ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 483




                                               

फोर्ट विलियम

फोर्ट विलियम कोलकाता में हुगली नदी के पूर्वी किनारे पर बना एक किला है, जिसे ब्रिटिश राज के दौरान बनवाया गया था। इसे इंग्लैंड के राजा विलियम तृतीय के नाम पर बनवाया गया था। इसके सामने ही मैदान है, जो कि किले का ही भाग है और कलकत्ता का सबसे बड़ा शहर ...

                                               

चेन्नई का इतिहास

चेन्नई एवं आस-पास का क्षेत्र पहली सदी से ही महत्त्वपूर्ण प्रशासनिक, सैनिक, एवं आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र रहा है। यह दक्षिण भारत के बहुत से महत्त्वपूर्ण राजवंशों यथा, पल्लव, चोल, पांड्य, एवं विजयनगर इत्यादि का केन्द्र बिन्दु रहा है। मयला ...

                                               

भगवानदास

राजा भगवान दास आमेर के कछवाहा शासक थे। जयसिंह द्वितीय उनके ही वंशज थे जिन्होने जयपुर की स्थापना की। भगवानदास ने भारमल केे बाद आमेर का सिंहासन संभाला। अकबर के दरबार की शान बढ़ाने वाला राजा मानसिंह भगवानदास का ही पुत्र था। मुगल दरबार में भगवानदास क ...

                                               

भानुमंत

भानुमंत प्राचीन दक्षिण कोशल का शासक था। इतिहास प्रसिद्ध राजा राम की माता कौशल्या कोसल के राजा भानुमंत की पुत्री थीं। भानुमंत का कोई पुत्र नहीं होने के कारण राजा दशरथ को कोशल का भी राज्य मिला।

                                               

हेलिओडोरस

हेलिओडोरस प्राचीन भारत का यूनानी राजनयिक था। वह पाँचवें शुंग राजा काशीपुत भागभद्र के राज्य काल के चौदहवें वर्ष में तक्षशिला के यवन राजा एण्टिआल्कीडस का दूत बनकर विदिशा आया था। हेलिओडोरस दिया का पुत्और तक्षशिला का निवासी था। वह पाँचवें शुंग राजा क ...

                                               

एकादशरथ

पुराण के अनुसार यदुकुल के राजा। एकादशरथ यदुकुल के प्रमुख राजा था। वह यदुकुल के इतिहास में सबसे प्रभावशाली राजाओं में से एक था। उसके राज की अवधि यादवों के लिए सबसे उल्लेखनीय अवधि में से एक था। महाभारत के पन्नों में उसके राजनीती प्रसिद्ध है। वह याद ...

                                               

यदु

महराजा यदु एक राजा थे। वे यदुकुल के प्रथम सदस्य माने जाते है। उनके वंशज जो कि यादव या अहीर के नाम से जाने जाते हैं, भारत एवं निकटवर्ती देशो मे काफ़ी संख्या मे पाये जाते हैं। उनके वंशजो मे सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं.महराज यदु यायाती के पुत्र थे। अत्रि ...

                                               

वृष्णि

वृष्णि चंद्रवंशी क्षत्रिय के महान राजा थे। राजा वृष्णी यदुकुल श्रेष्ठ यदु के बेटे थे। उन्हीं से यादवो की शाखा या {कृष्णोत} के नाम से जाना जाता है। भगवान श्री कृष्ण का जन्म भी इसी वृष्णी वंश में हुआ था। जिसके पश्चात इस पवित्र वृष्णि वंशी यादव को क ...

                                               

शाहनामा

शाहनामा या शाहनामे फ़ारसी भाषा का एक महाग्रंथ है जिसके रचायिता फ़िरदोसी हैं। इसमें ईरान पर अरबी फ़तह के पूर्व के शासकों का चरित लिखा गया है। ख़ोरासान के महमूद ग़ज़नी के दरबार में प्रस्तुत इस किताब को फ़िरदौसी ने 30 साल की मेहनत के बाद सन् 1010 मे ...

                                               

टाइटैनोसॉरस

टाइटैनोसॉरस भारत में उत्तर चाकमय युग में पाया जाने वाला एक डायनोसोर था। यह पहला डायनोसोर था जिसके जीवाश्म भारत में मिले। इसकी रीढ़ की एक हड्डी सन् 1828 में पागई थी। यह सभी डयनोसोर जातियों में सबसे भीमकाय में से एक माना जाता है। इसके बावजूद इसका अ ...

                                               

राजा हृदय शाह

हृदय शाह, प्राचीन भारत के वर्तमान मध्य प्रदेश राज्य स्थित पन्ना ज़िला रियासत के प्रथम राजा थे। इन्होंने १७३१ से १७३९ तक शासन किया। ये महाराजा छत्रसाल लोधी के ज्येष्ठ पुत्र थे। इन्हें पन्ना रियासत अपने पिता से सन १७३१ ई. में वार्षिक ३९ लाख रुपये क ...

                                               

भोजशाला

भोजशाला, राजा भोज द्वारा निर्मित संस्कृत अध्ययन का केन्द्र तथा सरस्वती का मन्दिर था। बीसवीं शदी के आरम्भिक दिनो से मध्य प्रदेश के धार में स्थित वर्तमान भोजशाला को विवादित कामिल मौला मसजिद माना जाने लगा है। सरस्वती का यह भव्य मंदिर पूर्व कि ओर मुख ...

                                               

फ़ैज़ी

शेख अबु अल-फ़ैज़, प्रचलित नाम: फ़ैज़ी मध्यकालीन भारत का फारसी कवि था। १५८८ में वह अकबर का मलिक-उश-शु‘आरा बन गया था। फ़ैज़ी अबुल फजल का बड़ा भाई था। सम्राट अकबर ने उसे अपने बेटे के गणित शिक्षक के पद पर नियुक्त किया था। बाद में अकबर ने उसे अपने नवर ...

                                               

अकबर शाह द्वितीय

अकबर द्वितीय को भी अकबर शाह द्वितीय के रूप में जाना जाता है, भारत के अंतिम द्वितीय मुगल सम्राट थे। उन्होंने 1806-1837 तक शासन किया। वह शाह आलम द्वितीय के दूसरे पुत्और बहादुर शाह ज़फ़र के पिता थे। अकबर द्वितीय को ही अकबर शाह द्वितीय के नाम से जाना ...

                                               

राजस्थान के दुर्गों की सूची

राजस्थान एक प्राचीन धरोहर है यहाँ अनेक राजाओं ने लंबे समय तक शासन किया। इस दौरान अपने शासन काल में उन्होंने अपनी तथा अपनी प्रजा की सुरक्षा हेतु दुर्गों अर्थात् किलों का निर्माण करवाया।

                                               

अचलगढ़

अचलगढ़ एक गिरि दुर्ग है जो सिरोही मे स्थित है। ९०० ई के लग्भग परमार शासको ने इसका निमार्ण करवाया। आगे चलकर १४५२ई॰ मे महाराना कुम्भा ने इसे नया रूप दिया। अचलेशवर महादेव परमार शासको के देव थे और उनके नाम पर ही इस दुर्ग का नाम "अचलगढ़" पड़ा।

                                               

कंकवाड़ी

कंकवाड़ी एक गांव तथा दुर्ग है जो भारतीय राज्य राजस्थान के अलवर ज़िले में स्थित है। इस दुर्ग की स्थापना सवाई राजा जय सिंह प्रथम ने की थी। राज्य में अकाल पड़ने पर जय सिंह जी ने इस किले का निर्माण कार्य शुरु करवाया, जिससे इलाके के लोगों को काम तथा म ...

                                               

कुचामन का किला

कुचामन का किला, राजस्थान के नागौर में स्थित है। यह दुर्ग राजस्थान के सबसे पुराने दुर्गों में से है। यह किला पर्वत के सबसे ऊपरी हिस्से पर स्थित है जैसे कि एक चील का घोंसला होता है । इसका निर्माण क्षत्रिय प्रतिहार वंश के महान प्रतिहार सम्राट नागभट् ...

                                               

खिमसर का किला

गहलोत की बाहरवीं पीढ़ी में चित्तौड़गढ़ में महान प्राक्रमी रावल खुम्माण द्वितीय पुत्र महायक व मंगल हुए महायक ने चित्तौड़गढ़ पर राज कायम किया मंगल ने लोद्रावे पर राज कायम किया था।जो चितोड से लगभग ९५०इंः के आस पास मारवाड़ रावल मदन मारवाड़ में रावल म ...

                                               

चौथ बरवाड़ा का किला

चौथ का बरवाड़ा में स्थित यह किला चौथ माता सरोवर के पास पड़ता है। चौथ का बरवाड़ा शहर सवाई माधोपुर जिले में चौथ माता मंदिर के लिए राजस्थान में प्रसिद्ध है।

                                               

जानागढ़

हर हिन्दू को गौ और हर मुसलमान को सूअर की सौगंध!” प्रतापगढ़ के घने जंगल और सुहागपुरा के पहाड़ की चोटी पर स्थित है जनागढ़ का दुर्ग .२०-२५ वर्ष पहले तक यहाँ पीपल खूंट का जंगल इतना घना था कि सूरज की रोशनी जमीन तक नहीं पंहुचती थी। रामपुरिया-रतनपुरिया ...

                                               

जालौर दुर्ग

जालौर दुर्ग पर विभिन्न कालों में प्रतिहार, परमार, चालुक्य, चौहान, राठौर, इत्यादि राजपुत राजवंशों ने शासन किया।किले पर परमार कालीन कीर्ती स्तम्भ कला का उत्कृष्ट नमूना है, दुर्ग का निर्माण परमार राजाओं ने १०वीं शताब्दी में करवाया था। कान्हड़देव चौह ...

                                               

भानगढ़ दुर्ग

भानगढ़ दुर्ग भारत के राजस्थान में स्थित १७वीं शताब्दी में निर्मित एक दुर्ग है। इसे मान सिंह प्रथम ने अपने छोटे भाई माधो सिंह प्रथम के लिए बनवाया था। इस दुर्ग का नाम भान सिंह के नाम पर है जो माधो सिंह के पितामह थे। इस दुर्ग की सीमा के बाहर एक नया ...

                                               

रूपनगढ़ दुर्ग

रूपनगढ़ दुर्ग एक पूर्व का दुर्ग था जो वर्तमान में एक होटल है। यह भारतीय राज्य राजस्थान के रूपनगढ़ में स्थित है इसका निर्माण महाराज रूप सिंह ने करवाया था।

                                               

लक्ष्मणगढ़ दुर्ग

लक्ष्मणगढ़ दुर्ग बहुत पुराना पहाड़ी दुर्ग है यह राजस्थान के सीकर ज़िले के लक्ष्मणगढ़ गाँव में स्थित है। लक्ष्मणगढ़ दुर्ग सीकर से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसका निर्माण लक्ष्मणसिंह तथा सीकर के राव राजा ने 1805 में करवाया था इसके अलावा 1805 ...

                                               

लोहागढ़ दुर्ग

लोहागढ़ दुर्ग एक दुर्ग अथवा एक किला है जो भारतीय राज्य राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित है। दुर्ग का निर्माण भरतपुर के जाट वंश के तब कुंवर महाराजा सूरजमल ने 19 फरवरी 1733 ई. में करवाया था। यह भारत का एकमात्र अजेय दुर्ग हैं। अतः इसको अजय गढ़ का द ...

                                               

मदन कामदेव

मदन कामदेव भारत के असम राज्य के कामरूप ज़िले में स्थित एक पुरातत्व स्थल है। इसका निर्माण 9वीं और 10वीं शताब्दी ईसवी में कामरूप के पाल राजवंश द्वारा करा गया था।

                                               

नवाब अब्दुल वहाब ख़ान

नवाब अब्दुल वहाब खान: नवाब अब्दुल वहाब खाउन लोगों में से एक हैं जिन्होंने 17 वीं शताब्दी में कुरनूल पर शासन किया था। वह सोलह साल के नवाब के रूप में करनूल पर शासन किया था। १६१९ -२० में बीजापुर सल्तनत के गवर्नर अब्दुल वहाब खान, विजयनगर साम्राज्य के ...

                                               

अम्बा विलास महल

महाराजा पैलेस, राजमहल मैसूर के कृष्णराजा वाडियार चतुर्थ का है। यह पैलेस बाद में बनवाया गया। इससे पहले का राजमहल चन्दन की लकड़ियों से बना था। एक दुर्घटना में इस राजमहल की बहुत क्षति हुई जिसके बाद यह दूसरा महल बनवाया गया। पुराने महल को बाद में ठीक ...

                                               

टीपू का बाघ

टीपू सुल्तान का बाघ एक १८वी शताब्दी का मशीनी कला का नमूना है, जो की मैसूर राज्य के पूर्व शासक टीपू सुल्तान की सम्पत्ती है। यह एक बाघ को बर्बरतापूर्ण तरीके से एक यूरोपीय सैनिक का वध करते हुए दर्शाता है – विशिष्ट रूप से एक ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्प ...

                                               

हरिहर राय प्रथम

हरिहर प्रथम, जिन्हें हक्क ಹಕ್ಕ और वीर हरिहर प्रथम भी कहा जाता है, विजयनगर साम्राज्य के संस्थापक थे। ये भवन संगम के ज्येष्ठ पुत्र थे, यादव जाति के थे और संगम राजवंश के संस्थापक थे, जो कि विजयनगर पर राज्य करने वाले चार राजवंशों में से प्रथम हैं। सत ...

                                               

वेंकट द्वितीय

वेंकटपति द्वितीय श्रीरंग देव राय के अनुजभ्राता, तिरुमल देव राय के कनिष्ठ पुत्र थें एवं विजयनगर साम्राज्य के सम्राट जिन्होंने पेनुकोंडा, चंद्रगिरि एवं वेल्लोर से शासन किया। उनके शासन काल में विजयनगर साम्राज्य की सैन्य शक्ति और समृद्धि में पुनरुत्थ ...

                                               

आलिया राम राय

आलिया राम राय एक विजयनगर साम्राज्य के अराविदु राजवंश के प्रशिद्ध शासक थे, ये आलिया के नाम से काफी प्रसिद्ध है,यह राजवंश विजयनगर साम्राज्य का अंतिम राजवंश था।

                                               

तथाचार्य

तथाचार्य या लक्ष्मी कुमारा थथाचार्यर विजयनगर साम्राज्य के राजा कृष्णदेवराय का राजपुरोहित था। उसकी पत्नी का नाम वरुणमाला और बेटा व्यासाचार्य था। तथाचार्य के दो शिष्य धनीचार्य और मनीचार्य थे। वह तेनाली रामा से शत्रुता रखते थे। तथाचार्य जितना ज्ञानी ...

                                               

तिम्मारसु

तिम्मारसु विजयनगर के राजा कृष्णदेवराय का महा-मंत्री था। वह तेनाली रामा का हमेशा साथ देता था। पूरे दरबार में तिम्मारसु व तेनाली रामा ही राजपुरोहित तथाचार्य का पाखंड जानते थे। तिम्मारसु ने विवाह नहीं किया था। तिम्मारसु का पूरा नाम सालुवा तिम्मारसु था।

                                               

विजयनगर का वास्तुशिल्प

विजयनगर वास्तुशिल्प का विकास विजयनगर साम्राज्य के समय में 1336–1565 ई के मध्य हुआ। दक्षिण भारत के इस साम्राज्य की राजधानी विजयनगर थी।

                                               

वीरनृसिंह राय

विजयनगर साम्राज्य का राजा। वीर नरसिंह राय, ने तनुला नारसा नायक की मृत्यु के बाद विजयनगर साम्राज्य का राजा बना। कृष्णा देवराय राव उनके छोटे भाई थे। अपने सक्षम पिता तुलुवा नारसा नायक की मौत के कारण हर जगह विद्रोह में बढ़ती झगड़े हुए। अपने लेखन में, ...

                                               

शाल्व नृसिंह देव राय

शाल्व नृसिऺह देव राय विजयनगर राज्य के सम्राट थे। वे विजयनगर के सलुवा वंश से थे। माधवा संत श्रीपादाराय के संरक्षक, उन्होंने संस्कृत के काम रामगुरुओं को लिखा। उन्होंने कन्नड़ कवि लिंग का भी संरक्षण किया। १४५२ मेऺ उन्हें मल्लिकार्जुन राय के शासनकाल ...

                                               

श्रीरंग प्रथम

विजयनगर साम्राज्य का राजा। श्रीरंग देवराय राय तिरुमला देव राय के ज्येष्ठ पुत्और पेनुकोंडा स्थित विजयनगर साम्राज्य के एक राजा थे। उन्होंने विजयनगर साम्राज्य की पुनर्स्थापना की, लेकिन उनके शासनकाल में उनके मुस्लिम पड़ोसियों के बार-बार आक्रमण और प्र ...

                                               

2002 की गुजरात हिंसा

2002 के गुजरात दंगे, जिसे 2002 गुजरात पोग्रोम के रूप में भी जाना जाता है, पश्चिमी भारतीय राज्य गुजरात में तीन दिनों की अंतर-सांप्रदायिक हिंसा थी। प्रारंभिक घटना के बाद, अहमदाबाद में तीन महीने तक हिंसा का प्रकोप रहा; राज्यव्यापी, अगले वर्ष के लिए ...

                                               

गोधरा काण्ड

27 फ़रवरी 2002 को गुजरात में स्थित गोधरा शहर में एक कारसेवको से भरी रेलगाड़ी में मुस्लिम समुदाय द्वारा आग लगाने से 90 यात्री मारे गए जिनमें सभी लोग हिन्दू बिरादरी से थे। इस घटना का इलज़ाम मुख्य रूप से मुस्लमानों पर लगाया गया जिसके नतीजा में गुजरा ...

                                               

नवानगर रियासत

नवानगर, सौराष्ट्र के ऐतिहासिक हालार क्षेत्र में अवस्थित एक देसी राज्य था। यह कच्छ की खाड़ी के दक्षिणी तट पर स्थित था जिसके केन्द्र में वर्त्तमान जामनगर था। इसकी स्थापना सन १५४० ईस्वी में हुई थी, और यह राज्य भारत के स्वतन्त्र होने तक विद्यमान था। ...

                                               

नवानगर के जाम साहब

नवानगर के महाराज जाम साहब, काठियावाड़, वर्त्तमान गुजरात राज्य में स्थित नवानगर रियासत के एकराटिय शाशक का पद था, जिन्हें जाम साहब के नाम से संबोधित किया जाता था।

                                               

भूचर मोरी की लड़ाई

भूचर मोरी की लड़ाई, जिसे ध्रोल युद्ध भी कहा जाता है, जुलाई १५९१ में, मुगल साम्राज्य की सेना, और नवानगर रियासत के नेतृत्व में, काठियावाड़ी राज्यों की संयुक्त सेना के बीच लगा गया एक युद्ध था। यह लड़ाई ध्रोल राज्य में भूचर मोरी नामक स्थान पर लड़ी गई ...

                                               

मुहम्मद शाह, सैयद

मुहम्मद शाह, सय्यद सय्यद वंश का तीसरा शासक था। जिनका शासन १४३४-४४ तक रहा। इनका शासन काल इसलिए भी जाना जाता है कि उस दौरान सरहिंद के अफगान सूबेदार बहलोल लोधी ने पंजाब के बाहर अपने प्रभाव को बढ़ा लिया था। वह लगभग स्वतंत्र हो गया था। इसी दौरान मुहम् ...

                                               

सुनहरी मस्जिद

सुनहरी मस्जिद पुरानी दिल्ली में स्थित एक मस्जिद है। यह लाल किले के दिल्ली दरवाजे के दक्षिण-पश्चिमी किनारे में, नेताजी सुभाष बाग के सामने स्थित है। इसके चारों ओर तीन गुंबद बने हुए हैं, जिसमें तांबे के साथ सोने का पानी चढ़ाया गया था। इसी से इसका ना ...

                                               

सैयद वंश

सैयद वंश अथवा सय्यद वंश दिल्ली सल्तनत का चतुर्थ वंश था जिसका कार्यकाल १४१४ से १४५१ तक रहा। उन्होंने तुग़लक़ वंश के बाद राज्य की स्थापना. यह परिवार सैयद अथवा मुहम्मद के वंशज माने जाता है। तैमूर के लगातार आक्रमणों के कारण दिल्ली सल्तनत का कन्द्रीय ...

                                               

ग्वालियर लाइट रेलवे

ग्वालियर लाइट रेलवे या महाराजा रेलवे एक 2 फीट नैरो-गेज रेलवे है जो ग्वालियर में चलती है। यह ब्रिटिश काल में ग्वालियर राज्य के लिए स्थापित की गई थी।

                                               

सिद्धांचल गुफाएँ

सिद्धांचल गुफाएँ जैन गुफा स्मारक और मूर्तियाँ हैं, उत्तरी मध्य प्रदेश में ग्वालियर किले की उरवई घाटी के अंदर चट्टान की ओर बनी हुई हैं। ग्वालियर किले की पहाड़ी के पत्थर पर 5 जगह नक्काशी की गई है, जिनमें से सिद्धांचल सबसे अधिक लोकप्रिय है। इनका निर ...

                                               

ओरछा किला

यह मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में स्थित है। यह बेतवा नदी और जामनी नदी के संगम से एक छोटा सा द्वीप बना है। इसके पूर्वी भाग में बाजार से शहर में आने के लिए ग्रेनाइट पत्थर से पुल बनाया गया है। निवाड़ी नगर से लगभग 27 किलोमीटर दूर ओरछा नगर स्थित है। ...