ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 73




                                               

बीजगणित (संस्कृत ग्रन्थ)

बीजगणित, भास्कर द्वितीय की रचना है। इसमें बीजगणित की चर्चा है। यह सिद्धान्तशिरोमणि का द्वितीय भाग है। अन्य भाग हैं - लीलावती, ग्रहगणित तथा गोलाध्याय। इस ग्रन्थ में भास्कराचार्य ने अनिर्धार्य द्विघात समीकरणों के हल की चक्रवाल विधि दी है। यह विधि ज ...

                                               

बुधभूषण

बुधभूषण, संभाजी महाराज द्वारा लिखा गया संस्कृत ग्रंथ है, जिसे उन्होंने केवल १४ वर्ष की आयु में लिखा था। इनमें राजाओं का चालचलन और राज्य चलाने के लिये आवश्यक गुणों का भी धर्मवीर छत्रपती श्री संभाजी महाराज द्वारा जिक्र किया गया है| जो आज के परिस्थि ...

                                               

बृहज्जातकम्

बृहज्जातकम या वृहत जातक वराहमिहिर द्वारा रचित पाँच प्रमुख ग्रन्थों में से एक है। उनके द्वारा रचित अन्य ४ ग्रन्थ ये हैं- पंचसिद्धान्तिका, बृहत संहिता, लघुजातक, और योगयात्रा। इसके साथ ही यह ग्रन्थ हिन्दू ज्योतिष के ५ प्रमुख ग्रन्थों में से एक है, अ ...

                                               

बृहत्कथामञ्जरी

बृहत्कथामंजरी क्षेमेन्द्र द्वारा रचित प्रसिद्ध संस्कृत ग्रन्थ है। यह बृहत्कथा का अत्यंत रोचक तथा सरस संक्षेप हैं। ग्रंथ लंबकों में विभक्त है, जिसमें प्रथम लंबक कथापीठ, द्वितीय लंबक कथामुख, तृतीय लावणक, चतुर्थ लंबक नरवाहनदत्त का जन्म, पंंचम चतुर्द ...

                                               

बृहत्संहिता

बृहत्संहिता वाराहमिहिर द्वारा ६ठी शताब्दी संस्कृत में रचित एक विश्वकोश है जिसमें मानव रुचि के विविध विषयों पर लिखा गया है। इसमें खगोलशास्त्र, ग्रहों की गति, ग्रहण, वर्षा, बादल, वास्तुशास्त्र, फसलों की वृद्धि, इत्रनिर्माण, लग्न, पारिवारिक संबन्ध, ...

                                               

बौधायन धर्मसूत्र

इस धर्मसूत्र के रचयिता बौधायन या बोधायन हैं। किन्तु स्वयं इस धर्मसूत्र में बौधायन के मत को कई स्थलों पर उद्धृत किया गया है।* एक स्थान पर तर्पण के प्रसंग में अन्य सूत्रकारों के साथ काण्व बौधायन का उल्लेख भी किया गया है।* इससे स्पष्ट है कि काण्व बौ ...

                                               

ब्रह्मसंहिता

ब्रह्मसंहिता एक संस्कृत पंचरात्र ग्रन्थ है जिसमें सृष्टि के आरम्भ में ब्रह्मा द्वारा भगवान कृष्ण या गोविन्द की स्तुति की गयी है। गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय में इस ग्रन्थ की बहुत प्रतिष्ठा है। ब्रह्मसंहिता में कहा है- ईश्वरः परमः कृष्णः सच्चिदानन्द वि ...

                                               

भामिनीविलास

भामिनीविलास जगन्नाथ पण्डितराज की प्रसिद्ध कृति है जिसे पन्डितराजशतक भी कहते हैं। यह मुक्तक कविताओं का संकलन है। नागेश भट्ट के अनुसार "रसगंगाधर" के लक्षणों का उदाहरण देने के लिए पहले से ही इसकी रचना हुई थी। सायास अलंकरणशैली का प्रभाव तथा चमत्कारसर ...

                                               

मध्वाचार्य की कृतियाँ

दशोपनिषद्भाष्यम् न्यायविवरणम् भागवततात्पर्यनिर्णयः अनुव्याख्यानम् तन्त्रसारसंग्रहः गीताभाष्यम् उपाधिखण्डनम् तिथिनिर्णयः यमकभारतम् प्रमाणलक्षणम् कर्मनिर्णयः ब्रह्मसूत्रभाष्यम् मायावादखण्डनम् न्यासपद्धतिः यतिप्रणवकल्पः महाभारततात्पर्यनिर्णयः विष्णु ...

                                               

मल्लपुराण

मल्लपुराण १३वीं शताब्दी में रचित एक ग्रन्थ है जिसमें मल्लयुद्ध का विस्तृत वर्णन है। मल्लपुराण कुश्ती के विभिन्न प्रकारों का वर्णन है, इसमें कुश्ती में प्रयुक्त तकनीकों का विस्तृत वर्णन है, मुक्केबाजी की तैयारी के लिये किये जाने वाले विभिन्न व्याय ...

                                               

महाभारततात्पर्यनिर्णय

महाभारततात्पर्यनिर्णय मध्वाचार्य द्वारा रचित एक टीका ग्रन्थ है। इसमें रामायण, महाभारत और वेदव्यास के जन्म आदि की समीक्षा की गयी है। यह ग्रन्थ महाभारत को एक कथा के रूप में न देखकर इसे निर्णायक ग्रन्थ की संज्ञा देता है। इस ग्रन्थ में ५००० श्लोक तथा ...

                                               

महासिद्धान्त

महासिद्धांत गणितीय ज्योतिष का एक ग्रन्थ है। इसके रचयिता आर्यभट द्वितीय हैं। इस ग्रंथ में 18 अधिकार हैं और लगभग 625 आर्याछंद हैं। पहले 13 अध्यायों के नाम वे ही हैं जो सूर्यसिद्धांत या ब्राह्मस्फुट सिद्धांत के ज्योतिष संबंधी अध्यायों के हैं, केवल द ...

                                               

मानसार शिल्पशास्त्र

मानसार शिल्पशास्त्र शिल्पशास्त्र का प्राचीन ग्रन्थ है जिसके रचयिता मानसार हैं। इसके 43 वें अध्याय में ऐसे अनेक रथों का वर्णन है जो वायुवेग से चल कर लक्ष्य तक पहुँचते थे। उनमें बैठा व्यक्ति बिना अधिक समय गवाँए गंतव्य तक पहुँच जाता था। श्री प्रसन्न ...

                                               

मानसोल्लास

मानसोल्लास नामक टीका-ग्रन्थ के लिए देखें, मानसोल्लास मानसोल्लास मानस + उल्लास = मन का उल्लास १२वीं शती का महत्वपूर्ण संस्कृत ग्रन्थ है जिसके रचयिता चालुक्यवंश के राजा सोमेश्वर तृतीय हैं। इसे अभिलाषितार्थचिन्तामणि भी कहते हैं। इसकी रचना ११२९ ई में ...

                                               

मानसोल्लास (टीका ग्रन्थ)

सोमेश्वर द्वारा रचित मानसोल्लास के लिए देखें, मानसोल्लास मानसोल्लास सुरेशाचार्य द्वारा रचित अद्वैत का महान ग्रन्थ है। यह आदि शंकराचार्य द्वारा रचित दक्षिणामूर्ति स्त्रोत्र का वार्तिक टीका ग्रन्थ है।

                                               

युक्तिदीपिका

युक्तिदीपिका, सांख्यकारिका की एक प्राचीन व्याख्या है। यह अन्य व्याख्याओं की तुलना में अधिक विस्तृत है। इसके रचनाकाल तथा रचनाकार के बारे में निश्चयपूर्वक कुछ कह पाना कठिन है। इसमें ११ आह्निक हैं।

                                               

रतिरहस्य

आचार्य कोक्कोक द्वारा संस्कृत में रचित रतिरहस्य कामसूत्र के पश्चात दूसरा ख्यातिलब्ध कामशास्त्रीय ग्रन्थ है। परम्परा कोक्कोक को कश्मीरीय विद्वान स्वीकारती है। कामसूत्र के सांप्रयोगिक, कन्यासंप्रयु्क्तक, भार्याधिकारिक, पारदारिक एवं औपनिषदिक अधिकरणो ...

                                               

राघवयादवीयम्

राघवयादवीयम एक संस्कृत स्त्रोत्र है। यह कांचीपुरम के १७वीं शती के कवि वेंकटाध्वरि द्वारा रचित एक अद्भुत ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ को ‘अनुलोम-विलोम काव्य’ भी कहा जाता है। पूरे ग्रन्थ में केवल ३० श्लोक हैं। इन श्लोकों को सीधे-सीधे पढ़ते जाएँ, तो रामकथा ...

                                               

रेखागणितम्

रेखागणितम् में १५ अध्याय हैं। अध्याय १, २, ३, ४ तथा ६ में समतल ज्यामिति से सम्बन्धित विषयों का वर्णन है। अध्याय ५ में समानुपात के नियमों laws of proportion का वर्णन है जिसका ६ठे अध्याय में उपयोग हुआ है। अध्याय ७, ८ तथा ९ पूर्णतः अंकगणित से सम्बन् ...

                                               

लीलावती

लीलावती, भारतीय गणितज्ञ भास्कर द्वितीय द्वारा सन ११५० ईस्वी में संस्कृत में रचित, गणित और खगोल शास्त्र का एक प्राचीन ग्रन्थ है, इसमें 625 श्लोक हैं साथ ही यह सिद्धान्त शिरोमणि का एक अंग भी है। लीलावती में अंकगणित का विवेचन किया गया है। लीलावती, भ ...

                                               

वक्रोक्तिजीवित

वक्रोक्तिजीवितम् कुन्तक द्वारा रचित संस्कृत ग्रन्थ है। यह कृति अधूरी ही उपलब्ध हैं। कुन्तक वक्रोक्ति को काव्य का जीवित मानते हैं। वक्रोक्तिजीवित में वक्रोक्ति को ही काव्य की आत्मा माना गया है जिसका अन्य आचार्यों ने खंडन किया है। पूरे ग्रंथ में वक ...

                                               

वसिष्ठ धर्मसूत्र

कुमारिल भट्ट ने वासिष्ठ धर्मसूत्र का सम्बन्ध ऋग्वेद से स्थापित किया है। म. म. काणे ने भी इससे सहमति व्यक्त की है, किन्तु उनकी मान्यतानुसार ऋग्वेदियों ने इसे अपने कल्प के पूरक रूप में बाद में ही स्वीकार किया। धर्मसूत्रगत उपनयन, अनध्याय, स्नातक के ...

                                               

विष्णु धर्मसूत्र

विष्णु धर्मसूत्र को विष्णु स्मृति अथवा वैष्णव धर्मशास्त्र भी कहते है। इसमें 100 अध्याय हैं जिनमें से कुछ अध्याय अत्यंत संक्षिप्त हैं। उनमें एक–एक पद्य और एक–एक सूत्र मात्र ही हैं। प्रथम और अन्तिम अध्याय पूर्णतया पद्यात्मक हैं।

                                               

वृत्तरत्नाकर

वृत्तरत्नाकर एक छन्दशास्त्रीय संस्कृत ग्रन्थ है जिसके रचयिता केदारभट्ट हैं। केदारभट्ट के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अधिक जानकारी प्राप्त नहीं होती। इस ग्रन्थ का रचनाकाल १५वीं शताब्दी स्वीकार किया जाता है। छन्दोविवेचन की दृष्टि से वृत्तरत्नाकर एक प ...

                                               

वैखानस धर्मसूत्र

प्रश्न–क्रम से प्रतिपाद्य विषयों का विवरण इस प्रकार हैः– द्वितीय प्रश्न – वानप्रस्थियों से सम्बद्ध अग्नि, जिसमें इसी नाम के अनुष्ठान सम्पन्न होते हैं, का विवरण, संन्यासी के कर्त्तव्यों तथा सन्यास–ग्रहण विधि का निरूपण, संन्यासी के सामान्य आचारों क ...

                                               

वैमानिक शास्त्र

वैमानिक शास्त्र, संस्कृत पद्य में रचित एक ग्रन्थ है जिसमें विमानों के बारे में जानकारी दी गयी है। इस ग्रन्थ में बताया गया है कि प्राचीन भारतीय ग्रन्थों में वर्णित विमान रॉकेट के समान उड़ने वाले प्रगत वायुगतिकीय यान थे। इस पुस्तक के अस्तित्व की घो ...

                                               

शारदातनय

शारदातनय, नाट्यशास्त्र के आचार्य हैं जिन्होंने भावप्रकाशन नामक संस्कृत ग्रंथ की रचना की। इस ग्रन्थ में कुल दस अधिकार हैं जिनमें क्रमश: भाव, रसस्वरूप, रसभेद, नायक-नायिका निरूपण, नायिकाभेद, शब्दार्थसम्बन्ध, नाट्येतिहास, दशरूपक, नृत्यभेद एवं नाट्य-प ...

                                               

शालिहोत्र

शालिहोत्र हयगोष नामक ऋषि के पुत्र थे। वे पशुचिकित्सा के जनक माने जाते हैं। उन्होंंने शालिहोत्रसंहिता नामक ग्रन्थ की रचना की। वे श्रावस्ती के निवासी थे।

                                               

शिव स्वरोदय

शिव स्वरोदय एक प्राचीन तान्त्रिक ग्रन्थ है। यह ग्रन्थ शिव और पार्वती के संवाद के रूप में है। इसमें कुल ३९५ श्लोक हैं। १९८३ में सत्यानन्द सरस्वती ने इस पर स्वर योग नाम से टीका लिखी। ग्रन्थ के आरम्भ में पार्वती भगवान शिव से पूछती हैं, हे प्रभु! मेर ...

                                               

शिवलीलार्णव

शिवलीलार्णव अच्चा दीक्षित के पौत्र तथा नारायण दीक्षित के पुत्र नीलकण्ठ दीक्षित द्वारा विरचित एक महाकाव्य है। इस महाकाव्य में 22 सर्ग हैं। शिवभक्ति में तत्पर रहने वाले मीनाक्षी देवी के साथ सुन्दरेश्वर की उपासना करने वाले पाण्ड्यवंश में उत्पन्न होन ...

                                               

श्री सूक्त

श्री सूक्तम् देवी लक्ष्मी की आराधना करने हेतु उनको समर्पित मंत्र हैं। इसे लक्ष्मी सूक्तम् भी कहते हैं। यह सूक्त ऋग्वेद से लिया गया है। इस सूक्त का पाठ धन-धान्य की अधिष्ठात्री, देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए किया जाता है। श्री सूक्त मंत्र ॐ ...

                                               

षटसंदर्भ

षटसंदर्भ, सोलहवीं शती के गौड़ीय वैष्णव भक्त कवि जीव गोस्वामी द्वारा रचित छ: संस्कृत ग्रंथ हैं। षटसन्दर्भ या छ: मानक निम्नवत हैं: कर्म संदर्भ परमात्म संदर्भ कृष्ण संदर्भ प्रीति संदर्भ भक्ति संदर्भ तत्व सन्दर्भ भागवत संदर्भ

                                               

समराङ्गणसूत्रधार

हाइड्रोलिक मशीन Turbine-जलधारा के शक्ति उत्पादन में उपयोग के संदर्भ में ‘समरांगण सूत्रधार‘ ग्रंथ के ३१वें अध्याय में कहा है- धारा च जलभारश्च पयसो भ्रमणं तथा॥ यथोच्छ्रायो यथाधिक्यं यथा नीरंध्रतापि च। एवमादीनि भूजस्य जलजानि प्रचक्षते॥ बहती हुई जलधा ...

                                               

सिद्धान्तदर्पण

सिद्धान्तदर्पण भारत के महान ज्योतिषी चंद्रशेखरसिंह सामंत द्वारा रचित ज्योतिष ग्रंथ है। यह संस्कृत में है और काव्य रूप में रचित है। श्री सामन्त का सम्पूर्ण शोध इस महान ग्रंथ में अंकित है। यह अपने पूर्ववर्ती ग्रंथों सूर्यसिद्धान्त तथा सिद्धान्तशिरो ...

                                               

सौरपुराण

सौरपुराण एक पुराण है। इसकी गिनती उपपुराणों में होती है, सूतसंहिता में स्थित क्रम के अनुसार यह सोलहवाँ उपपुराण है। किसी किसी का मत है कि साम्बपुराण, भास्कर, आदित्य, भानव और सौरपुराण एक ही ग्रंथ हैं, केवल नाम भिन्न भिन्न हैं, परन्तु यह कथन गलत है, ...

                                               

स्मरदीपिका

स्मरदीपिका एक कामशास्त्रीय संस्कृत ग्रन्थ है । इसकी रचना १४वीं या १५वीं शताब्दी में मीननाथ ने की थी। यह कई तरह से रतिरहस्य से अत्यन्त समानता रखती है। किन्तु इन दो ग्रन्थों में यौन आसनों के नाम और उनका वर्णन भिन्न है। नायिकाओं का वर्गीकरण और उनका ...

                                               

स्वप्नवासवदत्ता

स्वप्नवासवदत्ता, महाकवि भास का प्रसिद्ध संस्कृत नाटक है। इसमें छः अंक हैं। भास के नाटकों में यह सबसे उत्कृष्ट है। क्षेमेन्द्र के बृहत्कथामंजरी तथा सोमदेव के कथासरित्सागर पर आधारित यह नाटक समग्र संस्कृतवांमय के दृश्यकाव्यों में आदर्श कृति माना जात ...

                                               

हर्षचरितम्

हर्षचरित संस्कृत में बाणभट्ट द्वारा रचित एक ग्रन्थ है। इसमें भारतीय सम्राट हर्षवर्धन का जीवनचरित वर्णित है। ऐतिहासिक कथानक से सम्बन्धित यह संस्कृत का सबसे प्राचीन ग्रन्थ है।

                                               

हारीत धर्मसूत्र

हारीत की मान्यता अत्यन्त प्राचीन धर्मसूत्रकार के रूप में है। बौधायन धर्मसूत्र, आपस्तम्ब धर्मसूत्और वासिष्ठ धर्मसूत्रों में हारीत को बार–बार उद्धत किया गया है। हारीत के सर्वाधिक उद्धरण आपस्तम्ब धर्मसूत्र में प्राप्त होते हैं। तन्त्रवार्तिक* में हा ...

                                               

हिरण्यकेशि धर्मसूत्र

हिरण्यकेशिकल्प के 26 वें तथा 27 वें प्रश्नों की मान्यता धर्मसूत्र के रूप में है, किन्तु यह वास्तव में स्वतन्त्र कृति न होकर आपस्तम्ब धर्मसूत्र की ही पुनः प्रस्तुति प्रतीत होती है। अन्तर केवल इतना है कि आपस्तम्ब धर्मसूत्र के अनेक आर्ष प्रयोगों को ...

                                               

अप्सरा (निराला का उपन्यास)

अप्सरा एक उपन्यास है। इसकी रचना भारत के महान कवि एवं साहित्यकार सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने की। यह उपन्यास ई॰ सन् १९३१ में प्रकाशित हुआ।

                                               

कुकुरमुत्ता कविता संग्रह

कुकुरमुत्ता नामक इस संकलन में इसी शीर्षक की कविता के साथ अन्य सात कवितायें थीं। इस संकलन की कविताओं की सूची निम्नवत है: स्फटिक शिला प्रेम-संगीत गर्म पकौड़ी मास्को डायलाग्स खजोहरा खेल कुकुरमुत्ता रानी और कानी

                                               

कृषिगीता

कृषिगीता एक मलयालम ग्रन्थ है जिसमें उन्नत कृषि के विषय में परशुराम और ब्राह्मणों के बीच चर्चा है। इसके मूल लेखक एवं रचनाकाल के बारे में कुछ भी पता नहीं है। किन्तु ऐसा लगता है कि इसकी रचना लगभग १५०० ई में हुई होगी।

                                               

ख़ास मुलाकातें

ख़ास मुलाकातें एक पुस्तक है जिसके लेखक वरिष्ठ पत्रकाऔर लेखक ओमकार चौधरी है। ओमकार चौधरी वर्तमान में हरिभूमि नामक समाचार पत्पर सम्पादक है। यह पुस्तक सन २००२ में प्रकाशित हुई थी।

                                               

खोजी पत्रकारिता (पुस्तक)

खोजी पत्रकारिता एक पुस्तक है जिसके लेखक वरिष्ठ पत्रकाऔर लेखक ओमकार चौधरी है। ओमकार चौधरी वर्तमान में हरिभूमि नामक समाचार पत्पर सम्पादक है। यह पुस्तक) सन २००३ में प्रकाशित हुई थी।

                                               

जैविक खेती (पुस्तक)

जैविक खेती एक पुस्तक है जिसके लेखक वरिष्ठ पत्रकाऔर लेखक ओमकार चौधरी है। ओमकार चौधरी वर्तमान में हरिभूमि नामक समाचार पत्पर सम्पादक है। यह पुस्तक) सन २००५ में प्रकाशित हुई थी।

                                               

डन-डन लंदन

डन-डन लंदन एक पुस्तक है जिसके लेखक वरिष्ठ पत्रकाऔर लेखक ओमकार चौधरी है। ओमकार चौधरी वर्तमान में हरिभूमि नामक समाचार पत्पर सम्पादक है। यह पुस्तक सन २०१३ में प्रकाशित हुई थी।

                                               

दिव्या

दिव्या यशपाल द्वारा लिखित एक हिंदी उपन्यास है। उपन्यास बौद्ध काल की पृष्ठभूमि में समाज और व्यक्तियों का चित्रण करता है हालाँकि यह कोई ऐतिहासिक उपन्यास नहीं है।

                                               

नये पत्ते

नए पत्ते एक कविता संग्रह है। इसकी रचना सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने की थी। इसमें व्यंगपरक कविताओं का संग्रह है। अणिमा के प्रकाशन के बाद निराला अपनी इन व्यंग्यपरक रचनाओं को "कांटा" नाम से प्रकाशित करवाना चाहते थे पर बाद में उन्होंने इस संकलन का ना ...

                                               

परशुराम की प्रतीक्षा

परशुराम की प्रतीक्षा राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित खंडकाव्य की पुस्तक है। इस खंडकाव्य की रचना का काल 1962-63 के आसपास का है, जब चीनी आक्रमण के फलस्वरूप भारत को जिस पराजय का सामना करना पड़ा, उससे राष्ट्रकवि दिनकर अत्यंत व्यथित हुये और ...