ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 366




                                               

ऑपेरा प्रयोग

ऑसिलेशन प्रोजेक्ट विद इमल्शन- रैकिंग एपरेटस, म्यूऑन न्यूट्रिनों के दोलन से प्रप्त टाऊ न्यूट्रिनों को संसूचित करने के लिए वैज्ञानिक प्रयोगों में प्रयुक्त उपकरण है। यह प्रयोग जिनेवा, स्विट्ज़रलैण्ड में स्थित सर्न व ग्रान सास्सो, इटली स्थित ग्रान सा ...

                                               

ट्रोउटन-नोबल प्रयोग

ट्रोउटन-नोबल प्रयोग, प्रकाशवाही ईथर माध्यम में पृथ्वी की गति के मापन के लिए तैयार किया गया प्रयोग है। यह प्रयोग फ्रेडरिक थोमस ट्रोउटन व एच॰ आर॰ नोबल द्वारा १९०१ से १९०३ के मध्य किया गया प्रयोग है।

                                               

भारत में स्थित न्यूट्रिनो वेधशाला

भारत स्थित न्यूट्रिनो वेधशाला कण भौतिकी में शोध के लिए निर्मित विज्ञान परियोजना है। इसका उद्देश्य ब्रह्माण्डीय न्यूट्रिनो का अध्ययन करना है। न्यूट्रिनो मूल कण होते हैं जिनका सूर्य, तारों एवं वायुमंडल में प्राकृतिक रूप से निर्माण होता है।

                                               

पहलू अनुपात (चित्र)

एक छवि के पहलू अनुपात चौड़ाई और उसकी ऊंचाई के बीच आनुपातिक संबंध का वर्णन. यह आमतौपर दो संख्याओं के रूप में एक बृहदान्त्र द्वारा 16:09 में के रूप में, अलग व्यक्त किया है। के लिए एक एक्स: वाई पहलू अनुपात, कोई फर्क नहीं पड़ता कि कैसे छोटे या बड़े छ ...

                                               

समानुपात

गणित में दो चर राशियाँ x तथा y समानुपाती कही जाती हैं यदि y x {\displaystyle {\tfrac {y}{x}}} का मान नियत हो। ऐसी स्थिति में कहते हैं कि पहली राशि, दूसरी राशि के समानुपाती है। उदाहरण के लिये, यदि कोई वस्तु नियत वेग से गति कर रही है तो उसके द्वारा ...

                                               

किलोग्राम

किलोग्राम भार की SI इकाई है। एक किलोग्राम की परिभाषानुसार, {{उक्ति|यह अन्तर्राष्ट्रीय मूलरूप किलोग्राम, IPK, के भार के बराबर है, जो कि एक लीटर जल के भार के एकदम बराबर है। यह इकलौती SI इकाई है, जिसका उपसर्ग किलो उसके नाम का भाग है। दैनिक प्रयोग मे ...

                                               

कोस

कोस दूरी नापने का एक भारतीय माप है। अभी भी बुजुर्ग लोग दूरी के लिये कोस का प्रयोग करते हुए मिल जाते हैं। प्राचीनकाल में यह ४,००० हाथ, अथवा किसी-किसी के मत से ८,००० हाथ की दूरी का नाम था। आजकल यह दो मील लगभग ३ किलोमीटर का माना जाता है। गोवर्धन परि ...

                                               

घन मीटर

घन मीटर आयतन की एस आई इकाई है। १ मीटर लम्बे, १ मीटर चौड़े तथा १ मीटर ऊँचे घन का आयतन १ घन मीटर होता है। इसे मी ३ या m 3 से निरूपित किया जाता है। यह मी गुणा मी गुणा मी होती है। १ घन मीटर, १००० लीटर के बराबर होता है।

                                               

लीग (इकाई)

लीग लम्बाई के मापन की एक इकाई है जो काफी समय तक यूरोप और दक्षिण अमेरिका मे प्रचलित रही। आज यह किसी भी देश में आधिकारिक प्रयोग में नहीं लाई जाती। लीग से तात्पर्य उस दूरी से था जो कोई व्यक्ति या घोड़ा एक घंटे मे तय कर सकता था। लेकिन देशों के अनुसार ...

                                               

वर्ग किलोमीटर

वर्ग किलोमीटर तल-क्षेत्रफल के मापन की दशमलव इकाई है, वर्ग मीटर व्युत्पद इकाई है। १ किमी २ बराबर है: १०,००,००० मीटर २ २४७.१०५३८१ एकड़ १०० हैक्टेयर ०.३८६१०२ वर्ग मील इसके विरुद्धतया: १ हैक्टेयर = ०.०१ १० −२ किमी २ १ मीटर २ = ०.००० ०० १ १० −६ किमी २ ...

                                               

वॉट

वॉट शक्ति की SI व्युत्पन्न इकाई है। यह ऊर्जा के परिवर्तन या रूपान्तरण की दर मापती है। एक वॉट - १ जूल J ऊर्जा प्रति सैकण्ड के समकक्ष होती है। यांत्रिक ऊर्जा के संबंध में, एक वॉट उस कार्य को करने की दर होती है, जब एक वस्तु को १ मीटर प्रति सैकण्ड की ...

                                               

कोणीय दूरी

गणित और खगोलशास्त्र व भूभौतिकी जैसी सभी प्राकृतिक विज्ञान की शाखाओं में, कोणीय दूरी किसी प्रेक्षक द्वारा किन्ही दो वस्तुओं को देखने की रेखाओं के बीच के कोण के माप को कहते हैं।

                                               

कोणीय व्यास

कोणीय व्यास या स्पष्ट आकार, किसी दी गई स्थिति से, जैसा कि उसे देखा गया, किसी वस्तु का कोण के रूप में मापा गया "दृश्य व्यास" है। दृष्टि विज्ञान में इसे दृश्य कोण कहा जाता है।

                                               

सिद्धान्त ज्योतिष

ज्योतिष शब्द का अर्थ है - ज्योति, अर्थात्‌ प्रकाशपुंज, संबंधी विवेचन। अति प्राचीन काल से ही इससे उस विद्या का बोध होता रहा है, जिसका संबंध खगोलीय पिंडों, अर्थात्‌ ग्रहनक्षत्रों, के विवेचन से है। इसमें खगोलीय पिंडों की स्थिति, उनके गतिशास्त्र तथा ...

                                               

आयतन

सभी पदार्थ स्थान घेरते हैं। इसी त्रि-विमीय स्थान की मात्रा की माप को आयतन कहते हैं। एक-विमीय आकृतियाँ एवं द्वि-विमीय आकृतियाँ का आयतन शून्य होता है।

                                               

क्षेत्रफल

किसी तल के द्वि-बीमीय आकार के परिमाण को क्षेत्रफल कहते हैं। जिस क्षेत्र के क्षेत्रफल की बात की जाती है वह क्षेत्र प्रायः किसी बन्द वक्र से घिरा होता है। इसे प्राय: m 2 में मापा जाता है।

                                               

परिधि

परिधि बन्द वक्र अथवा वृत्तीय वस्तु के किनारों के चारों और की कुल रेखिक दूरी का मान होता है। वृत्त की परिधि ज्यामितीय और त्रिकोणमितीय अवधाराणओं में महत्वपूर्ण है। तथापि परिधि से दीर्घवृत्तीय बन्द वक्रों के किनारों का भी वर्णन किया जाता है। परिधि प ...

                                               

दीप्त तीव्रता

प्रकाशमिति में में, प्रकाश स्रोत से दिशा विशेष में, इकाई ठोस कोण में, निकलने वाली तरंग-दैर्घ्य-भारित शक्ति को दीप्त तीव्रता कहते हैं। यह प्रकाशीय सूत्पर आधारित है, जो की एक मानवीय आँख की संवेदनशीलता का एक मानकीकृत प्रतिरूप है। इसकी SI इकाई कैंडिल ...

                                               

पदार्थ की मात्रा

किसी नमूने या प्रणाली के पदार्थ की मात्रा, n, एक भौतिक मात्रा है, जो कि उसमें स्थित मौलिक अस्तित्व कणों की संख्य के अनुपात में है। "मौलिक अस्तित्व कण" अणु, परमाणु, आयन, इलेक्ट्रान या कोई और कण भी हो सकते हैं, जिसका चुनाव सन्दर्भ आधारित है और नियत ...

                                               

कैलिपर

कैलिपर दूरी मापन की युक्ति है। इसका उपयोग धातुकारी, यांत्रिक प्रौद्योगिकी, फिटिंग, गनस्मिथिंग आदि में होता है। कैलिपर अनेक रूप एवं आकार में मिलते हैं। अपने सरलतम रूप में यह परकार की शक्ल का होता है जिसकी दोनो टांगे अन्दर की तरफ या बाहर की तरफ मुड ...

                                               

क्षेत्रमापी

क्षेत्रमापी एक मापन यंत्र है जो किसी भी आकार के समतल द्विबिमीय क्षेत्र का क्षेत्रफल मापने के काम आता है। वर्तमान में अनेकों प्रकार के क्षेत्रमापी उपलब्ध हैं। वे सभी समान सिद्धान्त के आधापर कार्य करते हैं। इसके दो प्वाइंटरों नोकों में से एक को क्ष ...

                                               

चुंबकत्वमापी

चुम्बकत्वमापी मापक यन्त्र हैं जो दो सामान्य मापन कार्यों के लिये प्रयुक्त होते हैं- २ अन्तरिक्ष के किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता कुछ मामलों में चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा भी १ चुम्बकीय पदार्थों के चुम्बकन magnetization का मापन

                                               

द्रवघनत्वमापी

द्रवघनत्वमापी या उत्प्लव-घनत्वमापी या हाइड्रोमीटर वह यंत्र है जिससे बिना किसी गणना के, द्रवों के घनत्व पढ़े जा सकते हैं। इन यंत्रों की ओर वैज्ञानिकों का ध्यान अत्यंत प्राचीन समय से था और इस बात के प्रमाण मिलते हैं कि आर्किमीडीज़ को इनकी जानकारी थी।

                                               

पीएच मापक

पीएच मापक द्रव्यों की अम्लीयता और क्षारीयता यानि पीएच का स्तर मापन करने हेतु उपकरण होता है। इसके द्वारा जांचे गए द्रव्य में अम्लीयता और क्षारीयता का स्तर बराबर रहता है, तो वह द्रव्य उदासीन होता है। कई अर्ध-तरल पदार्थों की जांच हेतु विशेष प्रोब्स ...

                                               

फ्लक्समापी

फ्लक्समापी या सर्च क्वायल मैग्नेटोमीटर एक मैग्नेटोमीटर है जो परिवर्ती चुम्बकीय फ्लक्स का मापन करता है। यह एक सदिश मैग्नेटोमीटर है जो किसी बिन्दु पर मौजूद चुम्बकीय क्षेत्र के एक या सभी अंशों की माप करता है। यह कुछ मिलीहर्ट्ज से लेकर सैकड़ों मेगाहर ...

                                               

भूकम्पमापी

भूकंपमापी भूगति के एक घटक को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष विधि से अधिक यथार्थतापूर्वक अभिलिखित करने वाला उपकरण है। सुपरिचित प्राकृतिक भूकंपों, भूमिगत परमाणु परीक्षण एवं पेट्रोलियम अन्वेषण आदि में मनुष्यकृत विस्फोटों तथा तेज हवा, समुद्री तरंग, तेज मानस ...

                                               

रैंकाइन पैमाना

इसको रोमर पैमाना भी कहा जाता है इसका हिमांक विंदु 0°R तथा भाप बिंदु 80°R है इसको सेलसियस पैमाने से इस प्रकार तुलनात्मक रूप से जोड़ सकते है C-0/100=R-0/80

                                               

सूक्ष्ममापी

सूक्ष्ममापी वह यंत्र है जिसका उपयोग सूक्ष्मकोण एवं विस्तार मापने के लिए इंजीनियरों, खगोलज्ञों एवं यांत्रिक विज्ञानियों द्वारा किया जाता है। यांत्रिकी में सूक्ष्ममापी कैलिपर या गेज के रूप में रहता है और इससे एक इंच के १०-४ तक की यथार्थ माप ज्ञात क ...

                                               

सेंसर

सेंसर एक ऐसा उपकरण है जो किसी भौतिक राशि को मापने का कार्य करता है तथा इसे एक ऐसे संकेत में परिवर्तित कर देता है जिसे किसी पर्यवेक्षक या यंत्र द्वारा पढ़ा जा सकता है। उदाहरणस्वरूप, एक पारे से भरा कांच का थर्मामीटर मापित तापमान को एक तरल पदार्थ के ...

                                               

अयन

यह हिन्दू समय मापन इकाई है। यह इकाई मध्यम श्रेणी की है। एक अयन छः मास के बराबर होता है। एक याम = 7½ घटि एक अहोरात्र = नाक्षत्रीय दिवस जो कि सूर्योदय से आरम्भ होता है एक मास = २ पक्ष पूर्णिमा से अमावस्या तक कॄष्ण पक्ष; और अमावस्या से पूर्णिमा तक श ...

                                               

भारतीय मापिकी सोसायटी

भारतीय मापिकी सोसायटी) भारत की एक प्ंजीकृत सोसायटी है जो १ जनवरी १९८४ को स्थापित की गयी थी। इसका उद्देश्य मापिकी को भारतीय समाज में प्रसार करने एवं उसको आत्मसात करने के लिये प्रयास करना है।

                                               

अनिर्धार्य रूप

0/0, ∞/∞, 0 × ∞, ∞ − ∞, 0 0, 1 ∞ and ∞ 0 आदि रूपों को अनिर्धारित रूप या अनिर्धार्य रूप कहते हैं। इनके मान का निर्धारण बिना किसी अन्य सूचना के नहीं किया जा सकता। किन्तु ऐसे रूपों की सीमा निकाली जा सकती है।

                                               

अवकल गणित

गणित में अवकल गणित कैलकुलस का उपभाग है जिसमें परिवर्तन की दर का अध्ययन किया जाता है। कैलकुलस का दूसरा उपभाग समाकलन गणित है। अवकलज की परिभाषा f ′ x = lim h → 0 f x + h − f x h {\displaystyle fx=\lim _{h\to 0}{fx+h-fx \over h}}

                                               

आंशिक अवकलज

गणित में, कई चरों के किसी फलन का आंशिक अवकलज उस फलन में आये हुए अन्य चरों को अपरिवर्ती मानते हुए तथा केवल किसी एक चर को परिवर्ती मानते हुए उसके सापेक्ष उस फलन के अवकलज के बराबर होता है। कोई फलन f, x, y, z आदि का फलन हो तो x के सापेक्ष उसका आंशिक ...

                                               

एल् हास्पिटल का नियम

कलन में एल-हास्पिटल का नियम की सहायता से अनिर्धार्य रूप वाले फलनों का सीमान्त मान ज्ञात किया जाता है। इसके अनुप्रयोग से अनिर्धार्य रूप वाले फलन किसी ऐसे व्यंजक में परिवर्तित हो जाते हैं जिसमें सीमा चर को रखकर मान प्राप्त किया जा सकता है। इस नियम ...

                                               

कर्ल (गणित)

सदिश कलन में कुंतल या कर्ल एक सदिश संकारक है जो किसी त्रिविम सदिश क्षेत्र के अत्यणु घूर्णन का वर्णन करता है। क्षेत्र के प्रत्येक बिन्दु पर कर्ल को एक सदिश राशि द्वारा निरुपित किया जाता है। त्रिबीमीय सदिश A {\displaystyle \mathbf {A} } या A → {\di ...

                                               

खंडशः समाकलन

कैलकुलस में खंडश: समाकलन एक प्रमेय है जो दो फलनों के गुणनफल के समाकल को निम्नलिखित प्रकार से व्यक्त करता है- ∫ u x v ′ x d x = u x v x − ∫ v x u ′ x d x {\displaystyle \int uxvx\,dx=uxvx-\int vx\,uxdx} उपरोक्त को छोटे रूप में निम्नलिखित ढंग से भी ...

                                               

गुणन नियम

कैलकुलस में, गुणन नियम दो या अधिक फलनों के गुणनफल का अवकलज निकालने का एक सूत्र है। गुणन नियम को निम्नलिखित ढंग से अभिव्यक्त किया जा सकता है- f ⋅ g ′ = f ′ ⋅ g + f ⋅ g ′ {\displaystyle f\cdot g=f\cdot g+f\cdot g\,\!} इसे ही लैब्नीज के निरूपण Leibn ...

                                               

गुणोत्तर श्रेणी

गुणोत्तर श्रेणी वह श्रेणी है जिसके क्रमागत पदों का अनुपात अचर होता है। उदाहरण के लिये, २ + ६ + १८ + ५४. एक गुणोत्तर श्रेणी है जिसका सर्वनिष्ट अनुपात कॉमन रेशियो ३ है। निम्नलिखित श्रेणी, गुणोत्तर श्रेणी का सामान्य रूप है, a + a r + a r 2 + a r 3 + ...

                                               

टेलर प्रमेय

कैलकुलस में, टेलर प्रमेय किसी फलन का किसी बिन्दु पर सन्निकट प्रसार देने वाला एक प्रमेय है। यह प्रमेय किसी k-बार अवकलन किए जाने योग्य फलन का किसी बिन्दु पर k-वें आर्डर के टेलर बहुपद के रूप में सन्निकटन करता है।

                                               

टेलर श्रेणी

गणित में टेलर श्रेणी एक श्रेणी है किसी फलन को अनन्त पदों के योग से निरूपित करती है। ये पद उस फलन के किसी बिन्दु पर अवकलों के मान से निकाले जाते हैं। इसे अंग्रेज गणितज्ञ ब्रूक टेलर ने १७७५ में दिया था।

                                               

भिन्नात्मक कलन

भिन्नात्मक कलन, गणितीय विश्लेषण की शाखा है जिसमें अवकलज ऑपरेटर D = d x, {\displaystyle D={\dfrac {d}{dx}},} तथा समाकलन ऑपरेटर J के भिन्नात्मक या वास्तविक घातांक निकालने की सम्भावना का अध्ययन किया जाता है।

                                               

रीमान-समाकल

गणित की वास्तविक विश्लेषण के रूप में पहचानी जाने वाली शाखा में रीमान समाकलन किसी फलन का किसी अन्तराल में परिभाषित प्रथम निश्चित परिभाषा है। यह परिभाषा बर्नहार्ड रीमान ने दी थी। विभिन्न फलनोम और प्रायोगिक अनुप्रयोगों के लिए रीमान समाकलन की मूलभूत ...

                                               

लैब्नीज का सामान्य नियम

कैलकुलस में लैब्नीज का सामान्य नियम गुणन नियम का सामान्यीकरण करता है। इसका नाम जर्मन गणितज्ञ लैब्नीज के नाम पर रखा गया है। इस नियम के अनुसार, यदि f और g दो फलन हैं जो n -बार अवकलित किये जा सकते हैं, तो fg भी न-बार अवकलित किया जा सकता है तथा इसका ...

                                               

शृंखला नियम (अवकलन)

कैलकुलस में दो या अधिक फलनों के संयुक्त फलन का अवकलज निकालने के लिये शृंखला नियम का उपयोग किया जाता है। समाकलन में, प्रतिस्थापन द्वारा समाकलन, इस विधि की उल्टी विधि है। f ∘ g ′ = f ′ ∘ g ⋅ g ′. {\displaystyle f\circ g=f\circ g\cdot g.} इसी को लैब ...

                                               

समाकलन

समाकलन यह एक विशेष प्रकार की योग क्रिया है जिसमें अत्यणु मान वाली किन्तु गिनती में अत्यधिक चर राशियों को जोड़ा जाता है। इसका एक प्रमुख उपयोग वक्राकार क्षेत्रों का क्षेत्रफल तथा आयतन निकालने में होता है। समाकलन को अवकलन की व्युत्क्रम संक्रिया की त ...

                                               

कोशी की मूल परीक्षा

गणित में कोशी की मूल परीक्षा किसी अनन्त श्रेणी के अभिसरण की निकष है। यह परीक्षा सबसे पहले कोशी द्वारा प्रतिपादित की गयी थी। यह निम्नलिखित राशि सुपर लिमिट के मान पर निर्भर करता है - lim sup n → ∞ | a n | n, {\displaystyle \limsup _{n\rightarrow \i ...

                                               

कौशी अभिसरण परीक्षण

कौशी अभिसरण परीक्षण किसी अनन्त श्रेणी के अभिसरण के परीक्षण के लिए काम में लिया जाता है। एक श्रेणी ∑ i = 0 ∞ a i {\displaystyle \sum _{i=0}^{\infty }a_{i}} सभी a i वास्तविक अथवा सम्मिश्र के लिए यह योग के लिए अभिसारी है यदि और केवल यदि ∀ ε > 0 { ...

                                               

कौशी-आयलर समीकरण

गणित में, कौशी-आयलर समीकरण चर गुणांक सहित रैखिक समघात साधारण अवकल समीकरण है। कभी कभी इसे समविमीय समीकरण के के रूप में भी निर्दिष्ट किया जाता है। इसकी साधारण सरंचना के कारण इस समीकरण को नियत गुणांकों के साथ तुल्य समीकरण से प्रतिस्थापित किया जा सकत ...

                                               

चरघातांकी फलन

गणित में चरघातांकी फलन एक ऐसा फलन है जिसका अवकलज उसी के बराबर होता है। अर्थात किसी बिन्दु पर इस फलन के वृद्धि की दर उस बिन्दु पर इस फलन के मान के बराबर होती है। इस फलन को e x {\displaystyle e^{x}} से निरुपित किया जाता है जहाँ e एक अपरिमेय संख्या ...