ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 319




                                               

परिनालिका

परिनालिका एक त्रिबिमीय कुण्डली को कहते हैं। भौतिकी में परिनालिका स्प्रिंग की भांति बनाये गये तार की संरचना को कहते हैं जिसमें से धारा प्रवाहित करने पर चुम्बकीय क्षेत्र निर्मित होता है। प्राय: ये तार किसी अचुम्बकीय पदार्थ के बेलनाकार आधापर लिपटे र ...

                                               

प्रतिचुम्बकत्व

प्रतिचुम्बकीय पदार्थ वे हैं जिनमें बाहर से आरोपित चुम्बकीय क्षेत्र के उल्टी दिशा में चुम्बकीय क्षेत्र प्रेरित होता है। ये पदार्थ वाह्य चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा प्रतिकर्षित किये जाते हैं। अर्थात इनका व्यवहार अनुचुम्बकीय पदार्थों के चुम्बकीय व्यवहार ...

                                               

फेराइट

फेराइट सिरामिक चुम्बकीय पदार्थ हैं। इनकी वैद्युत प्रतिरोधकता बहुत अधिक होती है। इस कारण अधिक आवृत्ति पर काम करने वाले ट्रान्सफार्मर एवं प्रेरकत्व के निर्माण में इनका उपयोग किया जाता है क्योंकि अधिक प्रतिरोधकता के कारण इनमें भंवर-धारा-हानियाँ बहुत ...

                                               

फेरी चुम्बकत्व

फेरी चुम्बकत्व भौतिकी में फेराइट एवं अन्य ऐसे ही पदार्थों में पाया जाने वाल एक प्रकार का चुम्बकत्व है। यह स्थूल रूप से लौहचुम्बकत्व जैसा ही होता है परन्तु सूक्ष्मत: प्रतिलोहचुम्बकत्व से मिलता-जुलता है क्योंकि इसमें पड़ोसी आयनों के चुमबकीय आघूर्णो ...

                                               

मैक्सवेल कुण्डली

मैक्सवेल कुण्डली, लगभग एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करन्ने वाली एक युक्ति है। यह हेल्महोल्त्स कुण्डली का उन्नत रूप है जो हेल्मोत्स कुण्डली से भी अधिक एकस्मान चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है, किन्तु इसमें उससे अधिक पदार्थ लगता है। मैक्सवेल कुण ...

                                               

लौहचुम्बकत्व

लौहचुंबकत्व ही वह मूलभूत तरीका है जिससे कुछ पदार्थ स्थायी चुम्बक बनाते हैं या दूसरे चुम्बकों की ओर आकृष्ट होते हैं। वैसे प्रतिचुम्बकीय और अनुचुम्बकीय पदार्थ भी चुम्बकीय क्षेत्र में आकर्षित या प्रतिकर्षित होते हैं किन्तु इन पर लगने वाला बल इतना कम ...

                                               

विचुम्बकन

किसी अवांछित चुम्बकीय क्षेत्र को कम करना या समाप्त करना विचुम्बकन या डीगासिंग कहलाता है। चुम्बकीय शैथिल्य के कारण चुम्बकीय क्षेत्र का मान बिलकुल शून्य कर देना प्रायः सम्भव नहीं होता। इसलिये विचुम्बकन के द्वारा अधिशेष चुम्बकीय क्षेत्र को बहुत कम ज ...

                                               

विद्युत्-चुम्बकीय कुंडली

जब किसी विद्युत चालक को वृत्ताकार रूप में, या कुंडलिनी के रूप में, या सर्पिल के रूप में लपेटा जाता है तो इस रचना को विद्युत्-चुम्बकीय कुंडली कहते हैं। विद्युत इंजीनियरी में इनका अनेकों तरह से उपयोग किया जाता है, जैसे- प्रेरकत्व, विद्युत चुम्बक, ट ...

                                               

शैथिल्य

शैथिल्य या हिस्टेरिसिस पदार्थों या तंत्र का वह गुण है जिसके कारण कोई आउटपुट, केवल इनपुट पर ही निर्भर नहीं करता बल्कि निवेश एवं निर्गत सिग्नल की पूर्व स्थितियों पर भी निर्भर करता है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि शैथिल्ययुक्त किसी पदार्थ या तंत् ...

                                               

षट्ध्रुवी चुम्बक

षट्ध्रुवी चुम्बक में ६ चुम्बकीय ध्रुव होते हैं जो एक अक्ष के परितः उत्तर-दक्षिण-उत्तर-दक्षिण-उत्तर-दक्षिण ध्रुव के क्रम में होते हैं। षट्ध्रुवी चुम्बक, कण त्वरकों में प्रयुक्त होते हैं जहाँ ये कण-पुंज के क्रोमैटिक अबरेशन को ठीक करते हैं और हेड-टे ...

                                               

स्थिर चुम्बकिकी

स्थिर चुम्बकिकी उन चुम्बकीय क्षेत्रों का अध्ययन है जहां विद्युत धाराएँ समय के साथ न बदल रही हों। यह स्थिरवैद्युतिकी का चुंबकीय समतुल्य है, जहां आवेश स्थिर होते हैं। किन्तु स्थिर चुम्बकिकी के लिए चुम्बकन का स्थिर होना आवश्यक नहीं है। जब विद्युत धा ...

                                               

हाल प्रभाव

जब किसी चालक में किसी दिशा में धारा प्रवाहित करते हुए धारा के लम्बवत दिशा में चुम्बकीय क्षेत्र लगाते हैं एक विद्युतवाहक बल उत्पन्न होता है जो धारा एवं चुम्बकीय क्षेत्र दोनों के लम्बवत होता है। इस प्रभाव को हाल प्रभाव कहते हैं तथा उत्पन्न विभव को ...

                                               

भँवर धारा

किसी चालक के भीतर परिवर्ती चुम्बकीय क्षेत्र होने पर उसमें विद्युत धारा उत्पन्न होती है उसे भँवर धारा कहते हैं। धारा की ये भवरें चुम्बकीय क्षेत्र पैदा करती हैं और यह चुम्बकीय बाहर से आरोपित चुम्बकीय क्षेत्र के परिवर्तन का विरोध करता है। भँवर धाराओ ...

                                               

मेसर

मेसर एक ऐसा यन्त्र है जो उद्दीप्त उत्सर्जन द्वारा प्रवर्धन के माध्यम से सम्बंद्ध् विद्युतचुम्बकीय तरंगे उत्पन्न करता है। ऐतिहासिक रूप से यह परिवर्णी नाम मेसर से व्युत्पन्न होता है जिसका अर्थ विकिरण के उद्दीप्त उत्सर्जन द्वारा सूक्ष्मतरंग प्रवर्धन है।

                                               

इलेक्ट्रॉन दाता

इलेक्ट्रॉन दाता ऐसा रासायनिक तत्व या रासायनिक यौगिक होता है जो किसी अन्य तत्व या यौगिक को अपने इलेक्ट्रॉन देता है। यह एक अपचायक होता है जो इलेक्ट्रॉन देकर स्वयं ऑक्सीकरित हो जाता है। किसी इलेक्ट्रॉन दाता की दान-शक्ति उसकी आयनन ऊर्जा पर निर्भर करत ...

                                               

वेनिस गणराज्य

वेनिस गणराज्य को पारंपरिक रूप से ला ज़ेरिनिस्म के रूप में जाना जाता है, जो पूर्वोत्तर इटली में एक संप्रभु राज्य और प्रांत है जो आठवीं और अठारहवीं शताब्दी के बीच मौजूद था। लैगून में आधारित समाज वेनिस शहर रेनेसां के दौरान व्यापार के चलते काफ़ी अमीर ...

                                               

यांत्रिकी

भौतिक यांत्रिकी Mechanics भौतिकी की वह शाखा है जिसमें पिण्डों पर बल लगाने या विस्थापित करने पर उनके व्यवहार का अध्ययन करती है। यांत्रिकी की जड़ें कई प्राचीन सभ्यताओं से निकली हैं।

                                               

अनुप्रयुक्त यांत्रिकी

अनुप्रयुक्त यांत्रिकी भौतिक विज्ञानों की की वह शाखा है जिसमें यांत्रिकी के व्यावहारिक उपयोगों का अध्ययन किया जाता है। अनुप्रयुक्त यांत्रिकी भौतिक विज्ञान की शाखा यांत्रिकी का व्यावहारिक अनुप्रयोग है। अनुप्रयुक्त यांत्रिकी मे विष्लेषण मुल रूप से ग ...

                                               

अन्तःस्फोट

अन्तःस्फोट किसी वस्तु की ऐसी प्रक्रिया होती है जिसमें वह सिकुड़कर अपने आप पर ढह जाती है। यह विस्फोट की विपरीत प्रक्रिया है। जहाँ विस्फोट में पदार्थ व ऊर्जा बाहर की ओर फैलती है वहाँ अन्तःस्फोट में वह अन्दर की ओर संकुचित होती है। अन्तःस्फोट का एक उ ...

                                               

उष्मागतिकी

भौतिकी में उष्मागतिकी के अन्तर्गत ऊर्जा का कार्य और उष्मा में रूपान्तरण, तथा इसका तापमान और दाब जैसे स्थूल चरों से सम्बन्ध का अध्ययन किया जाता है। इसमें ताप, दाब तथा आयतन का सम्बन्ध भी समझा जाता है।

                                               

कल्पित कार्य

किसी कण पर किसी बल द्वारा किसी आभासी विस्थापन की दिशा में किया गया कार्य आभासी कार्य अथवा कल्पित कार्य कहलाता है। आभासी कार्य के सिद्धान्त की सहायता से किसी यांत्रिक तन्त्पर लगने वाले बलों एवं उनके कारण हुए विस्थापन का अध्ययन किया जाता है। आभासी ...

                                               

खगोलीय यांत्रिकी

खगोलीय यांत्रिकी में आकाशीय पिंडों की गतियों के गणितीय सिद्धांतों का विवेचन किया जाता है। न्यूटन द्वारा प्रिंसिपिया में उपस्थापित गुरुत्वाकर्षण नियम तथा तीन गतिनियम खगोलीय यांत्रिकी के मूल आधार हैं। इस प्रकार इसमें विचारणीय समस्या द्वितीय वर्ण के ...

                                               

गति के नियम

विशिष्ट आपेक्षिकता Special relativity कॉची के गति के समीकरण Cauchys equations of motion सामान्य सापेक्षता General relativity यूलर के नियम Eulers laws न्यूटन के गति के नियम Newtons laws of motion शास्त्रीय क्लासिकल यांत्रिकी केप्लर की ग्रहीय गति क ...

                                               

गुरुत्व केन्द्र

भौतिकी में, किसी पिण्ड का गुरुत्व केन्द्र वह बिन्दु है जिसको उस पिण्ड के गुरुत्वीय अन्तर्क्रियाओं के लिये मोटे तौपर उपयोग किया जा सकता है। एकसमान गुरुत्वीय क्षेत्र में स्थित किसी पिण्ड का संहति-केन्द्र ही उसका गुरुत्व केन्द्र भी होगा। यह बात धरती ...

                                               

घिरनी

घिरनी एक गोल रम्भ है, जिससे मशीन की शक्ति को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जाता है। यदि किसी खराद) को इंजन से चलाना है, तो इंजन की घिरनी और खराद की घिरनी पर पट्टा चढ़ाकर इंजन की शक्ति से खराद को चलाते हैं। घिरनी के व्यास से ही मशीनों की गति ...

                                               

छद्म बल

छद्म बल में यदि किसी पिण्ड की गति का वर्णन करना हो तो उस पर लगने वाले वास्तविक बलों के अलावा आभासी बल या बलों को भी उस पिण्ड पर लगाना पड़ेगा। सामान्यतः न्यूटन का द्वितीय नियम जड़त्वीय फ्रेमों पर ही लागू होता है लेकिन अजड़त्वीय फ्रेमों में न्यूटन ...

                                               

जड़त्वाघूर्णों की सूची

यहाँ पर विभिन्न आकार-प्रकार के पिण्डों के जड़त्वाघूर्ण दिये गये हैं। ज। दत्वाघूर्ण की इकाई की विमा द्रव्यमान × लम्बाई 2 होती है। नीचे दिये गये व्यंजकों की गणना में यह माना गया है कि घनत्व सर्वत्र समान है। टिप्पणी: जहाँ कहीं भी अलग से न कहा गया हो ...

                                               

जेट नोदन

जेट नोदन या क्षिपप्रणोदन, नोदन की वह विधि है जिसमें वस्तु पर आगे की तरफ धक्का लगाने के लिए उस वस्तु की गति की विपरीत दिशा में पदार्थ का जेट का उपयोग किया जाता है। इसकी क्रियाविधि न्यूटन के गति के तृतीय नियम पर आधारित है। यह एक प्रकार की प्रतिक्रि ...

                                               

ठोस यांत्रिकी

ठोस यांत्रिकी सातत्यक यांत्रिकी की वह शाखा है जिसमें ठोस वस्तुओं के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है। इसमें विशेषतः विभिन्न प्रकार के बल लगाने पर ठोसों की गति और इनमें होने वाली विरूपण का अध्यन किया जाता है। बल के अलावा ताप परिवर्तन, प्रावस्था परिव ...

                                               

पट्टा

पट्टा किसी लचीले पदार्थ का बना एक फंदा होता है जो दो या अधिक घूमने वाले शैफ्टों को जोड़कर एक की गति को दूसरे पर ट्रांसफर करने का कार्य करता है। यह यांत्रिक शक्ति के पारेषण के साधनों में से एक है। पट्टे घिरनियों पर लगाये जाते हैं।पट्टा किसी यंत्

                                               

पदार्थ प्रबलता

पदार्थ प्रबलता या पदार्थ यांत्रिकी एक विषय है जिसमें प्रतिबल और विकृति की अवस्था में ठोस वस्तुओं के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है। इस विषय का अध्ययन एक विमीय तथा द्विविमीय समस्याओं से आरम्भ हुआ। इसके बाद इसको त्रिविम समस्याओं के लिये सामान्यीकृत ...

                                               

पेंच

पेंच या बोल्ट एक प्रकार की यांत्रिक युक्ति है जो दो भागों को परस्पर कसने के काम आती है। यह किसी धातु के बेलनाकार दण्ड पर वर्तुलाकार चूड़ियाँ काटकर बनायी जाती है। आमतौपर पेंचों का एक शीर्ष होता है, यह पेंच के एक सिरे पर विशेष रूप से गठित अनुभाग है ...

                                               

प्रतिबल

प्रतिबल की परिभाषा सतत यांत्रिकी में प्रतिबल stress से आशय ईकाई क्षेत्रफल पर आरोपित उस आन्तरिक बल से है जो दूसरे कणों द्वारा अपने पड़ोसी कणों पर लगाया जाता है। इसकी इकाई न्यूटन/वर्ग मीटर या पासकल या किलोग्राम/मीटर/वर्ग सेकेण्ड होता है। किसी बिन्द ...

                                               

प्रत्यास्थता

यांत्रिकी में प्रत्यास्थता पदार्थों के उस गुण को कहते हैं जिसके कारण उस पर वाह्य बल लगाने पर उसमें विकृति आती है परन्तु बल हटाने पर वह अपनी मूल स्थिति में आ जाता है। यदि वाह्यबल के परिमाण को धीरे-धीरे बढ़ाया जाय तो विकृति समान रूप से बढ़ती जाती ह ...

                                               

प्रभावी विभव

प्रभावी विभव एक गणितीय व्यंजक है जो एक ही विभव में बहुत सारे प्रभावों का समावेश कर देता है। प्रायः इसका उपयोग ग्रहों की कक्षा की गणना करने में किया जाता है।

                                               

फन्नी

फान या फन्नी एक सरल उपकरण है जिसमें दो परस्पर झुके हुए तल होते हैं। यह छः सरल मशीनों में से एक है। फन्नी का उपयोग दो वस्तुओं को अलग करने, किसी चीज को उठाने या किसी चीज को अपने स्थान पर बनाए रखने के लिए किया जाता है। इसकी विशेषता है कि इसके भोथरे ...

                                               

भाप का इंजन

वाष्पयान या भाप का इंजन एक प्रकार का उष्मीय इंजन है जो कार्य करने के लिये जल-वाष्प का प्रयोग करता है। भाप के इंजन अधिकांशतः वाह्य दहन इंजन होते हैं जिसमें रैंकाइन चक्र नामक उष्मा-चक्र काम में लाया जाता है। कुछ वाष्पयान सौर उर्जा, नाभिकीय उर्जा या ...

                                               

मोटरवाहन

गाड़ी, मोटरवाहन, कार, मोटरकार या ऑटोमोबाइल एक पहियों वाला वाहन है, जो यात्रियों के परिवहन के काम आता है; और जो अपना इंजन या मोटर भी स्वयं उठाता है। इस शब्द की अधिकांश परिभाषाओं के अनुसार मोटरवाहन मुख्य रूप से सड़कों पर चलाने के लिए हैं, एक से आठ ...

                                               

यंग का प्रत्यास्थता मापांक

यांत्रिकी में प्रत्यास्थता पदार्थों के उस गुण को कहते हैं जिसके कारण उस पर वाह्य बल लगाने पर उसमें विकृति आती है परन्तु बल हटाने पर वह अपनी मूल स्थिति में आ जाता है। यदि वाह्यबल के परिमाण को धीरे-धीरे बढ़ाया जाय तो विकृति समान रूप से बढ़ती जाती ह ...

                                               

यंत्र

कोई भी युक्ति जो उर्जा लेकर कुछ कार्यकलाप करती है उसे यंत्र या मशीन कहते हैं। सरल मशीन वह युक्ति है जो लगाये जाने वाले बल का परिमाण या दिशा को बदल दे किन्तु स्वयं कोई उर्जा खपत न करे।

                                               

यांत्रिक लाभ

भौतिकी और इंजीनियरी में किसी मेकेनिज्म द्वारा उत्पन्न बल तथा उस पर लगाये बल के अनुपात को यांत्रिक लाभ कहते हैं। M A = output force input force {\displaystyle MA={\frac {\text{output force}}{\text{input force}}}} घर्षणरहित आदर्श मेकेनिज्मों के लिय ...

                                               

यांत्रिक संतुलन

स्थैतिक संतुलन का मानक परिभाषा निम्नवत है- कणों का कोई समूह स्थैतिक संतुलन की स्थिति में उस अवस्था में होता है जब सभी कण विराम अवस्था में हों तथा उनमें से प्रत्येक कण पर लगने वाले बलों का सदिश योग स्थाई रूप से शून्य हो। सूत्र रूप में - { v = 0 ω ...

                                               

लिंकेज

यांत्रिकी में उन दंडों के समूह को अनुबंधन या कटी-संहतियाँ या लिंकेज कहते हैं जो एक दूसरे से हिंज द्वारा ज़ड़े रहते हैं और जिनसे कोई विशेष प्रकार की गति प्राप्त होती है। कटी-संहतियों के उदाहरण अनेक यंत्रों में देखे जा सकते हैं। पैंटोग्राफ़ Pantogr ...

                                               

शक्ति संचरण

शक्ति शब्द का प्रयोग मानवनियंत्रित ऊर्जा को जो यांत्रिक कार्य करने के लिए प्राप्य हो, सूचित करने के लिए किया जाता है। शक्ति के मुख्य स्रोत हैं: मनुष्यों एवं जानवरों की पेशीय ऊर्जा, नदी एवं वायु की गतिज ऊर्जा, उच्च सतहों पर स्थित जलाशय की स्थितिज ...

                                               

संचरण (यांत्रिकी)

शक्ति का यांत्रिक संचरण पट्टे या रज्जु की सहायता से शैफ्ट द्वारा, अथवा यंत्रिचक्और जंजीर की सहायता से होता है। परिस्थिति के अनुसार शक्ति को संचारित करने के लिए ये तरीके अलग अलग, या एक दूसरे के साथ, व्यवहृत किए जाते हैं। मूल चालक के अनुसार शक्तिसं ...

                                               

सरल आवर्त गति

भौतिकी में सरल आवर्त गति उस गति को कहते हैं जिसमें वस्तु जिस बल के अन्तर्गत गति करती है उसकी दिशा सदा विस्थापन के विपरीत एवं परिमाण विस्थापन के समानुपाती होता है। उदाहरण - किसी स्प्रिंग से लटके द्रव्यमान की गति, किसी सरल लोलक की गति, किसी घर्षणरह ...

                                               

सातत्यक यांत्रिकी

सातत्यक यांत्रिकी यांत्रिकी की वह शाखा है जो पदार्थों की गति तथा यांत्रिक व्यवहार का अध्ययन उन पदार्थों को सतत द्रव्य मानकर करती है न कि उन्हें एक विविक्त कण मानकर। फ्रांसीसी गणितज्ञ ऑगस्तिन लुई कॉशी इस तरह का मॉडल प्रस्तुत करने वाले प्रथम व्यक्त ...

                                               

विद्या

विद्या है वो जानकारी और गुण, जो हम दिखाने, सुनाने, या पढ़ाने के माध्यम से प्राप्त करते है। हमारे जीवन के शुरुआत में हम सब जीना सीखते है। शिक्षा लोगों को ज्ञान और विद्या दान करने को कहते हैं अथवा व्यवहार में सकारात्मक एंव विकासोन्मुख परिवर्तन को श ...

                                               

भारत में स्वास्थ्य देखभाल

भारतीय संविधान सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार को राज्य का प्राथमिक कर्तव्य मानता है। हालांकि, व्यवहारिकता में निजी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र भारत के स्वास्थ्य सेवाओं के बहुमत के लिए जिम्मेदार है, और अधिकांश स्वास्थ्य देखभाल के खर्चों का भुगतान बीमा क ...

                                               

एकलशर्करा

एकलशर्करा सबसे सरल प्रकार का कार्बोहाइड्रेट है। इसका अणु कार्बोहाइड्रेट में सबसे छोटा होता है, तथा इससे ही कार्बोहाइड्रेट के बड़े अणुओं का निर्माण होता है। गलूकोज इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। इनके दो प्रकार हैं- 1* एल्डोस 2* कीटोस