ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 396




                                               

मावठा सरोवर

मावठा झील भारत के राजस्थान प्रदेश की राजधानी में आमेर दुर्ग के नीचे स्थित है। यह एक कृत्रिम झील है, जिसका निर्माण महल की सुरक्षा एवं सुन्दरता बढ़ाने के लिए किया गया था। झील के एक किनारे के साथ-साथ ही दुर्ग में जाने का पैदल मार्ग है, एवं एक सुंदर ...

                                               

मोती डूंगरी

मोती डूंगरी एक निजी पहाड़ी ऊचाँई पर बना किला है जो स्कॉटलैण्ड के महल की तरह निर्मित है। कुछ वर्षों पहले, पहाड़ी पादगिरी पर बना गणेश मंदिऔर अद्भुत लक्ष्मी नारायण मंदिर भी उल्लेखनीय है।

                                               

राम निवास बाग

एक चिड़ियाघर, दरबा, पौधाघर, वनस्पति संग्राहलय से युक्त एक हरा भरा विस्तृत बाग, खेल का प्रसिद्ध मैदान भी है। बाढ राहत परियोजना के अंतर्गत ईसवी सन् 1865 में सवाई राम सिंह द्वितीय ने इसे बनवाया था। सर सवीटन जैकब द्वारा रूपांकित, अल्बर्ट हाल जो भारती ...

                                               

रामगढ़ झील

पेड़ो से आच्छादित पहाड़ियो के बीच एक ऊंचा बांध बांधकर एक विशाल कृत्रिम झील की निर्माण किया गया है। यद्यपि जमवा माता का मंदिर व पुराने किले के खंडहर इसके पुरावशेष है। विशेषकर बारिश के मौसम में इसके आकर्षक प्राकृतिक दृश्य इसको एक बेहतर पिकनिक स्थल ...

                                               

लक्ष्मी मिष्ठान भंडार होटल

लक्ष्मी मिष्ठान भंडार होटल, जो एल एम् बी के नाम से भी लोकप्रिय है, यह भारत के राजस्थान राज्य में जयपुर शहर का एक प्रसिद्ध होटल, रेस्तरां एवं मिठाई की दुकान है। 1954 में स्थापित यह होटल जौहरी जयपुर शहर के जौहरी बाजार स्थित है। यह होटल राज्य को पहल ...

                                               

शिला माता मन्दिर

शिला देवी मंदिर भारत के राजस्थान राज्य के जयपुर नगर में आमेर महल में स्थित एक मंदिर है। इसकी स्थापना यहां सवाई मानसिंह द्वितीय द्वारा की गयी थी। स्थानीय लोगों से मिली सूचनानुसार शिला देवी जयपुर के कछवाहा राजपूत राजाओं की कुल देवी रही हैं। इस मंदि ...

                                               

सरगासूली

अठारहवीं सदी में 1749 में सात खण्डों की इस भव्य जयपुर शहर की सबसे ऊंची मीनार मीनार ईसरलाट उर्फ़ सरगासूली का निर्माण महाराजा ईश्वरी सिंह ने जयपुर के गृहयुद्धों में विरोधी सात दुश्मनों पर अपनी तीन विजयों के बाद करवाया था।

                                               

सांगानेर

सांगानेर टोंक मार्ग पर स्थित है। इसके ध्वस्त महलों के अतिरिक्त, सांगानेर के उत्कृष्ट नक्काशीदार जैन मंदिर है। दो त्रिपोलिया के अवशेषो द्वारा नगर में प्रवेश किया जाता है। शिल्प उद्योग के लिए शहर महत्वपूर्ण केन्द्र है और ठप्पे व जालीदार छपाई की इका ...

                                               

स्टैच्यू सर्किल

स्टैच्यू सर्किल राजस्थान की राजधानी जयपुर का केन्द्र है। इस गोल चक्कर के मध्य सवाई जयसिंह द्वितीय की मूर्ति बहुत ही उत्कृष्ट ढंग से बनी हुआ है। इसे जयपुर के संस्थापक को श्रद्धांजलि देने के लिए नई क्षेत्रीय योजना के अंतर्गत बनाया गया है।

                                               

हवामहल

हवा महल भारतीय राज्य राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक राजसी-महल है। इसे सन 1799 में महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने बनवाया था और इसे किसी राजमुकुट की तरह वास्तुकार लाल चंद उस्ता द्वारा डिजाइन किया गया था। इसकी अद्वितीय पांच-मंजिला इमारत जो ऊपर से तो ...

                                               

देहरादून जिला

देहरादून, भारत के उत्तराखंड राज्य की राजधानी है इसका मुख्यालय देहरादून नगर में है। इस जिले में ६ तहसीलें, ६ सामुदायिक विकास खंड, १७ शहर और ७६४ आबाद गाँव हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ १८ गाँव ऐसे भी हैं जहाँ कोई नहीं रहता। देश की राजधानी से २३० किलोमीटर ...

                                               

कलंगा स्मारक

देहरादून-सहस्रधारा मार्ग पर स्थित यह स्मारक ब्रिटिशों और गोरखाओं के बीच १८० वर्ष पहले हुए युद्ध में बहादुरी की गाथाएँ याद दिलाता है। रिसपाना नदी के किनारे पहाड़ी पर १००० फुट की ऊँचाई पर बना यह स्मारक गढ़वाली शासकों के इतिहास को दर्शाता है।

                                               

कालसी

कालसी यमुना और उसकी सहायक टोंस के संगम पर स्थित है। यह देहरादून से लगभग 56 किलोमीटर दूर है। कालसी में दून घाटी के कुछ बेहद लुभावने दृश्य हैं। यह जगह बाहर घूमने फिरने और दोस्तों तथा परिवार के साथ पिकनिक मनाने के लिए आदर्श है। यहां पक्षियों के बीच ...

                                               

डाकपत्थर

डाकपत्थर एक प्रसिद्ध और खूबसूरत पिकनिक स्थल है जो देहरादून से लगभग ५० किलोमीटर है। इस जगह के आर्कषणों में जल बिजली स्टेशन है जो डाकपत्‍थर बैराज पर स्थित है। यहाँ पर कई गेस्ट हाउस हैं जहाँ लोग ठहर सकते हैं और यहाँ की प्राकृतिक आभा का आनंद ले सकते हैं।

                                               

डोइवाला

मनोरम प्राकृतिक वादियों में स्थित डोईवाला, उत्तराखंड का एक लघु पर्यटन स्थल है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता से सैलानियों का मन मोह लेने वाले इस छोटे से शहर में पिकनिक मनाने का आनंद भी बेजोड़ है। इस आध्यात्मिक केन्द्पर पहुंचकर पर्यटकों को मानसिक शांति त ...

                                               

देहरादून का इतिहास

मान्यता है कि द्वापर युग में गुरु द्रोणाचार्य ने द्वारागांव के पास देहरादून शहर से 19 किमी पूर्व में देवदार पर्वत पर तप किया था। इसी से यह घाटी द्रोणाश्रम कहलाती है।. केदारखंड को स्कंदपुराण का एक भाग माना जाता है। इसमें गढ़वाल की सीमाओं का वर्णन ...

                                               

देहरादून की समीपवर्ती पहाड़ियाँ

देहरादून के आसपास अनेक पहाड़ियाँ है जो अपने प्राकृतिक वैभव या ऐतिहासिक व पौराणिक महत्व के कारण जानी जाती है। इनमें से प्रमुख हैं- चकराता शांत और प्रदूषण मुक्त परिवेश से सम्पन्न चकराता देहरादून से 98 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पर कुछ बेहद ...

                                               

देहरादून के दर्शनीय स्थल

देहरादून पर्यटन स्थल के रूप में बहुत प्रसिद्ध है। देहरादून की समीपवर्ती पहाड़ियाँ जो अपनी प्राकृतिक सुषमा के लिए जानी जाती हैं, मंदिर जो आस्था के आयाम हैं, अभयारण्य जो पशु-पक्षी के प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, रैफ्टिंग और ट्रैकिंग जो पह ...

                                               

देहरादून के पर्व और उत्सव

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून, मेलों और त्यौहारों का हिस्सा है। मेले और त्यौहार बडे़ उत्साह के साथ निरन्तर रूप से मनाये जाते है। मेले और त्यौहार यहाँ के स्थानीय लोगों के आध्यात्मिक जीवन को समृद्ध करते है। बहुत से मेले और त्यौहार भिन्न प्रकृति और ...

                                               

सहस्रधारा

सहस्त्रधारा देहरादून से मात्र 16 किलोमीटर की दूरी पर राजपुर गांव के पास स्थित है। यहां स्थित गंधक झरना त्वचा की बीमारियों की चिकित्सा के लिए प्रसिद्ध है। इसकी चिकित्सा संबंधी कुछ अन्य उपादेयताएं भी हैं। खाने-पीने और अन्य तरह की चीजें बेचने वाली द ...

                                               

आरा-छपरा सेतु

आरा-छपरा सेतु अथवा वीर कुँवर सिंह सेतु गंगा पर बना है। यह भोजपुर जिले के बबुरा और सारण जिले के डोरीगंज को जोड़ता है। इस पुल के बन जाने के बाद आरा से छपरा की दूरी 100 किमी कम हो गई। आरा साइड में 16 किलोमीटर व छपरा साइड में एक किलोमीटर एप्रोच रोड ह ...

                                               

कोइलवर पुल

कोईलवर पुल पटना और आरा के बीच कोइलवर नामक स्थान पर है। कोईलवर रेल-सह-सड़क पुल है। ऊपर रेलगाड़ियाँ और नीचे बस, मोटर और बैलगाड़ियाँ आदि चलती हैं। सोन नदी पर अवस्थित कोईलवर पुल विकास की जीवन रेखा का एक मुख्य बिन्दु है। लोहे के गाटर से बने इस दोहरे ए ...

                                               

पाटलिपुत्र

बिहार की राजधानी पटना का पुराना नाम पाटलिपुत्र है। पवित्र गंगा नदी के दक्षिणी तट पर बसे इस शहर को लगभग 2000 वर्ष पूर्व पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता था। इसी नाम से अब पटना में एक रेलवे स्टेशन भी है। पाटलीपुत्र अथवा पाटलिपुत्र प्राचीन समय से ही भ ...

                                               

राजेन्द्र सेतु

राजेन्द्र सेतु/ मोकामा पुल - लगभग दो किलोमीटर लंबा यह पुल गंगा नदी पर बना बिहार का रेल-सह-सड़क पुल है, जो उत्तर बिहार को दक्षिण बिहार से जोड़ता है। पुल का स्थान मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या के काम पर आधारित था, जो उस समय 90 वर्ष से अधिक पुराना था। प ...

                                               

गोलघर

गोलघर, बिहार प्रांत की राजधानी पटना में गाँधी मैदान के पश्चिम में स्थित है। 1770 में आई भयंकर सूखे के दौरान लगभग एक करोड़ लोग भुखमरी के शिकार हुए थे। तब के गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग ने गोलघर के निर्माण की योजना बनाई थी, ब्रिटिश इंजिनियर कैप्टन ज ...

                                               

दनियावॉ

दनियावॉ-पटना जिला के प्रखण्ड है। एन/एच३१पर एक गॉव है। यहॉ से बिहार, पटना एवं गया जाने के लिए सड़क मार्ग है। यहॉ पर हाई स्कूल है जहॉ आस-पास के२०गावो क लोग पढने आते है।

                                               

नालन्दा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल

नालन्दा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल पटना में स्थित एक चिकित्सा महाविद्यालय तथा चिकित्सा अनुसंधान का सार्वजनिक विश्वविद्यालय है। इसकी स्थापना १९७० में की गयी थी। यह कंकड़बाग में स्थित है। इस महाविद्यालय के प्रत्येक बैच में १०० छात्र लिये जाते हैं। यह ...

                                               

पटना के रोमन कैथोलिक आर्चडियोज़

विश्वास के प्रचार के लिए मण्डली ने तिब्बत के प्रान्त का निर्माण किया - 1703 में हिंदुस्तान और एंकोना के मार्च में पिकमेनम के इतालवी प्रांत के कैपचिन पिता को सौंप दिया। पिता का पहला समूह 1707 में ल्हासा तिब्बत पर पहुंच गया और वहां चर्च काम शुरू कि ...

                                               

पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल

पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल पटना में स्थित एक चिकित्सा महाविद्यालय है। इसकी स्थापना 1925 में हुई थी और इसका मूल नाम प्रिंस ऑफ वेल्स मेडिकल कॉलेज था। यह महाविद्यालय पूर्व में, पटना विश्वविद्यालय से सम्बद्ध था किन्तु अब आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय स ...

                                               

विक्रमशिला सेतु

विक्रमशिला सेतु भारतीय धर्म बिहार के भागलपुर के पास गंगा में एक पुल है, जिसका नाम विक्रमाशिला के प्राचीन महाविहार के नाम पर रखा गया था, जिसे राजा धर्मपाल द्वारा स्थापित किया गया था। विक्रमशिला सेतु भारत में पानी पर 5 वां सबसे लंबा पुल है। 4.7 किम ...

                                               

इस्कॉन का हरे कृष्ण मंदिर

इस्कॉन का हरे कृष्ण मंदिर १, आर ब्लॉक, चॉर्ड रोड, राजाजी नगर में हरे कृष्ण पहाड़ी पर स्थित है। सुंदर बगीचे के बीच में स्थित होने के कारण इस मंदिर के चारों ओर विश्राम करते हुए प्रकृति सौंदर्य का अनुभव करते हुए ईश्वर के साथ एकाकार हुआ जा सकता है। व ...

                                               

कब्बन पार्क और संग्रहालय

कब्बन पार्क और संग्रहालय बंगलोर शहर के मध्य में स्थित यह सुंदर पार्क १८६४ में बना था। इसका नाम पूर्व मुख्य आयुक्त मार्क कब्बन के नाम पर रखा गया है। साथ ही आप पार्क में बना सरकारी संग्रहालय देखने योग्य है। यहाँ होयसला शिल्पकला, मोहनजोदड़ो से प्राप ...

                                               

गांधी भवन

गांधी भवन बंगलोर यह कुमार कृपा रोड पर स्थित है। गांधी भवन देखने पर भारत के राष्ट्रपिता के महान दूरदर्शी व्यक्ति के जीवन की सादगी के दर्शन होते हैं। इस भवन में उनके फोटोग्राफ, लकड़ी के खड़ाऊ, मिट्टी के प्याले और फ्रेंक्लिन रूज़वेल्ट, जवाहर लाल नेह ...

                                               

जैवसूचना एवं जैवप्रौद्योगिकी संस्थान, बंगलौर

The Institute of Bioinformatics and Applied Biotechnology is a research and teaching institute located in the International Tech Park, Bangalore. Its mission is to help grow the biotech industry. In order to fulfill this mission, it has adopted t ...

                                               

टीपू सुल्तान का सुमेर महल

टीपू का सम्मर पेलेस, भारत के शहर बेंगलूर के क़िले में एक महल है जिसे मैसूर के सुल्तान हैदर अली ने बनवाना शुरू किया और टीपू सुल्तान ने उसको 1791 में पूरा किया। टीपू सुल्तान की मृत्यू के बाद ब्रिटिश सरकार के हाथों में यह महल आया। आज कल इसे कर्नाटक ...

                                               

नृत्य ग्राम

नृत्य ग्राम नामक प्रसिद्ध नृत्यशाला बंगलोर से ३० किलो मीटर पश्चिम में बंगलोर-पुणे मुख्य-मार्ग पर स्थित है। ओडिसी जैसी महान नृत्य शैली के प्रसार के लिए परीक्षण के तौपर इस स्कूल की स्थापना भारत की सर्वश्रेष्ठ ओडिसी नृत्यांगनाओं में से एक प्रोतिमा ग ...

                                               

बासवांगुडी मंदिर

बासवांगुडी मंदिर सुंदर बगले पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर का निर्माण बंगलोर के संस्थापक कैंपे गौड़ा द्वारा कराया गया था। यहां नंदी बैल की विशाल प्रतिमा है जो ५०० वर्ष से अधिक पुरानी है। यह मूर्ति ५ मी. ऊंची और ६ मी. लंबी है और एक ही पत्थर से काटकर बना ...

                                               

बेंगलोर पैलेस

बेंगलोर पैलेस बंगलोर विधान सौध के उत्तर-पश्चिम में ऊंचे स्थान पर यह एक सुंदर बगीचे के बीच में स्थित है। यह लंदन के विंडसर-कैसल की झलक देता है।owner is the queen of Mysore.

                                               

भारतीय प्रबंध संस्थान बेंगलूर

भारतीय प्रबंधन संस्थान, बंगलौर भारत का प्रमुख प्रबंध संस्थान है। यह संपूर्ण पत्थर की इमारत, हरे-भरे परिसर एवं भूदृश्य-पूर्ण उद्यान सहित दक्षिण बेंगलूर में 100 एकड़ के भू-भाग में स्थित है। इसकी स्थापना सन 1973 में हुई थी।

                                               

लाल बाग

लाल बाग कर्णाटक की राजधानी बंगलोर में स्थित एक उद्यान है। यहाँ कई एकड़ क्षेत्र में फैले घास के लॉन, दूर तक फैली हरियाली, सैंकड़ों वर्ष पुराने पेड़, सुंदर झीलें, कमल के तालाब, गुलाबों की क्यारियाँ, दुर्लभ समशीतोष्ण और शीतोष्ण पौधे, सजावटी फूल हैं। ...

                                               

वंडरला

वंडरला एक मनोरंजन पार्क है, जो बिदडी के निकट स्थित है, जो बंगलौर से २८ किलोमीटर के दूरी मे है। यह मनोरंजन पार्क ८२ एकड़ ज़मीन पर फैली है यह कोचीन, केरल में स्थित वि गार्ड इंडस्ट्रीज लिमिटेड, द्वारा पदोन्नत किया गया है। इस्को अक्टूबर 2005 के बाद स ...

                                               

विधान सौध

१९५८ में निर्मित बेंगलुरु का विधान सौध, कर्नाटक सरकार के सचिवालय और राज्य की विधान सभा के कार्यस्थल के रूप में उपयोग में लाया जाता है। बेंगलुरु ग्रेनाइट से नव-द्रविड़ शैली में बनी यह इमारत भारतीय स्थापत्य कला का शानदार उदाहरण है। इसे रविवार रात्र ...

                                               

साईं बाबा का आश्रम

साईं बाबा का आश्रम आश्रम बंगलोर से १६ कि॰मी॰ दूर चेन्नई रोड पर व्हाइटफील्ड में स्थित है। साईं बाबा का मुख्य आश्रम आंध्र प्रदेश में पुत्तापार्थी में है, जहां उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय व्यतीत किया था।

                                               

अरेरा कॉलोनी

अरेरा कॉलोनी भोपाल शहर, जो की मध्यप्रदेश की राजधानी है उसके सबसे बड़े आवासीय क्षेत्रो में से एक हैं। यह शहर के संभ्रांत आवासीय क्षेत्रो में जाना जाता है। शहर के दक्षिणी भाग में स्थित इस कॉलोनी में हरे भरे पेड़ तथा उद्यान बहुतायत की संख्या में पाए ...

                                               

गुफा मंदिर, भोपाल

गुफा मंदिर भोपाल के प्रमुख पर्यटन स्थलों के शीर्ष में सम्मिलित है तथा शहर के केंद्र से लगभग ५ किलो मीटर की दूरी पर लालघाटी नामक स्थान पर स्थित है और यात्रियों व दर्शकों के मध्य आकर्षण का केंद्र है। गुफा मंदिर की खोज वर्ष १९४९ में श्री महंत नारायण ...

                                               

भारत भवन

भारत भवन, भारत के प्रान्त मध्य प्रदेश में स्थित एक विविध कला,सांस्कृतिक केंद्र एवं संग्रहालय है। इसमें कला दीर्घा, ललित कला संग्रह, इनडोर/आउटडोर ओडिटोरियम, रिहर्सल रूम, भारतीय कविताओं का पुस्तकालय आदि कई चीजें शामिल हैं। यह भोपाल के बड़े तालाब के ...

                                               

भोपाल का इतिहास

ऐसा समझा जाता है कि भोपाल की स्थापना परमार राजा भोज ने १०००-१०५५ ईस्वी में की थी। उनके राज्य की राजधानी धार थी, जो अब मध्य प्रदेश का एक जिला है। शहर का पूर्व नाम भोजपाल था जो भोज और पाल के संधि से बना था। परमार राजाओं के अस्त के बाद यह शहर कई बार ...

                                               

भोपाल के पर्यटन स्थल

भोपाल का छोटा तालाब, बडा तालाब, भीम बैठका, अभयारण्य तथा भारत भवन देखने योग्य हैं| भोपाल के पास स्थित सांची का स्तूप भी पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है। भोपाल से लगभग २८ किलोमीटर दूर स्थित भोजपुर मन्दिर एक एतिहासिक दर्शनिय स्थल है।इस विशाल शहर की ...

                                               

भोपाल के शिक्षा संस्थान

AISECT University अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय RKDF University माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय Jagran Lakecity University राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय

                                               

भोपाल जंक्शन रेलवे स्टेशन

मिल 8 नए अन्य स्थानीय रेलवे स्टेशनों के रूप में नाम: तो कुल में, भोपाल 13 है स्थानीय रेलवे स्टेशनों. मुख्य रेलवे स्टेशन के रूप में के अच्छी तरह भोपाल हबीबगंज रेलवे स्टेशन के साथ 47 अन्य रेलवे स्टेशनों का चयन करने के साथ के रूप में उभरने वर्ल्ड क् ...