणि इनके गुरु थे। काशीनरेश महाराज उदितनारायण सिंह १७९५ - १८३५ ई. ही इनके आश्रयदाता थे। इनके जन्मकाल के विषय में कोई सूचना नहीं मिलती, किंतु शिवसिंह सरोज में इ ...

                                               

रामेश्वर शुक्ल अंचल

रामेश्वर शुक्ल अंचल हिन्दी भाषा के कवि थे। इनका जन्म - 01 मई 1915 को ग्राम किशनपुर, जिला - फतेहपुर उत्तर प्रदेश में हुआ था एवं मृत्यु - 12 अक्टूबर 1995 को हुई थी। शुक्ल ने जबलपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में वर्षों तक अध्यापन किया तथा विभागा ...

                                               

राय देवीप्रसाद पूर्ण

राय देवीप्रसाद जी का जन्म मार्गशीर्ष कृष्ण १३, संवत् १९२५ वि. को जबलपुर में हुआ था। इनके पिता का नाम राय वंशीधर था। वंशपरंपरागत राय उपाधि इनके पूर्वजों का बादशाही शासनकाल में मिली थी। इनका पैत्रिक निवास कानपुर जिले की घाटमपुर तहसील के अंतर्गत भदर ...

                                               

लछिराम

हिंदी में लछिराम नाम के सात कवियों का उल्लेख मिलता है जिनमें बहुज्ञात और प्रख्यात हैं 19 वीं शती के अमोढ़ा या अयोध्यावाले लछिराम। लछिराम जन्म संवत् 1898 में पौष शुक्ल 10 को शेखपुरा जि. बस्ती में हुआ। पिता पलटन ब्रह्मभट्ट ब्राह्मण थे। राजा अमोढ़ा ...

                                               

लाल कवि

गोरेलाल के पूर्वज पहले आंध्र प्रदेश में राजमहेंद्री जिले के नृसिंहक्षेत्र धर्मपुरी में रहते थे, किंतु बाद में वे रानी दुर्गावती के समय सं. 1535 वि. में आंध्र छोड़ बुंदेलखंड में जा बसे। इनके पूर्वज काशीनाथ भट्ट की कन्या "पूर्णा" का विवाह महाप्रभु ...

                                               

शरद आलोक

डॉ. सुरेशचंद्र शुक्ल शरद आलोक हिन्दी के आधुनिक कवि हैं। इनका मूल नाम सुरेशचन्द्र शुक्ल है और इनका जन्म 10 फरवरी 1954, को लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हुआ था। ये हिन्दी के उपन्यास, कहानी, नाटक, कविता आदि लिखते हैं।

                                               

शालिभद्र सूरि

शालिभद्र सूरि एक कवि थे जो भरतेश्वर बाहुबलि रास नामक ग्रन्थ के रचयिता हैं। इस रचना के दो संस्करण मिलते हैं। पहला प्राच्य विद्या मन्दिर बड़ौदा से प्रकाशित किया गया है तथा दूसरा "रास और रासान्वयी काव्य में प्रकाशित हुआ है। कृति में रचनाकाल सं. १२३१ ...