ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 317




                                               

अनुपूरक वतुएं

अथशा म, एक पूरक वतु वह होती है िजसका तरोध नकरामक होता है। यह एक वैकिपक वतु के वपरत होता है। अथात कसी अय वतु क कमत घटने पर, वतु क मांग म बढ़ोर होती है। इसके वपरत कसी अय वतु क कमत बढ़ने पर, वतु क मांग म वतु क मांग घट जाती है यद वतु ए और बी एक दूसरे ...

                                               

बेरिऑन संख्या

कण भौतिकी में बेरिऑन संख्या निकाय की लगभग संरक्षित क्वान्टम संख्या है। B = 1 3 n q − n q ¯, {\displaystyle B={\frac {1}{3}}\leftn_{\text{q}}-n_{\bar {\text{q}}}\right,} जहाँ n q क्वार्क की एक संख्या है और n q प्रतिक्वार्क की एक संख्या है। बेरिऑनो ...

                                               

समभारिक प्रचक्रण

इससे पहले यह एक बात जानना जरूरी है कि संमभारिक क्या है? अर्थात जिसके परमाणु संख्या अलग तथा परमाणु भार समान हो उसे संमभारिक कहते हैं। यह समस्थानिक का विपरीत होता है। समभारिक प्रचक्रण कण का एक नैज गुण है। यह प्रबल अन्योन्य क्रिया से सम्बंधित क्वान् ...

                                               

इलेक्ट्रॉन न्यूट्रिनो

इलेक्ट्रॉन न्यूट्रिनो एक मूलभूत कण है। इसका प्रतीक चिह्न ν e है। इसका आवेश शून्य होता है अर्थात यह एक उदासीन कण है। न्यूट्रिनों तीन प्रकार के होते हैं जिनमें से यह इलेक्ट्रॉन से सम्बद्ध लेप्टॉनों की श्रेणी में आता है। इसका द्रव्यमान लगभग शून्य मा ...

                                               

नौवां ग्रह

नौवां ग्रह एक सम्भावित ग्रह है जो शायद हमारे सौर मंडल के बाहरी भाग में काइपर घेरे से भी आगे स्थित हो। कई खगोलशास्त्रियों ने कुछ वरुण-पार वस्तुओं की विचित्र कक्षाओं का अध्ययन कर के यह प्रस्ताव दिया है कि इन कक्षाओं के पीछे सूरज से सुदूर क्षेत्र मे ...

                                               

चकती का क्षेत्रफल

चकती का क्षेत्रफल और सामान्यतः जिसे r त्रिज्या के वृत्त का क्षेत्रफल भी कहा जाता है, πr 2 होता है। यहाँ प्रतीक π वृत्त की परिधि और उसके व्यास अथवा वृत्त के क्षेत्रफल और उसकी त्रिज्या के वर्ग के अनुपात के बराबर होता है।

                                               

ब्रह्मगुप्त का सूत्र

ब्रह्मगुप्त का सूत्र किसी चक्रीय चतुर्भुज का क्षेत्रफल निकालने का सूत्र है यदि उसकी चारों भुजाएँ ज्ञात हों। उस चतुर्भुज को चक्रीय चतुर्भुज कहते हैं जिसके चारों शीर्षों से होकर कोई वृत्त खींचा जा सके।I

                                               

ऊष्मागतिक तापक्रम

ऊष्मगतिक तापक्रम या परम ताप तापमान का विशुद्ध माप है। यह ऊष्मगतिकी के मुख्य प्राचलों में से एक है। ऊष्मागतिक तापक्रम ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम द्वारा परिभाषित है जिसमें सिद्धान्त रूप में न्यूनतम सम्भव ताप को शून्य बिन्दु माना जाता है। इस ताप को ...

                                               

ताप मापन

आधुनिक वैज्ञानिक थर्मामीटर और तापमान पैमाने का उपयोग करने वाले तापमान माप का आविष्कार आरंभिक 18वीं सदी में हुआ था, जब गैबरियल फ़ारेनहाइट ने ओले क्रिस्टनसेन रोएमर द्वारा विकसित किगए थर्मामीटर और पैमाने को अपनाया था। सेल्सियस पैमाना और केल्विन पैमा ...

                                               

दूरी

दूरी दिक् में किन्ही दो बिन्दुओं के बीच की जगह के सांख्यिक मापन को कहते हैं, अर्थात यह उन दोनों बिन्दुओं के बीच के पथ की लम्बाई का माप है। किसी गतिमान वस्तु द्वारा किसी समय में तय किए पथ की लंबाई को भी उस वस्तु द्वारा चली गई दूरी कहते हैं।

                                               

प्रभावी द्रव्यमान (ठोस-अवस्था भौतिकी)

एटम के अंदर इलेक्ट्रान नाभिक के चारो ओर चक्कर लगता रहता है चुकी यह इलेक्ट्रान चाकर लगता है और वोभी परवलयकार पथ पर जिसके कारण इलेक्ट्रान का द्रव्यमान बदलता रहता है इस द्रव्यमान को प्रभावी कहते है

                                               

अवोगाद्रो का नियम

अवोगाद्रो का नियम गैस से सम्बन्धित एक नियम है जिसका नाम अमेदिओ अवोगाद्रो के नाम पर रखा गया है। इसे "अवोगाद्रो की परिकल्पना" एवं "अवोगाद्रो का सिद्धान्त" के नाम से भी जाना जाता है। सन् १८११ में अवोगाद्रो ने यह परिकल्पना प्रस्तुत की, जो इस प्रकार ह ...

                                               

परासरण दाब

परासरण को यदि रोकना चाहें तो उसे रोकने के लिए उसके विपरीत एक वाह्य दाब लगाना पड़ेगा। परासरण को रोकने के लिये लिये आवश्यक वाह्य दाब की मात्रा को परासरण दाब कहते हैं। किसी भी विलयन का परासरण दाब विलायक में उपस्थित विलेय के अणुओं की सांद्रता के सीधे ...

                                               

लम्बाई

लम्बाई किसी वस्तु की लम्बे आयाम को कहते हैं। किसी वस्तु की लम्बाई, उसके दोनों छोरों के बीच की दूरी को कहते हैं। इसे ऊंचाई से पृथक करने के लिये, ऊंचाई ऊर्ध्वाकार में कही जाती है। लम्बाई को मापने के लिए विभिन्न साधन है जिन्हे हम मात्रक या ईकाई कहते ...

                                               

असमिका

If x > 0, then x ≥ 1 e 1 / e. {\displaystyle x^{x}\geq \left{\frac {1}{e}}\right^{1/e}.\,} If x > 0, then x ≥ x. {\displaystyle x^{x^{x}}\geq x.\,} If x, y, z > 0, then x + y z + x + z y + y + z x > 2. {\displaystyle x+y^{z}+x+z^{y}+y ...

                                               

गोलीय दर्पण

गोलीय दर्पण वे दर्पण हैं जिनका परावर्तक तल गोस्फेरिक) होता है। ये दो तरह के होते हैं - उत्तल दर्पण convex mirror / कान्वेक्स मिरर वैसा दर्पण जिसका परावर्तक सतह बाहर कि तरफ उभरा रहता है उसे उत्तल दर्पण कहते हैं. इनका परावर्तक तल बाहर की ओर उभरा हु ...

                                               

समतल दर्पण

दर्पण ऐसे प्रकाशीय तल हैं जो प्रकाश की किरणों के परावर्तन के द्वारा या तो प्रकाशपुंज को प्रत्यावर्तित कर देते हैं अथवा उसे एक बिंदु पर अभिसृत करके बिंब का निर्माण करते हैं। प्रकाशीय यंत्रों के, विशेष कर ज्योतिष से संबधित यंत्रों के, निर्माण में द ...

                                               

कांच

काच, काँच या कांच एक अक्रिस्टलीय ठोस पदार्थ है। कांच आमतौर भंगुऔर अक्सर प्रकाशीय रूप से पारदर्शी होते हैं। काच अथव शीशा अकार्बनिक पदार्थों से बना हुआ वह पारदर्शक अथवा अपारदर्शक पदार्थ है जिससे शीशी बोतल आदि बनती हैं। काच का आविष्कार संसार के लिए ...

                                               

कांच तंतु

प्लैटिनम धातु के बने प्यालों के पेंदे के अति सूक्ष्म छिद्रों से द्रवित कांच अति संपीडित जलवाष्प, या वायु, द्वारा निकलने पर और शीघ्रता से खींचने पर कांच तंतु बनता है। कर्षण करने की गति प्राय: ६,००० फुट प्रति मिनट होती है। प्रत्येक तंतु की अनुप्रस् ...

                                               

गैस

गैस पदार्थ की तीन अवस्थाओं में से एक अवस्था का नाम है । गैस अवस्था में पदार्थ का न तो निश्चित आकार होता है न नियत आयतन। ये जिस बर्तन में रखे जाते हैं उसी का आकाऔर पूरा आयतन ग्रहण कर लेते हैं। जीवधारियों के लिये दो गैसे मुख्य हैं, आक्सीजन गैस जिसक ...

                                               

कॉम्पटन प्रभाव

कॉम्पटन प्रभाव उच्च आवृत्ति के विद्युतचुंबकीय विकिरण की पदार्थ के साथ वह अंत:क्रिया है जिसमें मुक्त इलेक्ट्रानों से प्रकीर्ण होकर फ़ोटान की ऊर्जा में ह्रास हो जाता है और उनके तरंग आयाम में वृद्धि हो जाती है। प्रकीर्णित विकिरण की तरंगदैर्घ्य केवल ...

                                               

ग्राम-ऋणात्मक बैक्टीरिया

ग्राम-ऋणात्मक बैक्टीरिया वे बैक्टीरिया होते हैं जो ग्राम अभिरंजन परीक्षण में क्रिस्टल वायोलेट नामक रंग से सने जाने पर उस रंग को नहीं पकड़ते हैं और रंगहीन ही रहते हैं। ऐसे बैक्टीरिया की कोशिका भित्ति पेप्टाइडोग्लाइकैन की पतली परतों से बनी होती हैं ...

                                               

ग्राम-धनात्मक बैक्टीरिया

ग्राम-धनात्मक बैक्टीरिया वे बैक्टीरिया होते हैं जो ग्राम अभिरंजन परीक्षण में क्रिस्टल वायोलेट नामक रंग से सने जाने पर उस रंग को पकड़ते हैं और नीले या जामुनी हो जाते हैं। ऐसे बैक्टीरिया की कोशिका भित्ति पेप्टाइडोग्लाइकैन की मोटी परतों से बनी होती ...

                                               

चुंबकत्व

चुंबकत्व प्रायोगिक चुंबकीय क्षेत्र के परमाणु या उप-परमाणु स्तर पर प्रतिक्रिया करने वाले तत्वों का गुण है। उदाहरण के लिए, चुंबकत्व का ज्ञात रूप है जो की लौह चुंबकत्व है, जहां कुछ लौह-चुंबकीय तत्व स्वयं अपना निरंतर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करते रहते ...

                                               

अनुचुम्बकत्व

अनुचुम्बकत्व पदार्थों का वह गुण है जिसमें पदार्थ बाहर से आरोपित चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में ही चुम्बकीय क्षेत्र पैदा करते हैं। ये पदार्थ वाह्य चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा आकर्षित किये जाते है। इनका व्यवहार प्रतिचुम्बकीय पदार्थों के चुम्बकीय व्यवहार ...

                                               

क्यूरी ताप

भौतिकी और पदार्थ विज्ञान में क्यूरी ताप) या क्यूरी बिन्दु वह ताप है जिस पर उस पदार्थ का स्थायी चुम्बकत्व समाप्त हो जाता है और केवल प्रेरित चुम्बकत्व ही शेष रहता है।

                                               

गाउस का नियम (चुंबकत्व)

भौतिकी में चुंबकत्व से संबन्धित गाउस का नियम मैक्सवेल के चार समीकरणों में से एक है। इस नियम के अनुसार चुंबकीय क्षेत्र B का डाइवर्जेंस शून्य होता है। इसी को दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि चुंबकीय एकध्रुव मोनोपोल्स हो ही नहीं सकते। चुंबकत्व में सब ...

                                               

चुंबकीय प्रतिष्टम्भ

चुंबकीय प्रतिष्टम्भ, चुम्बकीय परिपथों के विश्लेषण में प्रयुक्त एक कांसेप्ट है। जिस प्रकार विद्युत परिपथ में वोल्टता को प्रतिरोध से विभाजित करने पर धारा प्राप्त होती है, उसी प्रकार चुम्बकीय परिपथ में चुम्बकीय वाहक बल को प्रतिष्टम्भ से भाग देने पर ...

                                               

चुम्बकन

विद्युतचुम्बकत्व के सन्दर्भ में, किसी चुम्बकीय पदार्थ में मौजूद स्थायी चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण अथवा प्रेरित चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण को चुम्बकन अथवा चुम्बकीय ध्रुवण कहते हैं। चुम्बकन M {\displaystyle M} एक भौतिक राशि है जो पदार्थों की चुम्बकित ...

                                               

चुम्बकीय आघूर्ण

किसी चुम्बक का चुम्बकीय आघूर्ण वह राशि है जो बताती है कि उस चुम्बक को किसी वाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर वह कितना बलाघूर्ण अनुभव करेगा। छद़ चुम्बक, एक लूप जिसमें विद्युत धारा बह रही हो, परमाणु का चक्कर काटता इलेक्ट्रॉन, अणु, ग्रह आदि सभी का ...

                                               

चुम्बकीय क्रोड

चुम्बकीय क्रोड उच्च पारगम्यता वाले पदार्थ होते हैं जिनका उपयोग चुम्बकीय क्षेत्र को परिरुद्ध करने एवं उसका मार्ग निर्धारित करने के लिये किया जाता है। चुम्बकीय क्रोड का उपयोग विद्युतचुम्बक, ट्रान्सफॉर्मर, विद्युत मोटर, विद्युत जनित्र, प्रेरक, उपकरण ...

                                               

चुम्बकीय द्विध्रुव

चुम्बकीय आघूर्ण चुम्बकत्व में सबसे सरल रचना है। किसी जटिल चुम्बकीय संरचना को अनेकों चुम्बकीय आघूर्णों से बना हुआ माना जा सकता है। दूसरे शब्दों में कहें तो चुम्बकीय आघूर्ण, किसी धारावाही बन्द लूप या चुम्बकीय द्विध्रुव की सीमान्त अवस्था है जब स्रोत ...

                                               

चुम्बकीय प्रोत्थापन

चुम्बकीय प्रोत्थापन किसी वस्तु को केवल चुम्बकीय बल द्वारा लटकाने की क्रिया है। इस प्रक्रिया में वस्तु पर लगने वाले गुरुत्वीय बल एवं अन्य बलों को चुम्बकीय बल के द्वारा संतुलित किया जाता है जिससे वस्तु बिना किसी आधार के लटकी रहती है या हवा में लटके ...

                                               

चुम्बकीय बेयरिंग

चुम्बकीय धारुक या चुम्बकीय बेयरिंग ऐसा बेयरिंग है जो किसी शैफ्ट को चुम्बकीय बलों के द्वारा एक अक्ष पर बनाये रखता है। चुम्बकीय बीयरिंग बिना किसी भौतिक-सम्पर्क के ही चलायमान अवयवों को एक सीमा में धारण किये रहते हैं। इस कारण चुम्बकीय बेयरिंग सबसे अध ...

                                               

चुम्बकीय शैथिल्य

लौहचुम्बकीय पदार्थों में चुम्बकीय शैथिल्य बहुत जानी-पहचानी परिघटना है। जब किसी लौहचुम्बकीय पदार्थ के ऊपर कोई वाह्य चुम्बकीय क्षेत्र लगाया जाता है तो इसके आणविक द्विध्रुव स्वयं को उस वाह्य क्षेत्र की दिशा में घुमा लेते हैं। किन्तु उस क्षेत्र को शू ...

                                               

चुम्बकीय संतृप्ति

कुछ चुम्बकीय पदार्थों में चुम्बकीय संतृप्ति का गुण देखने को मिलता है। जब किसी चुम्बकीय पदार्थ पर आरोपित चुम्बकीय क्षेत्र H के बढाने पर भी पदार्थ के अन्दर मौजूद चुम्बकीय फ्लक्स घनत्व लगभग अपरिवर्तित रहता है तो पदार्थ की इस अवस्था को चुम्बकीय संतृप ...

                                               

परावैद्युत

उन कुचालक पदार्थों को परावैद्युत कहते हैं जिनके अन्दर विद्युत क्षेत्र पैदा करने पर वे ध्रुवित हो जाते हैं। कुचालक से आशय उन सभी पदार्थों से है जिनकी प्रतिरोधकता अधिक होती है किन्तु परावैद्युत पदार्थ वे हैं जो कुचालक होने के साथ-साथ पर्याप्त मात्र ...

                                               

परिनालिका

परिनालिका एक त्रिबिमीय कुण्डली को कहते हैं। भौतिकी में परिनालिका स्प्रिंग की भांति बनाये गये तार की संरचना को कहते हैं जिसमें से धारा प्रवाहित करने पर चुम्बकीय क्षेत्र निर्मित होता है। प्राय: ये तार किसी अचुम्बकीय पदार्थ के बेलनाकार आधापर लिपटे र ...

                                               

प्रतिचुम्बकत्व

प्रतिचुम्बकीय पदार्थ वे हैं जिनमें बाहर से आरोपित चुम्बकीय क्षेत्र के उल्टी दिशा में चुम्बकीय क्षेत्र प्रेरित होता है। ये पदार्थ वाह्य चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा प्रतिकर्षित किये जाते हैं। अर्थात इनका व्यवहार अनुचुम्बकीय पदार्थों के चुम्बकीय व्यवहार ...

                                               

फेराइट

फेराइट सिरामिक चुम्बकीय पदार्थ हैं। इनकी वैद्युत प्रतिरोधकता बहुत अधिक होती है। इस कारण अधिक आवृत्ति पर काम करने वाले ट्रान्सफार्मर एवं प्रेरकत्व के निर्माण में इनका उपयोग किया जाता है क्योंकि अधिक प्रतिरोधकता के कारण इनमें भंवर-धारा-हानियाँ बहुत ...

                                               

फेरी चुम्बकत्व

फेरी चुम्बकत्व भौतिकी में फेराइट एवं अन्य ऐसे ही पदार्थों में पाया जाने वाल एक प्रकार का चुम्बकत्व है। यह स्थूल रूप से लौहचुम्बकत्व जैसा ही होता है परन्तु सूक्ष्मत: प्रतिलोहचुम्बकत्व से मिलता-जुलता है क्योंकि इसमें पड़ोसी आयनों के चुमबकीय आघूर्णो ...

                                               

मैक्सवेल कुण्डली

मैक्सवेल कुण्डली, लगभग एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करन्ने वाली एक युक्ति है। यह हेल्महोल्त्स कुण्डली का उन्नत रूप है जो हेल्मोत्स कुण्डली से भी अधिक एकस्मान चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है, किन्तु इसमें उससे अधिक पदार्थ लगता है। मैक्सवेल कुण ...

                                               

लौहचुम्बकत्व

लौहचुंबकत्व ही वह मूलभूत तरीका है जिससे कुछ पदार्थ स्थायी चुम्बक बनाते हैं या दूसरे चुम्बकों की ओर आकृष्ट होते हैं। वैसे प्रतिचुम्बकीय और अनुचुम्बकीय पदार्थ भी चुम्बकीय क्षेत्र में आकर्षित या प्रतिकर्षित होते हैं किन्तु इन पर लगने वाला बल इतना कम ...

                                               

विचुम्बकन

किसी अवांछित चुम्बकीय क्षेत्र को कम करना या समाप्त करना विचुम्बकन या डीगासिंग कहलाता है। चुम्बकीय शैथिल्य के कारण चुम्बकीय क्षेत्र का मान बिलकुल शून्य कर देना प्रायः सम्भव नहीं होता। इसलिये विचुम्बकन के द्वारा अधिशेष चुम्बकीय क्षेत्र को बहुत कम ज ...

                                               

विद्युत्-चुम्बकीय कुंडली

जब किसी विद्युत चालक को वृत्ताकार रूप में, या कुंडलिनी के रूप में, या सर्पिल के रूप में लपेटा जाता है तो इस रचना को विद्युत्-चुम्बकीय कुंडली कहते हैं। विद्युत इंजीनियरी में इनका अनेकों तरह से उपयोग किया जाता है, जैसे- प्रेरकत्व, विद्युत चुम्बक, ट ...

                                               

शैथिल्य

शैथिल्य या हिस्टेरिसिस पदार्थों या तंत्र का वह गुण है जिसके कारण कोई आउटपुट, केवल इनपुट पर ही निर्भर नहीं करता बल्कि निवेश एवं निर्गत सिग्नल की पूर्व स्थितियों पर भी निर्भर करता है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि शैथिल्ययुक्त किसी पदार्थ या तंत् ...

                                               

षट्ध्रुवी चुम्बक

षट्ध्रुवी चुम्बक में ६ चुम्बकीय ध्रुव होते हैं जो एक अक्ष के परितः उत्तर-दक्षिण-उत्तर-दक्षिण-उत्तर-दक्षिण ध्रुव के क्रम में होते हैं। षट्ध्रुवी चुम्बक, कण त्वरकों में प्रयुक्त होते हैं जहाँ ये कण-पुंज के क्रोमैटिक अबरेशन को ठीक करते हैं और हेड-टे ...

                                               

स्थिर चुम्बकिकी

स्थिर चुम्बकिकी उन चुम्बकीय क्षेत्रों का अध्ययन है जहां विद्युत धाराएँ समय के साथ न बदल रही हों। यह स्थिरवैद्युतिकी का चुंबकीय समतुल्य है, जहां आवेश स्थिर होते हैं। किन्तु स्थिर चुम्बकिकी के लिए चुम्बकन का स्थिर होना आवश्यक नहीं है। जब विद्युत धा ...

                                               

हाल प्रभाव

जब किसी चालक में किसी दिशा में धारा प्रवाहित करते हुए धारा के लम्बवत दिशा में चुम्बकीय क्षेत्र लगाते हैं एक विद्युतवाहक बल उत्पन्न होता है जो धारा एवं चुम्बकीय क्षेत्र दोनों के लम्बवत होता है। इस प्रभाव को हाल प्रभाव कहते हैं तथा उत्पन्न विभव को ...

                                               

भँवर धारा

किसी चालक के भीतर परिवर्ती चुम्बकीय क्षेत्र होने पर उसमें विद्युत धारा उत्पन्न होती है उसे भँवर धारा कहते हैं। धारा की ये भवरें चुम्बकीय क्षेत्र पैदा करती हैं और यह चुम्बकीय बाहर से आरोपित चुम्बकीय क्षेत्र के परिवर्तन का विरोध करता है। भँवर धाराओ ...