ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 62




                                               

‍कारख़ाना अधिनियम १९४८

फैक्‍टरी अधिनियम, 1948 मुख्‍य विधान है जिसका अधिनियम फैक्‍टरियों में कार्य परिस्थितियों को विनियमित करने के लिए किया गया है। अधिनियम के अनुसार फैक्‍टरी का अर्थ है कोई भी परिसर उसका अहाता सहित:- i जहां दस या अधिक कामगार कार्य कर रहे हैं या पहले बा ...

                                               

उत्तरी कोरिया के साथ शांति समझौता

उत्तरी कोरिया के साथ शांति समझौता उत्तर कोरिया के साथ शांति समझौता है, जो कि कोरियाई प्रायद्वीप पर औपचारिक रूप से युद्ध को समाप्त करने के लिए एक समझौता होगा, 1 9 53 के युद्धविधि समझौते के लिए अनुवर्ती कार्रवाई के रूप में, जिसे कोरियाई युद्ध के बा ...

                                               

उत्तर अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौता

उत्तर अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौता मेक्सिको, कनाडा और अमेरिका के बीच हुआ एक व्यापार समझौता है। यह १ जनवरी, १९९४ से प्रभाव में आया। इस समझौते के कारण इन तीनों देशों के बीच माल की ढुलाई पर लगने वाले कर को समाप्त कर दिया गया। इसके अन्तर्गत मुद्राधिक ...

                                               

बुखारेस्ट की संधि

बुखारेस्ट की संधि १० अगस्त १९१३ को बुल्गारिया, रोमानिया, सर्बिया, मान्टिनिग्रो, और ग्रीस के प्रतिनिधियों के बीच हुई थी। यह संधि द्वितीय बाल्कन युद्ध के बाद हुई थी तथा इसके द्वारा प्रथम बाल्कन युद्ध के बाद हुई लन्दन की संधि को संशोधित किया गया।

                                               

अपराध जांच विभाग (भारत)

अपराध जांच विभाग एक भारतीय पुलिस की जांच और खुफिया शाखा है। इस संस्था की स्थापना ब्रिटिश सरकार ने सन १९०२ में की थी।

                                               

पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो

पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो की स्थापना पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के बारे में भारत सरकार के उद्देश्य को पूरा करने के लिए २८ अगस्त, १९७० को की गई थी। अब यह बहुआयामी एवं परामर्शदाता संगठन है और इसके चार प्रभाग हैं। मूल रूप से संस्थान में दो प्रभा ...

                                               

ज़िला न्यायालय (भारत)

भारत में जिला स्तर पर न्याय देने के लिए निर्मित न्यायालय जिला न्यायालय कहलाते हैं। ये न्यायालय एक जिला या कई जिलों के लोगों के लिए होते हैं जो जनसंख्या तथा मुकद्दमों की संख्या को देखते हुए तय की जाती है। ये न्यायालय उस प्रदेश के high court के प्र ...

                                               

दिल्ली जिला न्यायालय

भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल द्वारा दिनांक १७ सितंबर १९१२ को जारी की गई प्रोकलेमेशन संख्या ९११ के अन्तर्गत दिल्ली को विशेष वैधानिक क्षेत्र के रूप में मान्यता दी गई। इस नोटिफिकेशन के द्वारा दिल्ली पर भारत के गवर्नर जनरल का प्रत्यक्ष प्रभुत्व स्थाप ...

                                               

भारत की संघीय अदालत

भारत में पहली बार संघीय न्यायालय की स्थापना भारत शासन अधिनियम 1935 के दिल्ली में की गई। अब सभी न्यायालय इसके अधीन होंगे, जहाँ 28 जनवरी 1950 को भारतीय उच्चतम न्यायालय विस्थापित किया गया इसके अधिकार 1) प्रारंभिक 2)अपीलीय 3)परामर्श दात्री. Ek. एक अध ...

                                               

भारतीय संविधान सभा

भारत की संविधान सभा का चुनाव भारतीय संविधान की रचना के लिए किया गया था। ब्रिटेन से स्वतंत्र होने के बाद संविधान सभा के सदस्य ही प्रथम संसद के सदस्य बने।

                                               

अनुच्छेद ३७०

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370 एक ऐसा अनुच्छेद था जो जम्मू और कश्मीर को स्वायत्तता प्रदान करता था। संविधान के २१वें भाग में अनुच्छेद के बारे में परिचयात्मक बात कही गयी थी- अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष प्रावधान । जम्मू और कश्मीर की संविधान सभा क ...

                                               

एक सौ प्रथम संशोधन (भारत का संविधान)

भारत में वस्तु एवं सेवा कर विधेयक एक बहुचर्चित विधेयक है जिसमें 1 जुलाई 2017 से पूरे देश में एकसमान मूल्य वर्धित कर लगाने का प्रस्ताव है। इस कर को वस्तु एवं सेवा कर कहा गया है। यह एक अप्रत्यक्ष कर होगा जो पूरे देश में निर्मित उत्पादों और सेवाओं क ...

                                               

गौ हत्या

मवेशी वध, विशेष रूप से गाय वध, भारत में एक विवादास्पद विषय है क्योंकि इस्लाम में कई लोगों द्वारा मांस के स्वीकार्य स्रोत के रूप में माना जाने वाला मवेशियों के विपरीत हिंदू धर्म, सिख धर्म, जैन धर्म में कई लोगों के लिए एक सम्मानित और सम्मानित जीवन ...

                                               

भारत का प्रधानमन्त्री

भारत गणराज्य के प्रधानमन्त्री का पद भारतीय संघ के शासन प्रमुख का पद है। भारतीय संविधान के अनुसार, प्रधानमन्त्री केंद्र सरकार के मंत्रिपरिषद् का प्रमुख और राष्ट्रपति का मुख्य सलाहकार होता है। वह भारत सरकार के कार्यपालिका का प्रमुख होता है और सरकार ...

                                               

भारत का संविधान-भाग अठारह

भाग XVIII - इसमें आपातकाल के प्रावधानों से संबंधित अनुच्छेद शामिल हैं: अनुच्छेद 360 - आर्थिक आपातकाल के प्रावधानों से संबंधित अनुच्छेद 359A - निरस्त - संविधान के ६३ वें संशोधन के द्वारा निरस्त अनुच्छेद 352 - 359 आपातकाल के प्रावधान से संबंधित

                                               

भारत में बाल विवाह

बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 भारत का एक अधिनियम है जो ०१ नवम्बर २००७ से लागू हुआ। इस अधिनियम के अनुसार, बाल विवावह है जिसमें लड़के की उम्र २१ वर्ष से कम या लड़की की उम्र १८ वर्ष से कम हो। ऐसे विवाह को बाल विवाह निषेध अधियिम 2006 द्वारा प्रतिबंधित ...

                                               

भारत में संघवाद

भारत, क्षेत्और जनसंख्या की दृष्टि से अत्यधिक विशाल और बहुत अधिक विविधताओं से परिपूर्ण है, ऐसी स्थिति में भारत के लिए संघात्मक शासन व्यवस्था को ही अपनाना स्वाभाविक था और भारतीय संविधान के द्वारा ऐसा ही किया गया है। संविधान के प्रथम अनुच्छेद में कह ...

                                               

भारत सरकार अधिनियम, १९१९

भारत सरकार अधिनियम, १९१९ युनाइटेड किंगडम के संसद द्वारा पारित एक विधान था जिसे मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इस अधिनियम के पारित होने के समय मांटेग्यू भारत सचिव तथा चेम्सफोर्ड वायसराय थे। सरकार का दावा था कि उस अधिन ...

                                               

भारतीय संविधान का 35अ अनुच्छेद

भारतीय संविधान का 35अ अनुच्छेद एक अनुच्छेद था जो जम्मू और कश्मीर राज्य विधानमण्डल को "स्थायी निवासी" परिभाषित करने तथा उन नागरिकों को विशेषाधिकार प्रदान करने का अधिकार देता था। जिसे दिनांक 5 अगस्त 2019 को निरस्त कर दिया गया है । यह भारतीय संविधान ...

                                               

भारतीय संविधान की उद्देशिका

संविधान के उद्देश्यों को प्रकट करने हेतु प्राय: उनसे पहले एक उद्देशिका प्रस्तुत की जाती है। भारतीय संविधान की उद्देशिका आस्ट्रेलियाई संविधान से प्रभावित तथा विश्व में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। उद्देशिका संविधान का सार मानी जाती है उसके लक्ष्य प्र ...

                                               

भारतीय संविधान के तीन भाग

संविधान के तीन. प्रमुख भाग हैं। भाग एक में संघ तथा उसका राज्यक्षेत्रों के विषय में टिप्पणीं की गई है तथा यह बताया गया है कि राज्य क्या हैं और उनके अधिकार क्या हैं। दूसरे भाग में नागरिकता के विषय में बताया गया है कि भारतीय नागरिक कहलाने का अधिकार ...

                                               

राज्यपाल (भारत)

{{स्रोतहीन|date=फरवरी 2020}{Nishant jain} भारत का संविधान संघात्मक है। इसमें संघ तथा राज्यों के शासन के सम्बन्ध में प्रावधान किया गया है। संविधान के भाग 6 में राज्य शासन के लिए प्रावधान है। राज्य की भी शासन पद्धति संसदीय है। राज्यपाल की नियुक्ति ...

                                               

केन्द्र-राज्य संबंध

केंद्र-राज्य संबंध से अभिप्राय किसी लोकतांत्रिक राष्ट्रीय-राज्य में संघवादी केंद्और उसकी इकाइयों के बीच के आपसी संबंध से होता है। विश्व भर में लोकतंत्र के उदय के साथ राजनीति में केंद्र-राज्य संबंधों को एक नई परिभाषा मिली है।

                                               

समवर्ती सूची

समवर्ती सूची अथवा तीसरी-सूची भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची में दिये गये 52 विषय की सूची है। इसमें राज्य सरकाऔर केन्द्र सरकार दोनों के साझा अधिकारों को वर्णित किया गया है। विधायी खंड को तीन भागों में बांटा गया है: संघ सूची, राज्य सूची और समवर् ...

                                               

सातवीं अनुसूची

भारत के संविधान में राज्य सरकारों और केन्द्र सरकार के मध्य मुद्दों अथवा अधिकारों के बंटवारे के लिए विभिन्न अनुसूचियाँ परिभाषित की गयी हैं। इनमें से महत्त्वपूर्ण अनुच्छेद २४५ और २४६ के अन्तर्गत आते हैं। भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची राज्यों और ...

                                               

जेसिका लाल

जेसिका लाल नई दिल्ली में एक मॉडल थी, 29 अप्रैल 1999 को, उसकी तब गोली माकर ह्त्या कर दी गयी जब वो एक भीड़ भरी उच्चवर्गीय पार्टी में एक प्रतिष्ठित बारमेड की तरह काम कर रही थी. दर्जनों गवाहों ने कातिल के रूप में हरियाणा में एक धनी कांग्रेस नेता विनो ...

                                               

भारतीय दण्ड संहिता

भारतीय दण्ड संहिता भारत के अन्दर भारत के किसी भी नागरिक द्वारा किये गये कुछ अपराधों की परिभाषा व दण्ड का प्रावधान करती है। किन्तु यह संहिता भारत की सेना पर लागू नहीं होती। अनुच्छेद ३७० हटने के बाद जम्मू एवं कश्मीर में भी अब भारतीय दण्ड संहिता लाग ...

                                               

भारतीय दण्ड संहिता धारा १

भारतीय दण्ड संहिता की धारा १ इस धारा के बारे में और यह कहा कहा लागू होगी इस बारे में है। इसके तहत, इस संहिता को भारतीय दण्ड संहिता कहा जाएगा. यह संहिता जम्मू और कश्मीर राज्य को छोड़कर पूरे भारत देश में लागू होगी.

                                               

भारतीय दण्ड संहिता धारा १०

भारतीय दण्ड संहिता की धारा १० आदमी और औरतो के बारे में है। इसके तहत आदमी शब्द से मतलब किसी भी नर लिंग के मानव से है व औरत शब्द का मतलब किसी भी मादा लिंग के मानव से है चाहे उसकी उम्र कुछ भी हो.

                                               

भारतीय दण्ड संहिता धारा ११

भारतीय दण्ड संहिता की धारा ११ व्यक्ति के बारे में. इसके तहत व्यक्ति शब्द से मतलब किसी व्यक्ति के आलावा किस भी संसथान, कम्पनी, आदि से भी हो सकता है चाहे वोह पंजीकृत हो या न हो.

                                               

भारतीय दण्ड संहिता धारा १४

भारतीय दण्ड संहिता की धारा १४ सरकारी नौकर के बारे में है। इसके तहत शब्द सरकारी नौकर से मतलब ऐसे किसी भी अधिकारी या नौकर से है जिसे की भारत में सरकार के द्वारा या के अधीन नौकरी पर रखा गया।

                                               

भारतीय दण्ड संहिता धारा २

भारतीय दण्ड संहिता की धारा २ इस बारे में है कि ऐसा कोई भी व्यक्ति जिंसने की कोई भी अपराध किया है व भारत में इसके लिए दोषी पाया जाता है उसे इस संहिता व इसकी धाराओं के अनुसार सजा दी जा सकेगी.

                                               

भारतीय दण्ड संहिता धारा ३

भारतीय दण्ड संहिता की धारा ३ ऐसे अपराधो की सजा के बारे में है जो की भारत से बहार किये गए है पर कानून के अनुसार उन्हें भारत में ही पेश किया जायेगा व यही उनकी सुनवाई होगी. इसके तहत कोई भी व्यक्ति जिसपे की यह दंड संहिता लागू होती है के द्वारा किये ग ...

                                               

भारतीय दण्ड संहिता धारा ४

भारतीय दण्ड संहिता की धारा ४ भारत से बहार किये गए अपराधो की धरा के विस्तार के रूप में है। इसके तहत यह इनमे से किसी भी अपराध पे लागू हो सकती है जो की किसी भारतीय द्वारा किया गए हो चाहे वोह जगह भारत में हो या न हो. साथ ही ऐसा कोई भी जाहज या हवाईजाह ...

                                               

भारतीय दण्ड संहिता धारा ५

भारतीय दण्ड संहिता की धारा ५ ऐसे कानूनों के बारे में है जो की इस संहिता से प्रभावित नहीं होंगे। इसके तहत इस संहिता से ऐसा कोई भी कानून प्रभावित नहीं होगा जो की किसी सरकारी कर्मचारी, सनिक, नाविक, एयरमेंन आदि के द्वारा किये गए विद्रोह और परित्याग स ...

                                               

भारतीय दण्ड संहिता धारा ६

भारतीय दण्ड संहिता की धारा ६ संहिता में उन परिभाषाओं के लिए है जिन्हें अपवाद समझाना चाहिए. इसके तहत इस संहिता में हर प्रकार के अपराध, दंड आदि को इस संहिता के सामान्य अपवाद अध्याय के अनुरूप परखना चाहिए.

                                               

भारतीय दण्ड संहिता धारा ७

भारतीय दण्ड संहिता की धारा ७ उन अभिव्यक्तियो के बारे में है जिन्हें एक बार समझाया गया है। इसके तहत हर अभिव्यक्ति, जो इस संहिता के किसी भी भाग में समझायी गयी है विवरण के साथ इस संहिता के अनुरूप हर हिस्से में प्रयोग कि जाती है।

                                               

भारतीय दण्ड संहिता धारा ८

भारतीय दण्ड संहिता की धरा ८ लिंग सम्बन्धी वर्णन के लिए है। इसके तहत पुरुलिंग लिंग सभी व्यक्तियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है चाहे उससे मुतालिक व्यक्ति पुरुष हो या महिला.

                                               

भारतीय दण्ड संहिता धारा ९

भारतीय दण्ड संहिता की धारा ९ अंको के प्रयोग के बारे में है। इसके तहत जहा विशेष रूप से उलेख कर बताया नहीं गया हो वहा बहुवचन अंको में एकवचन और एकवचन में बहुवंचन अंक समिलित होते है।

                                               

अग्रिम जमानत

अग्रिम जमानत न्यायालय का वह निर्देश है जिसमें किसी व्यक्ति को, उसके गिरफ्तार होने के पहले ही, जमानत दे दिया जाता है । भारत के आपराधिक कानून के अन्तर्गत, गैर जमानती अपराध के आरोप में गिरफ्तार होने की आशंका में कोई भी व्यक्ति अग्रिम जमानत का आवेदन ...

                                               

अध्यादेश

अध्यादेश ऐसे कानून हैं, जिन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल की सिफारिश पर भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित किया जाता है, जिसका संसद के अधिनियम के समान प्रभाव होगा । उन्हें केवल तभी जारी किया जा सकता है जब संसद सत्र में नहीं हो। वे भारत सरकार को तत्का ...

                                               

अनुपातहीन सम्पत्ति

जब किसी व्यक्ति की कुल सम्पत्ति इतनी अधिक हो कि उसकी वैध आय से उसका कोई सम्बन्ध ही नहीं बनाया जा सके तो इसे अनुपातहीन सम्पत्ति हैं। किसी लोकसेवक public servant के पास अनुपातहीन सम्पत्ति होने पर उसके भ्रष्टाचारी होने की जाँच आरम्भ करने के लिये प्र ...

                                               

आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2013

आपराधिक कानून अधिनियम, 2013 जिसे निर्भया एक्ट के प्रचलित नाम से भी जाना जाता है, एक भारतीय विधि है जो भारतीय संसद की लोकसभा एवं राज्यसभा द्वारा क्रमशः 19 मार्च 2013 और 21 मार्च 2013 को पास की गयी और इसके द्वारा भारतीय दण्ड संहिता, भारतीय साक्ष्य ...

                                               

कम्पनी अधिनियम २०१३

कम्पनी अधिनियम २०१३ भारतीय संसद द्वारा पारित एक अधिनियम है जो कम्पनियों के निर्माण, उनके उत्तरदायित्व, उनके निदेशक तथा उनकी समाप्ति आदि का नियमन करती है। इस अधिनियम में २९ अध्याय तथा ४७० अनुभाग हैं जबकि १९५६ के अधिनियम में ६५८ अनुभाग थे। इस अधिनि ...

                                               

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, २०१९

नागरिकता अधिनियम, २०१९ Act, 2019) भारत की संसद द्वारा पारित एक अधिनियम है जिसके द्वारा सन 1955 का नागरिकता कानून को संशोधित करके यह व्यवस्था की गयी है कि ३१ दिसम्बर सन २०१४ के पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हिन्दू, बौद्ध, सि ...

                                               

न्याय पंचायत

न्याय पंचायत भारत में ग्राम-स्तर पर विवाद समाधान की एक प्रणाली है। इसका काम प्राकृतिक न्याय के व्यापक सिद्धांत पर आधारित रहते हुए बहुत सरल बनाया जा सकता है। इनको दिवानी के अलावा कुछ छोटे आपराधिक क्षेत्राधिकार भी दिया जा सकता है। लेकिन उनसे कभी सि ...

                                               

भारतीय अपकृत्य विधि

भारतीय अपकृत्य विधि अपेक्षाकृत नयी कॉमन ला है। अपकृत्य का उपयोग कानून में कोई ऐसे कार्य के लिए किया जाता है जिससे कोई क्षति या अपकार हुआ हो। इसकी मुख्य विशेषता यह है कि उसका प्रतिकार क्षतिपूर्ति के द्वारा संभव है है। अपकृत्य, संविध के उल्लंघन से ...

                                               

हिन्दू कोड बिल

हिन्दू कोड बिल भारत में स्वतन्त्रता के पश्चात पारित कई अधिनियमों का समूह है। इसके अन्तर्गत निम्नलिखित अधिनियम आते हैं- हिन्दू विवाह अधिनियम हिन्दू अप्राप्तवयता और संरक्षकता अधिनियम Hindu Minority and Guardianship Act हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम, १ ...

                                               

प्रशासकीय न्याय

प्रशासकीय न्याय की व्याख्या ऐसी व्यवस्था के रूप में की जा सकती है जिसके अंतर्गत प्रशाकीय अधिकारियों को कानून द्वारा इस बात का अधिकार मिलता है कि वे निजी मामलों का अथवा निजी एवं सरकारी अधिकारियों के बीच उठनेवाले मामलों का निपटारा कर सकें। भारत में ...

                                               

उद्योग सहजता सूचकांक

उद्योग सहजता सूचकांक विश्व बैंक समूह के शिमोन ड्जांकौव के बनायी हुई सूचकांक है। प्रोफेसरों ओलिवर हार्ट और आंद्रेई ष्लॆफर के साथ मिल कर इन्होंने इस सूचकांक के लिये शोध की। कोइ देश की उच्च रैंकिंग का मतलब होता है कि उस देश में व्यापार करने वालों के ...