ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 450




                                               

नेत्रकाचाभ द्रव

नेत्रकाचाभ द्रव एक पारदर्शी, बेरंग, पतला जन जो लेंस और रेटिना के बीच आंख में अंतरिक्ष भरता है। सिलिअरी शरीर के गैर-वर्णक भाग में कोशिकाओं द्वारा उत्पादित होते है, भ्रूण मिसेनच्यमे कोशिकाओं से व्युत्पन्न होते है, जन्म के बाद। नेत्रकाचाभ द्रव रेटिन ...

                                               

नेत्रोद

नेत्रोद एक तरल पदार्थ है, जो आँख के अग्रखंड में भरा रहता है। यह रक्तनालिकाओं से निकल कर लेंस को चारों ओर से आच्छादित रखता हुआ, पुतली द्वारा होकर अग्रखंड में आता है और फिर अग्रखंड के कोण से इसका बहिष्करण रक्त में होता रहता है। नेत्र के अंदर यह एक ...

                                               

पलक

पलक का अर्थ होता है आँख की पुतली के ऊपर का पपोटा जो इसकी सुरक्षा करता है। पलकें सिकुड़कर और खुलकर आँख के खुलने और बंद होने कि स्थितियाँ बनाती हैं। पलकों का झपकना एक वांछित या अनैच्छिक दोनों प्रकार की क्रिया है। पलकों के किनारों पर नन्हे बालों की ...

                                               

प्रकाशग्राही कोशिका

प्रकाशग्राही कोशिका आँखों के दृष्टि पटल में उपस्थित ऐसी कोशिका होती है जो दृश्य प्रकाशपारक्रमण की क्षमता रखता हो। यह अपने ऊपर प्रकाश के फ़ोटोन पड़ने पर उसे अन्य प्रकार के संकेतों में बदल देते हैं, जिनका प्रयोग दृष्टि पटल पर अंकित होने वाली छवियों ...

                                               

शंकु कोशिका

शंकु कोशिकाएँ स्तनधारी प्राणियों की आँखों के दृष्टि पटल में उपस्थित एक प्रकार की प्रकाशग्राही कोशिकाएँ होती हैं। आँखों में एक अन्य प्रकार की प्रकाशग्राही कोशिका भी होती है जिसे शलाका कोशिका कहते हैं। शंकु रंग दृष्टि प्रदान करते हैं और अधिक प्रकाश ...

                                               

शलाका कोशिका

शलाका कोशिकाएँ प्राणियों की आँखों के दृष्टि पटल में उपस्थित एक प्रकार की प्रकाशग्राही कोशिकाएँ होती हैं। आँखों में एक अन्य प्रकार की प्रकाशग्राही कोशिका भी होती है जिसे शंकु कोशिका कहते हैं। शंकुओं की तुलना में शलाकाएँ कम प्रकाश में देखने में अधि ...

                                               

स्वच्छमण्डल

स्वच्छमण्डल या कनीनिया आंखों का वह पारदर्शी भाग होता है जिस पर बाहर का प्रकाश पड़ता है और उसका प्रत्यावर्तन होता है। यह आंख का लगभग दो-तिहाई भाग होता है, जिसमें बाहरी आंख का रंगीन भाग, पुतली और लेंस का प्रकाश देने वाला हिस्सा होते हैं। कॉर्निया म ...

                                               

दाँत

दाँत मुख की श्लेष्मिक कला के रूपांतरित अंकुर या उभार हैं, जो चूने के लवण से संसिक्त होते हैं। दाँत का काम है पकड़ना, काटना, फाड़ना और चबाना। कुछ जानवरों में ये कुतरने, खोदने, सँवारने और लड़ने के काम में भी आते हैं। दांत, आहार को काट-पीसकर गले से ...

                                               

अकल दाढ़

अकल दाढ उन दाँतों के नाम हैं जो आखिर में निकलते हैं। अधिकतर लोगों को चार अकल दाढ होते हैं - मुँह के हर कोने में एक - ये ज्यादातर जवानी में निकलते हैं। यह संभव है कि अकल दाढ जबड़ों की हड्डी में अटक जाएं, या फिर निकलें ही नहीं। ऐसा होने पर बाकी दाँ ...

                                               

दंत-क्षरण

दंत क्षरण, जिसे दंत-अस्थिक्षय या छिद्र भी कहा जाता है, एक बीमारी है जिसमें जीवाण्विक प्रक्रियाएं दांत की सख्त संरचना को क्षतिग्रस्त कर देती हैं। ये ऊतक क्रमशः टूटने लगते हैं, जिससे दन्त-क्षय उत्पन्न हो जाते हैं। दन्त-क्षय दो जीवाणुओं के कारण प्रा ...

                                               

दांत मटमैले होना

दांतों को ठीक से साफ नहीं करना पीने के पानी में फ्लोरीन तत्व अधिक होना खाने की आदतें विटामिन सी और डी की कमी दांतों एवं जबड़े की हड्डियों का अस्थिभंग होना मसूढ़ों का संक्रमण दांत कैरीज़ क्षय के साथ कैल्शियम का स्तर कम होना पान मसाला चबाना धूम्रपान

                                               

मानव दाँत

दांत मुंह में स्थित छोटे, सफेद रंग की संरचनाएं हैं जो बहुत से कशेरुक प्राणियों में पाया जाती है। दांत, भोजन को चीरने, चबाने आदि के काम आते हैं। कुछ पशु शिकार करने एवं रक्षा करने के लिये भी दांतों का उपयोग करते हैं। दांतों की जड़ें मसूड़ों से ढ़की ...

                                               

परशुराम कुंड

परशुराम कुण्ड को प्रभु कुठार के नाम से भी जाना जाता है। यह अरुणाचल प्रदेश के लोहित ज़िले की पूर्वोत्तर दिशा में २४ किमी की दूरी पर स्थित है। लोगों का ऐसा विश्वास है कि मकर संक्रांति के अवसर परशुराम कुंड में एक डूबकी लगाने से सारे पाप कट जाते है।

                                               

कामाख्या मन्दिर

कामाख्या मंदिर असम की राजधानी दिसपुर के पास गुवाहाटी से ८ किलोमीटर दूर कामाख्या में है। कामाख्या से भी १० किलोमीटर दूर नीलाचल पव॑त पर स्थित है। यह मंदिर शक्ति की देवी सती का मंदिर है। यह मंदिर एक पहाड़ी पर बना है व इसका महत् तांत्रिक महत्व है। प् ...

                                               

तिरुचानूर

तिरुचनूर मंदिर, तिरुचानूरु या अलमेलु मंगापुरं आन्ध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में तिरुपति मंदिर से थोड़ी दूपर स्थित है जो भगवान वैंकटेश्वर की पत्नी श्री पद्मावती को समर्पित है। यह तिरुपति नगरपालिक क्षेत्र के बाहरी सीमा पर स्थित है। हाल ही में यह ति ...

                                               

तिरुपति वेंकटेश्वर मन्दिर

तिरुपति वेंकटेश्वर मन्दिर तिरुपति में स्थित एक विश्व प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ स्थल है। तिरुपति भारत के सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है। यह आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले की तिरुमाला पहाड़ी में स्थित है। प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में दर्शनार्थी ...

                                               

चुन्ने मियाँ का मन्दिर

चुन्ने मियाँ का मन्दिर बरेली शहर में एक मुस्लिम व्यवसायी फजलुर्रहमान खां का बनबाया हुआ हिन्दू मन्दिर है जिसे चुन्ने मियाँ के नाम से ठीक उसी प्रकार जाना जाता है जैसे नई दिल्ली का बिरला मन्दिर। यह स्वतन्त्र भारत में हिन्दू-मुस्लिम एकता का अनुपम उदा ...

                                               

बरुआ सागर

बरुआसागर उत्तर-प्रदेश के जिला झाँसी में स्थित विशाल मन्दिर है। यह मन्दिर प्रतिहार कला शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस मन्दिर के प्रवेश द्वापर अनेक सुन्दर मूर्तियाँ उकेरी गईं हैं। इस मन्दिर की कलाकृतियों को देखने से स्पष्ट होता है कि उस समय के कलाक ...

                                               

कसार देवी

कसार देवी उत्तराखण्ड में अल्मोड़ा के निकट एक गाँव है। यह कसार देवी मंदिर के कारण प्रसिद्ध है। मंदिर दूसरी शताब्दी का है। स्वामी विवेकानन्द १८९० में यहाँ आये थे। इसके अलावा अनेकों पश्चिमी साधक यहाँ आये और रहे। यह क्रैंक रिज के लिये भी प्रसिद्ध है ...

                                               

नीलकण्ठ महादेव मंदिर

गढ़वाल, उत्तरांचल में हिमालय पर्वतों के तल में बसा ऋषिकेश में नीलकंठ महादेव मंदिर प्रमुख पर्यटन स्थल है। नीलकंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश के सबसे पूज्य मंदिरों में से एक है। कहा जाता है कि भगवान शिव ने इसी स्थान पर समुद्र मंथन से निकला विष ग्रहण किया ग ...

                                               

माँ नन्दा भगवती मन्दिर पोथिंग (कपकोट)

माँ नंदा भगवती मंदिर भारत के उत्तराखंड राज्य के बागेश्वर जिले में स्थित पोथिंग नामक गाँव में है। जिला मुख्यालय से मंदिर की दूरी लगभग 30 कि०मी० है। यह मंदिर क्षेत्रवासियों को ही नहीं बल्कि दूर-दराज के लोगों को भी अपनी भव्यता एवं आस्था से अपनी ओर आ ...

                                               

मोटेश्वर महादेव

मोटेश्वर महादेव मंदिर भारत के उत्तरी राज्य उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर जिले के काशीपुर तहसील में स्थित एक मन्दिर है। यहां के चैती मैदान में महादेव नगर के किनारे चैती मंदिर स्थित यह मंदिर महाभारत कालीन बताया जाता है और इसका शिवलिंग बारहवां उप ज्योति ...

                                               

मोटेश्वर महादेव मन्दिर

मोटेश्वर महादेव मंदिर भारत के उत्तरी राज्य उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर जिले के काशीपुर तहसील में स्थित एक मन्दिर है। यहां के चैती मैदान में महादेव नगर के किनारे चैती मंदिर स्थित यह मंदिर महाभारत कालीन बताया जाता है और इसका शिवलिंग बारहवां उप ज्योति ...

                                               

गलगनाथ

गलगनाथ कर्नाटक के हवेरी जिले में स्थित एक छोटा-सा ग्राम है। यहाँ एक प्रसिद्ध मंदिर भी है - गलगनाथ शिव मन्दिर यह मन्दिर चालुक्य वंश द्वारा बनवाया गया है। यह तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित है।

                                               

चित्रापुर मठ

चित्रापुर मठ भारत के कर्नाटक राज्य के उत्तरी कनारा के शिराली में स्थित है। यह चित्रापुर सारस्वत ब्राह्मण समुदाय का केन्द्रीय मन्दिर है। यह मठ सन् १७५७ से विद्यमान है। इस समुदाय के अन्य मठ गोकर्न, कर्ला, मंगलोर एवं मल्लपुर में स्थित हैं। इस मठ के ...

                                               

बनवासी

बनवासी कर्नाटक राज्य का प्राचीनतम शहर है। यह मधुकेशवर मंदिर के निकट से बढ़ता गया है। यह मंदिर ९वीं शताब्दी में बना था और भगवान शिव को समर्पित है। the supreme God in Shaivism, a major branch of Hinduism. हाल ही में यहाम एक ५वीं शताब्दी का सिक्का भ ...

                                               

मुरुदेश्वर

मुरुदेश्वर दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में उत्तर कन्नड जिले के भटकल तहसील स्थित एक कस्बा है। मुरुदेश्वर भगवान शिव का एक नाम है। यहाँ भगवान शंकर की विश्व की दूसरी सबसे ऊँची मूर्ति स्थित है। यह कस्बा अरब सागर के तट पर स्थित है और मंगलुरु से १६५ कि ...

                                               

मेलुकोटे

मेलुकोटे या मेलुकोट कर्नाटक के मांड्या जिला के पांडवपुरा ताल्लुके का एक तीर्थ स्थान है। इस स्थान को तिरुनारायणपुरम् भी कहा जाता है। यहां कावेरी नदी के समक्ष एक पथरीली पहाड़ी है जिसे यदुगिरि या यादवगिरि कहा जाता है। यह मैसूर से लगभग ५१ कि.मी और बं ...

                                               

आट्टुकाल देवी मंदिर

केरल के तिरुवनंतपुरम शहर में स्थित आट्टुकाल भगवती मंदिर की शोभा ही अलग है। धर्मयात्रा की इस कड़ी में इस बार हम इस तीर्थ के विषय में ही जानकारी दे रहे हैं। कलिकाल के दोषों का निवारण करने वाली वही पराशक्ति जगदम्बा केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम शहर क ...

                                               

कोडुंगलूर भगवती मंदिर

कोटुंगलूर भगवती मंदिर केरल के तृश्शूर ज़िले के कोडुंगलूर नामक स्थान में स्थित एक हिन्दू मन्दिर है। यह भारत के सर्वाधिक प्राचीन मन्दिरों में से एक है। इसमें भद्रकाली की आठ भुजाओं वाली मूर्ति है जिन्हें कोडुंगलुर अम्मा के नाम से अधिक जाना जाता है।

                                               

मंगला देवी मंदिर

मंगला देवी मंदिर केरल के इडुक्की जिले में तेक्कड़ी से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित है। यह लगभग केरल और तमिलनाडु राज्यों की सीमा पर स्थित है। तमिलनाडु में इसके समीप थेनी जिले की सीमा जुड़ती है। यह स्थल समुद्र तल से करीब 1337m की ऊंचाई पर स्थित है। य ...

                                               

मुथप्पन मंदिर

मुथप्पन मंदिर अथवा परस्सीनिकडवु मुथप्पन केरल के कन्नूर जिले में तालीपरम्बा से लगभग 10 किलोमीटर दूर वलपत्तनम नदी के किनारे पर स्थित एक हिन्दू मंदिर है। मंदिर के प्रमुख देवता श्री मुथप्पन हैं, इन्हें तिरुवप्पन और वेल्लत्तम के पात्रों के रूप में दो ...

                                               

वडकुनाथन मन्दिर

त्रिश्शूर एक खूबसूरत प्राचीन शहर और केरल की सांस्कृतिक राजधानी है। भूतपूर्व कोचिन रियासत के महाराजा राम वर्मा ९ वां शक्तन तम्बुरान 1790 – 1805 के समय त्रिश्शूर ही रियासत की राजधानि भी रही। नगर के मध्य में ही 9 एकड में फैला ऊंचे परकोटे वाला एक विश ...

                                               

वल्य कूनम्बायिक्कुलम मन्दिर

वल्य कूनम्बायिक्कुलम मन्दिर केरल में स्थित एक प्रशस्त भद्रकाली मन्दिर है। इस मन्दिर का पहला नाम "पनम्काव मन्दिर" था। कोल्लम जिले में वटक्केविला पर स्तित यह मन्दिर तिरुवनन्तपुरम से 62 किलोमीटर दूपर है। मन्दिर के मुख्य देवता भद्रकाली देवी हैं। देवी ...

                                               

श्री द्वारकाधीश मंदिर

द्वारिकाधीश मंदिर, भी जगत मंदिर के रूप में जाना और कभी कभी वर्तनी द्वारिकाधीश, एक है हिंदू मंदिर भगवान के लिए समर्पित कृष्णा, जो नाम द्वारिकाधीश, या द्वारका के राजा द्वारा यहां पूजा की जाती है। मंदिर भारत के गुजरात के द्वारका में स्थित है। 72 स्त ...

                                               

मां बम्लेश्वरी मंदिर

माँ बम्लेश्वरी देवी के मंदिर के लिये विख्यात डोंगरगढ एक ऎतिहासिक नगरी है। यहां माँ बम्लेश्वरी के दो मंदिर है। पहला एक हजार फीट पर स्थित है जो कि बडी बम्लेश्वरी के नाम से विख्यात है। मां बम्लेश्वरी के मंदिर मे प्रतिवर्ष नवरात्र के समय दो बार विराट ...

                                               

श्री सिध्देश्वर महादेव मंदिर

छत्तीसगढ के रायपुर जिला मुख्यालय से 70 किमी की दूरी पर बलौदा बाजार तहसील मुख्यालय से 15 किमी की दूरी पर ग्राम पलारी मे एक प्राचीन शिव मंदिर स्थित है इसे ही सिध्देश्चर मंदिर के नाम से जाना जाता है। मंदिर की स्थापना बाल समुंद तालाब के निकट की गई है ...

                                               

कपालीश्वर मंदिर

कपालीश्वर मंदिर चेन्नई का एक मंदिर है। यहाँ पार्वती का जो रूप पूजित है, उसे तमिल में कर्पागम्बल कहते हैं, जिसका अर्थ है- कृपा वृक्ष। यह मन्दिर द्रविड शैली में है और इसकी स्थापना ७वीं शताब्दी के आसपास हुई थी।

                                               

कैलाशनाथ मंदिर, कांचीपुरम

कैलाशनाथ मंदिर, कांचीपुरम में स्थित एक हिन्दू मंदिर है। यह शहर के पश्चिम दिशा में स्थित यह मंदिर कांचीपुरम का सबसे प्राचीन और दक्षिण भारत के सबसे शानदार मंदिरों में एक है। इस मंदिर को आठवीं शताब्दी में पल्लव वंश के राजा राजसिम्हा ने अपनी पत्नी की ...

                                               

चित्रगुप्त मन्दिर

चित्रगुप्त मन्दिर, हिन्दू देवता चित्रगुप्त, जो प्रत्येक प्राणी के पाप ओर पुन्य का लेखा रखते है, उनका मंदिर है। यह तमिलनाडु राज्य के कांचीपुरम शहर में बसा हैं। प्रमुख मन्दिर का निर्माण चोल राजवंश ने ९-वी शताब्दी में किया था और आगे कई लोंगोने इसका ...

                                               

तमिलनाडू के नवग्रह मंदिर

पृथ्वी से जुड़े प्राणियों की प्रभा और मन को ग्रह प्रभावित करते हैं। प्रत्येक ग्रह में एक विशिष्ट ऊर्जा होती है। ग्रहों की ऊर्जा किसी व्यक्ति के भाग्य के साथ एक विशिष्ट तरीके से उस समय जुड़ जाती है जब वे अपने जन्मस्थान पर अपनी पहली सांस लेते हैं औ ...

                                               

रुद्रेश्वर स्वामी मन्दिर

रुद्रेश्वर स्वामी मन्दिर एक हिन्दू मन्दिर है जो भारत के तेलंगाना राज्य में स्थित है। इस मन्दिर में भगवान विष्णु, शिव तथा सूर्य भगवान की मूर्तियाँ है। इसका निर्माण लगभग ११६३ ईसवी में हुआ था।

                                               

दक्षिणेश्वर काली मन्दिर

दक्षिणेश्वर काली मन्दिर, उत्तर कोलकाता में, बैरकपुर में, विवेकानन्द सेतु के कोलकाता छोर के निकट, हुगली नदी के किनारे स्थित एक ऐतिहासिक हिन्दू मन्दिर है। इस मंदिर की मुख्य देवी, भवतारिणी है, जोकि मान्यतानुसार हिन्दू देवी काली का एक रूप है। यह कलकत ...

                                               

मायापुर

मायापुर पश्चिम बंगाल के नदिया जिला में गंगा नदी के किनारे, उसके जलांगी नदी से संगम के बिंदु पर बसा हुआ एक छोटा सा शहर है। यह नवद्वीप के निकट है। यह कोलकाता से १३० कि॰मी॰ उत्तर में स्थित है। यह हिन्दू धर्म के गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय के लिए अति पाव ...

                                               

काल भैरव मंदिर, उज्जैन

काल भैरव मंदिर, उज्जैन स्थित एक हिन्दू मंदिर है जो कि भगवान काल भैरव को समर्पित है। यह महाकाल मंदिर से लगभग पाँच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह दुनिया का एक मात्र ऐसा मंदिर है जहां पर भैरव भगवान पर मदिरा का चढ़ावा चढ़ाया जाता है । आपको इस मंदिर ...

                                               

कालियादेह महल

कालियादेह भवन उज्जैन से उत्तर की ओर ६ मील की दूरी पर क्षिप्रा नदी में एक द्वीप के रूप में स्थित है। मुसलमानों के आगमन से पहले यह ब्रह्मकुण्ड के नाम से जाना जाता था। इसमें स्नान के लिए घाट बने थे तथा पीछे की तरफ मंदिर था। इस पुराने भवन को पत्थर के ...

                                               

गढ़कालिका मंदिर, उज्जैन

गढ़कालिका मंदिर, मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित है। कालजयी कवि कालिदास गढ़ कालिका देवी के उपासक थे। कालिदास के संबंध में मान्यता है कि जब से वे इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने लगे तभी से उनके प्रतिभाशाली व्यक्तित्व का निर्माण होने लगा। कालिदास ...

                                               

गोपाल मंदिर झाबुआ

गोपाल मंदिर झाबुआ सबसे प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों में से एक है। यह मंदिर गुरु भक्तो के अनंत अविभूषित पूज्य रामशंकर जी जानी, पूज्य घनश्याम प्रभु जी जानी और माँ रविकांता बेन को समर्पित है. यह भारत के मध्य प्रदेश राज्य में झाबुआ के प्राचीन शहर में स्थित ...

                                               

चतुर्भुज मंदिर (खजुराहो)

यह मंदिर जटकारा ग्राम से लगभग आधा किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। यह विष्णु मंदिर निरधार प्रकार का है। इसमें अर्धमंडप, मंडप, संकीर्ण अंतराल के साथ- साथ गर्भगृह है। इस मंदिर की योजना सप्ररथ है। इस मंदिर का निर्माणकाल जवारी तथा दुलादेव मंदिर के निर्म ...

                                               

चित्रगुप्त मन्दिर,खजुराहो

चित्रगुप्त मंदिर मध्य भारत के राज्य मध्य प्रदेश के खजुराहो क्षेत्र में बना निरंधार प्रासाद शैली का एक मन्दिर है। इस मंदिर का निर्माण ९७५ ईसवी सन में हुआ था और यहां मिथुन नर्तक, देवांगनाएँ, शार्दूल काफी मात्रा में अंकित किये गए हैं। इस मंदिर की सब ...