ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 356




                                               

गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति

गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति का मूल उद्देश्य विभिन्न सामाजिक-शैक्षणिक कार्यक्रमों के माध्यम से महात्मा गांधी के जीवन ध्येय एवं विचारों का प्रचार प्रसार करना है। राजघाट पर स्थित गांधी दर्शन और तीस जनवरी मार्ग पर स्थित गांधी स्मृति का समायोजन करके ...

                                               

गांधीगिरी

गांधीगिरी एक पुराना शब्द है जो गांधीवाद के मूल्यों की ओर इशारा करता है जिसमें सत्याग्रह एवं अहिंसा सबसे मुख्य है। इस शब्द को लोकप्रिय रूप तब मिला जब २००६ में हिंदी फिल्म लगे रहो मुन्नाभाई प्रदर्शित हुई।

                                               

यंग इण्डिया

यंग इंडिया एक साप्ताहिक पत्रिका थी जिसे महात्मा गांधी प्रकाशित करते थे। पत्रिका अंग्रेजी में निकलती थी। गांधीजी ने अपने विचार एवं दर्शन को प्रसारित करने लिये आरम्भ किया था। इसके लेखों में अनेक सूक्तियाँ होती थीं जो लोगों के लिये महान प्रेरणा का क ...

                                               

सत्याग्रह सदन

सत्याग्रह सदन, या सत्याग्रह हाउस, जिसे आमतौपर गांधी हाउस के रूप में जाना जाता है, जोहान्सबर्ग में स्थित संग्रहालय और अतिथि गृह है। घर महात्मा गांधी का था: उन का यह 1908 से 1909 के बीच निवास स्थान व कार्यस्थल था। यह जोहान्सबर्ग की ऐतिहासिक विरासत ...

                                               

सेवाग्राम

1920 सेवाग्राम महाराष्ट्र के वर्धा जिले में एक गाँव का नाम है। यहाँ एक प्रसिद्ध आश्रम है जिसे गांधीजी ने स्थापित किया था। पहले इस गाँव का नाम शेगाँव था जिसे गांधीजी ने बदलकर नया नाम सेवाग्राम रखा।

                                               

सेवाग्राम आश्रम

सेवा ग्राम आश्रम भारत में गांधी जी द्वारा स्थापित दूसरा महत्वपूर्ण आश्रम है जो सेवाग्राम में स्थित है। उन्होने इससे पूर्व साबरमती में आश्रम की स्थापना की थी। ये आश्रम गांधी जी के रचनात्मक कार्यक्रमो एवम राजनीतिक आंदोलन संचालन का केंद्र हुआ करते थ ...

                                               

हरिजन

हरि का अर्थ है "ईश्वर या भगवान" और जन का अर्थ है "लोग" महात्मा गाँधी ने "हरिजन" शब्द का प्रयोग हिन्दू समाज के उन समुदायों के लिये करना शुरु किया था जो सामाजिक रूप से बहिष्कृत माने जाते थे। इनके साथ ऊँची जाति के लोग छुआछूत का व्यवहार करते थे अर्था ...

                                               

गोपाल गोडसे

गोपाल गोडसे हिन्दू महासभा के एक क्रान्तिकारी कार्यकर्ता थे। इन्हें गान्धी-हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा मिली थी। ये प्रमुख अभियुक्त नाथूराम गोडसे के अनुज थे। अपने अंतिम दिनों तक उन्हें महात्मा गाँधी के प्रति अपने रवैये पर कभी कोई अफ़सोस ...

                                               

दिगम्बर बड़गे

दिगम्बर बड़गे हिन्दू महासभा के एक सक्रिय कार्यकर्ता थे। जब इन पर गान्धी-ह्त्या के मामले में मुकदमा चलाया गया तो ये सरकारी गवाह बन गये और उन्होंने मामले में सभी अभियुक्तों के नाम बता दिये जिसके चलते मामला शीघ्रता से सुलझ गया। अदालत में जब गान्धी-ह ...

                                               

मदनलाल पाहवा

मदनलाल पाहवा हिन्दू महासभा के एक कार्यकर्ता थे जिन्होंने नई दिल्ली स्थित बिरला हाउस में गान्धी-हत्या की तिथि से दस दिन पूर्व २० जनवरी १९४८ को उनकी प्रार्थना सभा में हथगोला फेंका था। उपस्थित जन समुदाय ने उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया था। उस घटना क ...

                                               

विष्णु रामकृष्ण करकरे

विष्णु रामकृष्ण करकरे हिन्दू महासभा के एक समर्पित कार्यकर्ता थे। इन्हें गन्धी-हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा दी गयी थी। अदालत में जब गान्धी-ह्त्या का अभियोग चला तो मदनलाल पाहवा ने उसमें स्वीकार किया कि जो भी लोग इस षड्यन्त्र में शामिल थे ...

                                               

शंकर किस्तैया

शंकर किस्तैया हिन्दू महासभा के एक क्रान्तिकारी कार्यकर्ता थे। इन्हें महात्मा गांधी का वध करने के मामले में आजीवन कारावास की सजा मिली थी। बाद में उच्च न्यायालय ने अपील करने पर छोड़ने का निर्णय दिया। अदालत में जब गान्धी-वध का अभियोग चला तो मदनलाल प ...

                                               

सामुदायिक विकास खंड

कई पंचायतों को मिला कर एक विकास खंड होता है इसका मुख्यालय सामुदायिक विकास केन्द्र कहलाता है। एक जिले में कई सामुदायिक विकास केन्द्र होते हैं। विकास खंडों और सामुदायिक विकास केंद्रों के सामंजस्य से जनविकास से सम्बंधित जन कल्याणकारी योजनाओं को लागू ...

                                               

आधिकारिक आवास

सामान्य रूप में आधिकारिक आवास किसी अधिकार या पद के साथ मिलनेवाले आवास को कहते है। लेकिन सार्वभौमिक रूप से, किसी देश के राष्ट्रप्रमुख, शासनप्रमुख, राज्यपाल या अन्य वरिष्ठ पद के निवासस्थान को "आधिकारिक आवास" कहते है। निम्नलिखित दुनिया के आधिकारिक आ ...

                                               

ब्रिटेन के शाही निवासों की सूची

यह ब्रिटेन के राजकीय निवासों की सूची है, इस पृष्ठ पर ब्रिटिश राजपरिवार के सदस्यों के विभिन्न राजकीय निवासों व महलों को सूचीबद्ध किया गया है, तथा पारंपरिक रूप से राजकितुंब के उस भवन में रहने का समय भी दिया गया है। ब्रिटेन में सारे राजकीय निवास, मह ...

                                               

ख़िज्र खाँ

तुगलक वंश की समाप्ति के बाद दिल्ली सल्तनत की बागडोर खिज्र खां के हाथों में आ गई। खिज्र खां सैय्यद वंश का संस्थापक था। वह स्वयं को इस्लाम धर्म के संस्थापक मुहम्मद पैगंबर साहब का वंशज मानता था। सल्तनत काल में शासन करने वाला एकमात्र शिया वंश था। इसन ...

                                               

जमरूद किला

जमरूद किला ख़ैबर दर्रे के मुख पर स्थित बाब-ए-ख़ैबर के पास स्थित एक क़िला है। प्रशासनिक रूप से यह पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा के संघीय प्रशासित कबायली क्षेत्र में पड़ता है।

                                               

असमिया चलचित्र

असमिया चलचित्र या असमिया सिनेमा, असमिया भाषा में बनाया गया चलचित्र है, जो मुख्य तौपर असम में देखा जाता है। इसकी शुरुआत १९३५ में ज्योतिप्रसाद आगरवाला द्वारा बनागई फिल्म जॉयमोती के साथ हुई। उसके बाद असमिया चलचित्र का विकास करने में भाबेंदर नाथ सैकि ...

                                               

मोहम्मद सिकंदर आलम

ये भगवान जगन्नाथ के भक्ति गीतों के प्रख्यात उडिया गायक थे। ८ अगस्त को उनका दिल का दौरा प़डने से निधन हो गया। वे 71 वर्ष के थे। उनके घर में पत्नी नईमा और दो बेटियां अभिनेत्री सोफिया व गायिका नाजिया हैं। आलम उड़ीसा संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष थे।

                                               

कुलदेवी मंदिर

कुलदेवी मंदिर, उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के डेरवा क़स्बे में स्थित प्रख्यात भदरी राजघराने की कुल देवी का मंदिर हैं। यह मंदिर कुंडा तहसील के डेरवा बाजार के पास भदरी राजघराने के जिल्ले में स्थित है, यह बिसेन ठाकुरों की कुलदेवी हैं, इसे उत्तर प ...

                                               

तुलसी मानस मन्दिर

तुलसी मानस मन्दिर काशी के आधुनिक मंदिरों में एक बहुत ही मनोरम मन्दिर है। यह मन्दिर वाराणसी कैन्ट से लगभग पाँच कि॰ मि॰ दुर्गा मन्दिर के समीप में है। इस मन्दिर को सेठ रतन लाल सुरेका ने बनवाया था। पूरी तरह संगमरमर से बने इस मंदिर का उद्घाटन भारत के ...

                                               

संकट मोचन हनुमान मंदिर

संकट मोचन हनुमान मंदिर हिन्दू भगवान हनुमान के पवित्र मंदिरों में से एक हैं। यह वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत में स्थित है। यह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय कॆ नजदीक दुर्गा मंदिऔर नयॆ विश्वनाथ मंदिर के रास्ते में स्थित हैं। संकट मोचन का अर्थ है परेशानिय ...

                                               

खोल

खोल गोवा का प्रसिद्ध लोक नृत्य है। {{Navbox |name = भारत के लोक नृत्य |state = autocollapse |title = भारत के लोक नृत्य |image = |group1 = उत्तर भारत |list1 =

                                               

झागोर

झागोर गोवा का प्रसिद्ध लोक नृत्य है। {{Navbox |name = भारत के लोक नृत्य |state = autocollapse |title = भारत के लोक नृत्य |image = |group1 = उत्तर भारत |list1 =

                                               

दकनी

दकनी गोवा का प्रसिद्ध लोक नृत्य है। {{Navbox |name = भारत के लोक नृत्य |state = autocollapse |title = भारत के लोक नृत्य |image = |group1 = उत्तर भारत |list1 =

                                               

पंडवानी

पंडवानी छत्तीसगढ़ का वह एकल नाट्य है जिसका अर्थ है पांडववाणी - अर्थात पांडवकथा, यानी महाभारत की कथा। ये कथाएं छत्तीसगढ़ की परधान तथा देवार छत्तीसगढ़ की जातियों की गायन परंपरा है। परधान गोंड की एक उपजाति है और देवार धुमन्तू जाति है। इन दोनों जातिय ...

                                               

वेदमती शैली

वेदमती शैली छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध नृत्य-नाट्य पंडवानी की एक शैली का नाम है। वेदमती शैली का आधार है शास्त्र। खड़ी भाषा में सबलसिंह चौहान के महाभारत, जो पद्यरुप में हैं। वेदमती शैली के गायक गायिक वीरासन पर बैठकर पंडवानी गायन करते है। श्री झाडूराम द ...

                                               

पाबूजी

पाबूजी राजस्थान के लोक-देवता हैं। वे १४वीं शताब्दी में राजस्थान में जन्मे थे। पाबु जी को प्लेग रक्षक देवता के रूप में पूजा जाता है। राजस्थान में ऊँटो के बीमार होने तथा ऊँटो के देवता के रूप में पाबूजी की पूजा होती है।

                                               

मेहोजी मांगलिया

राजस्थान के लोक देवता मेहोजी मांगलिया का जन्म वि.संवत 1332 में जोधपुर ज़िले में ओसिया के पास बापिणी नामक गाँव में हुआ था। मेहोजी के पिता का नाम केलु जी था। केलु जी एक दुर्गपति थे।

                                               

राजस्थान के लोकदेवता

यह सूची राजस्थान के लोकदेवता की है। श्री श्री 1008 लिखमीदास जी महाराज प्रतिस्पर्धा परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य: लेखक - मुकेश यादव जयपुर बाबा रामदेव,उंडूकाश्मेर बाड़मेर राजस्थान,गुजरात,उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश,पाकिस्तान अनेक जगह पर पूजे जाने ...

                                               

रानी भटियानी

रानी भटियानी एक हिन्दू देवी है जो पश्चिमी राजस्थान, भारत और सिंध, पाकिस्तान में उनके प्रमुख मंदिरों में जसोल, बाड़मेऔर जैसलमेर है, जहां उन्हें भुआसा कहा जाता है।

                                               

रामदेव पीर

रामदेव जी राजस्थान के एक लोक देवता हैं। जिनकी पूजा सम्पूर्ण राजस्थान व म.प्र.सहित कई भारतीय राज्यों में की जाती है । इनकी समाधि -स्थल रामदेवरा पर भाद्रपद माह में भव्य मेला लगता है, जहाँ पर देश के भर लाखों श्रद्धालु पहुँचते है ।

                                               

अचिन बासभूमि

अचिन बासभूमि ओड़िया भाषा के विख्यात साहित्यकार कल्पना कुमारी देवी द्वारा रचित एक उपन्यास है जिसके लिये उन्हें सन् 2011 में ओड़िया भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

                                               

अभिशप्त गंधर्व

अभिशप्त गंधर्व ओड़िया भाषा के विख्यात साहित्यकार महापात्र नीलमणि साहू द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1984 में ओड़िया भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

                                               

अमृतर संतान

अमृतरसंतान ओड़िया भाषा के विख्यात साहित्यकार गोपीनाथ मोहांती द्वारा रचित एक उपन्यास है जिसके लिये उन्हें सन् 1955 में ओड़िया भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

                                               

अरण्य फ़सल

अरण्य फ़सल ओड़िया भाषा के विख्यात साहित्यकार मनोरंजन दास द्वारा रचित एक नाटक है जिसके लिये उन्हें सन् 1971 में ओड़िया भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

                                               

अवांतर

अवांतर ओड़िया भाषा के विख्यात साहित्यकार अनंत पटनायक द्वारा रचित एक कविता–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1980 में ओड़िया भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

                                               

असरंती अणसर

असरंती अणसर ओड़िया भाषा के विख्यात साहित्यकार प्रमोद कुमार मोहांती द्वारा रचित एक कविता–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 2008 में ओड़िया भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

                                               

आत्मजीवनी

आत्मजीवनी ओड़िया भाषा के विख्यात साहित्यकार नीलकंठ दास द्वारा रचित एक आत्मकथा है जिसके लिये उन्हें सन् 1964 में ओड़िया भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

                                               

आह्निक

आह्निक ओड़िया भाषा के विख्यात साहित्यकार जगन्नाथप्रसाद दास द्वारा रचित एक कविता–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1991 में ओड़िया भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

                                               

उल्लंघन

उल्लंघन ओड़िया भाषा के विख्यात साहित्यकार प्रतिभा राय द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 2000 में ओड़िया भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

                                               

ओ अंधगली

ओ अंधगली ओड़िया भाषा के विख्यात साहित्यकार अखिलमोहन पटनायक द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1981 में ओड़िया भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

                                               

कविता–1962

कविता–1962 ओड़िया भाषा के विख्यात साहित्यकार सची राउतराय द्वारा रचित एक कविता–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1963 में ओड़िया भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

                                               

कान्ता ओ अन्यान्य गल्प

कान्ता ओ अन्यान्य गल्प ओड़िया भाषा के विख्यात साहित्यकार गौरहरि दास द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 2012 में ओड़िया भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

                                               

काव्यशिल्पी गंगाधर

काव्यशिल्पी गंगाधर ओड़िया भाषा के विख्यात साहित्यकार गोविन्दचंद्र उद्गाता द्वारा रचित एक समालोचना है जिसके लिये उन्हें सन् 1995 में ओड़िया भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

                                               

कुंभार चक्र

कुंभार चक्र ओड़िया भाषा के विख्यात साहित्यकार कालीचरण पटनायक द्वारा रचित एक आत्मकथा है जिसके लिये उन्हें सन् 1977 में ओड़िया भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

                                               

गाँधी मनिष

गाँधी मनिष ओड़िया भाषा के विख्यात साहित्यकार शरत कुमार मोहांती द्वारा रचित एक जीवनी है जिसके लिये उन्हें सन् 2002 में ओड़िया भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

                                               

गां मजलिस

गां मजलिस ओड़िया भाषा के विख्यात साहित्यकार हरेकृष्ण महताब द्वारा रचित एक निबंध–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1983 में ओड़िया भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

                                               

गोपपुर

गोपपुर ओड़िया भाषा के विख्यात साहित्यकार रामचंद्र बेहेरा द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 2005 में ओड़िया भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

                                               

घरडीह

घरडीह ओड़िया भाषा के विख्यात साहित्यकार नित्यांनद महापात्र द्वारा रचित एक उपन्यास है जिसके लिये उन्हें सन् 1987 में ओड़िया भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।