ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 78




                                               

तेनाली रामा

Charanसाँचा:Charan तेनाली रामाकृष्णा जो विकटकवि के रूप में जाने जाते थ,आंध्र प्रदेश के एक तेलुगु कवि थे। वे अपनी कुशाग्र बुद्धि और हास्य बोध के कारण प्रसिद्ध हुये। तेनाली विजयनगर साम्राज्य के राजा कृष्णदेवराय के दरबार के अष्टदिग्गजों में से एक थे ...

                                               

नर्मद

नर्मदाशंकर लालशंकर दवे, गुजराती के कवि विद्वान एवं महान वक्ता थे। वे नर्मद के नाम से प्रसिद्ध हैं। उन्होने ही १८८० के दशक में सबसे पहले हिन्दी को भारत की राष्ट्रभाषा बनाने का विचार रखा था। गुजराती साहित्य के आधुनिक युग का समारंभ कवि नर्मदाशंकर नर ...

                                               

महादेवी वर्मा की रचनाएँ

क्षणदा 1956 ललित निबंधों का संग्रह है। रचनात्मक गद्य के अतिरिक्त महादेवी का विवेचनात्मक गद्य तथा दीपशिखा, यामा और आधुनिक कवि- महादेवी की भूमिकाएँ उत्कृष्ट गद्य-लेखन का नमूना समझी जाती हैं। उनकी कलम से बाल साहित्य की रचना भी हुई है।

                                               

रहीम

अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ानाँ उर्फ़ रहीम, एक मध्यकालीन कवि, सेनापति, प्रशासक, आश्रयदाता, दानवीर, कूटनीतिज्ञ, बहुभाषाविद, कलाप्रेमी, एवं विद्वान थे। वे भारतीय साहित्य संस्कृति के अनमोल आराधक तथा सभी संप्रदानों के प्रति समादर भाव के सत्यनिष्ठ साधक थे। ...

                                               

राजबहादुर विकल

राजबहादुर विकल वीर रस के सिद्धहस्त कवियों में थे। विकल उनका उपनाम था जिसका शाब्दिक अर्थ होता है बेचैन आत्मा। निस्संदेह उनके शरीर में किसी शहीद की बेचैन आत्मा प्रविष्ट हो गयीं थी। काकोरी शहीद इण्टर कालेज जलालाबाद में काफी समय तक अध्यापन करते रहने ...

                                               

विबुध श्रीधर

अब तक इनकी चार पुस्तकों का पता चला हैं, Vaddhamana Chariu Vardhamana Charit VS 1190 Pasanaha Chariu Parshvanatha Charit VS 1189 Sukumala Chariu Sukumala Charit VS 1208 Bhavisayatta Kahaa Bhavishyadatta KathaVS 1230

                                               

शबनम रोमानी

शबनम रोमानी का जन्म 30 दिसंबर 1928 को बदायूं में हुआ। वह पाकिस्तान से उर्दू के प्रसिद्ध कवि थे जज़ीरा, तोहमत, दूसरा हिमालय उनके प्रमुख संग्रह हैं इनकी मृत्यु 17 फरवरी 2009 को लम्बी बीमारी से हुई।

                                               

शिवनारायण द्विवेदी ‘रमेश’

शिवनारायण द्विवेदी ‘रमेश’ उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद नगर के निवासी थे। इनका समय सम्वत् 1932-1992 है। इनका ‘बिलेलेले’ उपनाम भी मिलता है। आपके ‘मनमौज’, ‘गंगा लहरी’, ‘श्री रामविवाह’, ‘रमेशानुभव’, ‘कान्यकुब्ज पचीसी’, ग्रंथ प्रकाशित हैं। इन्होंने अनेक ...

                                               

सेनापति (कवि)

सेनापति भक्ति काल एवं रीति काल के सन्धियुग के कवि हैं। इनकी रचनाओं में हिन्दी साहित्य की दोनों धाराओं का प्रभाव पड़ा है जिनमें भक्ति और शृंगार दोनों का मिश्रण है। इनके ऋतु वर्णन में सूक्ष्म प्रकृति निरीक्षण पाया जाता है जो साहित्य में अद्वितीय है ...

                                               

उर्वशी (महाकाव्य)

उर्वशी रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित काव्य नाटक है। १९६१ ई. में प्रकाशित इस काव्य में दिनकर ने उर्वशी और पुरुरवा के प्राचीन आख्यान को एक नये अर्थ से जोड़ना चाहा है। अन्य रचनाओं से इतर उर्वशी राष्ट्रवाद और वीर रस प्रधान रचना है। इसके लिए १९७२ में ...

                                               

यक्ष प्रश्न (कविता)

यह लेख यक्ष प्रश्न नामक एक कविता पर है। अन्य यक्ष लेखों के लिए देखें: यक्ष यक्ष प्रश्न एक कविता है जो भूतपूर्व प्रधानमन्त्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा लिखी गई थी। कविता की पंक्तियां: जो कल थे, वे आज नहीं हैं। जो आज हैं, वे कल नहीं होंगे। होन ...

                                               

सरोज स्मृति

सरोज स्मृति १९३५ ई. में सूर्यकांत त्रिपाठी निराला द्वारा लिखी लंबी कविता और एक शोकगीत है। निराला ने यह शोकगीत 1935 में अपनी 18 वर्षीया पुत्री सरोज के निधन के उपरांत लिखा था। इसका प्रथम प्रकाशन 1938 या 1939 में प्रकाशित "द्वितीय अनामिका" के प्रथम ...

                                               

इंदूमति

ये विदर्भराज भोज की बहन, राजा अज की पत्नी और दशरथ की माता थी। पूर्व जन्म में यह अप्सरा थीं। इंद्र ने इन्हें तृणबिंदु ऋषि की तपस्या भंग करने के लिए भेजा था। ऋषि ने इन्हें मनुष्य योनि में जन्म पाने का अभिशाप दे दिया था। इनके अत्यंत विनय करने पर ऋषि ...

                                               

उर्वशी

साहित्य और पुराण में उर्वशी सौंदर्य की प्रतिमूर्ति रही है। स्वर्ग की इस अप्सरा की उत्पत्ति नारायण की जंघा से मानी जाती है। पद्मपुराण के अनुसार इनका जन्म कामदेव के उरु से हुआ था। श्रीमद्भागवत के अनुसार यह स्वर्ग की सर्वसुंदर अप्सरा थी। एक बार इंद् ...

                                               

कुब्जा

कुब्जा के नाम से भारतीय साहित्य में दो पात्र मशहूर हैं। १- मंथरा- रामायण की पात्र, कैकयी की प्रमुख दासी। २- त्रिविका- महाभारत के कंस की दासी जो कृष्ण की महान भक्त बनी।

                                               

त्रिविका

यह कृष्ण भक्ति साहित्य में कुब्जा और कूबरी नाम से प्रसिद्ध, कृष्ण की महान भक्त थी। यह मथुरा के राजा कंस के यहाँ लेपनादी किया करती थी। यह कूबड़ी और कुरूप थी। कृष्ण की कृपा से इसका कूबड़ ठीक हो गया और यह रूपवती हो गई।

                                               

दुष्यंत

संस्कृत साहित्य के महाकवि कालिदास की प्रसिद्ध रचना अभिज्ञान शकुंतलम् के नायक दुष्यंत पुरुवंशी राजा थे। एक बार मृगया का शिकार करते हुए संयोगवश वे महर्षि कण्व के आश्रम में पहुँचे। वहाँ उनका परिचय कण्व ऋषि की पोष्य दुहिता शकुंतला से हुआ। उन्होंने शक ...

                                               

रंभा

पुराणों में रंभा का चित्रण एक प्रसिद्ध अप्सरा के रूप में हुआ है। उसकी उत्पत्ति देवताओं और असुरों द्वारा किगए विख्यात सागर मंथन से मानी जाती है। वह पुराण और साहित्य में सौंदर्य की एक प्रतीक बन चुकी है। इंद्र ने इसे अपनी राजसभा के लिए प्राप्त किया ...

                                               

शबरी

शबरी एक भिलनी थी.। उसका स्थान प्रमुख रामभक्तों में है। वनवास के समय राम-लक्ष्मण ने शबरी का आतिथ्य स्वीकार किया था और उसके द्वारा प्रेम पूर्वक दिए हुए कन्दमूल फ़ल खाये कुछ लोग जूठे बेरो का वर्णन करते हैं तथा इसे रामायण में देखा जा सकता हैं। से प्र ...

                                               

शर्मिष्ठा

यह राजा वृषपर्वा की पुत्री थी। वृषपर्वा के गुरु शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी उसकी सखी थी। एक बार क्रोध से उसने देवयानी को पीटा और कूएँ में डाल दिया। देवयानी को ययाति ने कूएँ से बाहर निकाला। ययाति के चले जाने पर देवयानी उसी स्थान पर खड़ी रही। पुत ...

                                               

अष्टछाप

अष्टछाप, महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी एवं उनके पुत्र श्री विट्ठलनाथ जी द्वारा संस्थापित 8 भक्तिकालीन कवियों का एक समूह था, जिन्होंने अपने विभिन्न पद एवं कीर्तनों के माध्यम से भगवान श्री कृष्ण की विभिन्न लीलाओं का गुणगान किया। अष्टछाप की स्थापना 1 ...

                                               

सन्त रज्जब

रज्जब, भक्ति आन्दोलन के एक सन्त कवि थे। ये दादूदयाल के प्रमुख शिष्यों में से एक हैं। ये न रामभक्त कवि हैं, न कृष्णभक्त। ये राम-रहीम और केशव-करीम की एकता के गायक निर्गुण संत हैं। रज्जब राजस्थान की माटी में जन्में थे। इनकी कविता में सुंदरदास की शास ...

                                               

आदर्शोन्मुख यथार्थवाद

आदर्शोन्मुख यथार्थवाद आदर्शवाद तथा यथार्थवाद का समन्वय करने वाली विचारधारा है। आदर्शवाद और यथार्थवाद बीसवीं शती के साहित्य की दो प्रमुख विचार धाराएँ थीं। आदर्शवाद में सत्य की अवहेलना या उस पर विजय प्राप्त कर के आदर्शवाद की स्थापना की जाती थी। जबक ...

                                               

छायावाद

छायावाद हिंदी साहित्य के रोमांटिक उत्थान की वह काव्य-धारा है जो लगभग ई.स. १९१८ से १९३६ तक की प्रमुख युगवाणी रही। जयशंकर प्रसाद, सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला, सुमित्रानदन पंत, महादेवी वर्मा इस काव्य धारा के प्रतिनिधि कवि माने जाते हैं। छायावाद नामकर ...

                                               

छायावादी आंदोलन

छायावादी आंदोलन भारतीय साहित्य का एक काव्य आंदोलन था जिसमें छायावाद की प्रवृत्तियाँ थीं। ये प्रवृत्तियाँ जिस युग के काव्य में पाई गईं उस साहित्यिक युग को छायावादी युग के नाम से जाना गया। इन प्रवृत्तियों में लिखने वाले लेखकों को छायावादी कवि कहा गया।

                                               

यथार्थवाद (हिंदी साहित्य)

यथार्थवाद बीसवीं शती के तीसरे दशक के आसपास से हिन्दी साहित्य में पाई जाने वाली एक विशेष विचारधारा थी। इसके मूल में कुछ सामाजिक परिवर्तनों का हाथ था। जो परिवर्तन हुआ उसके मूलकारण थे राष्ट्रीय स्वाधीनता संग्राम, कम्यूनिस्ट आन्दोलन, वैज्ञानिक क्षेत् ...

                                               

चंद्रबली सिंह

उनका जन्म गाजीपुर जिला में हुआ था। उन्होंने आगरा के राजा बलवंत कालेज और बनारस के यूपी कालेज में अंग्रेजी का अध्यापन किया। वे जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष भी रहे। गिरने के कारण उनके कूल्हे की हड्डी टूट गई थी। इस कारण वे लगभग एक साल तक बिस्तर पर रहे। ...

                                               

देवीशंकर अवस्थी

देवीशंकर अवस्थी का जन्म 5 अप्रैल 1930 को उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के गाँव सथनी बाला खेड़ा में, एक संयुक्त परिवार में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा अपने गाँव तथा ननिहाल में हुई। ये 17 वर्ष की उम्र के थे तभी इनके पिता का देहावसान हो गया। बड़े होने के ...

                                               

प्रहलाद अग्रवाल

प्रहलाद अग्रवाल का जन्म जबलपुर मध्य प्रदेश में 20 मई 1947 ईस्वी को हुआ था। हिन्दी विषय से उन्होंने एम ए तक की शिक्षा प्राप्त की। आरंभ से ही उन्हें फिल्म एवं फिल्मों से संबंधित व्यक्तित्व के बारे में विस्तार से जानने की उत्कंठा रही है। बाद में उन् ...

                                               

रघुवंश (साहित्यकार)

डॉ॰ रघुवंश सहाय वर्मा हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार एवं आलोचक थे। वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग के अध्यक्ष तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज, शिमला के फेलो रह चुके हैं।

                                               

विजयदेव नारायण साही

विजयदेव नारायण साही हिन्दी साहित्य के नयी कविता दौर के प्रसिद्ध कवि, एवं आलोचक हैं। वे तीसरा सप्तक के कवियों में शामिल थे। जायसी पर केन्द्रित उनका व्यवस्थित अध्ययन एवं नयी कविता के अतिरिक्त विभिन्न साहित्यिक तथा समसामयिक मुद्दों पर केन्द्रित उनके ...

                                               

हजारीप्रसाद द्विवेदी

हजारीप्रसाद द्विवेदी हिन्दी निबन्धकार, आलोचक और उपन्यासकार थे। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म श्रावण शुक्ल एकादशी संवत् 1964 तदनुसार 19 अगस्त 1907 ई० को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के आरत दुबे का छपरा, ओझवलिया नामक गाँव में हुआ था। इनके पिता ...

                                               

प्रयोगवाद

प्रयोगवाद हिंदी साहित्य खासकर कविता की उस प्रवृत्ति की ओर संकेत करता है जिसकी तरफ अज्ञेय ने दूसरा सप्तक की भूमिका में संकेत किया था। प्रयोग अपने आप में इष्ट नहीं है बल्कि वह साधन और दोहरा साधन है। वह एक ओर तो सत्य को जानने का साधन है दूसरी तरफ वह ...

                                               

अग्निगर्भा

यह अमृतलाल नागर द्वारा लिखित स्त्री समस्या केंद्रित उपन्यास है। महादेवी वर्मा को समर्पित किगए इस उपन्यास में सुशिक्षित होकर भी निरंतर अवहेलना झेलती हुई सीता पांडे की कहानी है। सीता पांडे को प्रतिष्ठा मिलती है तो रामेश्वर रूपी एक ऐसे पुरुष के सहयो ...

                                               

अपने अपने अजनबी

अपने अपने अजनबी सच्चिदानंद हीरानंद वात्सयायन अज्ञेय द्वारा लिखा गया हिन्दी उपन्यास है। यह अज्ञेय का तीसरा उपन्यास है। इसपर अस्तित्ववाद का प्रभाव देखने को मिलता है। इस उपन्यास की प्रमुख पात्र योके द्वारा अपनी इच्छा मृत्यु पा लेने की चाहत अस्तित्वव ...

                                               

कर्मभूमि

कर्मभूमि प्रेमचन्द का राजनीतिक उपन्यास है जो पहली बार १९३२ में प्रकाशित हुआ। आज कई प्रकाशकों द्वारा इसके कई संस्करण निकल चुके हैं। इस उपन्यास में विभिन्न राजनीतिक समस्याओं को कुछ परिवारों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। ये परिवार यद्यपि अपनी प ...

                                               

काशी का अस्सी

काशी का अस्सी काशी नाथ सिंह. द्वारा लिखित 2004 का एक हिंदी उपन्यास है। इस पर मोहल्ला अस्सी नाम की एक फिल्म बनागई थी। वास्तविक लोगों और वास्तविक बातचीत को इस उपन्यास में जोड़ा गया है। कहानी राम जन्मभूमि आंदोलन और मंडल आयोग के कार्यान्वयन घटनाओं सह ...

                                               

चंद्रकांता संतति

चंद्रकांता संतति लोक विश्रुत साहित्यकार बाबू देवकीनंदन खत्री का विश्वप्रसिद्ध ऐय्यारी उपन्यास है। खत्री जी ने पहले चन्द्रकान्ता लिखा फिर उसकी लोकप्रियता और सफलता को देख कर उन्होंने कहानी को आगे बढ़ाया और चन्द्रकान्ता संतति की रचना की। हिन्दी के प ...

                                               

झाँसी की रानी (उपन्यास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई हिंदी लेखक वृंदावनलाल वर्मा द्वारा लिखित एक ऐतिहासिक उपन्यास है। इसका प्रथम प्रकाशन सन् 1946 में हुआ। 1946 से 1948 के बीच लेखक ने इसी शीर्षक से एक नाटक भी लिखा जिसे 1955 में मंचित किया गया हालाँकि, उपन्यास अधिक प्रसिद्ध ह ...

                                               

त्यागपत्र

जैनेंद्र की तीसरी औपन्यासिक कृति त्यागपत्र है। इसका प्रकाशन सन 1937 में हुआ। इसका अनुवाद अनेक प्रादेशिक तथा विदेशी भाषाओं में हो चुका है। हिंदी के भी सर्वश्रेष्ठ लघु उपन्यासों में मृणाल नामक भाग्यहीना युवती के जीवन पर आधारित यह मार्मिक कथा अत्यंत ...

                                               

निर्मला (उपन्यास)

निर्मला, मुंशी प्रेमचन्द द्वारा रचित प्रसिद्ध हिन्दी उपन्यास है। इसका प्रकाशन सन १९२७ में हुआ था। सन १९२६ में दहेज प्रथा और अनमेल विवाह को आधार बना कर इस उपन्यास का लेखन प्रारम्भ हुआ। इलाहाबाद से प्रकाशित होने वाली महिलाओं की पत्रिका चाँद में नवम ...

                                               

परीक्षागुरु

यह लाला श्रिनिवास दास द्वारा लिखा गया उपन्यास है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के शब्दों में यह पश्चिमी ढंग पर लिखा गया हिंदी का पहला मौलिक उपन्यास है। इसमें दिल्ली के बिगड़ैल रईस मदनमोहन के उद्धार की कथा है। इस उपन्यास का नायक मदनमोहन कुछ स्वार्थी, अर ...

                                               

पीली छतरी वाली लड़की

पीली छतरी वाली लड़की, उदय प्रकाश का एक हिंदी कहानी यह एक स्त्री विमर्श है। इसमें एक युवक व एक युवती के बीच प्रेम की कहानी पेश की गई है, जिसके रास्ते में जाति व्यवस्था, सामाजिक मूल्य और उपभोक्ता संस्कृति रुकावटें हैं। लेकिन यह कहानी उससे कहीं परे ...

                                               

प्रेमा

प्रेमा अथवा हमख़ुर्मा व हमसवाब प्रेमचंद का पहला उपन्यास है। यह १९०७ ई। में मूलतः उर्दू में प्रकाशित हुआ था। इस उपन्यास में १२ अध्याय हैं। यह विधवा विवाह पर केंद्रित है। इसमें धार्मिक आडंबरों औ्र मंदिरों में व्याप्त पाखंड को उजागर किया गया है। यह ...

                                               

मैला आँचल

मैला आँचल फणीश्वरनाथ रेणु का प्रतिनिधि उपन्यास है। यह हिन्दी का श्रेष्ठ और सशक्त आंचलिक उपन्यास है। नेपाल की सीमा से सटे उत्तर-पूर्वी बिहार के एक पिछड़े ग्रामीण अंचल को पृष्ठभूमि बनाकर रेणु ने इसमें वहाँ के जीवन का, जिससे वह स्वयं ही घनिष्ट रूप स ...

                                               

वैशाली की नगरवधू

वैशाली की नगरवधू, आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा रचित एक हिन्दी उपन्यास है जिसकी गणना हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में की जाती है। यह उपन्यास दो भागों में हैं, जिसके प्रथम संस्करण दिल्ली से क्रमशः 1948 तथा 1949 ई. में प्रकाशित हुए। इस उपन्यास ...

                                               

शेखर एक जीवनी

शेखर एक जीवनी सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्सयायन अज्ञेय का मनोविश्लेषणात्मक उपन्यास है। इसके दो भाग हैं। प्रथम भाग का प्रकाशन 1941 में तथा दूसरे भाग का प्रकाशन 1944 में हुआ। इसमें अज्ञेय ने बालमन पर पड़ने वाले काम, अहम और भय के प्रभाव तथा उसकी प्रकृत ...

                                               

सेवासदन

सेवासदन प्रेमचंद द्वारा रचित उपन्यास है। प्रेमचंद ने सेवासदन उपन्यास सन् १९१६ में उर्दू भाषा में लिखा था। बाद में सन १९१९ में उन्होने इसका हिन्दी अनुवाद स्वयं किया। उर्दू में यह बाज़ारे-हुस्न नाम से लिखा गया था।

                                               

अचला शर्मा

अचला शर्मा लंदन में रहने वाली भारतीय मूल की हिंदी लेखिका है। उनका जन्म भारत के जालंधर शहर में हुआ तथा शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से प्राप्त की। वे लंदन प्रवास से पूर्व भारत में ही कहानीकार एवं कवि के रूप में स्थापित हो गई थीं। रेडियो से भी वे भा ...

                                               

अरुणा सीतेश

डॉ॰ अरुणा सीतेश हिंदी की प्रसिद्ध कथाकार थीं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से १९६५ में अंग्रेज़ी साहित्य में एम. ए. किया और स्वर्ण पदक भी प्राप्त किया। १९७० में उन्होंने यहीं से डी. फ़िल की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से सं ...