ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 451




                                               

नाथद्वारा

श्रीनाथद्वारा राजस्थान के राजसमन्द जिले मैं स्थित है। श्रीनाथद्वारा पुष्टिमार्गीय वैष्‍णव सम्‍प्रदाय की प्रधान पीठ है। यहाँ नंदनंदन आनन्‍दकंद श्रीनाथजी का भव्‍य मन्‍दिर है जो करोडों वैष्‍णवो की आस्‍था का प्रमुख स्‍थल है, प्रतिवर्ष यहाँ देश-विदेश ...

                                               

परशुराम महादेव मन्दिर

परशुराम महादेव मन्दिर राजस्थान राज्य के दो जिलों- राजसमन्द व पाली जिले की सीमा पर स्थित है। किंवदंती है कि यहाँ रह कर परशुराम जी ने तपस्या की थी व अपने शिष्यो को शिक्षा भी दी थी।

                                               

पल्लु वाली माता

माताजी के द्वारपाल सादूलाजी का मंदिर पल्लू में श्री ब्रहमाणी माताजी के मंदिर के पहले माता जी के द्वारपाल श्री सादूला जी का मंदिर बना हुआ है! इस मंदिर में सादूलाजी की एक सफेद मारबल की मुर्ति लगी हुई है! धार्मिक मान्यताओ के अनुसार श्री सादूला जी को ...

                                               

ब्रह्मा मन्दिर, पुष्कर

ब्रह्मा मन्दिर एक भारतीय हिन्दू मन्दिर है जो भारत के राजस्थान राज्य के अजमेर ज़िले में पवित्र स्थल पुष्कर में स्थित है। इस मन्दिर में जगत पिता ब्रह्माजी की मूर्ति स्थापित है। इस मन्दिर का निर्माण लगभग १४वीं शताब्दी में हुआ था जो कि लगभग ७०० वर्ष ...

                                               

मीन भगवान का मन्दिर, राजस्थान

भारत के राजस्थान प्रांत में भगवान मीनेष अर्थात मत्स्यावतार को समर्पित यह मंदिर सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा कस्बें में स्थित है। चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र के मीणा समाज के सहयोग से बना यह भव्य मंदिर साधारण नहीं बल्कि तमाम आधुनिक सुविधाओं से लै ...

                                               

रानी सती मन्दिर

राणी सती दादी मन्दिर राजस्थान के जुंझुनू जिले में स्थित है। रानी सती की पूजा के लिए समर्पित यह सबसे बड़ा मन्दिर है। रानी सती की पूजा के लिए अन्यत्र भी बहुत से मन्दिर बने हैं किन्तु यह सबसे भव्य और प्राचीन है।

                                               

सच्चियाय माता मन्दिर

सच्चियाय माता के नाम से भी जानी जाती है इनका मंदिर जोधपुर से 63 किमी दूर ओसियां में स्थित है। यह मंदिर जोधपुर जिले का सबसे बड़ा मंदिर है इसका निर्माण 9वीं या 10वीं सदी में उपत्पलदेव ने करवाया था। सच्चियाय माता की पूजा ओसवाल, जैन, परमार, पंवार, कु ...

                                               

श्री स्थानेश्वर महादेव मन्दिर

श्री स्थानेश्वर महादेव मन्दिर कुरुक्षेत्र की पावन धरती पर स्थित है। लोक मन्यता है कि महाभारत के युद्ध से पूर्व भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन समेत यहा भगवान शिव की उपासना कर अशिर्वाद प्राप्त किया था। इस तिर्थ की खासियत यह भी है कि यहा मन्दिर व गुरुद् ...

                                               

श्री भीमा काली मंदिर

श्री भीमा काली मंदिर भारत में हिमाचल प्रदेश के सराहन में एक प्राचीन मंदिर है, जो कि माता भीमाकाली देवी को समर्पित है, जो पूर्व बुशहर राज्य के शासकों के देवी हैं। यह मंदिर शिमला से लगभग 180 किमी दुरी पर स्थित है और हिन्दू धर्म के 51 शक्तिपीठों में ...

                                               

बैजनाथ मंदिर

बैजनाथ मंदिर बैजनाथ में स्थित नागर शैली में बना हिंदू मंदिर है। यह 1204 ईस्वी में अहुका और मन्युका नामक दो स्थानीय व्यापारियों ने बनवाया था। यह वैद्यनाथ के रूप में भगवान शिव को समर्पित है। शिलालेखों के अनुसार वर्तमान बैजनाथ मंदिर के निर्माण से पू ...

                                               

चतुर्भुज मंदिर (ग्वालियर)

चतुर्भुज मंदिर एक हिंदू मंदिर है जिसे ग्वालियर के किले, में पत्थरों में नक़्क़ाशी करके निर्मित किया गया है। एक ज़माने में यह मंदिर दुनिया में शून्य के सबसे पहले ज्ञात शिलालेख के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन अब बख्शाली पांडुलिपि को शून्य प्रतीक का उपयोग ...

                                               

ऐसानेश्वर शिव मंदिर, भुवनेश्वर, उड़ीसा

ऐसानेश्वर शिव मंदिर भारतीय राज्य उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में भगवान शिव को समर्पित १३ वीं शताब्दी में निर्मित एक हिन्दू मंदिर है। मंदिर भुवनेश्वर के पुराने शहर के श्रीराम नगर में एक अस्पताल के अंदर स्थित है। यह लिंगराज मंदिर के परिसर की पश्चिम ...

                                               

कापिलेश्वर शिव मंदिर

कपिलेश्वर शिव मंदिर एक हिंदू मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है जो कि कपिलेश्वर, ओल्ड टाउन, भुवनेश्वर, उड़ीसा, भारत के दक्षिण पश्चिमी बाहरी इलाके में स्थित है। यह कपिलेश्वर मार्ग के अंत में लिंगराज मंदिर से कपिलेश्वरा ग्राम की ओर जाता है। इष्टदे ...

                                               

चिन्तामनिश्वर शिव मंदिर

चिन्तामनिश्वर शिव मंदिर भारत के उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित भगवान शिव को समर्पित एक हिंदू मंदिर है। यह पुराने स्टेशन बाजार के पास कटक-पुरी रोड से चिन्तामनिश्वर रोड की शाखा के अंत में स्थित है। मंदिर पश्चिम की तरफ मुड़ता है और निस्संदेह ...

                                               

भारती मठ मंदिर, भुवनेश्वर, ओड़ीशा

भारती मठ भारतीय राज्य ओड़ीशा का राजधानी सहर भुवनेश्वर का एक शिब मंदिर है। एह एका प्राचीन 3 तल्ला भबन पर है और इसे 11 बा सताब्दी में बनाया गया था। आबी इसी मे पूजा आराधना के साथ एक मठ के रूप में भी श्रर्द्धालुयाओन को आकर्षित करता है।

                                               

यमेश्वर मंदिर

मुख्य विमान रेखा देउळ शैली में है, जग मोहन पिढा देउळ शैली में है और मंदिर के बाहार एक अलग मंडप है. मंदिर कई भाग क्षतिग्रस्त हो गया है। यह मंदिर 13 वीं 14 वीं सदी के दौरान पूर्वी गंग वंश के राजाओं के द्वारा बनाया गया था।.

                                               

राजारानी मंदिर

राजारानी मंदिर एक ११ वीं शताब्दी के हिंदू मंदिर भारत के ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित है। माना जाता है कि मंदिर को मूल रूप से इंद्रेस्वार के रूप में जाना जाता है। यह मंदिर में महिलाओं और जोड़ों के कामुक नक्काशी की वजह से स्थानीय रूप से "प् ...

                                               

मानव का पोषण नाल

मानव का पाचक नाल या आहार नाल 25 से 30 फुट लंबी नाल है जो मुँह से लेकर मलाशय या गुदा के अंत तक विस्तृत है। यह एक संतत लंबी नली है, जिसमें आहार मुँह में प्रविष्ट होने के पश्चात्‌ ग्रासनाल, आमाशय, ग्रहणी, क्षुद्रांत्र, बृहदांत्र, मलाशय और गुदा नामक ...

                                               

अवग्रहाभ मलाशय

अवग्रहाभ मलाशय या कूल्हा मलाशय बृहदान्त्र का वह भाग होता है जो मलाशय और गुदा के सबसे समीप होता है। यह एक 35–40 सेंटीमीटर लम्बा घुमावदार अंग है। यह साधारण रूप से कूल्हा गुहा में स्थित होता है लेकिन इसे शरीर में हिलने की थोड़ी स्वतंत्रता है, इसलिए ...

                                               

अरोगजनक जीव

अरोगजनक जीव ऐसे जीव होते हैं जो किसी अन्य जीव में रोग नहीं उत्पन्न करते और न ही किसी अन्य तरह से उन्हें हानि पहुँचाते हैं। यह अक्सर बैक्टीरिया की कई जातियों के लिए प्रयोग होता है। अधिकांश बैक्टीरिया अरोगजनक होते हैं, और कई तो अन्य जीवों में सहभोज ...

                                               

प्रतिपिंड

प्रतिपिंड, संक्षिप्ताक्षर में आईजी) के नाम से भी जाने जाते हैं, गामा रक्तगोलिका प्रोटीन हैं, जो मेरुदण्डीय प्राणियों के रक्त या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों में पाए जाते हैं, तथा इनका प्रयोग प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा बैक्टीरिया तथा वायरस जैसे बाह्य ...

                                               

शोथ

प्रदाह शरीर में रक्तवाहिकाओं का हानिकारक कारणों, जैसे पैथोजन, क्षतिग्रस्त कोशिका या उत्तेजकों आदि के कारण शरीर की प्रतिक्रिया होती है। प्रदाह प्राणियों द्वारा खतरनाक या हानिकारक स्टिमुलाई को हटाने व कोशिका या ऊतकों के पुनरोद्धार की प्रक्रिया आरंभ ...

                                               

विकिरण चिकित्सा

आयनकारी विकिरण का उपयोग करके की जाने वाली चिकित्सा विकिरण चिकित्सा कहलाती है। यह प्रायः कैंसर के उपचार में खराब कोशिकाओं को मारने के काम आती है।विकिरण चिकित्सा पद्धति मानव चिकित्सा का वह औषधीय अनुशासन है जिसके द्वारा कैंसर तथा कुछ अन्य रोगों की च ...

                                               

टेलीथेरापी

इस तकनीक में दूर से विकिरण द्वारा इलाज किया जाता है।शुरुजात में रेडियम सिजियम आदि रेडियो सक्रिय तत्वों के द्वारा इलाज होता था।किन्तु वातावरण की हानि तथा इस पद्धति से ईलाज में सक्रीय चिकित्साविदों के स्वास्थ पर प्रतिकूल प्रभाव जान कर इन तत्वों का ...

                                               

बिलीरुबिन

बिलीरुबिन सामान्य अल्परक्तकणरंजक उपचय का एक विश्लेषित उत्पाद है। अल्परक्तकणरंजक हीमोग्लोबिन में पाया जाता है, जो लाल रक्त कोशिका का एक प्रमुख घटक है। बिलीरुबिन मूत्और पित्त से उत्सर्जित है और इसके उच्च स्तर से कुछ रोग हो सकते हैं। यह मूत्र के पील ...

                                               

चयापचय

उपापचय जीवों में जीवनयापन के लिये होने वाली रसायनिक प्रतिक्रियाओं को कहते हैं। ये प्रक्रियाएं जीवों को बढ़ने और प्रजनन करने, अपनी रचना को बनाए रखने और उनके पर्यावरण के प्रति सजग रहने में मदद करती हैं। साधारणतः चयापचय को दो प्रकारों में बांटा गया ...

                                               

एमिलॉयडोसिस

एमिलॉयडोसिस बीमारियों का एक समूह है जिसमें असामान्य प्रोटीन, जिसे एमिलॉयड फाइब्रिल कहा जाता है, ऊतक में बनता है। लक्षण इस प्रकापर निर्भर करते हैं और अक्सर परिवर्तनीय होते हैं। उनमें दस्त, वजन घटाना, थकान महसूस करना, जीभ का विस्तार, रक्तस्राव, सूज ...

                                               

चयापचय की अंतर्जात त्रुटि

आनुवंशिक रोग का एक बड़ा वर्ग गिना जाता है। अधिकांश, एकल जीन दोष के कारण होते हैं, जो एंजाइम की कोड में सहायता करता है - ताकि विभिन्न पदार्थ के रूपांतरण कोई दूसरे में हो जाय. सबसे अधिक विकारों में, समस्याओं का कारण वे पदार्थो के संचयीकरण जो विषैला ...

                                               

विऐमीनन

किसी अणु से अमीनो समूह को निकाल देना विएमीनन कहलाता है। जो एंजाइम इस कार्य में सहायक होते हैं उन्हें विएमीनक कहते हैं। मानव शरीर में विएमीनन मुख्यतः यकृत में होता है। किन्तु ग्लूटामेट का विएमीनन वृक्क में होता है। विएमीनन की प्रक्रिया के द्वारा ए ...

                                               

जीन व्यवहार

कोशिका विज्ञान और अनुवांशिकी में जीन व्यवहार वह प्रक्रिया होती है जिसमें किसी जीन में उपस्थित सूचना के प्रयोग से किसी जीन उत्पाद का निर्माण होता है। यह उत्पाद अक्सर प्रोटीन होते हैं लेकिन कुछ जीनों का कार्य अंतरण आर॰ऍन॰ए॰ की उत्पत्ति होता है। विश ...

                                               

आरएनए हस्तक्षेप

आरएनए हस्तक्षेप सजीव कोशिकाओं के अंदर की एक प्रणाली है जो यह नियंत्रण करने में सहायता करती है कि कौन-कौन से जीन सक्रिय हैं और कितने सक्रिय हैं। आरएनए अणुओं के दो छोटे प्रकार - माइक्रोआरएनए और लघु हस्तक्षेप करने वाले आरएनए - आरएनए हस्तक्षेप के केन ...

                                               

जीन उत्पाद

कोशिका विज्ञान और अनुवांशिकी में जीन उत्पाद ऐसा प्रोटीन या आर॰ऍन॰ए॰ होता है जो जीन व्यवहार द्वारा निर्मित हो। कोई जीन कितना सक्रीय है इसका अनुमान अक्सर उसके द्वारा उत्पन्न जीन उत्पाद की मात्रा के मापन से किया जाता है। असाधारण मात्रा में निर्मित ज ...

                                               

प्रतिलेखन (जीवविज्ञान)

प्रतिलेखन जीन अभिव्यक्ति में पहला कदम है जिसमें डीएनए के किसी एक भाग को आर एन ए पॉलीमरेज एंजाइम के द्वारा आर एन ए में कॉपी किया जाता है। प्रतिलेखन के समय एक आरएनए पॉलीमरेज एक डीएनए अनुक्रम को पढता है और एक पूरक, प्रतिसमान्तर आरएनए स्ट्रैण्ड उत्पन ...

                                               

झिल्ली विभव

झिल्ली विभव या कला विभव निम्नलिखित तीन प्रकार के झिल्ली विभवों को इंगित करता है- पारकला विभव - जिसका वर्णन इस लेख में किया गया है। यही कला विभव का सबसे प्रमुख रूप है। अधिकांश मामलों में कला विभव का अर्थ पारकला विभव ही होता है। द्विध्रुव विभिव dip ...

                                               

50 साल से ऊपर गर्भधारण

अंडदान के क्षेत्र में हाल के वर्षों में हुए तकनीकी विकास के कारण पचास वर्ष से अधिक की महिलाओं के लिए अब गर्भधारण ज्यादा संभव हो पाया है। आमतौपर एक महिला के गर्भधारण की क्षमता उसके मासिक धर्म के समाप्त होते ही खत्म मानी जाती है, जिसे बारह महीने तक ...

                                               

अल्ट्रासाउंड परिक्षण

अल्ट्रासाउंड परिक्षण में उच्च आवृत्ति की ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है तथा इन तरंगों की मदद से शरीर के अंदर की तस्वीरें निकाली जाती हैं। अल्ट्रासाउंड या सोनोग्राफी सुरक्षित स्कैन होते हैं, क्योंकि इनमें विकिरणों की जगह ध्वनि तरंगों या गूँ ...

                                               

स्तन

स्तन रूपांतरित स्वेद ग्रंथियां है, जो दुग्ध उत्पन्न करती हैं और यह दुग्ध नवजात और छोटे बच्चों के पीने के काम आता है। प्रत्येक स्तन में एक चूचुक और स्तनमण्डल होता है। स्तनमण्डल का रंग गुलाबी से लेकर गहरा भूरा तक हो सकता है साथ ही इस क्षेत्र में बह ...

                                               

युग्मज

दो युग्मक कोशिकाएँ लैंगिक प्रजनन के द्वारा संयुक्त होकर जिस कोशिका का निर्माण करतीं हैं उसे युग्मज या युग्मनज या गैमीट या जाइकोसाइट कहते हैं। बहुकोशिकीय प्राणियों में युग्मज ही भ्रूण का आदिरूप है। एककोशीय प्राणियों में युग्मज स्वयं विभक्त होकर नय ...

                                               

कायान्तरण

कायान्तरण एक जीववैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें किसी जानवर के पैदा होने के या अंडे से निकलने के बाद कोशिकाओं की बढ़ौतरी से उसके शारीरिक ढाँचे में कम समय में बड़े परिवर्तन आ जाते हैं। उदाहरण के लिए रेंगने वाली इल्ली कायांतरण करके उड़ने वाली तितली बन ...

                                               

खंडीभवन (जीवविज्ञान)

जीवविज्ञान में खंडीभवन कुछ प्राणी व वनस्पति जातियों की शारीरिक योजना में दोहराते हुए भागों का प्रयोग होता है। इस से जीव के शरीर विकास और हिलावट में लाभ होता है।

                                               

डिंभ

कुछ जीवों, जैसे कीट-पतंगो तथा उभयचरों की विकास प्रक्रिया में डिंभ या डिंभक एक अपरिपक्व अवस्था है। डिंभ का रूप रंग उसके व्यस्क रूप से एकदम भिन्न हो सकता है। जैसा कि तितली एवं उसकी डिंभ का होता है। डिंभ में प्रायः कुछ ऐसे अंग पाए जाते हैं जो उसके व ...

                                               

भ्रूण

भ्रूण प्राणी के विकास की प्रारंभिक अवस्था को कहते हैं। मानव में तीन मास की गर्भावस्था के पश्चात्‌ भ्रूण को गर्भ की संज्ञा दी जाती है। एक निषेचित अंडाणु जब फलोपिओन नालिका fallopian tube से गुजरता है तब उसका खंडीभवन segmentation होता हें तथा यह अवस ...

                                               

शारीरिक गुहा

बहुकोशिकीय जीवों में शारीरिक गुहा रक्त वाहिका और लसिका वाहिका जैसी वाहिकाओं को छोड़कर शरीर के भीतर कोई भी ऐसा ख़ाली भाग होता है जो द्रव से भरा हो। इसका दो उदाहरण उदर गुहा और वक्ष गुहा हैं।

                                               

योनिच्छद

योनिच्छद उस झिल्ली को कहते हैं जो योनिद्वार के बाहरी प्रवेशद्वार को अम्शतः या अधिकांशतः ढके रहती है। यह भग का भाग है और इसकी संरचना योनि जैसी ही होती है।

                                               

गर्भाशय

गर्भाशय स्त्री जननांग है। यह 7.5 सेमी लम्बी, 5 सेमी चौड़ी तथा इसकी दीवार 2.5 सेमी मोटी होती है। इसका वजन लगभग 35 ग्राम तथा इसकी आकृति नाशपाती के आकार के जैसी होती है। जिसका चौड़ा भाग ऊपर फंडस तथा पतला भाग नीचे इस्थमस कहलाता है। महिलाओं में यह मूत ...

                                               

कुत्ता

कुत्ता या श्वान भेड़िया कुल की एक प्रजाति है। यह मनुष्य के पालतू पशुओं में से एक महत्त्वपूर्ण प्राणी है। इनके द्वारा तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाली एक भयंकर बीमारी रेबीज होती है। इसकी मादा को कुतिया और शावक को पिल्ला कहते हैं। इसका औसत जीवन ...

                                               

कैनिडाए

कैनिडाए मांसाहारी गण के जानवरों का एक कुल है जिसमें कुत्ता, भेड़िया, सियार, कायोटी और कई कुत्ते-जैसी जीवित और विलुप्त जातियाँ शामिल हैं। इसकी दो मुख्य शाखाएँ हैं: कैनिनी और वलपायनी । कैनिडाए की दो जातियाँ ऐसी हैं जो बहुत रूढ़ी मानी जाती हैं और इन ...

                                               

फ़ेलिडाए

फ़ेलिडाए बिल्लियों और बिल्ली-नुमा मांसाहारी जानवरों का जीववैज्ञानिक कुल है जिसमें बिल्ली, सिंह, शेर, चीता और लिंक्स जैसे प्राणी शामिल हैं। वर्तमान युग में इस कुल की दो शाखाएँ अस्तित्व में हैं: पैन्थेरिनाए‎ और फ़ेलिनाए‎ । पैन्थेरिनाए‎ में बाघ, सिं ...

                                               

काराकारा

काराकारा पक्षियों के फ़ैल्कोनीडाए कुल के पोलीबोरिनाए उपकुल के सदस्य होते हैं, हालांकि कुछ जीववैज्ञानिकों के अनुसार इनका काराकारीनाए नामक अलग उपकुल होना चाहिए। इनके साथ वन श्येन भी पोलीबोरिनाए उपकुल में सम्मिलित हैं और दोनों ही शिकारी पक्षी होते ह ...

                                               

इलापिडाए

इलापिडाए विषैले साँपों का एक जीववैज्ञानिक कुल है जो विश्व के ऊष्णकटिबन्ध और उपोष्णकटिबन्ध क्षेत्रों में पाये जाते हैं। यह धरती और समुद्रों दोनों में रहते हैं। इन सभी के दांत खोखले होते हैं जिन में से यह किसी अन्य प्राणी को काटने पर सीधा उसमें विष ...