ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 314




                                               

एल्युमिनियम कांस

ऐल्यूमिनियम और ताम्र की मिश्रधातुएँ, जिनमें ताम्र की मात्रा अधिक हो, ऐल्यूमिनियम कांस कहलाती हैं। इनकी विशेषताएँ हैं उच्च दृढ़ता, विधि आकारों में निर्मित किए जाने की क्षमता, क्षय तथा क्लांति के प्रति उच्च प्रतिरोधशक्ति, सुंदर स्वर्णिम रंग और उष्म ...

                                               

कांसा

कांसा या कांस्य, किसी तांबे या ताम्र-मिश्रित धातु मिश्रण को कहा जाता है, प्रायः जस्ते के संग, परंतु कई बार फासफोरस, मैंगनीज़, अल्युमिनियम या सिलिकॉन आदि के संग भी होते हैं। यह पुरावस्तुओं में महत्वपूर्ण था, जिसने उस युग को कांस्य युग नाम दिया। इस ...

                                               

ड्यूरालुमिन

ड्यूरालुमिन एक प्रमुख मिश्र धातु है। इसमें 95% एल्युमिनियम, 4% कापर, 0.5% मैंगनीज तथा 0.5% मैंग्नेसियम होता है। वायुयान तथा हल्के औजारों को बनाने में इसका उपयोग होता है।

                                               

नाइक्रोम

निकेल आणि क्रोमियम धातूंचे प्राधान्य असलेल्या मिश्रधातू. या मिश्रधातूंच्या तारांचा उपयोग प्रामुख्याने विद्युत् रोधन व विद्युत् रोधापासून उष्णतानिर्मितीसाठी होतो. उच्च तापमान दीर्घकाल सहन करता येणे हा ह्या मिश्रधातूंचा मुख्य गुण आहे. त्यांचा विद्य ...

                                               

प्यूटर

प्यूटर एक मिश्रातु है जिसके बर्तन आदि बनते हैं। पारम्परिक रूप से इसमें ८५ से ९९% तक टिन तथा शेष ताँबा, एंटीमनी, बिस्मथ आदि होते हैं। इसका गलनांक 170–230 °C के बीच होता है। यह घातवर्धनीय मिश्रधातु है।

                                               

संलय

पारा तथा अन्य किसी धातु की मिलावट से बनी मिश्रधातु को संलय या संरस कहते हैं। केवल लोहे को छोड़कर प्राय: सभी धातुएँ पारे के साथ मिलकर मिश्रधातु बनाती हैं। कुछ समय पूर्व संरसों का व्यवहार स्वर्ण, चाँदी, जस्ता जैसी धातुओं में किया जाता था। दाँत के ड ...

                                               

स्टेनलेस स्टील

बेज़ंग फ़ौलाद एक इस्पात है जो वायुमंडल तथा कार्बनिक और अकार्बनिक अम्लों से कलुषित नहीं होता है। साधारण इस्पात की अपेक्षा ये अधिक ताप भी सह सकते हैं। इस्पात में ये गुण क्रोमियम मिलाने से उत्पन्न होते हैं। इसमें 15-20% क्रोमियम, 8-10% निकेल तथा साध ...

                                               

कच्चा लोहा

लौह अयस्क को अधिक कार्बन वाले ईँधन बनता है उसे कच्चा लोहा कहते हैं। इसमें प्रायः चूने के पत्थर को फ्लक्स के रूप में प्रयोग करते हैं। ईंधन के रूप में चारकोल और एंथ्रासाइट भी प्रयोग किये जा सकते हैं। कच्चे लोहे में कार्बन की मात्रा बहुत अधिक होती ह ...

                                               

मोरचा

मोरचा या जंग कई भिन्न प्रकार की लोहे की ऑक्साइडों का नाम है। आम भाषा में इसे लाल और नारंगी रंग के उन पदार्थों के लिए प्रयोग किया जाता है जो पानी या हवा की मौजूदगी में लोहे और ऑक्सीजन की रासायनिक अभिक्रिया से बन जाते हैं। लोहे के संक्षारण में ज़ंग ...

                                               

संक्षारण

धातुओं का संक्षारण रासायनिक क्रिया है, जिसके फलस्वरूप धातुओं का क्षय एवं ह्रास होता है। धातुओं की क्षरणक्रिया, जिनमें यांत्रिक कारकों के फलस्वरूप धातुओं का ह्रास होता है, इस क्रिया से भिन्न होती है। धातुओं में संक्षारण वस्तुत: रासायनिक क्रिया, अथ ...

                                               

निमरोद किला

निमरोद किला ; Nimrod Fortress, "कैसल ऑफ़ द लार्ज क्लिफ", बाद में क़लायत नमुरुद, "निम्रोद का महल", हिब्रू: מבצר נמרוד) मिवत्जर निमरोड, "निमरोद का किला") एक मध्ययुगीन मुस्लिम महल है, जो कि हेर्मोन पर्वत की दक्षिणी ढलानों पर स्थित है, समुद्र तल से 8 ...

                                               

शानहाइगुआन

शानहाइ दर्रा या शानहाइगुआन, जिसे यू दर्रा भी कहते हैं, चीन की विशाल दीवार में बना एक प्रमुख दर्रा है, जिसके ज़रिये दीवार को पार किया जा सकता है। यह दीवार के सुदूर पूर्वी छोर के पास स्थित है, जो दीवार के बोहाई सागर के किनारे अंत हो जाने से थोड़ा प ...

                                               

आइकिया प्रभाव

आइकिया प्रभाव एक संज्ञानात्मक पूर्वाग्रह है। जिसमें उपभोक्ता उत्पादों पर एक अधिकतर उच्च मूल्य रखते हैं जिनको उन्होंने आंशिक रूप से बनाया है। यह नाम स्वीडिश निर्माता और फर्नीचर रिटेलर आइकिया से निकला है, जोकि कई फर्नीचर उत्पाद बेचता है।

                                               

व्युत्पन्न इकाइयाँ

मूल इकाइयों को इकठ्ठे रखकर अन्य मात्राओं की इकाइयाँ व्युत्पन्न की जा सकती हैं। दो आम रहित इकाइयों रेडियन और स्टर्डियन सहित बीस व्युत्पन्न इकाइयाँ अपने विशेष नामों सहित हैं

                                               

आत्माराम नाडकर्णी

आत्माराम नाडकर्णी भारत के उच्चतम न्यायालय में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल हैं। 9 मई 2016 को मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने उन्हें इस पद पर तीन वर्षों के लिए नियुक्त किया है।

                                               

महान्यायवादी (भारत)

भारत का महान्यायवादी भारत सरकार का मुख्य कानूनी सलाहकार तथा भारतीय उच्चतम न्यायालय में सरकार का प्रमुख वकील होता है। भारत के महान्यायवादी अनुच्छेद ७६ की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। जो व्यक्ति supreme court न्यायाधीश बनने की योग ...

                                               

वी कृष्णस्वामी ऐयर

वेंकटराम ऐयर कृष्णस्वामी ऐयर भारत के एक अधिवक्ता तथा मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति थे। उन्होने मद्रास संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना की। वे ब्रिटिश कम्पनी आर्बुथनॉट ऐण्ड कम्पनी के अंशधारक पर मुकदमा चलाने के लिये प्रसिद्ध है।

                                               

त्रिभुजों के हल

त्रिकोणमिति में त्रिभुज का हल का मतलब त्रिभुज के सभी तीन कोण तथा तीन भुजाओं की लम्बाई ज्ञात करना है। इस समस्या में कुछ जानकारी दी होती है और शेष की गणना करनी होती है। नीचे कुछ प्रमुख स्थितियाँ दी गयीं है ; A = Angle - यदि दो कोण दिये हों तो तीसरा ...

                                               

परिवृत्त

ज्यामिति में किसी बहुभुज का परिवृत्त ऐसा वृत्त होता है जो उस बहुभुज के हर शीर्ष से गुज़रता हो। इस वृत्त के केन्द्र को परिकेन्द्और त्रिज्या को परित्रिज्या कहते हैं। प्रत्येक बहुभुज ऐसा नहीं होता कि उसके लिए एक परिगत वृत्त बनाया जा सके और जिसके लिए ...

                                               

समरूपता

यदि दो ज्यामितीय वस्तुओं का आकार समान हो तो उन्हें समरूप कहा जाता है। दूसरे शब्दों में, यदि दूसरी आकृति की सभी लम्बाइयों को समान अनुपात में घटाकर या बढ़ाकर पहली आकृति प्राप्त की जा सकती है तो ये दोनो आकृतियाँ परस्पर समरूप हैं। किन्ही दो समरूप बहु ...

                                               

सर्वांगसमता

ज्यामिति में बिन्दुओं के दो समुच्चय को परस्पर सर्वांगसम कहते हैं यदि उनमें से किसी एक समुच्चय को स्थानान्तरण, घूर्णन, परावर्तन या इनके मिश्रित क्रियाओं के द्वारा परिवर्तित करने पर दूसरा समुच्चय प्राप्त किया जा सके। सर्वांगसम = सर्व + अंग + सम = स ...

                                               

हीरोन का सूत्र

ज्यामिति में हीरोन का सूत्र त्रिभुज की तीनों भुजाएँ ज्ञात होने पर उसका क्षेत्रफल निकालने का एक सूत्र है। इसे हीरो का सूत्र भी कहते हैं। सूत्र का यह नाम अलेक्जैण्ड्रिया के हीरोन के नाम पर पड़ा है। इस सूत्र के अनुसार, यदि किसी त्रिभुज की तीन भुजाएँ ...

                                               

त्रिज्या

अंग्रेज़ी में त्रिज्या को रेडियस radius, व्यास को डायमीटर diameter, वृत्त को सरकल circle और परिधि को सर्कमफ़्रेन्स circumference कहते हैं।

                                               

व्यास (ज्यामिति)

ज्यामिति में व्यास किसी वृत्त में ऐसी रेखांश होती है जो वृत्त के केन्द्र से निकले और जिसके अंतबिन्दु वृत्त पर स्थित हों। इसकी लम्बाई वृत्त की अधिकतम चौड़ाई भी होती है और यह त्रिज्या से दुगनी लम्बी होती है। इसे वृत्त की सबसे लम्बी सम्भव जीवा भी कह ...

                                               

अणु-अंश

रसायन विज्ञान में, किसी मिश्रण के किसी अवयव का अणु-अंश निम्नलिखित प्रकार से पारिभाषित है- x i = n i n t o t {\displaystyle x_{i}={\frac {n_{i}}{n_{tot}}}} जहाँ, n i {\displaystyle n_{i}} = अवयव के मोलों की संख्या तथा, ∑ i = 1 n i = n t o t ; ; ∑ ...

                                               

मोल (इकाई)

मोल एक SI मूल इकाई है, जो पदार्थ की मात्रा का मापन करता है। यह एक गण्य इकाई है। एक मोल में एवोगाद्रो संख्या के बराबर परमाणु, अणु, अन्य आरम्भिक कण होते हैं। एक मोल पदार्थ का ग्राम में भार, उस पदार्थ के एक परमाणु/अणु के AMU में भार की संख्या के बरा ...

                                               

रासायनिक ध्रुवीयता

रसायनशास्त्र में रासायनिक ध्रुवीयता किसी अणु या उसके अंशों में विद्युत आवेशों में होने वाले अलगाव को कहते हैं जिसके कारण अणु के कुछ भागों में ऋणात्मक आवेश और कुछ में धनात्मक अवेश देखा जा सकता है। इस से अणु में विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण या बहुध्रुव ...

                                               

विद्युत्-ऋणात्मकता

विद्युत्-ऋणात्मकता किसी परमाणु का एक रासायनिक गुण है जो दर्शाता है कि वह परणाणु किसी सहसंयोजी आबंध में एलेक्ट्रॉनों को आकर्षित करने में कितना सक्षम है। कभी-कभार प्रकार्यात्मक समूह के विद्युत-ऋणात्मकता की भी बात की जाती है। इसे प्रतीक χ द्वारा प्र ...

                                               

संयोजकता

20वीं शताब्दी के आरंभिक काल में वैज्ञानिक सर जे.जे. टॉमसन तथा नील्स बोर ने प्रयोगों तथा अपनी कल्पनाओं द्वारा परमाणुओं की रचना के बारे में हमारे ज्ञान में वृद्धि की ओर रदरफर्ड ने परमाणुओं के नाभिक nuclear रूप की विवेचना की। इसके अनुसार प्रत्येक पर ...

                                               

अंतःसर्पी श्रेणी

गणित में अंतःसर्पी श्रेणी एक श्रेणी है जिसके आंशिक योग निरसन के बाद केवल कुछ सीमित पदों तक सीमित हो जाते हैं। इस तरह की तकनीक को अन्तर विधि भी कहते हैं। दूसरे शब्दों में, निम्नलिखित श्रेणी ∑ k = 1 ∞ a k {\displaystyle \sum _{k=1}^{\infty }a_{k}} ...

                                               

अपसारी श्रेणी

गणित में अपसारी श्रेणी एक अनन्त श्रेणी है जो अभिसारी नहीं है, मतलब यह कि श्रेणी के आंशिक योग का अनन्त अनुक्रम का सीमान्त मान नहीं होता। यदि एक श्रेणी अभिसरण करती है तो इसका व्याष्‍टिकारी पद n वाँ पद जहाँ n अनन्त की ओर अग्रसर है। शून्य की ओर अग्रस ...

                                               

अभिसारी श्रेणी

गणित में संख्याओं के किसी अनुक्रम के योग को श्रेणी कहते हैं। यदि पदों की संख्या अपरिमित हो, तो इस श्रेणी को अनंत श्रेणी कहते हैं। यदि दिया हुआ अनुक्रम { a 1, a 2, a 3, … } {\displaystyle \left\{a_{1},\ a_{2},\ a_{3},\dots \right\}} है तो, अनुक्रम ...

                                               

आयलर संकलन

अभिसरण और अपसारी श्रेणी की गणित में आयलर संकलन एक संकलनीय विधि है। अर्थात यह किसी श्रेणी को एक मान निर्दिष्ट करने की, आंशिक योग के सीमान्त मान वाली पारम्परिक विधियों से अलग एक विधि है। यदि किसी श्रेणी Σ a n का आयलर रुपांतरण इसके योग पर अभिसरित हो ...

                                               

कौशी संघनन परीक्षण

गणित में कौशी संघनन परीक्षण, जिसे ऑगस्टिन लुइस कौशी के नाम से नामकरण किया गया एक अनन्त श्रेणी एक लिए मानक अभिसरण परीक्षण है। धनात्मक ह्रासमान अनुक्रम f के लिए ∑ n = 1 ∞ f n {\displaystyle \sum _{n=1}^{\infty }fn} अभिसारी है यदि और केवल यदि ∑ n = ...

                                               

डीरिख्ले परीक्षण

गणित में डीरिख्ले परीक्षण किसी श्रेणी के अभिसरण के परीक्षण की एक विधि है। इसका नामकरण इसके लेखक पीटर गुस्ताफ लजन डीरिक्ले के जर्नल डी मैथेमेटिक्स प्योर एट अप्पलिक़्यीक्स में प्रकाशन के बाद उनके मरणोपरान्त किया गया।

                                               

प्रत्यावर्ती श्रेणी

गणित में प्रत्यावर्ती श्रेणी निम्न प्रकार की अनन्त श्रेणी है: ∑ n = 0 ∞ − 1 n a n {\displaystyle \sum _{n=0}^{\infty }-1^{n}\,a_{n}} or ∑ n = 1 ∞ − 1 n − 1 a n {\displaystyle \sum _{n=1}^{\infty }-1^{n-1}\,a_{n}} जहाँ n के सभी मानों के लिए a n &g ...

                                               

प्रत्यावर्ती श्रेणी परीक्षण

प्रत्यावर्ती श्रेणी परीक्षण किसी अनन्त श्रेणी के पदों के अभिसरण के लिए काम में ली जाने वाली विधि है। इसकी उपपत्ति सर्वप्रथम गाटफ्रीड लैबनिट्ज़ ने की थी अतः इसे कई बार लैबनिट्ज़ परीक्षण अथवा लैबनिट्ज़ कसौटी भी कहते हैं।

                                               

बोरल संकलन

गणित में बोरल संकलन अथवा बोरेल संकलन एमिल बोरेल द्वारा अपसारी श्रेणियों के लिए दी गयी संकलन विधि है। यह विधि मुख्यतः अपसारी अलक्षणी श्रेणियों का योग प्राप्त करने के लिए उपयोगी है तथा कुछ अर्थों में ऐसी श्रेणियों के लिए सर्वश्रेष्ठ परिणाम देती है। ...

                                               

१ − २ + ३ − ४ + · · ·

गणित में, 1 − 2 + 3 − 4 + एक अनन्त श्रेणी है जिसके व्यंजक क्रमानुगत धनात्मक संख्याएं होती हैं जिसके एकांतर चिह्न होते हैं अर्थात प्रत्येक व्यंजक के चिह्न, इसके पूर्व व्यंजक से विपरीत होते हैं। श्रेणी के प्रथम m पदों का योग सिग्मा योग निरूपण की सह ...

                                               

वियुक्त बिन्दु

गणित में वियुक्त बिन्दु किसी समुच्चय का ऐसा बिन्दु होता है जिसके सभी पड़ोसी बिन्दु उस समुच्चय के सदस्य न हों, यानि वह बिन्दु समुच्चय के सभी अन्य बिन्दुओं से पृथक स्थित हो।

                                               

कौशी संवेग समीकरण

कौशी संवेग समीकरण कौशी द्वारा सुझावित आंशिक अवकल समीकरण है जो किसी भी सांतत्यक में संवेग अपवाहन के अन-आपेक्षिक संवेग की व्याख्या करता है: ρ D v D t = ∇ ⋅ σ + f {\displaystyle \rho {\frac {D\mathbf {v} }{Dt}}=\nabla \cdot {\boldsymbol {\sigma }}+\ ...

                                               

कौशी समस्या

कौशी समस्या गणित में उन आंशिक अवकल समीकरणों के हल से सम्बंधित है जो कुछ शर्तों का पालन करती हैं जो प्रांत के ऊनविम पृष्‍ठ पर दिए गये हैं। कौशी समस्या एक प्रारंभिक मान समस्या अथवा एक परिसीमा मान समस्या हो सकती है लेकिन यह इनमें से कोई भी नहीं है। ...

                                               

विसरण समीकरण

विसरण समीकरण एक आंशिक अवकल समीकरण है जो विसरण में प्रयुक्त पदार्थों के घनत्व गतिकी को वर्णित करती है। इस समीकरण को विसरण-सदृश व्यवहार करने वाली प्रक्रियाओं के लिए भी प्रयुक्त किया जाता है।

                                               

अवकल ज्यामिति

अवकल ज्यामिति गणित की एक विधा है जो कैलकुलस तथा रेखीय तथा बहुरेखीय बीजगणित का उपयोग करके ज्यामितीय समस्याओं का अध्ययन करती है। इसमें उन तलों और बहुगुणों के गुणों क अध्ययन किया जाता है जो अपने किसी अल्पांश के समीप स्थित हों जैसे किसी वक्र अथवा तल ...

                                               

वक्रता

गणित में वक्रता के कई अर्थ हैं जो मोटे तौपर आपस में सम्बन्धित भी हैं। किसी समतल में स्थित किसी वक्र के किसी बिन्दु पर उस वक्र की वक्रता निम्न प्रकार से परिभाषित की जाती है - κ = lim Δ S → 0 Δ φ Δ S = d φ d S {\displaystyle \kappa =\lim _{\Delta S ...

                                               

स्पर्शरेखा

ज्यामिति में किसी समतल में स्थित किसी वक्र की किसी बिन्दु पर स्पर्शरेखा या स्पर्शी उस सरल रेखा को कहते हैं जो उस वक्र को उस बिन्दु पर बस स्पर्श करती है, अर्थात् उस वक्र को केवल उसी बिन्दु पर छूती है और अन्य किसी बिन्दु पर नहीं। वक्र y = f के बिन् ...

                                               

लोलक (गणित)

सरल लोलक, वास्तविक लोलक का सरलीकृत रूप है जिसमें निम्नलिखित मान्यताएँ अन्तर्निहित हैं- इस गति में घर्षण या वायु के प्रतिरोध के कारण ऊर्जा का क्षय नहीं हो रहा। गति केवल दो बिमाओं 2-D में हो रही है। लोलक जिस धागे या रॉड से बंधा है वह शून्य द्रवयमान ...

                                               

हेमिल्टोनीय यांत्रिकी

हेमिल्टोनीय यांत्रिकी अथवा हेमिल्टोनियन यांत्रिकी चिरसम्मत यांत्रिकी के पुनःसूत्रिकरण पर आधारित एक विकसित सिद्धान्त है जो चिरसम्मत यांत्रिकी के समान परिणाम देता है। इसमें विभिन्न गणितीय सूत्रों का उपयोग होता है, जो सिद्धांतो को अधिक अमूर्त रूप मे ...

                                               

उद्भावना

उद्भावना हिन्दी की एक साहित्यिक पत्रिका है। इसके सम्पादक अजेय कुमार हैं। इस पत्रिका का प्रकाशन सन् 1986 से आरंभ हुआ और यह अपने प्रकाशन के 30 वर्ष पाकर चुकी है। इसका प्रकाशन शाहदरा, दिल्ली से होता है।

                                               

कोयला भारती

कोयला भारती भारत कोकिंग कोल लिमिटेड धनबाद की गृह पत्रिका है। प्रत्येक छमाही में इसका प्रकाशन किया जाता है। प्रत्येक वर्ष गणतन्त्र दिवस और स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर इसका विमोचन किया जाता है। अब तक इस पत्रिका के कुल 24 अंक प्रकाशित किए जा चुके है ...