ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 456




                                               

रेडियन

रेडियन तलीय कोण के माप की मानक इकाई है। एक रेडियन वह कोण है, जो वृत्त की त्रिज्या के बराबर एक चाप, वृत्त के केन्द्पर अन्तरित करता है। १ रेडियन कोण 57.3 डिग्री से थोड़ा कम होता है। ओर 1 रेडियन वह कोण है, जो वृत्त की त्रिज्या के बराबर का चाप वृत्त ...

                                               

लम्बवत

किसी सतह रेखा से 90 अंश पर बनाई गयी रेखा को उस रेखा पर लम्ब कहते हैं और कहते हैं कि दूसरी रेखा पहली रेखा पर लम्बवत है। उदाहरण के लिए, किसी आयत की कोई भी भुजा अपने से संलग्न भुजा से लम्बवत होती है।

                                               

वक्रता त्रिज्या

किसी वक्र के किसी बिन्दु पर एक चाप की कल्पना की जाय जो उस बिन्दु पर उस वक्र के सबसे सन्निकट निरूपण करे तो इस चाप की त्रिज्या को वक्रता त्रिज्या R {\displaystyle R} कहते हैं। यह वक्रता κ {\displaystyle \kappa } का व्युत्क्रम होता है। R = | 1 κ | = ...

                                               

वर्णनात्मक ज्यामिति

ठोसों, तलों, रेखाओं और उनके प्रतिच्छेदों के परिमाण, आकाऔर स्थिति की दृष्टि से, यथार्थ रेखण को वर्णनात्मक ज्यामिति कहते हैं। फ्रांसीसी गणितज्ञ और भौतिकविद्, गैसपर्ड मॉंज, ने १८वीं शताब्दी के अंत में इस व्यावहारिक ज्यामिति का आविष्कार किया। सभी वास ...

                                               

वैश्‍लेषिक ज्यामिति

वैश्लेषिक ज्यामिति ज्यामिति का एक शाखा है। 17वीं शताब्दी के मध्य में फ्रांसीसी गणितज्ञ रेने देकार्त ने ज्यामिति में बीजगणित का प्रयोग कर इसे बहुत शक्तिशाली बना दिया। उसने पहले दो काटती हुई रेखाएँ लीं, जिन्हें अक्ष कहते हैं। किसी बिंदु की इन रेखाओ ...

                                               

समचतुर्भुज

समचतुर्भुज चार समान भुजाओं वाली एक समतल आकृति है। ऐसा समचतुर्भुज जिसके सभी कोण ९० अंश के हों, वर्ग होता है।

                                               

स्टेरेडियन

स्टेरेडियन घन कोण का मात्रक है। 1 स्टेरेडियन वह घन कोण है, जो गोले की त्रिज्या के वर्ग के बराबर के क्षेत्रफल वाले गोले का पृष्ठ भाग गोले के केन्द्पर अन्तरित करता है।

                                               

स्प्लाईन (गणित)

गणित में कई निष्कोण वक्रों को जोड़कर बने वक्र को स्प्लाइन कहते हैं। अतः यह एक पर्याप्त रूप से निष्कोण खण्डश: बहुपद है। अन्तर्वेशन की समस्याओं में स्प्लाईन अन्तर्वेशन प्रायः बहुपद अन्तर्वेशन की तुलना में अधिक पसंद किया जाता है क्योंकि यह कम डिग्री ...

                                               

अनुपात

गणित में अनुपात समान प्रकार की दो संख्याओं के बीच सम्बन्ध को कहते हैं। प्रायः इसे "a संबंध b" या a:b कहते हैं। उदाहरण के लिये यदि दो पेड़ों की उँचाइयों का अनुपात ३:५ है तो इसका अर्थ यह है कि यदि पहले पेड़ की ऊंचाई ३ मीटर है तो दूसरे की ऊंचाई ५ मी ...

                                               

गणितीय सूत्र

विश्व में गणित सिर्फ चार चिन्हों का लेखा जोखा है। इसलिए इससे डरने कि आवश्कता बिलकुल भी नहीं है। १ - + -- योग २ - - -- घटाना ३ - * -- गुणा ४ - / -- भाग

                                               

मूल (फलन के)

गणित में किसी फलन का मूल वह संख्या होती है जिस पर उस फलन का मान शून्य हो जाता है। इसे फलन का शून्य या फलन का हल भी कहते हैं। किसी फलन के शून्य, एक, या एक से अधिक, मूल हो सकते हैं। उदाहरण के लिये निम्नलिखित फलन को देखिये- f x = x 2 − 6 x + 9. {\di ...

                                               

आव्यूह

गणित में आव्यूह एक अदिश राशियों से निर्मित आयताकार रचना है। यह आयताकार रचना लघु कोष्ठक ", दोहरे दण्ड "|| ||" अथवा दीर्घ कोष्ठक " के अन्दर बंद होती है। इसमें संख्याओं का एक विशेष प्रकार का विन्यास किया जाता है, अत: इसे आव्यूह, या मैट्रिक्स, की संज ...

                                               

उल्लेखनीय सर्वसमिकाएँ

a + b 2 = a 2 + 2 a b + b 2 {\displaystyle a+b^{2}=a^{2}+2ab+b^{2}\,} त्रिपदी व्यंजक: a 2 + 2 a b + b 2 {\displaystyle a^{2}+2ab+b^{2}\;}, पूर्ण वर्ग त्रिपद कहलाता है। इसी प्रकार, a − b 2 = a 2 − 2 a b + b 2 {\displaystyle a-b^{2}=a^{2}-2ab+b^{2} ...

                                               

क्रमविनिमेयता

गणित में क्रमविनिमेयता किसी संक्रिया का वह गुण है जिसमें चीजों का क्रम बदलने पर भी अन्तिम परिणाम नहीं बदलता। अनेकों द्विक संक्रियाओं का यह मौलिक गुण है।

                                               

त्रिपदी

प्रारम्भिक बीजगणित के सन्दर्भ में त्रिपदी उस बहुपद को कहते हैं जो तीन पद वाला हो। जैसे: 21 a b + c + 3 b {\displaystyle 21ab+c+3b} और 37 x y z + 4 y 3 + z {\displaystyle 37xyz+4y^{3}+z}.

                                               

पूर्ण वर्ग बनाना

आरम्भिक बीजगणित में द्विघात बहुपद a x 2 + b x + c {\displaystyle ax^{2}+bx+c\,\!} को a 2 + k {\displaystyle a^{2}+k\,} के रूप में बदलने को पूर्ण वर्ग बनाना कहते हैं। यहाँ h तथा k का मान x से स्वतंत्र है। नीचे पूर्ण वर्ग बनाने के कुछ उदाहरण दिये ह ...

                                               

प्रारम्भिक बीजगणित

प्रारम्भिक बीजगणित से आशय उस बीजगणित से है जो उन विद्यार्थियों को सिखाया जाता है जिनको गणित में केवल अंकगणित की कुछ जानकारी हो। बीजगणित एवं अंकगणित में सबसे बड़ा अन्तर यह है कि बीजगणित में अंकों के साथ-साथ चरों का भी प्रयोग किया जाता है 6

                                               

बहुपद समीकरणों के सिद्धान्त

x के किसी n घातीय व्यंजक को शून्य के बराबर रखने पर प्राप्त समीकरण को n घात का बहुपद समीकरण कहते हैं। a n x n + a n − 1 x n − 1 + ⋯ + a 2 x 2 + a 1 x + a 0 = 0 {\displaystyle a_{n}x^{n}+a_{n-1}x^{n-1}+\cdots +a_{2}x^{2}+a_{1}x+a_{0}=0\,} एक चर वाल ...

                                               

बीजीय फलन

गणित में बीजीय फलन ऐसे फलनों को कहते हैं जो बहुपद गुणांक वाले बहुपदीय समीकरणों को संतुष्ट करें। उदाहरण के लिये, एक ही चर वाला बीजीय व्यंजक x निम्नलिखित बहुपदीय समीकरण का हल है- a n x y n + a n − 1 x y n − 1 + ⋯ + a 0 x = 0 {\displaystyle a_{n}xy^ ...

                                               

वर्ग आव्यूह

वर्ग आव्यूह एक प्रकार का आव्यूह होता है, जिसमें पंक्ति और स्तम्भ दोनों समान संख्या में होते हैं। उदाहरण के लिए यदि R एक वर्ग आव्यूह है और उसमें m पंक्तियों की संख्या और n स्तम्भों की संख्या है, तो m और n की संख्या समान होगी।

                                               

विलोपन सिद्धान्त

बीजगणित तथा बीजीय ज्यामिति में उन कलनविधियों को विलोपन सिद्धान्त या केवल विलोपन कहते हैं जो अनेकों चरों से युक्त समीकरणों में से एक या अधिक चरों को हटाने के लिए प्रयुक्त होती हैं। आजकल रैखिक युगपत समीकरणों से चरों के विलोपन के लिए प्रायः गाउस का ...

                                               

वर्गमूल निकालने की विधियाँ

आर्यभट ने वर्गमूल निकालने की अपनी विधि को निम्नलिखित श्लोक द्वारा अभिव्यक्त किया है- भागं हरेदवर्गान्नित्यं द्विगुणेन वर्गमूलेन। वर्गाद्वर्गे शुद्धे लब्धं स्थानान्तरे मूलम़्॥ अनुवाद: Having subtracted the greatest possible square from the last od ...

                                               

विश्लेषी संख्या सिद्धान्त

गणितीय विश्लेषण से शब्दार्थ के अनुसार गणित को सरलतम तत्वों में विघटित करने का तात्पर्य होता है। ये तत्व अंततोगत्वा संख्याएँ ही हैं। क्रॉनेकर ने भी कहा है: ईश्वर ने धन पूर्णांकों की रचना की है, तथा अन्य सभी संख्याएँ मनुष्य द्वारा बनाई हुई हैं।

                                               

संख्या सिद्धान्त

Jयह लेख संख्या पद्धति number system के बारे में नहीं है। संख्या सिद्धांत Number theory सामान्यत: सभी प्रकार की संख्याओं के गुणधर्म का अध्ययन करता है किन्तु विशेषत: यह प्राकृतिक संख्याओं 1, 2, 3.के गुणधर्मों का अध्ययन करता है। पूर्णता के विचार से ...

                                               

कैटालन संख्या

निम्नलिखित सम्बन्ध द्वारा पारिभाषित प्राकृतिक संख्याएँ कैटालन संख्याएँ कहलाती हैं: C n = 1 n + 1 2 n = 2 n! n + 1! n! = ∏ k = 2 n + k for n ≥ 0. {\displaystyle C_{n}={\frac {1}{n+1}}{2n \choose n}={\frac {2n!}{n+1!\,n!}}=\prod \limits _{k=2}^{n}{ ...

                                               

गोल्डबैक का अनुमान

गोल्डबैक का अनुमान गणित एवं संख्या सिद्धान्त की सबसे पुरानी अनसुलझी समस्याओं में से एक है। इसके अनुसार, 2 से बड़ी सभी सम संख्याओं को दो अभाज्य संख्याओं के योग के रूप में व्यक्त किया जा सकता है। उदाहरण

                                               

दशमलव बिन्दु

दशमलव बिन्दु गणितीय संख्याओं को लिखने का एक प्रतीक है। प्राय: यह दाशमिक संख्या पद्धति में प्रयुक्त होता है और संख्या के पूर्णांक भाग एवं अपूर्णाक भागों के बीच में लगाया जाता है। किन्तु अन्य पद्धतियों में भी यह अलग अर्थ मेंप्रयुक्त हो सकता है। ऐति ...

                                               

द्विघाती अवशेष

संख्या सिद्धान्त में किसी पूर्णांक q को मापांक n का द्विघाती अवशेष कहते हैं यदि निम्नलिखित सम्बन्ध सत्य हो- x 2 ≡ q mod n. {\displaystyle x^{2}\equiv q{\pmod {n}}.} जहाँ x कोई पूर्णांक है। इसके विपरीत यदि उपरोक्त सम्बन्ध x के किसी भी मान के लिए स ...

                                               

प्रागनुभविक संख्या

गणित में, प्रागनुभविक संख्या उन संख्याओं को कहते हैं जो परिमेय गुणांकों वाले किसी भी अशून्य बहुपद समीकरण की मूल न हों। π और e दो प्रमुख प्रागनुभविक संख्याएँ हैं। यह सिद्ध करना कि कोई दी हुई संख्या प्रागनुभविक है, आसान नहीं है। फिर भी प्रागनुभविक ...

                                               

बीजगणितीय संख्या सिद्धान्त

बीजगणितीय संख्या सिद्धान्त, संख्या सिद्धान्त की एक प्रमुख शाखा है जो बीजगणितीय पूर्णांकों से सम्बन्धित बीजगणितीय संरचनाओं का अध्ययन करती है।

                                               

बेसल समस्या

बेसल समस्या संख्या सिद्धान्त से सम्बद्ध गणितीय विश्लेषण की समस्या है जो सर्वप्रथम पिएत्रो मंगोली ने १६४४ में दी और १७३४ में लियोनार्ड आयलर ने हल की। यह सर्वप्रथम द सेंट पीटर्सबर्ग एकेडेमी ऑफ़ साइंसेज में ५ दिसम्बर १७३५ को प्रकाशित हुई। बेसल समस्य ...

                                               

संख्या रेखा

संख्या रेखा या वास्तविक रेखा एक सरल रेखा है जिसका उपयोग वास्तविक संख्याओं को प्रदर्शित करने के लिये किया जाता है। इस रेखा पर वास्तविक संख्याएँ एक बिन्दु के रूप में दिखायी जातीं हैं। उदाहरण के लिये, पार्श्व चित्र में कुछ संख्याएं संख्या रेखा पर दि ...

                                               

हरात्मक संख्या

गणित में, n वीं हरात्मक संख्या प्रथम n प्राकृत संख्याओं के व्युत्क्रम का संकलन है। सामान्यतः इसे H n से प्रदर्शित करते हैं: H n = 1 + 1 2 + 1 3 + ⋯ + 1 n = ∑ k = 1 n 1 k. {\displaystyle H_{n}=1+{\frac {1}{2}}+{\frac {1}{3}}+\cdots +{\frac {1}{n}} ...

                                               

गाउस-साइडल विधि

संख्यात्मक रैखिक बीजगणित में गाउस-साइडल विधि रैखिक समीकरण निकाय को हल करने की एक पुनरावृत्तिमूलक विधि है। इसे लिबमान विधि भी कहते हैं। इसका नाम जर्मनी के गणितज्ञ कार्ल फ्रेडरिक गाउस तथा फिलिप लुडविग फॉन साइडल के नाम पर पड़ा है। यह विधि जकोबी की व ...

                                               

छेदिका विधि

छेदिका विधि निम्नलिखित प्रतिवर्ती सम्बन्ध से दी जा सकती है: x n = x n − 1 − f x n − 1 x n − 1 − x n − 2 f x n − 1 − f x n − 2 {\displaystyle x_{n}=x_{n-1}-fx_{n-1}{\frac {x_{n-1}-x_{n-2}}{fx_{n-1}-fx_{n-2}}}} इस सम्बन्ध को ध्यान से देखने पर पता च ...

                                               

न्यूटन विधि

संख्यात्मक विश्लेषण में न्यूटन विधि किसी वास्तविक मान वाले फलन के मूल निकालने की एक पुनरावृत्‍तिमूलक विधि है जिसके द्वारा मूल के सन्निकट मान से आरम्भ करके क्रमशः अधिक यथार्थ मूल प्राप्त किया जाता है। इसको न्यूटन-रैप्सन विधि भी कहते हैं। एक चर वाल ...

                                               

पुनरावृत्तिमूलक विधि

संख्यात्मक गणित में पुनरावृत्‍तिमूलक विधि गणना की वह विधि है जिसमें किसी अनुमानित हल से शुरू करते हैं और एक ही सूत्र या कलनविधि का बारबार प्रयोग करते हुए अधिक शुद्ध हल प्राप्त करते हैं। यह हल पुनः उस सूत्र में प्रयुक्त होकर और भी अधिक शुद्ध हल दे ...

                                               

मान्टे-कार्लो सिमुलेशन

मॉन्टे-कार्लो विधियाँ कम्प्यूटर-कलन विधियों के उस समूह को कहते हैं जो किसी समस्या के संख्यात्मक परिणाम प्राप्त करने के लिये यादृच्छिक प्रतिचयन का उपयोग करता है। इस विधि का मूल मंत्र यह है कि यादृच्छता का उपयोग करते हुए उन समस्याओं क भी ह्ल निकाल ...

                                               

मिथ्या स्थिति विधि

संख्यात्मक विश्लेषण में मिथ्या स्थिति विधि समीकरणों का मूल निकालने की एक संख्यात्मक विधि है। यह विधि छेदिका विधि तथा समद्विभाजन विधि का सम्मिलित रूप है।

                                               

वक्र आसंजन

वक्र आसंजन या वक्र बैठाना एक गणितीय प्रक्रिया है जिसमें किसी दिये हुए आंकड़े के आधापर एक वक्र की रचना करना या एक गणितीय फलन की गणना करना होता है जो इन आंकड़ों से सर्वाधिक शुद्धतापूर्वक मेल खाता हो । वैज्ञानिकों, इंजीनियरों एवं अन्य प्रायोगिक कार् ...

                                               

संख्यात्मक समाकलन

संख्यात्मक विश्लेषण में किसी निश्चित समाकल का संख्यात्मक मान निकालने की कलनविधियाँ संख्यात्मक समाकलन के अन्तर्गत आतीं हैं। इसके वितार के रूप में, कभी-कभी अवकलल समीकरणों के संख्यात्मक हल को भी संख्यात्मक समाकलन का नाम दे दिया जाता है। संख्यात्मक स ...

                                               

सन्निकटन सिद्धांत

गणित में फलनों को मूल फलन की अपेक्षा अधिक सरल फलनों द्वारा इस प्रकार निरूपित करना कि ताकि इसके गुणधर्म यह मूल फलन के जैसे ही हो, बहुत उपयोगी है। यह कार्य संन्निकटन सिद्धान्त के अन्तर्गत आता है। जटिल फलनो के सरल फलनों द्वारा निरूपण के फलस्वरूप गणन ...

                                               

समद्विभाजन विधि

संख्यात्मक विश्लेषण के क्षेत्र में, समद्विभाजन विधि अरैखिक समीकरण का मूल निकालने की एक संख्यात्मक विधि है। यह एक पुनरावृत्‍तिमूलक विधि है।

                                               

सांख्यिकी की रूपरेखा

साँचा:StatsTopicTOC सांख्यिकी के अवलोकन और सामयिक दिशानिर्देश हेतु निम्न रूपरेखा प्रदान की गई हैं - सांख्यिकी – डाटा का संग्रह, विश्लेषण, विवेचन और प्रदर्शन। यह अकादमिक विषयों की व्यापक विविधता में, भौतिक और सामाजिक विज्ञान से लेकर मानविकी तक में ...

                                               

काई-वर्ग परीक्षण

चाई-वर्ग परीक्षण या काई-वर्ग परीक्षण या χ 2 {\displaystyle \chi ^{2}} परीक्षण सांख्यिकीय का कोई भी परिकल्पना परीक्षण है जिसमें परिक्षण सांख्यिकी का नमूना वितरण काई-वर्ग वितरण होता है, जब कोई परिकल्पना सत्य नहीं है।

                                               

काई-वर्ग वितरण

सांख्यिकी के प्रायिकता सिद्धान्त में स्वतंत्रता की कोटि k {\displaystyle k} का काई-वर्ग वितरण k स्वतंत्र मानक यादृच्छिक चरों के वर्ग के संकलन का वितरण होता है। काई-वर्ग वितरण फलन, गामा वितरण का एक विशेष रूप है जो सांख्यिकीय अनुमिति के प्रायिकता व ...

                                               

गणितीय सांख्यिकी

सांख्यिकी में प्रायिकता सिद्धान्त का उपयोग करना गणितीय सांख्यिकी कहलाता है। सांख्यिकीय आंकड़े इकट्ठा करने का कार्य इसमें नहीं किया जाता। गणितीय सांख्यिकी में प्रयुक्त कुछ प्रमुख गणितीय तकनीकें ये हैं- गणितीय विश्लेषण, रैखिक बीजगणित,संप्रभाव्य विश ...

                                               

टी-परीक्षण

टी-परीक्षण से आशय किसी भी सांख्यिकीय परिकल्पना से है जिसमें परीक्षण की सांख्यिकी नल हाइपोथेसिस के अन्तर्गत स्टुडेन्ट टी-वितरण का अनुसरण करती है। इसका विकास १९०८ में विलियम सीली गोसेट ने स्टुडेन्ट के छद्मनाम से की थी। टी-परीक्षण करते समय किगए आम ध ...

                                               

पुंज विश्लेषण

आँकड़ो या बिन्दुओं को गुच्छों में या ढेरों में एकत्र करने के विज्ञान को पुँजकलन या गुच्छा विश्लेषण करना कह सकते हैं। सांख्यिकी में आज कल डेटा विश्लेषण में यह बहुत प्रयुक्त हो रहा है। अंग्रेज़ी में इसे cluster analysis या numerical taxonomy कहते ह ...

                                               

प्रतिदर्श

सांख्यिकी और मात्रात्मक अनुसन्धान विधियों में, किसी बड़ी राशि में से चुनी हुई एक छोटी सी मात्रा को प्रतिदर्श या नमूना है। यह माना जाता है कि प्रतिदर्श के सांख्यिकीय गुण, पूरी राशि के सांख्यिकीय गुणों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उदाहरण के लिए, माना ...