ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 66




                                               

काफ़ी राग

यह राग काफी थाट से निकलता है। इसमें ः?ग" और ः?नी" कोमल वाकी सब शुद्ध स्वर लगते हैं। वादी स्वर ः?प" और सम्वादी ः?स" माना जाता है। इसकी जाति सम्पूर्ण मानी जाती है। इस राग में होली के गीत बहुत गाये जाते हैं। ठुमरी भी गाई जाती है। गाने बजाने का समय र ...

                                               

जयजयवन्ती

जयजयवन्ती, हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत का एक राग है। गुरु ग्रन्थ साहिब के अनुसार यह राग, बिलवाल और सोरठ नामक दो अन्य रागों का मिश्रण है। यह राग, गुरबानी के उत्तरार्ध में आया है। नौवें गुरु तेग बहादुर जी ने जयजयवन्ती में ४ पदों की रचना की है।

                                               

जौनपुरी

जौनपुरी राग को आसावरी ठाट से उपजा हुआ राग माना गया है। इस राग में ग, ध, नी स्वर कोमल लगते हैं । आरोह में ग वर्ज्य है अर्थात गाते बजाते समय आरोह में ग स्वर को छोड़ देते हैं। अवरोह में सातों स्वर प्रयोग किये जाते हैं। अतः इस राग की जाती षाडव-संपूर् ...

                                               

देश राग

यह राग खमाज थाट से निकलता है। इसके आरोह में ः?ग" और ः?ध" नहीं लगाते और अवरोह में सब स्वर लगाये जाते हैं, इस प्रकार इसकी जाति औडव सम्पूर्ण होनी चाहिये पर इसे सम्पूर्ण जाति का राग संगीतज्ञ मानते हैं आरोह में शुद्ध ः?नी अवरोह में कोमल ः?नी" का प्रयो ...

                                               

बिहाग

यह राग बिलावल ठाठ से उतपन्न होता है। इसके आरोह में रे और ध नहीं लगाते और अवरोह में सातों स्वर लगते हैं, इसलिये इसकी जाति औडव-सम्पूर्ण मानी जाती है। इसमें सब स्वर शुद्ध लगते है। कुशल संगीतज्ञ बड़ी कुशलता से इस राग में तीव्र म का भी प्रयोग करते हैं ...

                                               

भीमपलासी

यह राग काफी थाट से निकलता है। आरोह में ः?रे" और ः?ध" नहीं लगता और अवरोह में सब स्वर लगते हैं, इसलिये इस की जाति औडव-सम्पूर्ण मानी जाती है। इसमें ः?ग" और ः?नी" कोमल लगते हैं। वादी स्वर ः?म" और सम्वादी स्वर ः?स" माना जाता है। गाने-बजाने का समय दिन ...

                                               

भैरव राग

भैरव राग राग भैरव थाट का राग है। यह राग भैरव थाट के नाम जैसे होने से इसे भैरव थाट का आश्रय राग कहा जाता है। इस राग में सात स्वर लगते हैं, इसलिये इसकी जाति सम्पूर्ण मानी जाती है। इस राग में रे और ध स्वर कोमल लगते हैं जिसे इस प्रकार दर्शाया जाता है ...

                                               

मल्हार राग

मल्हार राग/ मेघ मल्हार, हिंदुस्तानी व कर्नाटिक संगीत में पाया जाता है। मल्हार का मतलब बारिश या वर्षा है और माना जाता है कि मल्हार राग के गानों को गाने से वर्षा होता है। मल्हार राग को कर्नाटिक शैली में मधायामावती बुलाया जाता है। तानसेन और मीरा मल् ...

                                               

मालकोश

यह राग भैरवी थाट से निकलता है। इसमें ऋषभ और पंचम स्वर नहीं लगते इसलिये इसकी जाति औडव मानी जाती है। इसमें गंधार धैवत और निषाद कोमल लगते है। इसका वादी स्वर मध्यम तथा सम्वादी स्वर षड्ज माना जाता है। गाने का समय रात्रि का तीसरा प्रहर है। आरोह--ड स ज् ...

                                               

रसिकप्रिया (राग)

रसिकप्रिया कर्नाटक संगीत का एक राग है। यह कर्नाटक संगीत का अंतिम मेलापक राग है। मुतुस्वामी दीक्षितार के संगीत घराने में इसे रसमंजरी कहा गया है।

                                               

राग काफ़ी

राग काफ़ी हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का एक महत्वपूर्ण राग है। यह काफ़ी थाट का प्रमुख राग है। इस राग का लोक संगीत से घनिष्ठ संबंध है इस लिए अनेक लोकगीत जैसे होली, टप्पा दादरा कीर्तन और भजन इस राग में गाए जाते हैं। इस राग की जाति संपूर्ण संपूर्ण ह ...

                                               

राग गौड़सारङ्ग

गौड़ सारंग, भारतीय संगीत का एक राग है। इसके गायन का समय दोपहर है। ठाठ - कल्याण मतान्तर में कई लोग इसे विलावल ठाठ से उत्पन्न भी मानते हैं वादी - ग संवादी- ध जाति- सम्पूर्ण *वक्र सम्पूर्ण- अर्थात आरोह व अवरोह में सभी स्वरों का प्रयोग *वक्र होता है ...

                                               

राग दरबारी कान्हड़ा

प्राचीन संगीत ग्रन्थों में राग दरबारी कान्हड़ा के लिये भिन्न नामों का उल्लेख मिलता है। कुछ ग्रन्थों में इसका नाम कणार्ट, कुछ में कणार्टकी तो अन्य ग्रन्थों में कणार्ट गौड़ उपलब्ध है। वस्तुत: कन्हण शब्द कणार्ट शब्द का ही अपभ्रंश रूप है। कान्हड़ा के ...

                                               

राग बहार

राग बहार काफ़ी थाट से उत्पन्न षाड़व षाड़व जाति का राग है। अर्थात इसके आरोह तथा अवरोह से छे छे स्वरों का प्रयोग होता है। इसके गाने का समय रात्रि का दूसरा प्रहर है। गांधाऔर निषाद दोनो स्वर कोमल है लेकिन गायक अक्सर दोनों निषाद लेते हैं, शुद्ध निषाद ...

                                               

राग भूपाली

राग परिचय-- थाट- कल्याण वर्जित स्वर- म, नि जाति- औडव-औडव वादी- ग संवादी-ध गायन समय- रात्रि का प्रथम प्रहर इस राग का चलन मुख्यत: मन्द्और मध्य सप्तक के प्रतह्म हिस्से में होती है पूर्वांग प्रधान राग। इस राग में ठुमरी नहीं गायी जाती मगर, बड़ा खयाल, ...

                                               

राग भैरवी

राग भैरवी के बारे में- रे ग ध नि कोमल राखत, मानत मध्यम वादी। प्रात: समय जाति संपूर्ण, सोहत सा संवादी॥ इस राग की उत्पत्ति ठाठ भैरवी से मानी गई है। इसमें रे, ग, ध और नि, कोमल लगते हैं और म को वादी तथा सा को संवादी स्वर माना गया है। गायन समय प्रात:क ...

                                               

राग मधुवंती

हिन्दुस्तनी राग मधुवंती, थाट: तोडी इस राग में गाकोमल तथा म तीव्र है। चलन मुल्तानी, भीमपलासी की तरह है। जाति: औडब- सम्पूर्ण आरोह: नि सा गा म प नि सां। अवरोह: सा नि धा प म ग रे सा। वादी -संवादी: प -सा गायन समय: दिन का तीसरा प्रहर प्रकृति: कोमल रस: ...

                                               

राग मुल्ताली

नीचे आप जहाँ भी ~ चिन्ह देखें, ये मीड़ दर्शाने के लिये है। और खटका दिखाने के लिये। अर्थात अगर सा दिखाया गया है तो इसे रे सा ऩि सा गाया जायेगा। राग परिचय: थाठ: तोड़ी वादी: प संवादी: सा जाति: औडव-संपूर्ण आरोह में रे और ध वर्जित स्वर हैं गायन समय: द ...

                                               

राग यमन

प्रथम पहर निशि गाइये ग नि को कर संवाद। जाति संपूर्ण तीवर मध्यम यमन आश्रय राग ॥ राग का परिचय - 1) इस राग को राग कल्याण के नाम से भी जाना जाता है। इस राग की उत्पत्ति कल्याण थाट से होती है अत: इसे आश्रय राग भी कहा जाता है जब किसी राग की उत्पत्ति उसी ...

                                               

राग ललित

राग बसंत या राग वसंत शास्त्रीय संगीत की हिंदुस्तानी पद्धति का राग है। राग ललित सन्धिप्रकाश रागो के अन्तर्गत आता है। यह एक गम्भी्र प्रकृति का उत्तरांग प्रधान राग है। इसे गाते व बजाते समय इसका विस्तार मन्द्र व मध्य सप्तकों में अधिक होता है। राग ललि ...

                                               

राग हंसध्वनि

राग हंसध्वनि कनार्टक पद्धति का राग है परन्तु आजकल इसका उत्तर भारत मे भी काफी प्रचार है। इसके थाट के विषय में दो मत हैं कुछ विद्वान इसे बिलावल थाट तो कुछ कल्याण थाट जन्य भी मानते हैं। इस राग में मध्यम तथा धैवत स्वर वर्जित हैं अत: इसकी जाति औडव-औडव ...

                                               

राग हिंडोल

राग हिंडोल या राग हिंदोल का जन्म कल्याण थाट से माना गया है। इसमें मध्यम तीव्र तथा निषाद व गंधार कोमल लगते हैं। ऋषभ तथा पंचम वर्जित है। इसकी जाति ओड़व ओड़व है तथा वादी स्वर धैवत व संवादी स्वर गांधार है। गायन का समय प्रातःकाल है। शुद्ध निषाद, रिषभ ...

                                               

केदार राग

यह राग कल्याण थाट से निकलता है। इसमें शुद्ध व तीव्र दोनों म लगाये जाते है। इसके आरोह में रे और ग को नहीं लगाते और अवरोह में ग नहीं लगाते इसलिये इसकी जाति औडव-षाड़व मानी जाती है। वादी स्वर म और संवादी स्वर सा माना जाता है। गाने बजाने का समय रात का ...

                                               

राग-रागिनी पद्धति

रागों के वर्गीकरण की यह परंपरागत पद्धति है। १९वीं सदी तक रागों का वर्गीकरण इसी पद्धति के अनुसार किया जाता था। हर एक राग का परिवार होता था। सब छः राग ही मानते थे, पर अनेक मतों के अनुसार उनके नामों में अन्तर होता था। इस पद्धति को मानने वालों के चार ...

                                               

रागांग-पद्धति

रागों के वर्गीकरण की इस पद्धति के अनुसार तीस राग माने गये हैं, जिनके नाम इस प्रकार हैं-- 1. कल्याण राग, 2. बिलावल राग, 3. खमाज राग, 4. काफी राग, 5. भैरव राग, 6.भैरवी राग, 7. पूर्वी राग, 8. मारवा राग, 9. तोड़ी राग, 10. सारंग राग, 11. आसावरी राग, 1 ...

                                               

रागों की सूची

करुणामय गोस्वामी के संगीतकोष नामक ग्रन्थ में ३७८ रागों का परिचय मिलता है। यहाँ उसी से एक तालिका दी जा रही है- मार्गहिन्दोल काफि बिहारी रक्तहंस सारं गारा धबलाश्री प्रभात भैरब नन्द धानी गोरख कल्याण हिन्दोली पूरिया मियाँकी सारं साबनी कल्याण सुहा कान ...

                                               

ओड़व ओड़व

"जाति" शब्द राग में प्रयोग किये जाने वाले स्वरों की संख्या का बोध कराती है। रागों में जातियां उनके आरोह तथा अवरोह में प्रयोग होने वाले स्वरों की संख्या पर निर्धारित होती है। जिन रागों के आरोह में पाँच व अवरोह में भी पाँच स्वर प्रयोग होते हैं वे र ...

                                               

भारतीय वाद्य यंत्र

200 ईसा पूर्व से 200 ईसवीं सन् के समय में भरतमुनि द्वारा संकलित नाट्यशास्‍त्र में ध्‍वनि की उत्‍पत्ति के आधापर संगीत वाद्यों को चार मुख्‍य वर्गों में विभाजित किया गया है: 4. घन वाद्य या आघात वाद्य ठोस वाद्य, जिन्‍हें समस्‍वर स्‍तर में करने की आवश ...

                                               

चित्र वीणा

चित्रवीणा, एक भारतीय वाद्ययंत्र है जो कर्नाटक संगीत में उपयोग किया जाता है। इसे हनुमद् वीणा, महानाटक वीणा तथा गोटुवाद्यम भी कहते हैं। इसमें २० या २१ तंतु होते हैं।

                                               

नक्कारा

नक्कारा एक ताल वाद्य यंत्र है। इस लोक वाद्य का उपयोग अनेक लोकनृत्यों में किया जाता है। मसलन उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में अहीरों द्वारा इसका प्रयोग प्रसिद्ध नटवरी नृत्य में किया जाता है।

                                               

सारंगी

सारंगी एक गायकी प्रधान भारतीय शास्त्रीय संगीत का वाद्य यंत्र है। प्राचीन काल में सारंगी घुमक्कड़ जातियों का वाद्य था। इसका प्राचीन नाम सारिंदा था, जो कालांतर में सारंगी हुआ। एक मत यह भी है कि यह नाम हिन्दी के सौ और रंग शब्दों से मिलकर बना है जिसक ...

                                               

गमक

भारतीय शास्त्रीय संगीत के निष्पादन में प्रयुक्त होने वाले भूषणों को गमक या गमकम कहते हैं। सुन्दर ढंग से मुड़ना, वक्र आदि को गमक कहते हैं। संगीत में किसी स्वर को अधिक रंजक तथा श्रुति मधुर बनाने के लिए उसमें उत्पन्न किया जानेवाला एक विशिष्ट प्रकार ...

                                               

ताल

संगीत में समय पर आधारित एक निश्चित ढांचे को ताल कहा जाता है। शास्त्रीय संगीत में ताल का बड़ी अहम भूमिका होती है। संगीत में ताल देने के लिये तबले, मृदंग, ढोल और मँजीरे आदि का व्यवहार किया जाता है। प्राचीन भारतीय संगीत में मृदंग, घटम् इत्यादि का प् ...

                                               

तीन ताल

यह कुल सोलह 16 मात्राओं का ताल हैं जिसमें चार-चार मात्राओं के चार विभाग होते हैं। तीसरे विभाग में ख़ाली होती है जो नवीं मात्रा पर होती है। पहली मात्रा पर सम होता है। इसके मूल बोल निम्नलिखित हैं: धा धिन् धिन् धा। धा धिन् धिन् धा। धा तिन् तिन् ता। ...

                                               

शरण रानी

शरण रानी हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की विद्वान और सुप्रसिद्ध सरोद वादक थीं। गुरु शरन रानी प्रथम महिला थीं जिन्होंने सरोद जैसे मर्दाना साज को संपूर्ण ऊँचाई दी। वे प्रथम महिला थीं जो संगीत को लेकर पूरे भूमंडल में घूमीं, विदेश गईं, जिन्हें सरोद के ...

                                               

टप्पा

टप्पा हिंदुस्तानी संगीत की एक विशिष्ट शैली है। इसमें छोटी लम्बाई के बोल होते हैं और लय अक्सर चंचल होती है। ये गीत बहुधा पंजाबी भाषा में होते हैं। इन्हें मुग़ल काल में दरबारी गायन के रूप में स्थापित करने का श्रेय शौरी मियां को जाता है। ग्वालियर घर ...

                                               

तानसेन संगीत सम्मेलन

तानसेन संगीत सम्मेलन का आयोजन हर वर्ष ग्वालियर में तानसेन की मज़ापर किया जाता है। तानसेन संगीत सम्मेलन विगत चार-पाँच शताब्दियों से यह हिन्दुस्तानी संगीत शैली का मूल स्रोत रहा है। हिन्दुस्तानी संगीत के बड़े आयोजनों में ग्वालियर के ‘तानसेन संगीत सम ...

                                               

श्रुति (संगीत)

shruti hindustani music हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत वह छोटे से छोटा नाद जो कानो को स्पष्ट सुनाई दे, व समझा जा सके, श्रुति कहलाता है। प्राचीन ग्रंथो में श्रुति की परिभाषा श्रूयतेति श्रुति दी गई है । संस्कृत में श्रृ का अर्थ है सुनना। अर्थात जो का ...

                                               

संगीता गौड़

डॉ॰ संगीता गौड़ - संगीतकार, शास्त्रीय संगीत गायिका और नाट्य संगीत निर्देशक हैं। वे मानव संसाधन विकास मंत्रालय से हवेली संगीत में अनुसंधान के लिए फैलोशिप प्राप्त कर चुकी हैं।

                                               

विचित्र वीणा

विचित्र वीणा एक तार से बजने वाला वाद्य है जिसका प्रयोग हिन्दुस्तानी संगीत में किया जाता है। यह कर्नाटक संगीत में प्रयोग होने वाले गोट्टुवाद्यम के समान होता है। इसमें कोई फ़्रेट्स नहीं होते हैं और एक स्लाइड द्वारा बजाया जाता है।

                                               

भारतीय हिप हॉप

भारतीय हिप हॉप भारत में एक संगीत की शैली है जिसमें अमेरिकी हिप हॉप और भारत का संगीत संयुक्त करते हैं। भारतीय हिप हॉप की शुरुआत २० साल पहले हुई मानी जाती है। इसमें बाबा सहगल एवं रैपर अार.डी. प्रचलित है।

                                               

कन्दीसा

कन्दीसा भारतीय रॉक बैंड, इंडियन ओशॅन की तीसरी एल्बम है। सात गीतों वाली यह एल्बम मार्च २००० में रिलीस की गई थी, और इसने इंडियन ओशॅन को भारत के सबसे वास्तविक और रचनात्मक बैंडों में से एक की पहचान दिलाई, और यह आगे चलकर किसी भी भारतीय बैंड की सर्वाधि ...

                                               

डेजर्ट रेन

डेजर्ट रेन भारतीय रॉक बैंड, इंडियन ओशॅन की दूसरी एल्बम है। विक्रम बत्रा द्वार रिकॉर्ड की गयी यह एल्बम किसी भारतीय बैंड की पहली लाइव एल्बम है। १९९७ में दिल्ली के आसपास संचलन के लिए एल्बम के सीमित-संस्करण की प्रति को जारी किया गया था। बैंड की भारी ...

                                               

ब्लैक फ्राइडे (फ़िल्म एल्बम)

ब्लैक फ्राइडे २००७ की इसी नाम की फ़िल्म की संगीत तथा स्कोर एल्बम है। एल्बम में संगीत इंडियन ओशॅन बैंड द्वारा दिया गया है, और यह उनका पहला फिल्म साउंडट्रैक है। इसमें कुल नौ गीत हैं, जिनमें से तीन में बोल हैं, और शेष छह इंस्ट्रुमेंटल हैं। ब्लैक फ्र ...

                                               

डॉन (1978 फ़िल्म एल्बम)

डॉन १९७८ की इसी नाम की एक फिल्म की संगीत एल्बम है। कल्याणजी आनंदजी द्वारा संगीतबद्ध इस एल्बम के गीत अंजान और इंदीवर ने लिखे हैं। यह एल्बम १९७७ में ईएमआई द्वारा एचएमवी के विनाइल रिकॉर्ड पर जारी की गई थी। एल्बम में कुल ५ गीत हैं, जिन्हें किशोर कुमा ...

                                               

म्यूजिक ऑफ़ द सन

म्यूजिक ऑफ़ द सन गायिका रिहाना की प्रथम एकल स्टूडियो एल्बम है। इसे डेफ जैम रिकॉर्डिंग्स ने संयुक्त राज्य में ३० अगस्त २००५ को रिलीज़ किया था। डेफ जैम के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करने से पहले, बारबाडोस के रिकॉर्ड निर्माता इवान रोजर्स ने रिहाना ...

                                               

आओगे जब तुम

आओगे जब तुम संगीतकार संदेश शांडिल्य द्वारा रचित, इरशाद कामिल के बोल से सजा वा उस्ताद राशिद खान द्वारा गाया गया, फिल्म जब वी मेट से एक गीत है। यह गीत करीना कपूर वा शाहिद कपूपर फिल्माया गया है। जब वी मेट को इम्तियाज अली ने निर्देशित किया है।

                                               

आज जाने की ज़िद ना करो

आज जाने की ज़िद ना करो एक मशहूर नज़्म है जिसे पाकिस्तानी कवि फ़य्याज़ हाशमी द्वारा लिखा गया है। इस नज़्म की धुन पाकिस्तान के प्रसिद्ध रचयिता सोहैल राणा द्वारा रचित है। इसे प्राचीन गायक हबीब वलि मोहम्मद द्वारा लोकप्रिय बनाया गया जिन्होंने एक पार्श ...

                                               

गुर नालो इश्क़ मीठा - द योयो रिमेक

गुर नालो इश्क़ मीठा - द योयो रिमेक भारतीय पंजाबी रैपर यो यो हनी सिंह और मलकीत सिंह की हिट हिट है । ट्रैक को यूट्यूब के माध्यम से २३ जुलाई २०१९ को टी-सीरीज़ द्वारा एकल के रूप में जारी किया गया था । संगीत चलचित्र "गुर नालो इश्क़ मीठा - द योयो रिमेक ...

                                               

चैता की चैत्वाली

चैता की चैत्वाली गायक अमित सागर द्वारा गाया गया एक गढ़वाली गीत है। यह गीत उत्तराखण्ड के पारम्परिक "चैत्वाली" लोकगीतों पर आधारित है। दिसम्बर २०१७ में किशन महिपाल के "फ्यूंलड़िया" को पीछे छोड़कर यह यू्-ट्यूब पर सबसे ज्यादा सुना जाने वाला गढ़वाली ऑड ...