ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 414




                                               

बदायूँ

बदायूं भारत के उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख शहर एवं लोकसभा क्षेत्र है। बदायूँ, उत्तर प्रदेश का एक महत्त्वपूर्ण ज़िला है। यह गंगा की सहायक नदी स्रोत के समीप स्थित है। 11वीं शती के एक अभिलेख में, जो बदायूँ से प्राप्त हुआ है, इस नगर का तत्कालीन नाम वोद ...

                                               

बनवारी लाल

बनवारी लाल ब्रिटिश काल के दौरान उत्तर प्रदेश में गठित क्रान्तिकारी संगठन हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन का सक्रिय सदस्य ही नहीं अपितु रायबरेली का जिला संगठनकर्ता भी था। ९ अगस्त १९२५ को काकोरी के समीप हुई ऐतिहासिक डकैती में समूचे हिन्दुस्तान से ४० ...

                                               

बराबिकू

बराबिकू फ़र्रूख़ाबाद जिले के अन्तर्गत कायमगंज से अलीगंज मार्ग पर कायमगंज कस्वे से लगभग ७ किलोमीटर दूर है। आलू, गेहूँ, ईख की बहुत अच्छी खेती यहाँ होती है। गाँव में राजकीय प्राथमिक पाठशाला है।

                                               

बस्ती, उत्तर प्रदेश

यह भारत के उत्तर प्रदेश प्रान्त का एक शहर और बस्ती जिला का मुख्यालय है। ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह स्थान काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। बस्ती जिला गोण्डा जिले के पूर्व और संत कबीर नगर के पश्चिम में स्थित है। क्षेत्रफल की दृष्टि से भी यह उत्तर प्रदेश ...

                                               

बाँदा

बाँदा, बुन्देल्ख्नन्ड के उत्तर प्रदेश प्रान्त का एक जिला है। यहाँ से "चित्रकूट" काफ़ी निकट है। यहाँ की केन नदी का "शजर" पत्थर बहुत मशहूर है। और यहाँ बाम्देवेश्वर मन्दिर भी काफी प्रसिद्ध है।

                                               

बाल विद्या मंदिर, लखनऊ

बाल विद्या मंदिर, लखनऊ, भारत के लखनऊ में स्थित एक अंग्रेजी माध्यम, सह-शिक्षा विद्यालय है। 1963 में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, श्रध्देय चन्द्र भानु गुप्ता द्वारा स्थापित, सीबीएसई से संबद्ध स्कूल, नर्सरी से बारहवीं कक्षा तक शिक्षा प्रदान कर ...

                                               

बिजनौर

बिजनौर भारत के उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख शहर एवं लोकसभा क्षेत्र है। हिमालय की उपत्यका में स्थित बिजनौर को जहाँ एक ओर महाराजा दुष्यन्त, परमप्रतापी सम्राट भरत, परमसंत ऋषि कण्व और महात्मा विदुर की कर्मभूमि होने का गौरव प्राप्त है, वहीं आर्य जगत के प ...

                                               

बिल्हौर

बिल्हौर,यह एक कस्बा है जो भारत में उत्तर प्रदेश प्रांत के कानपुर जिले की प्रमुख नगरपालिका है। बिल्हौर की जनसंख्या २००१ की जनगणना के अनुसार १८,०५६ आंकी गयी थी। यहां मुख्य रूप से हिंदी भाषा के तौपर इस्तेमाल की जाती है। यह क्षेत्र कन्नौज शहर के करीब ...

                                               

भदावर

भदावर - भदौरियो के १९४७ से पहले का राजसी साम्राज्य का नाम है! यह क्षेत्र भारत के उत्तर प्रदेश में जिला इटावा, आगरा, मध्य प्रदेश के भिन्ड, राजस्थान के धौलपुर तक फ़ैला हुआ है, भिण्ड, मुरैना, इटावा, ग्वालियर, दतिया, धौलपुर, आगरा, तथा जालौन तथा यमुना ...

                                               

मिर्ज़ापुर

मिर्ज़ापुर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का शहर है। यह मिर्ज़ापुर जिला का मुख्यालय है। पर्यटन की दृष्टि से मिर्जापुर काफी महत्वपूर्ण जिला माना जाता है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक वातावरण बरबस लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती है। मिर्जापुर विं ...

                                               

मिल्कीपुर

मिल्कीपुर भारतवर्ष के उत्तरी राज्य उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले का एक कस्बा, विधानसभा क्षेत्र तथा तहसील है। तथा अयोध्या से रायबरेली राजमार्ग पर स्थित है। २००१ में इसकी जनसंख्या १,७६४ तथा साक्षरता दर ५२% थी। मिल्कीपुर थाना और तहसील मुख्यालय मिल्की ...

                                               

मुरादाबाद

मुरादाबाद भारत के उत्तर प्रदेश प्रान्त का एक नगर है जो कि पीतल हस्तशिल्प के निर्यात के लिए प्रसिद्ध है। रामगंगा नदी के तट पर स्थित मुरादाबाद पीतल पर की गई हस्तशिल्प के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इसका निर्यात केवल भारत में ही नहीं अपितु अमेरि ...

                                               

मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय

मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय: एक निजी विश्वविद्यालय है जो रामपुर में मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, उत्तर प्रदेश, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, द्वारा मान्यता प्राप्त 2006 में स्थापित किया गया था इसके चांसलर समाजवादी पार्टी के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम ख ...

                                               

राधन

राधन,गाँव भारत में उत्तर प्रदेश प्रांत के कानपुर जिले की तहसील बिल्हौर में स्थित है। राधन की कुल जनसंख्या २०१५ की जनगणना के अनुसार ४००९ आंकी गयी थी। यहाँ की प्रमुख भाषा हिन्दी है। यह क्षेत्र कानपुर शहर और जिले से ४२ किलोमीटर की दूरी पे स्थित है। ...

                                               

रोहिना मिर्जापुर

रोहिना मिर्जापुर गाँव भारत देश में उत्तर प्रदेश प्रान्त में स्थित एटा जिले की जलेसर तहसील के ब्लाक अवागढ़ का महत्वपूर्ण गाँव है। यह गाँव 12 गाँव की ग्राम पंचायत का केन्द्र हैँ। इस पंचायत के अंर्तगत आने बाले गाँव टोढरपुर, नगला खड़ी, आनंदपुर, कुबेर ...

                                               

रोहिलखन्ड मंडल

रोहिलखंड मंडल ब्रिटिश भारत के प्रान्त यूनाइटेड प्रौविन्सेज़ ऑफ़ ऐग्रा ऐण्ड औध के 9 प्रशासनिक मंडलों में से एक था। इसमें रोहिलखंड क्षेत्र के जिले शामिल थे।

                                               

शम्भूनगला

शम्भूनगला फ़र्रूख़ाबाद जिले के अन्तर्गत कायमगंज से अलीगंज मार्ग पर कायमगंज कस्वे से लगभग ७ किलोमीटर दूर है। आलू, गेहूँ, गन्ना की बहुत अच्छी खेती यहाँ होती है। गाँव में डाकघर है तथा जूनियर हाई स्कूल है। यह यादवों का गाँव है। इस गाँव में केवल यादव ...

                                               

शिवपाल सिंह यादव

शिवपाल सिंह यादव भारत के एक राजनेता हैं। सन् 1955 को बसंत पंचमी के पावन दिन में पिता सुघर सिंह तथा माता मूर्ति देवी के कनिष्ठ पुत्र के रूप में जन्मे शिवपाल सिंह यादव को मानवता के प्रति उदात्त भाव विरासत में मिला। उन्होंने जनसंघर्षों में भाग लेना ...

                                               

सलेमपुर

सलेमपुर देवरिया जिले का एक शहर है, तथा यह एक तहसील के रूप में जान जाता है, और यहाँ रेलवे जंक्शन भी है, जो बरहज बाजार तक जाता है,यह तहसील देवरिया जिला, उत्तर प्रदेश में स्थित है। 2011 में हुई भारत की जनगणना के अनुसार इस तहसील में 526 गांव हैं। सले ...

                                               

हमीरपुर, उत्तर प्रदेश

हमीरपुर भारत के उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख शहर एवं लोकसभा क्षेत्र है। यह कानपुर के दक्षिण में यमुना नदी के तट पर स्थित है। यह नगर एक कृषि व्यापार केंद्र है। हमीरपुर की एक प्रमुख सड़क जंक्शन और रेलमार्ग के पास स्थित है। हमीरपुर नगर में 11वीं शताब्द ...

                                               

अस्कोट

अस्कोट उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित एक कस्बा है। यह कुमाऊँ मण्डल में आता है। अस्कोट प्राचीनकाल में इसी नाम के एक राज्य की राजधानी हुआ करता था। यह डीडीहाट तहसील और कनालीछीना विकासखंड का हिस्सा है। अस्कोट यहाँ स्थित एक वन्य जीव अभ्यारण्य क ...

                                               

उनियाल

उनियाल उत्तर भारत की गढ़वाली ब्राह्मण जाति है, जो अक्सर उत्तरांचल राज्य में उपयोग होती है। यह उत्तराखंड के श्रेष्ठतम ब्राह्मणों में जाने जाते हैं। नौंवी शताब्दी में विहार राज्य के मिथिला से जयानन्द व विजयानन्द झा जो कि ममेरे भाई थे व भारद्वाज व क ...

                                               

एफ़आरआई और कॉलेज एरिया

२००१ की भारतीय जनगणना के अनुसार, एफ़आरआई और कॉलेज एरिया की जनसंख्याअ ५,४२८ है। कुल जनसंख्या में पुरुष ५३% और महिलाएं ४७% हैं। एफ़आरआई और कॉलेज एरिया की औसत साक्षरता दर ८१% है, जो राष्ट्रीय औसत ६५% से अधिक है: पुरुष साक्षरता ८४% और महिला साक्षरता ...

                                               

कालाढूंगी

कालाढूंगी उत्तराखण्ड राज्य के नैनीताल जनपद में स्थित एक नगर है। यह नगर हल्द्वानी-रामनगर तथा बाजपुर-नैनीताल सड़कों के चौराहे पर हल्द्वानी से २६ किलोमीटर, नैनीताल से ३० किलोमीटर तथा बाजपुर से १९ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कालाढूंगी नैनीताल जनपद ...

                                               

कुमाऊँ मण्डल

यह लेख कुमाऊँ मण्डल पर है। अन्य कुमाऊँ लेखों के लिए देखें कुमांऊॅं कुमाऊँ मण्डल भारत के उत्तराखण्ड राज्य के दो प्रमुख मण्डलों में से एक हैं। अन्य मण्डल है गढ़वाल। कुमाऊँ मण्डल में निम्नलिखित जिले आते हैं:- उधमसिंह नगर बागेश्वर पिथौरागढ़ अल्मोड़ा ...

                                               

गढ़वाल मण्डल

यह लेख गढ़वाल मण्डल पर है। अन्य गढ़वाल लेखों के लिए देखें गढ़वाल। गढ़वाल भारत के उत्तराखण्ड राज्य का एक प्रमुख क्षेत्र है। यहाँ की मुख्य भाषा गढ़वाली तथा हिन्दी है। गढ़वाल का साहित्य तथा संस्कृति बहुत समृद्ध हैं। लोक संस्कृत भी अत्यंत प्राचीन और ...

                                               

गढ़वाल में धर्म

गढ़वाल में निवास करने वाले व्यक्तियों में से अधिकांश हिन्दू हैं। यहाँ निवास करने वाले अन्य व्यक्तियों में मुस्लिम, सिख, ईसाई एवं बौद्ध धर्म के लोग सम्मिलित हैं। गढ़वाल का अधिकांश भाग पवित्र भू-दृश्यों एवं प्रतिवेशों से परिपूर्ण है। उनकी पवित्रता ...

                                               

गोरखाली

गोरखाली सन १८०३ में नेपाल की गोरखा सेना द्वारा गढ़वाल राज्य पर किये गये आक्रमण को कहा जाता है। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार केदारखण्ड कई गढ़ों किले में विभक्त था। इन गढ़ों के अलग-अलग राजा थे जिनका अपना-अपना आधिपत्य क्षेत्र था। इतिहासकारों के अनुसार ...

                                               

चौखुटिया

चौखुटिया शब्द दो कुमाउँनी शब्दों "चौ" तथा "खुट" से बना है। कुमाउँनी भाषा में चौ शब्द का अर्थ होता है चार, तथा खुट शब्द का अर्थ होता है पैर। इससे चौखुट का अर्थ हुआ चार पैऔर चौखुटिया का अर्थ हुआ चार पैरों वाला। चार पैर यहां चार मार्गों के सन्दर्भ म ...

                                               

जसपुर, उत्तराखण्ड

यहां पर घना वन क्षेत्र होने तथा राज्‍य की सीमा के पास होने के कारण से चन्‍द्र वंश की छावनी यहीं पर स्‍थापित थी। कहा जाता है कि जसपुर की स्‍थापना चन्‍द्र वशं के सुप्रसिद्ध सेनापति यशोधर सिंह अधिकारी द्वारा की गयी थी। जिसका नाम यशपुर था कालान्‍तर म ...

                                               

द्वाराहाट

द्वाराहाट उत्तराखण्ड राज्य के अल्मोड़ा ज़िले का एक कस्बा है जो रानीखेत से लगभग 21 किलोमीटर दूर स्थित है। द्वाराहाट में तीन वर्ग के मन्दिर हैं - कचहरी, मनिया तथा रत्नदेव। इसके अतिरिक्त बहुत से मन्दिर प्रतिमाविहीन हैं। द्वाराहाट में गूजरदेव का मन्द ...

                                               

धारचूला

धारचूला, पिथौरागढ़ जिला, उत्तराखंड में स्थित एक क्षेत्र है। यह कुमाऊँ मण्डल में आता है। धारचूला की प्रमुख भाषा हिन्दी, पहाड़ी, नेपाली, कुमाऊँनी, और रङ्ग ल्व रंग भाषा है।

                                               

पंतनगर

पंतनगर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के उधम सिंह नगर जनपद में स्थित एक नगर है। गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय तथा पंतनगर विमानक्षेत्र यहां ही स्थित हैं। उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री, गोविन्द बल्लभ पन्त के नाम पर ही इस नगर ...

                                               

परमार्थ निकेतन

परमार्थ निकेतन भारत देश के उत्तराखंड राज्य में ऋषिकेश में स्थित एक आश्रम है। यह हिमालय की गोद में गंगा के किनारे स्थित है। इसकी स्थापना 1942 में सन्त सुकदेवानन्द जी महाराज ने की थी। सन् 1986 स्वामी चिदानन्द सरस्वती इसके अध्यक्ष एवं आध्यात्मिक मुख ...

                                               

बाजपुर

इतिहासकारों के अनुसार सोलहवीं सदी तक बाजपुर चैरासी माल का एक परगना था। बाजपुर का पुराना नाम मुन्डिया था। राजा रुद्रचन्द्र ने मुगल बादशाह अकबर से चैरासी माल का पूर्ण अधिकार प्राप्त कर तराई के प्रबन्ध पर पर्याप्त ध्यान दिया। किन्तु राजा रुद्र चन्द ...

                                               

बेंजी

बेंजी भारत के उत्तरांचल राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में सिल्ली नामक छोटे शहर के पास स्थित एक गाँव है। स्थानीय गढ़वाली बोली में इसका उच्चारण ब्येंजि होता है। बेंजी ग्राम के निवासियों का उपनाम बेंजवाल होता है।

                                               

भवाली

भवाली या भुवाली उत्तराखण्ड राज्य के नैनीताल जनपद में स्थित एक नगर है। यह कुमाऊँ मण्डल में आता है। शान्त वातावरण और खुली जगह होने के कारण भवाली कुमाऊँ की एक शानदार नगरी है। यहाँ पर फलों की एक मण्डी है। यह एक ऐसा केन्द्र - बिन्दु है जहाँ से काठगोदा ...

                                               

मरचा एवं तोलचा समूह

मारचा एवं तोलचा ऊपरी चमोली के ठंडे एवं सूखे भागों में माणा एवं नीति घाटियों में मारचा वास करते हैं। यद्यपि वे तिब्बती भाषा बोलते हैं, उनके मुखाकृति की विशेषता आर्यो से मिलती-जुलती दिखती है। चूंकि मूल रूप से वे तिब्बत से आये हैं इसलिए मारचा हिन्दू ...

                                               

लक्ष्मण झूला

पुरातन कथनानुसार भगवान श्रीराम के अनुज लक्ष्मण ने इसी स्थान पर जूट की रस्सियों के सहारे नदी को पार किया था। स्वामी विशुदानंद की प्रेरणा से कलकत्ता के सेठ सूरजमल झुहानूबला ने यह पुल सन् 1889 में लोहे के मजबूत तारों से बनवाया, इससे पूर्व जूट की रस् ...

                                               

श्रीनगर, गढ़वाल का पौराणिक संदर्भ

उत्तराखंड का गढ़वाल क्षेत्र देवभूमि कहा गया है। इसका अपना एक विस्तृत इतिहास है। हिन्दुओं के पौराणिक लेखों में इसे श्री क्षेत्र कहा गया है जो भगवान शिव की पसंद है। किंवदन्ती है कि महाराज सत्यसंग को गहरी तपस्या के बाद श्री विद्या का वरदान मिला जिसक ...

                                               

श्रीनगर, गढ़वाल की परंपराएं

वाल्टन के अनुसार वर्ष 1901 की जनगणना के अनुसार यहां की जनसंख्या 2.091 थी जिसमें ब्राह्मण, राजपूत, जैन, अग्रवाल, बनिया, सुनार तथा कुछ मुसलमान भी शामिल थे। वह बताता है कि व्यापारी मुख्यतः नजीबाबाद से कार्य करते थे जहां से वे कपड़े, गुड़ तथा अन्य व् ...

                                               

श्रीनगर, गढ़वाल की सभ्यता

गढ़वाल के 17 पंवार राजाओं का आवास होने के नाते श्रीनगर एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक तथा प्रशासनिक केंद्र रहा है। यही वह जगह है जहां निपुण चित्रकार मौलाराम के अधीन चित्रकारी स्कूल विकसित हुआ। यहां के पुराने राजमहलों में गढ़वाली पुरातत्व के सर्वोत्तम उ ...

                                               

हरसिल

हरसिल, भारत के उत्तराखण्ड राज्य के गढ़वाल के उत्तरकाशी जिले में उत्तरकाशी-गंगोत्री मार्ग के मध्य स्थित एक ग्राम और कैण्ट क्षेत्र है। यह स्थान गंगोत्री को जाने वाले मार्ग पर भागीरथी नदी के किनारे स्थित है। हरसिल समुद्र तल से ७,८६० फुट की ऊंचाई पर ...

                                               

कोणार्क

कोणार्क उड़ीसा प्रदेश के पुरी जिले में पुरी के जगन्नाथ मन्दिर से 21 मील उत्तर-पूर्व समुद्रतट पर चंद्रभागा नदी के किनारे स्थित है। यहाँ का सूर्य मन्दिर बहुत प्रसिद्ध है। इस मंदिर की कल्पना सूर्य के रथ के रूप में की गई है। रथ में बारह जोड़े विशाल प ...

                                               

खिचिंग

खिचिंग ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित एक प्राचीन ऐतिहासिक गाँव है। यह भंज वंश की प्राचीन राजधानी है। भंज का राजवंश चित्तौड़ के राजपूतों की एक शाखा थी। इस राज्य के दो खंड थे जो क्रमश: खिचिंग और खिंजली कहे जाता थे। इस राजवंश के संस्थापक वीरभद्र थे ...

                                               

पुरुषोत्तमदेव

पुरुषोत्तमदेव उड़ीसा के एक राजा थे जो वंशपरंपरा के अनुसार जगन्नाथ जी के मंदिर में झाड़ू लगाया करते थे। कांची नरेश ने जब इनसे अपने कन्या का विवाह करना अस्वीकाकर दिया तो राजा ने इस अपमान से रुष्ट होकर कांची पर चढ़ाई कर दी और कांचीपति को पराजित कर ब ...

                                               

बालि यात्रा

बालियात्रा ओडिशा में मनाया जाने वाला एक प्रमुख उत्सव है। यह उत्सव कटक नगर में महानदी के किनारे गडगडिया घाट पर मनाया जाता है। यह उत्सव उस दिन की स्मृति में मनाया जाता है जब प्राचीन काल में ओडिशा के नाविक बाली, जावा, सुमात्रा, बोर्नियो और श्री लंका ...

                                               

मदल पंजी

मदल पंजी ओडिशा के जगन्नाथ पुरी के जगन्नाथ का इतिहास है। इसमें भगवान जगन्नाथ और जगन्नाथ मन्दिर से सम्बन्धित घटनाओं का वर्णन है। इस पंजी के आरम्भ होने की वास्तविक तिथि ज्ञात नहीं है किन्तु ऐसा अनुमान किया जाता है कि यह १३वीं या १४वीं शती में आरम्भ ...

                                               

मेक इन ओडिशा

मेक इन ओडिशा ओड़ीशामें औद्योगिक विकास केलिये ओडिशा सरकारके द्वारा शुरू की गयी एक योजना हे । प्रमुख निवेशकों को राज्य में कर रहे हैं, एनटीपीसी, एमसीएल, सेल, टाटा स्टील, टीसीएस, अदानी, जेएसपीएल, पीपीएल, आईओसीएल और कई और अधिक. 80 से अधिक कंपनियों के ...

                                               

वन्दे उत्कल जननी

बन्दे उत्कला जननी कांतकबि लक्ष्मीकान्त महापात्र द्वारा लिखित एक उड़िया देशभक्ति कविता है। उड़ीसा १ अप्रैल १९३६ में स्वतंत्र होने के बाद, इस कविता को उड़ीसा का राज्य गान बनाया गया था। कविता मे उत्कल को आत्मविश्वास और शक्ति को बजाय रखने और असुरक्षा ...