ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 458




                                               

पेंट थिनर

पेंट थिनर एक ऐसा विलायक है जिसका उपयोग तेल से निर्मित पेंट को पतला करने या पेंट के प्रयोग के बाद सफाई करने के लिए किया जाता है। व्यावसायिक रूप से, "पेंट थिनर" नामक विलायक सामान्यत: खनिज स्पिरिट होते हैं, इनका स्फुरांक लगभग 40 °C होता है, जो चारको ...

                                               

फॉर्मिक अम्ल

फॉर्मिक अम्ल एक कार्बनिक यौगिक है। यह लाल चींटियों, शहद की मक्खियों, बिच्छू तथा बर्रों के डंकों में पाया जाता है। इन कीड़ों के काटने या डंक मारने पर थोड़ा अम्ल शरीर में प्रविष्ट हो जाता है, जिससे वह स्थान फूल जाता है और दर्द करने लगता है। पहले पह ...

                                               

गुर्दा

वृक्क या गुर्दे का जोड़ा एक मानव अंग हैं, जिनका प्रधान कार्य मूत्र उत्पादन करना है। गुर्दे बहुत से वर्टिब्रेट पशुओं में मिलते हैं। ये मूत्र-प्रणाली के अंग हैं। इनके द्वारा इलेक्त्रोलाइट, क्षार-अम्ल संतुलन और रक्तचाप का नियामन होता है। इनका मल स्व ...

                                               

आर्द्र गुण

आर्द्र एक हिन्दी भाषा का विशेषण है। अर्थ 1.गीला, तर, नम 2.पिघला हुआ 3.किसी प्रकार के रस या तरल पदार्थ से युक्त। जैसे-आर्द्र काष्ठ, आर्द्र नेत्र आदि। 4.सना हुआ। लथ-पथ।

                                               

ज्येष्ठ

जेठ रिश्ता: पति के बड़े भ्राता का पत्नी से रिश्ता। ज्येष्ठ मास: हिन्दू पंचांग का एक मास। ज्येष्ठ शब्द: बड़ा रिश्ता, यानि रिश्ते में बड़ा, उदा के लिए ज्येष्ठ भ्राता = बड़ा भाई ज्येष्ठ अभियंता = सीनियर इंजीनियर

                                               

नवनिर्मित प्रयोग

नवनिर्मित प्रयोग या नीओलॉजिज्म ऐसे शब्दों को कहते हैं जो पहले से प्रयोग में नहीं रहे हों और कुछ ही दिनों से प्रयोग किये जाने लगे हों। नवनिर्मित प्रयोग के पीछे कोई व्यक्ति या प्रकाशन होता है और वह किसी विशिष्ट घटना या समय पर अस्तित्व में आया होता है।

                                               

नवरोहण

नवरोहण नियुक्ति के लिए किसी योग्य व्यक्ति लुभाना, जाँच करना, चयन करना और पदनियुक्ति की एक प्रक्रिया है। सामरिक स्तर पर यह नियोक्ता ब्राण्ड के विकास में शामिल हों जिसमें कर्मचारी भेण्ट भी शामिल है। भर्ती मैन पावर स्टाफिंग अनुसूची की आवश्यकताओं को ...

                                               

लागू नहीं

लागू नहीं अंग्रेज़ी शब्दों not applicable के तुल्यार्थक शब्द हैं। साधारण रूप से लागू नहीं उस समय प्रयोग किया जाता है जब दी गई एक या दो शर्तों को मानना असंभव हो। इसे कई बार ऑनलाइन फ़ॉर्मों पर एक विकल्प के रूप में दिया जाता है। उदाहरण प्रश्न: क्या ...

                                               

शुष्क

शुष्क शब्द एक विशेषण है। अर्थ:-ठंडा 1.पदार्थ या वातावरण जो आर्द्र या नम न हो। 2.स्थान जहाँ वर्षा न हुई हो या न होती हो। 3.व्यक्ति जिसमें कोमलता, ममता, मोह, सह्रदयता आदि का अभाव हो। 4.विषय जो संपूर्ण न हो। जिससे मनोरंजन न होता हो। नीरस। जैसे-शुष्क ...

                                               

गुदा

गुदा शरीर के पाचक नाल का अंतिम एक या डेढ़ इंच लंबा भाग है, जिसके वहि:छिद्र external orifice से मल शरीर से बाहर निकलता है। इस नली की रचना भी नाल के शेष भाग के ही समान है, अर्थात्‌ सबसे भीतर श्लैष्मिक स्तर और उसके बाहर वृत्ताकाऔर अनुदैर्ध्य मांससूत ...

                                               

ग्रीवा

ग्रीवा गर्भाशय का मुख है। स्त्री के शरीर में बाहर से दिखने वाली संरचना को योनि द्वार कहा जाता है। योनि के जितने भाग में पुरुष का लिंग प्रवेश करता है, उतना भाग योनि है। लिंग से निकलने वाला वीर्य इस ग्रीवा से अंदर प्रवेश करके गर्भाशय में पहुँचता है।

                                               

ठोड़ी

ठोड़ी या ठुड्डी मनुष्यों के चेहरे में होंठ के नीचे वाली हड्डी को कहते हैं। यह चेहरे का सबसे निचला भाग होता है। मनुष्यों को बोलने के लिए होंठों को हिलाना पड़ता है और उसके लिए स्नायुओं की आवश्यकता पड़ती है। होठों के यह स्नायु ठोड़ी की हड्डी से लगे ...

                                               

बृहदान्त्र

बृहदान्त्र, जठरांत्र क्षेत्र तथा पाचन तंत्र का अंतिम भाग है। इस भाग में जल का शोषण करके बचे हुए अपशिष्ट को मल के रूप में भण्डारित किया जाता है जो मल विसर्जन द्वारा गुदा मार्ग से बाहर आता है।

                                               

यौन अंग

यौन अंग, शरीर के वह अंग होते हैं, जो किसी जीव की प्रजनन प्रकिया में सम्मिलित होने के साथ साथ उसके प्रजनन तंत्र का रचना भी करते हैं। स्तनधारियों के प्रमुख यौन अंग हैं: - गर्भाशय बार्थोलिन की ग्रंथियां ग्रीवा स्कीन की ग्रंथि योनि फैलोपियन नलिकायें ...

                                               

गतिशीलता

गतिशीलता जीवविज्ञान में ऊर्जा का प्रयोग करके स्वयं को जगह-से-जगह हिला पाने की क्षमता को गतिशीलता कहते हैं। ज़्यादातर जानवर गतिशील होते हैं हालांकि यह शब्द एककोशिकीय और सरल बहुकोशिकीय जीवों के लिए भी प्रयोग होता है। कभी-कभी इस शब्द को शरीर के अन्द ...

                                               

पारक्रमण (कार्यिकी)

पारक्रमण के अन्य अर्थों के लिए कृप्या पारक्रमण देखें कार्यिकी में संवेदक पारक्रमण किसी उद्दीपक को एक रूप से दूसरे में परिवर्तित होने को कहते हैं। प्राणियों के तन्त्रिका तन्त्र में पारक्रमण का अर्थ किसी भौतिक उद्दीपक को ऐक्शन पोटेंशिअल में बदलकर न ...

                                               

समस्थापन

समस्थापन या होमिओस्तासिस किसी तंत्र का वह गुण है जिसके द्वारा वह अपने आन्तरिक पर्यावरण में आवश्यक परिवर्तन करके ताप, पीएच आदि को नियत रखता है। तंत्र - दो प्रकार के हो सकते हैं - खुला या बन्द ।

                                               

अनाक्सी श्वसन

अनाक्सीय श्वसन में आक्सीजन की आवश्यकता नहीं पड़ती है तथा यह आक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है। इस क्रिया में भोजन का अपूर्ण आक्सीकरण होता है। जन्तुओं में इस क्रिया के फलस्वरूप कार्बन डाई-आक्साइड तथा लैक्टिक अम्ल का निर्माण होता है तथा पौधों में क ...

                                               

आक्सी श्वसन

ऑक्सीय श्वसन श्वसन की वह पद्धति है जिसमें आक्सीजन की उपस्थिति अनिवार्य है तथा इसमें भोजन का पूर्ण आक्सीकरण होता है। इस क्रिया के अन्त में पानी, कार्बन डाई-आक्साइड तथा ऊष्मीय ऊर्जा का निर्माण होता है। एक ग्राम मोल ग्लूकोज के आक्सीकरण से ६७४ किलो क ...

                                               

उदरीय श्वसन

गभीर श्वसन या उदरीय श्वसन उस श्वसन को कहते हैं जो डायाफ्राम को संकुचित करके किया जाता है। इस प्रकार के श्वसन में फेफड़ों में हवा घुसती है तथा पेट फैलता है।

                                               

क्रेब्स चक्र

क्रेब्स चक्र वायवीय श्वसन की दूसरी अवस्था है। यह कोशिका के माइटोकाँन्ड्रिया में होती है। इस क्रिया में ग्लूकोज का अंत पदार्थ पाइरूविक अम्ल पूर्ण रूप से आक्सीकृत होकर कार्बन डाईआक्साइड और जल में बदल जाता है तथा अधिक मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है। ...

                                               

क्लोम

क्लोम या गलफड़ा जलीय जीवों में पाया जाने वाला एक श्वसन अंग है। इसका प्रयोग कर जलचर पानी से ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड का त्याग करते हैं। गलफड़े की सूक्ष्म संरचना बाहरी वातावरण के लिए एक बहुत बड़ा तल क्षेत्र प्रस्तुत करती है।

                                               

ग्लाइकोलिसिस

ग्लाइकोलिसिस या ग्लाइको अपघटन, श्वसन की प्रथम अवस्था है जो कोशिका द्रव में होती है। इस क्रिया में ग्लूकोज का आंशिक आक्सीकरण होता है, फलस्वरूप ग्लूकोज के एक अणु से पाइरूविक अम्ल के 2 अणु बनते हैं तथा कुछ ऊर्जा मुक्त होती है। यह क्रिया कई चरणों में ...

                                               

श्वसन अंग

वे अंग जिनके द्वारा सजीवों तथा वातावरण के बीच गैसों का आदान-प्रदान होता है, उसे श्वसन अंग कहते हैं। शरीर की बाह्य सतह, त्वचा, ट्रेकिया, गिल्स, फेफड़ा प्राणियों के विभिन्न श्वसन अंग हैं। पौधों में जन्तुओं की तरह कोई विशेष श्वसन अंग नहीं पाये जाते ...

                                               

श्वसन तंत्र

श्वसन तंत्र या श्वासोच्छ्वास तंत्र में सांस संबंधी अंग जैसे नाक, स्वरयंत्र, श्वासनलिका और फुफ्फुस आदि शामिल हैं। शरीर के सभी भागों में गैसों का आदान-प्रदान इस तंत्र का मुख्य कार्य है।

                                               

श्वास कष्ट (डिस्पनिया)

डिस्पनिया या, श्वास क्षुधा), श्वासल्पता का व्यक्तिपरक लक्षण है। यह अत्यधिक श्रम का एक आम लक्षण होता है तथापि यदि यह अप्रत्याशित स्थिति में उत्पन्न हो तो यह एक रोग बन जाता है। 85% मामलों में इसका कारण होता है: अस्थमा, निमोनिया, हृदय इशेमिया, छिद्र ...

                                               

श्वासनली

मनुष्य, पशुओं और पक्षियों के शरीर में श्वास नलिका या साँस की नली वह नली होती है जो गले में स्थित स्वरयंत्र को फेफड़ों से जोड़ती है और मुंह से फेफड़ों तक हवा पहुँचाने के रास्ते का एक महत्वपूर्ण भाग है। श्वासनली की आन्तरिक सतह पर कुछ विशेष कोशिकाओं ...

                                               

संपीडित वायु

वायु में दबाव होता है। साधारणतया इसकी अनुभूति हमें नहीं होती। यदि हमारे शरीर के किसी अंग से वायु निकाल ली जाए, तब वायु के दबाव की अनुभूति हमें सरलता से हो जाती है। समुद्रतल पर वायु के दबाव की मात्रा ७६० मिमी पारे से दाब के तुल्य होती है। जैसे जैस ...

                                               

सांस की दुर्गंध

साँस की दुर्गंध या मुह की दुर्गन्ध या दुर्गंधी प्रश्वसन के रोगी के मुख से एक विशेष दुर्गन्ध आती है जो, सांस के साथ मिली होती है। सांसों की दुर्गन्ध ग्रसित व्यक्ति में चिन्ता का कारण बन सकती है। यह एक गंभीर समस्या बन सकती है किंतु कुछ साधारण उपायो ...

                                               

अवटु ग्रंथि

अवटु मानव शरीर में पायी जाने वाली सबसे बड़ी अंत:स्रावी ग्रंथियों में से एक है। यह द्विपिंडक रचना निम्न ग्रीवा में अवटु उपास्थि स्वरयंत्र के नीचे वलयाकार उपास्थि के लगभग समान स्तर पर स्थित होती है। यह थायरॉकि्सन, ट्राइ-आयडोथाइरोनीन और थाइरोकैल्सिट ...

                                               

थायरॉकि्सन

थायरॉकि्सन एक प्राणि हार्मोन है जिसका स्राव अवटु ग्रंथि से होता है। थायरॉक्सिन हार्मोन वसा, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट के मेटाबोलिज्म को बढ़ाता है। यह रक्त में शर्करा, कोलेस्टरोल तथा फास्फोलिपिड का मात्रा को कम कर देता है। लाल रक्त कोशिका के निर्म ...

                                               

पादप हार्मोन

पादप हार्मोन, जिन्हें फाइटोहार्मोन भी कहते हैं, रसायन होते हैं जो पौधों के विकास को विनियमित करते हैं। पादप हार्मोन, संकेत अणु होते है और बहुत कम परिमाण में इनका उत्पादन पौधों में ही होता है। हार्मोन, स्थानीय रूप से लक्षित कोशिकाओं में कोशिकीय प् ...

                                               

लेप्टिन

लेप्टिन शब्द ग्रीक से लिया गया है, जिसका अर्थ "पतला" होता है। यह एक प्रकार का तृप्ति हार्मोन है। यह वसा कोशिकाओं द्वारा बनाए जाते हैं, जो भूख को बाधित कर ऊर्जा संतुलन को विनियमित करने में मदद करता है। यह घ्रेलिन नामक भूख दिलाने वाले हार्मोन के का ...

                                               

विकास हार्मोन की कमी

ग्रोथ हार्मोन डेफिशियंशी एक चिकित्सा कमी है जो पीयूष ग्रन्थि में आने वाली समस्या के कारण होती है तथा इसमें शरीर को पर्याप्त वृद्धि हार्मोन नहीं मिल पाता।

                                               

केन्द्रक आव्यूह

जीवविज्ञान और कोशिका विज्ञान में केन्द्रक आव्यूह रेशों का एक जाल होता है जो वनस्पतियों, प्राणियों और सुकेन्द्रिक जीवों की कोशिकाओं के कोशिका केन्द्रकों में फैला हुआ होता है। लेकिन जहाँ कोशिका कंकाल एक स्थिर ढांचा होता है वहाँ केन्द्रक आव्यूह के ब ...

                                               

जातक पारिजात

जातक पारिजात एक ज्योतिष ग्रन्थ है जिसकी गणना वृहत पाराशर होराशास्त्र, वृहत् जातक तथा फलदीपिका के समकक्ष होती है। जातक पारिजात के रचयिता वैद्यनाथ दीक्षित हैं जो १४२५ से १४५० के आसपास जन्मे थे।

                                               

कल्याण वर्मा

यह तो सर्व विदित है कि ज्योतिष शास्त्र वेदान्गों में सर्वश्रेष्ठ शास्त्र है। इस शास्त्र के अनुसार ही विश्व का शुभाशुभ ज्ञात हो सकता है। इस शास्त्र के तीन भाग हैं- होरा सिद्धान्त संहिता इन तीनों भागों को महॠषियों के द्वारा प्रणीत होने के कारण जीवन ...

                                               

प्रथम भाव

भदावरी ज्योतिष में प्रथम भाव की परिभाषा व्यक्ति के जन्म के समय के बारे में बखान करता है। व्यक्ति का शरीऔर शरीर की बनावट शरीर की जाति शरीर का भेद शरीर की क्रियायें शरीर के रहने का समय आदि प्रथम भाव में बताये जाते है।

                                               

अभिजित

अभिजित भारतीय ज्योतिष में वर्णित एक नक्षत्र है। वर्तमान खगोलशास्त्र में वेगा नामक तारे को अभिजित की संज्ञा दी जाती है। तैत्तिरीय संहिता और अथर्ववेद में २८ नक्षत्रों का ज़िक्र है जिनमें अभिजित भी एक है। भचक्र में इसे सबसे अधोवर्ती नक्षत्र माना गया ...

                                               

उत्तरायण सूर्य

Youtube उत्तरायण सूर्य, सूर्य की एक दशा है।उत्तरायण = उत्तर + अयन का शाब्दिक अर्थ है - उत्तर में गमन | दिन के समय सूर्य के उच्चतम बिंदु को यदि दैनिक तौपर देखा जाये तो वह बिंदु हर दिन उत्तर की और बढ़ता हुआ दिखेगा | उत्तरायण की दशा में पृथ्वी के उत ...

                                               

चन्द्रवाक्य

चंद्रवाक्य सूची के रूप में व्यवस्थित संख्याओं के एक समूह को कहते हैं जिनका उपयोग प्राचीन भारतीय गणितज्ञों द्वारा चन्द्रमा की पृथ्वी के चारो ओर गति की गणना के लिए किया जाता था। वास्तव में ये संख्या के रूप में होते ही नहीं हैं बल्कि संख्याओं को कटप ...

                                               

चौघड़िया

चौघडिया पंचांग हिन्दू वैदिक कैलेण्डर का एक रूप या अंग होता है। इसमें प्रतिदिन के लिये दिन, नक्षत्र, तिथि, योग एवं करण दिये होते हैं। इनके लिये प्रत्येक नगर या स्थान के लिये वहां के सूर्योदय एवं सूर्यास्त से संबंधित स्वतः सुधार होता है। यदि कभी कि ...

                                               

द्वितीय भाव

भदावरी ज्योतिष धन का कमाना और खर्च करना, बैक में धन को जमा करना और निकालना, धन के विवरण को अपने पास रखना, धन वाले कामों के अन्दर धन को समयानुसार कम या अधिक मुनाफ़े के लिये लेना देना, भौतिक वस्तुओं का निष्पादन करना, भौतिक वस्तुओं के प्रति और उनके ...

                                               

नतोन्नत बल

नतोन्नत षडबल के काबल का एक हिस्सा होता है। जातक दिन में हुआ है या रात्रि में हुये जन्मको आधार बनाकर नतोन्नत बल निकाला जाता है। कुछ ग्रह दोपहर में बली होते हैं। वह उन्नत बल और कुछ ग्रह रात्रि में बली होते हैं। वे नत बल रखते हैं। इस बल को निकालने क ...

                                               

वक्री ग्रह

भारतीय खगोलविद्या के सन्दर्भ में, वक्री ग्रह, सूर्य और चन्द्रमा के अलावा उन सौर मण्डल के ग्रहों को कहते हैं जो पीछे की ओर गति करते हुए दिखते हैं। यह आभासी गति पृथ्वी के घूर्णक की कक्षा के कारण होती है।

                                               

विंशोत्तरी दशा

ज्योतिषशास्त्र में परिणाम की प्राप्ति होने का समय जानने के लिए जिन विधियों का प्रयोग किया जाता है उनमें से एक विधि है विंशोत्तरी दशा. विंशोत्तरी दशा का जनक महर्षि पाराशर को माना जाता है। पराशर मुनि द्वारा बनाई गयी विंशोत्तरी विधि चन्द्र नक्षत्पर ...

                                               

वैदिक ज्योतिष

भारतीय संस्कृति का आधार वेद को माना जाता है। वेद धार्मिक ग्रंथ ही नहीं है बल्कि विज्ञान की पहली पुस्तक है जिसमें चिकित्सा विज्ञान, भौतिक, विज्ञान, रसायन और खगोल विज्ञान का भी विस्तृत वर्णन मिलता है। भारतीय ज्योतिष विद्या का जन्म भी वेद से हुआ है। ...

                                               

मनोवैज्ञानिक ज्योतिष

मनोवैज्ञानिक ज्योतिष या ज्योतिषमनोविज्ञान ज्योतिष और मनोविज्ञान के संयोग से निर्मित नया अध्ययन क्षेत्र है। इसमें जातक के मन का अध्ययन ज्योतिष के अनुसार किया जाता है। इसमें राशिफल निकालने की अनेक पद्धतियाँ हैं। ज्योतिषी तथा मनोचिकित्सक ग्लेन पेरी ...

                                               

अंग (शारीरिकी)

हृदय, फेफडे फुफ्फुस, मस्तिष्क, आँख, आमाशय stomach, प्लीहा spleen, अस्थियाँ bone, अग्न्याश pancreas, वृक्क या गुर्दे kidneys, यकृत liver, आंतें intestines, त्वचा skin त्वचा, मनुष्य का सबसे विशाल अंग है, मूत्राअशय urinary bladder, योनि मादाओं में, ...

                                               

अग्न्याशय

अग्न्याशय कशेरुकी जीवों की पाचन व अंतःस्रावी प्रणाली का एक ग्रंथि अंग है। ये इंसुलिन, ग्लुकागोन, व सोमाटोस्टाटिन जैसे कई ज़रूरी हार्मोन बनाने वाली अंतःस्रावी ग्रंथि है और साथ ही यह अग्न्याशयी रस निकालने वाली एक बहिःस्रावी ग्रंथि भी है, इस रस में ...